सिरदर्द होते ही खाते हैं ये गोली? सरकार ने दी बड़ी चेतावनी, किडनी को चुपचाप नुकसान पहुंचा सकती है आपकी आदत!
सिरदर्द हुआ, शरीर में दर्द हुआ या कमर और जोड़ों में तकलीफ हुई तो बहुत से लोग तुरंत दर्द की गोली ले लेते हैं। कई बार डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर खुद ही खाना शुरू कर देते हैं। दर्द की दवा लेने के बाद कुछ समय में आराम भी मिल जाता है, लेकिन यही आदत अगर बार-बार दोहराई जाए तो शरीर के अंदर एक गंभीर नुकसान का खतरा बढ़ सकता है।
किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में शामिल है। यह खून से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने, शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बनाए रखने तथा ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन कुछ दवाओं का गलत तरीके से इस्तेमाल किडनी के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
इसी चिंता को देखते हुए भारत के दवा नियामक Central Drugs Standard Control Organisation यानी CDSCO ने सितंबर 2026 में दर्द निवारक दवाओं और एंटीबायोटिक्स के बिना जरूरत इस्तेमाल को लेकर चेतावनी जारी की। CDSCO ने खास तौर पर NSAIDs यानी Non-Steroidal Anti-Inflammatory Drugs के इस्तेमाल में सावधानी बरतने को कहा है।
आखिर दर्द की दवा किडनी को कैसे नुकसान पहुंचा सकती है?
NSAIDs ऐसी दवाओं का समूह है जिनका इस्तेमाल दर्द और सूजन कम करने के लिए किया जाता है। इनमें ibuprofen, naproxen, diclofenac जैसी दवाएं शामिल हैं।
इन दवाओं का इस्तेमाल कई तरह के दर्द में किया जाता है, जैसे सिरदर्द, मांसपेशियों का दर्द, जोड़ों का दर्द, पीठ दर्द और अन्य सूजन से जुड़ी समस्याएं।
समस्या तब बढ़ सकती है जब कोई व्यक्ति इन दवाओं को बार-बार, ज्यादा मात्रा में या लंबे समय तक बिना चिकित्सकीय सलाह के लेता रहे।
मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार NSAIDs शरीर में उन रसायनों को प्रभावित करती हैं जो किडनी में रक्त प्रवाह बनाए रखने में भूमिका निभाते हैं। इनके कारण कुछ परिस्थितियों में किडनी तक पहुंचने वाला रक्त प्रवाह कम हो सकता है। इससे किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है।
सबसे ज्यादा खतरा किन लोगों को?
हर व्यक्ति में जोखिम एक जैसा नहीं होता। अगर किसी व्यक्ति की किडनी पहले से कमजोर है, तो NSAIDs का इस्तेमाल अधिक सावधानी से किया जाना चाहिए।
विशेष रूप से इन लोगों को डॉक्टर से सलाह के बिना ऐसी दवाएं लेने से बचना चाहिए:
पहले से किडनी की बीमारी वाले लोग
बुजुर्ग
हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीज
हार्ट डिजीज या हार्ट फेलियर वाले लोग
शरीर में पानी की कमी यानी dehydration वाले लोग
कुछ ऐसी दवाएं लेने वाले मरीज जो किडनी के काम को प्रभावित कर सकती हैं
National Kidney Foundation के अनुसार NSAIDs किडनी में रक्त प्रवाह कम कर सकती हैं और अधिक मात्रा या लंबे समय तक इस्तेमाल से किडनी को नुकसान का जोखिम बढ़ सकता है। डिहाइड्रेशन की स्थिति में Acute Kidney Injury का खतरा भी बढ़ सकता है।
कौन सी दर्द की दवाएं NSAIDs में आती हैं?
कई लोग दवा का नाम देखकर यह नहीं समझ पाते कि वह किस श्रेणी की है। इसलिए किसी भी painkiller को नियमित रूप से लेने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से पूछना जरूरी है।
आम तौर पर NSAID श्रेणी में आने वाली कुछ दवाओं में शामिल हैं:
Ibuprofen, Naproxen, Diclofenac, Indomethacin, Meloxicam और Celecoxib जैसी दवाएं।
यह सूची पूरी नहीं है और किसी दवा का इस्तेमाल केवल उसके नाम के आधार पर बंद या शुरू नहीं करना चाहिए। आपकी बीमारी, उम्र, दूसरी दवाएं और किडनी की स्थिति के आधार पर डॉक्टर उचित सलाह दे सकते हैं।
क्या एक-दो बार दर्द की गोली खाने से किडनी खराब हो जाती है?
ऐसा कहना सही नहीं होगा कि दर्द की गोली खाते ही किडनी खराब हो जाएगी।
असल चिंता गलत तरीके से इस्तेमाल, ज्यादा मात्रा, बार-बार सेवन और लंबे समय तक बिना चिकित्सकीय निगरानी के इस्तेमाल को लेकर है।
CDSCO ने भी अपनी चेतावनी में NSAIDs को बिना जरूरत बार-बार या लंबे समय तक लेने से बचने और इन्हें उचित खुराक तथा उचित अवधि के लिए चिकित्सकीय निगरानी में इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
इसलिए डॉक्टर द्वारा किसी विशेष बीमारी के लिए निर्धारित दर्द की दवा को केवल इस खबर की वजह से खुद से बंद नहीं करना चाहिए।
शरीर में पानी की कमी के दौरान बढ़ सकता है खतरा
दर्द की दवा और डिहाइड्रेशन का संयोजन खास तौर पर चिंता का विषय हो सकता है।
जब शरीर में पानी की कमी होती है तो किडनी तक रक्त का प्रवाह पहले ही प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में NSAID लेने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
इसलिए तेज बुखार, उल्टी, दस्त या अत्यधिक गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी होने पर खुद से painkiller लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है। National Kidney Foundation भी डिहाइड्रेशन के दौरान NSAIDs के इस्तेमाल से Acute Kidney Injury के जोखिम की ओर ध्यान दिलाता है।
दर्द की गोली के साथ एंटीबायोटिक लेना भी खतरनाक आदत
CDSCO की सितंबर 2026 की चेतावनी केवल painkillers तक सीमित नहीं थी। दवा नियामक ने एंटीबायोटिक्स के गलत और अनावश्यक इस्तेमाल पर भी चिंता जताई।
बहुत से लोग सर्दी, खांसी या सामान्य वायरल बीमारी में भी खुद से एंटीबायोटिक शुरू कर देते हैं। लेकिन एंटीबायोटिक्स वायरस के खिलाफ काम नहीं करतीं।
बिना जरूरत एंटीबायोटिक्स लेने से Antimicrobial Resistance यानी AMR की समस्या बढ़ सकती है। इसका मतलब है कि बैक्टीरिया कुछ दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधी हो सकते हैं और भविष्य में संक्रमण का इलाज मुश्किल हो सकता है।
क्या Paracetamol किडनी के लिए सुरक्षित है?
यह सवाल बहुत से लोगों के मन में आता है। मेडिकल स्रोतों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में और सही खुराक में Paracetamol को NSAIDs की तुलना में किडनी के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे मनमानी मात्रा में लिया जा सकता है।
Paracetamol की अधिक मात्रा लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
इसलिए किसी भी painkiller को लंबे समय तक लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। खासकर अगर दर्द बार-बार हो रहा है तो केवल गोली खाकर दर्द दबाने के बजाय उसके कारण की जांच कराना जरूरी है।
दर्द बार-बार हो तो क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति को लगातार सिरदर्द, कमर दर्द, जोड़ों में दर्द या शरीर के किसी हिस्से में बार-बार दर्द हो रहा है तो रोजाना painkiller खाना समाधान नहीं है।
बार-बार दर्द किसी दूसरी बीमारी, सूजन, मांसपेशियों की समस्या, नसों की परेशानी या अन्य स्वास्थ्य कारण से हो सकता है।
ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच कराकर दर्द का कारण पता करना ज्यादा जरूरी है।
अगर पहले से किडनी की बीमारी है या eGFR कम है, तो painkiller लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। National Kidney Foundation CKD वाले लोगों को NSAIDs से बचने और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सुरक्षित विकल्प के बारे में बात करने की सलाह देता है।
CDSCO ने दवा दुकानदारों को भी किया सतर्क
सरकार की चेतावनी सिर्फ आम लोगों के लिए नहीं है। CDSCO ने डॉक्टरों, फार्मासिस्टों, रिटेलर्स, होलसेलर्स, अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को भी दवाओं के उचित इस्तेमाल और बिक्री नियमों का पालन करने को कहा है।
CDSCO के अनुसार अधिकांश NSAIDs Schedule H के अंतर्गत आती हैं और लागू नियमों के मुताबिक इन्हें Registered Medical Practitioner के prescription के बिना खुदरा बिक्री नहीं की जानी चाहिए। अधिकांश एंटीबायोटिक्स Schedule H1 के अंतर्गत आती हैं और उनके लिए भी prescription संबंधी नियम लागू हैं।
किडनी को बचाने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
दर्द होने पर तुरंत गोली खाने की आदत को कम करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा:
बिना सलाह के painkiller बार-बार न लें।
डॉक्टर द्वारा बताई गई खुराक और अवधि का पालन करें।
एक साथ कई painkillers लेने से पहले डॉक्टर से पूछें।
डिहाइड्रेशन के दौरान विशेष सावधानी बरतें।
अगर पहले से किडनी, हार्ट या ब्लड प्रेशर की समस्या है तो डॉक्टर को जरूर बताएं।
दूसरी सभी दवाओं की जानकारी डॉक्टर को दें।
लगातार या बार-बार होने वाले दर्द का कारण पता कराएं।
खुद से बची हुई पुरानी दवाएं दोबारा शुरू न करें।
निष्कर्ष: दर्द से राहत जरूरी, लेकिन किडनी की कीमत पर नहीं
दर्द निवारक दवाएं आधुनिक चिकित्सा में बेहद उपयोगी हैं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेने पर कई मरीजों को काफी राहत देती हैं। समस्या तब पैदा होती है जब इन्हें “साधारण गोली” समझकर बार-बार और लंबे समय तक खुद से लिया जाता है।
भारत के दवा नियामक CDSCO की हालिया चेतावनी ने एक बार फिर इस मुद्दे को सामने ला दिया है। खासतौर पर NSAIDs के अनावश्यक और लंबे इस्तेमाल से किडनी पर पड़ने वाले संभावित असर को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
इसलिए अगली बार सिरदर्द, कमर दर्द या शरीर में दर्द होने पर तुरंत painkiller लेने से पहले यह जरूर सोचें कि दर्द का कारण क्या है और क्या आपको सच में डॉक्टर की सलाह की जरूरत है। अगर दर्द बार-बार हो रहा है, तो उसे दबाने के बजाय उसकी वजह की जांच कराना ज्यादा समझदारी है।
महत्वपूर्ण: यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी prescribed दवा को डॉक्टर से बात किए बिना बंद या बदलें नहीं।

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