Breaking News

बार-बार कमर दर्द को सिर्फ गैस या गलत पॉश्चर समझना पड़ सकता है भारी! शरीर में इस विटामिन की कमी से कमजोर हो सकती हैं हड्डियां, जानिए छिपा खतरा



लगातार कमर दर्द को अक्सर लोग गलत तरीके से बैठने, घंटों कंप्यूटर पर काम करने, कम शारीरिक गतिविधि या बढ़ती उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई मामलों में ऐसा करना नुकसानदेह नहीं होता, क्योंकि कमर दर्द के पीछे मांसपेशियों में खिंचाव या अन्य सामान्य कारण हो सकते हैं। लेकिन अगर दर्द लंबे समय से बना हुआ है, उठने-बैठने में परेशानी हो रही है, थोड़ी दूर चलने पर थकान महसूस होती है या पीठ की मांसपेशियों में कमजोरी नजर आ रही है, तो इसके पीछे हड्डियों और मांसपेशियों की सेहत से जुड़ी समस्या भी हो सकती है।

इसी संदर्भ में लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर से जुड़ी जानकारी में लंबे समय से कमर दर्द की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों में विटामिन-D की कमी को लेकर चिंता सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, क्रॉनिक लो बैक पेन की शिकायत वाले मरीजों के एक समूह में बड़ी संख्या में विटामिन-D का स्तर कम पाया गया।

हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। किसी अस्पताल की ओपीडी में कमर दर्द के मरीजों के बीच विटामिन-D की कमी ज्यादा मिलना यह साबित नहीं करता कि उन सभी लोगों का दर्द केवल विटामिन-D की कमी के कारण था। कमर दर्द के कई कारण हो सकते हैं और सही वजह जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।

विटामिन-D और कैल्शियम का हड्डियों से क्या संबंध है?

विटामिन-D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों के सामान्य स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लंबे समय तक विटामिन-D की गंभीर कमी रहने पर वयस्कों में ऑस्टियोमलेशिया जैसी स्थिति हो सकती है, जिसमें हड्डियों में दर्द और मांसपेशियों में कमजोरी हो सकती है। NIH के अनुसार, लंबे समय तक विटामिन-D और कैल्शियम की कमी हड्डियों को कमजोर और अधिक नाजुक बना सकती है।

कैल्शियम भी हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी खनिज है। शरीर में कैल्शियम की पर्याप्त उपलब्धता न होने पर लंबे समय में हड्डियों की मजबूती प्रभावित हो सकती है और ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ सकता है।

इसलिए लगातार कमर दर्द या हड्डियों से जुड़ी परेशानी में डॉक्टर जरूरत के अनुसार विटामिन-D और कैल्शियम की स्थिति का मूल्यांकन कर सकते हैं।

SGPGI की ओपीडी में सामने आया क्या मामला?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार SGPGI के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर की ओपीडी में लंबे समय से कमर दर्द की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों में विटामिन-D की कमी देखी गई। ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अमित कुमार के हवाले से बताया गया कि क्रॉनिक लो बैक पेन वाले मरीजों के एक समूह में 69.3 प्रतिशत मरीजों में विटामिन-D की गंभीर कमी पाई गई।

यह आंकड़ा निश्चित रूप से ध्यान देने योग्य है, लेकिन इसे समझने में सावधानी जरूरी है। उपलब्ध जानकारी में अध्ययन में शामिल मरीजों की कुल संख्या, मरीजों के चयन की प्रक्रिया और विस्तृत शोध पद्धति जैसी जानकारी स्पष्ट नहीं है। इसलिए इस आंकड़े को पूरे लखनऊ या भारत की सामान्य आबादी में कमर दर्द और विटामिन-D की कमी का अनुपात मानना सही नहीं होगा।

यानी संदेश यह नहीं है कि कमर दर्द होने पर हर व्यक्ति को विटामिन-D की कमी है। संदेश यह है कि कुछ मरीजों में पोषण संबंधी कमी भी उनकी हड्डियों और मांसपेशियों की समस्या का हिस्सा हो सकती है और जरूरत पड़ने पर इसकी जांच की जानी चाहिए।

क्या विटामिन-D की कमी से कमर दर्द हो सकता है?

विटामिन-D की गंभीर कमी का संबंध हड्डियों और मांसपेशियों की समस्याओं से हो सकता है। NIH के अनुसार वयस्कों में गंभीर विटामिन-D की कमी से osteomalacia हो सकती है, जिसमें हड्डियों में दर्द और मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि लंबे समय से होने वाला हर कमर दर्द विटामिन-D की कमी की वजह से होता है।

कमर दर्द के पीछे मांसपेशियों में खिंचाव, डिस्क की समस्या, नसों पर दबाव, रीढ़ में उम्र से जुड़े बदलाव, चोट, ऑस्टियोपोरोसिस और कई अन्य कारण हो सकते हैं। NICE के अनुसार, गंभीर कारणों की तुलना में सामान्य या गैर-विशिष्ट कमर दर्द काफी अधिक आम है और अधिकांश मामलों में यह समय के साथ सुधार सकता है।

उम्र बढ़ने पर क्यों बढ़ सकती है हड्डियों की कमजोरी?

उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व कम हो सकता है। महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन के स्तर में कमी के कारण हड्डियों के नुकसान की गति बढ़ सकती है।

NIH के अनुसार, रजोनिवृत्ति के आसपास और उसके बाद महिलाओं में हड्डियों का नुकसान तेजी से बढ़ सकता है, जिससे समय के साथ ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ता है। ऑस्टियोपोरोसिस में रीढ़ की हड्डी के वर्टिब्रा सहित कई हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।

रीढ़ की हड्डी में कमजोरी होने पर कभी-कभी सामान्य गतिविधियों के दौरान भी कंप्रेशन फ्रैक्चर हो सकता है। ऐसे फ्रैक्चर में अचानक या लगातार कमर दर्द, कद में कमी या पीठ के आकार में बदलाव जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं।

महिलाओं को क्यों रहना चाहिए ज्यादा सतर्क?

40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में लगातार कमर दर्द को हमेशा केवल मांसपेशियों की समस्या मानना सही नहीं है। खासकर रजोनिवृत्ति के बाद हड्डियों की मजबूती का मूल्यांकन महत्वपूर्ण हो सकता है, यदि अन्य जोखिम कारक भी मौजूद हों।

हालांकि, किसी भी व्यक्ति में यह तय करने के लिए कि कमर दर्द हड्डियों की कमजोरी या फ्रैक्चर से जुड़ा है या नहीं, केवल लक्षण पर्याप्त नहीं होते। डॉक्टर व्यक्ति की उम्र, मेडिकल हिस्ट्री, चोट का इतिहास, दवाओं, शारीरिक स्थिति और जरूरत पड़ने पर बोन डेंसिटी या अन्य जांचों को ध्यान में रखते हैं।

धूप में कम निकलना भी बन सकता है एक कारण

आधुनिक जीवनशैली में बहुत से लोग दिन का बड़ा हिस्सा घर, ऑफिस या अन्य बंद जगहों में बिताते हैं। इससे सूर्य के प्रकाश के संपर्क में कमी हो सकती है।

NIH के अनुसार जो लोग बहुत कम धूप में रहते हैं उनमें विटामिन-D की कमी का जोखिम बढ़ सकता है। त्वचा का रंग, उम्र, कपड़े, मौसम, भौगोलिक स्थिति और धूप की तीव्रता जैसे कई कारक शरीर में विटामिन-D बनने की मात्रा को प्रभावित करते हैं।

इसलिए हर व्यक्ति के लिए धूप में रहने का एक ही निश्चित समय पर्याप्त होगा, ऐसा कहना सही नहीं है।

खाने में कैल्शियम और विटामिन-D पर दें ध्यान

हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित भोजन महत्वपूर्ण है। दूध और दही जैसे डेयरी उत्पाद कैल्शियम के स्रोत हो सकते हैं। इसके अलावा भोजन में अन्य कैल्शियम युक्त चीजों को भी शामिल किया जा सकता है।

विटामिन-D के कुछ खाद्य स्रोतों में वसायुक्त मछली, अंडे की जर्दी और विटामिन-D से फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं।

लेकिन केवल भोजन के आधार पर हर व्यक्ति की विटामिन-D जरूरत पूरी हो जाए, यह जरूरी नहीं है। कमी होने पर डॉक्टर जांच और व्यक्ति की स्थिति के अनुसार सप्लीमेंट की सलाह दे सकते हैं।

क्या खुद से विटामिन-D और कैल्शियम की गोली शुरू कर दें?

नहीं। यह एक महत्वपूर्ण सावधानी है।

कमर दर्द होने पर बिना जांच के लंबे समय तक विटामिन-D या कैल्शियम की अधिक मात्रा लेना उचित नहीं है। विटामिन-D की जरूरत और सप्लीमेंट की मात्रा व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, भोजन और रक्त जांच सहित कई कारकों पर निर्भर कर सकती है।

NIH यह भी बताता है कि बहुत अधिक मात्रा में विटामिन-D लेना नुकसान पहुंचा सकता है। अत्यधिक सेवन से मतली, कमजोरी, अत्यधिक प्यास-पेशाब और किडनी स्टोन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

इसलिए सप्लीमेंट को इलाज का आसान विकल्प समझना सही नहीं है।

लंबे समय तक बैठे रहने वालों को क्या करना चाहिए?

जो लोग कंप्यूटर या डेस्क पर लंबे समय तक काम करते हैं, उन्हें लगातार कई घंटे एक ही स्थिति में बैठे रहने से बचना चाहिए।

काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेकर उठना, थोड़ा चलना और शरीर को आराम देना उपयोगी हो सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि और मांसपेशियों को मजबूत रखने वाले व्यायाम भी सामान्य स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।

हालांकि, यदि पहले से कमर दर्द, रीढ़ की बीमारी, फ्रैक्चर या ऑस्टियोपोरोसिस है तो व्यायाम का प्रकार और उसकी तीव्रता डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह के अनुसार तय करना बेहतर है।

कमर दर्द में कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?

अधिकांश कमर दर्द गंभीर बीमारी के कारण नहीं होते, लेकिन कुछ लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अगर कमर दर्द के साथ पैरों में तेजी से बढ़ती कमजोरी, सुन्नपन, चलने में गंभीर परेशानी, पेशाब या मल पर नियंत्रण में नया बदलाव या जांघों के अंदरूनी हिस्से और जननांगों के आसपास सुन्नपन हो, तो तुरंत चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है। NICE ऐसे लक्षणों के साथ गंभीर कमर दर्द में तत्काल मूल्यांकन की सलाह देता है क्योंकि ये cauda equina syndrome जैसी गंभीर स्थिति से जुड़े हो सकते हैं।

इसी तरह गंभीर चोट के बाद शुरू हुआ कमर दर्द, बुखार के साथ दर्द या कैंसर के इतिहास वाले व्यक्ति में नया और लगातार कमर दर्द भी डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

क्या हर कमर दर्द में ऑपरेशन की जरूरत होती है?

नहीं। सामान्य कमर दर्द के अधिकांश मामलों में तुरंत सर्जरी की जरूरत नहीं होती। इलाज का तरीका दर्द के वास्तविक कारण और उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है।

मांसपेशियों से जुड़े दर्द में गतिविधि, व्यायाम, फिजियोथेरेपी और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवाओं से राहत मिल सकती है। दूसरी ओर, अगर नस पर गंभीर दबाव, फ्रैक्चर या कोई अन्य संरचनात्मक समस्या है तो उपचार अलग हो सकता है।

कुछ चुनिंदा मरीजों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन इसका फैसला जांच और विशेषज्ञ मूल्यांकन के बाद ही किया जाना चाहिए।

कमर दर्द को नजरअंदाज करना कितना सही?

अगर कमर दर्द कुछ दिनों की सामान्य समस्या है और धीरे-धीरे बेहतर हो रहा है, तो हर बार गंभीर बीमारी की आशंका करने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर दर्द लगातार बना हुआ है, बार-बार लौटता है या इसके साथ कमजोरी, चलने में परेशानी या अन्य लक्षण भी हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

विशेष रूप से उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों की कमजोरी, ऑस्टियोपोरोसिस या फ्रैक्चर के जोखिम वाले लोगों को लगातार कमर दर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

लगातार कमर दर्द का कारण सिर्फ गलत पॉश्चर या लंबे समय तक बैठना ही नहीं हो सकता। कुछ लोगों में विटामिन-D और कैल्शियम की कमी हड्डियों और मांसपेशियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है, जिससे हड्डियों में दर्द या मांसपेशियों की कमजोरी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। NIH भी गंभीर विटामिन-D कमी को osteomalacia, हड्डियों के दर्द और मांसपेशियों की कमजोरी से जोड़ता है।

लेकिन हर कमर दर्द को विटामिन-D की कमी से जोड़ना भी सही नहीं है। रीढ़ की डिस्क, मांसपेशियों, नसों, उम्र से जुड़े बदलाव और अन्य चिकित्सकीय कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं।

इसलिए लगातार कमर दर्द होने पर खुद से सप्लीमेंट लेने के बजाय सही कारण की पहचान करना ज्यादा जरूरी है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त पोषण और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच हड्डियों और रीढ़ की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। कमर दर्द और विटामिन-D की कमी के बीच संबंध व्यक्ति-विशेष में अलग हो सकता है। केवल लक्षणों के आधार पर विटामिन-D की कमी या किसी रीढ़ की बीमारी का निदान नहीं किया जा सकता। लगातार या गंभीर दर्द तथा पैरों में कमजोरी, सुन्नपन या पेशाब-मल पर नियंत्रण में बदलाव होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।

कोई टिप्पणी नहीं