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दोस्त से बात करने पर बेटी को किया कैद, फिर सामने आया ऐसा राज कि पुलिस भी रह गई हैरान! कच्छ में 14 साल की नाबालिग की शिकायत से मचा हड़कंप



गुजरात के कच्छ जिले से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां 14 साल की एक नाबालिग लड़की ने अपने ही माता-पिता के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। नाबालिग ने अपने पिता पर उसके साथ यौन अपराध करने और अपनी मां पर कथित तौर पर पिता का साथ देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया और पॉक्सो एक्ट समेत अन्य संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के सामने आई शिकायत में नाबालिग ने अपने घर के माहौल और उसके साथ कथित तौर पर हुई घटनाओं को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, पुलिस जांच अभी शुरुआती चरण में है और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी। मामले में आरोप साबित होना अभी बाकी है।

फोन पर बात करने के बाद शुरू हुआ विवाद

पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, मामले की शुरुआत उस समय हुई जब नाबालिग अपनी मां की नजर में एक लड़के से फोन पर बातचीत करते हुए पकड़ी गई थी। आरोप है कि इसकी जानकारी मिलने के बाद उसके पिता ने उसके साथ मारपीट की और उसे घर में बंद कर दिया।

नाबालिग ने पुलिस को बताया कि इसके बाद उसकी गतिविधियों पर कड़ी पाबंदी लगा दी गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कई मौकों पर उसे घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई और कथित तौर पर खाना-पानी तक उपलब्ध नहीं कराया गया।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घर में वास्तव में क्या परिस्थितियां थीं और नाबालिग द्वारा लगाए गए आरोपों की घटनाक्रम के साथ कितनी पुष्टि होती है।

पिता पर लगाए गंभीर आरोप

नाबालिग ने अपनी शिकायत में अलग-अलग तारीखों का उल्लेख करते हुए अपने पिता पर बार-बार उसके साथ जबरदस्ती करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने यह भी दावा किया कि कुछ घटनाओं के दौरान उसकी मां भी वहां मौजूद थी।

नाबालिग ने अपनी मां के खिलाफ भी गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि उसकी मां ने कथित तौर पर उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें खींचीं।

ये सभी आरोप फिलहाल नाबालिग की शिकायत का हिस्सा हैं। पुलिस इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। जांच के दौरान पुलिस घटनाओं की तारीख, स्थान, परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान कर रही है।

29 सितंबर को फूफी के घर पहुंची नाबालिग

मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम 29 सितंबर को सामने आया। शिकायत के अनुसार, नाबालिग किसी तरह अपने घर से निकलकर अपनी फूफी यशोदाबेन के घर पहुंची। वहां उसने उन्हें कथित तौर पर अपने साथ हुई पूरी घटना की जानकारी दी।

इसके बाद फूफी के फोन से पुलिस की आपातकालीन सेवा 112 पर सूचना दी गई। इस सूचना के बाद मामले ने पुलिस का ध्यान खींचा।

हालांकि, नाबालिग का आरोप है कि पुलिस को सूचना दिए जाने के बाद भी उसे दोबारा घर ले जाया गया और वहां बंद कर दिया गया। इस दावे की भी पुलिस जांच कर रही है कि उस समय वास्तव में क्या हुआ था और नाबालिग को वापस घर क्यों ले जाया गया।

1 अक्टूबर को दोबारा मांगी मदद

शिकायत के अनुसार, 1 अक्टूबर को नाबालिग एक बार फिर अपनी फूफी के पास पहुंची और मदद मांगी। इस बार उसने 112 के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों की सहायता के लिए उपलब्ध 181 अभयम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की।

लगातार दूसरी बार मदद मांगने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और नाबालिग के माता-पिता के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।

पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया और शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया।

पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज

नाबालिग की उम्र 14 वर्ष बताई गई है। ऐसे मामलों में बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने के लिए पॉक्सो कानून लागू होता है। पुलिस ने इसी कानून के तहत मामला दर्ज किया है।

पॉक्सो कानून का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देना और ऐसे मामलों की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के लिए विशेष कानूनी व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

मामले में अब पुलिस को शिकायत में बताए गए घटनाक्रम की जांच करनी होगी। इसके लिए नाबालिग के बयान, मेडिकल जांच, उपलब्ध डिजिटल या अन्य साक्ष्य तथा परिवार और आसपास के लोगों से प्राप्त जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।

शिकायत में बताई गई तारीखों की भी जांच

नाबालिग ने अपनी शिकायत में कथित घटनाओं के लिए अलग-अलग तारीखों का उल्लेख किया है। पुलिस के लिए अब इन तारीखों और घटनाओं की परिस्थितियों की पुष्टि करना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि शिकायत में बताए गए समय पर नाबालिग कहां थी, घर में कौन-कौन मौजूद था और कथित घटनाओं के संबंध में कोई स्वतंत्र या तकनीकी साक्ष्य उपलब्ध है या नहीं।

यदि किसी डिजिटल डिवाइस, फोन, संदेश या अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री से संबंधित जानकारी सामने आती है, तो पुलिस उसकी भी जांच कर सकती है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी भी साक्ष्य या आरोप को अंतिम निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा।

नाबालिग की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण

ऐसे मामलों में जांच के साथ-साथ नाबालिग की सुरक्षा और उसके मानसिक एवं भावनात्मक संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाती है। बच्चे से जुड़े संवेदनशील मामलों में उसकी पहचान और निजी जानकारी को सार्वजनिक करना कानून और नैतिकता दोनों की दृष्टि से उचित नहीं है।

इस मामले में भी नाबालिग द्वारा खुद हेल्पलाइन के जरिए मदद मांगना जांच का महत्वपूर्ण पहलू है। उसने पहले 112 के माध्यम से पुलिस तक पहुंचने की कोशिश की और बाद में 181 अभयम से भी सहायता मांगी।

अब पुलिस की जिम्मेदारी है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष तरीके से जांच करे और नाबालिग को आवश्यक सुरक्षा तथा सहायता उपलब्ध कराए।

पुलिस जुटा रही है साक्ष्य

पुलिस के सामने इस मामले में कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। नाबालिग ने जिन घटनाओं का उल्लेख किया है, वे वास्तव में किन परिस्थितियों में हुईं? क्या उसके आरोपों की पुष्टि करने वाले स्वतंत्र साक्ष्य मौजूद हैं? घर में उस दौरान कौन-कौन मौजूद था? और 29 सितंबर तथा 1 अक्टूबर को नाबालिग द्वारा मदद मांगने के बाद क्या घटनाक्रम हुआ?

इन सभी सवालों के जवाब पुलिस जांच के जरिए तलाशे जा रहे हैं।

पुलिस ने माता-पिता को हिरासत में लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे जरूरी बात यह है कि नाबालिग द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं, लेकिन वे अभी आरोप ही हैं। किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले कानूनी प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है।

पुलिस जांच, मेडिकल रिपोर्ट, बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। अदालत में आरोप साबित होने के बाद ही किसी व्यक्ति को दोषी माना जा सकता है।

कच्छ का यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि एक 14 वर्षीय नाबालिग ने खुद दो अलग-अलग मौकों पर मदद मांगने की कोशिश की। पहले 112 और बाद में 181 अभयम तक पहुंचने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की। अब जांच एजेंसियों के सामने चुनौती यह है कि शिकायत में बताए गए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए और नाबालिग की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

मामले की जांच अभी जारी है। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच और सामने आने वाले साक्ष्यों से ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में बताए गए घटनाक्रम की पूरी सच्चाई क्या है और मामले में आगे कौन-कौन से कानूनी कदम उठाए जाते हैं।

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