वर्कआउट के बाद होने वाला दर्द कहीं खतरे का संकेत तो नहीं? ये लक्षण दिखे तो तुरंत रुक जाएं, वरना पड़ सकता है भारी
आज के समय में फिट और स्वस्थ रहने के लिए लोग जिम, योग, रनिंग, वॉकिंग और अलग-अलग तरह की एक्सरसाइज का सहारा ले रहे हैं। लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि से दूर रहने के बाद जब कोई व्यक्ति अचानक वर्कआउट शुरू करता है, तो शरीर में दर्द और मांसपेशियों में जकड़न महसूस होना काफी आम है। कई लोग इस दर्द को यह सोचकर नजरअंदाज कर देते हैं कि एक्सरसाइज का असर हो रहा है और शरीर मजबूत बन रहा है।
हालांकि, हर तरह का दर्द सामान्य नहीं होता। कुछ दर्द शरीर के नए व्यायाम के साथ एडजस्ट होने की वजह से हो सकते हैं, जबकि अचानक या बहुत तेज दर्द चोट का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि वर्कआउट के बाद होने वाला कौन-सा दर्द सामान्य है और किस तरह के दर्द को गंभीरता से लेना चाहिए।
एक्सरसाइज के बाद 12 से 24 घंटे में दर्द क्यों होता है?
अगर आपने लंबे समय के बाद एक्सरसाइज शुरू की है या अचानक अपने वर्कआउट की तीव्रता बढ़ा दी है, तो अगले कुछ घंटों में मांसपेशियों में दर्द और जकड़न महसूस हो सकती है। कई बार यह दर्द वर्कआउट के तुरंत बाद नहीं, बल्कि 12 से 24 घंटे बाद ज्यादा महसूस होता है।
इसे Delayed Onset Muscle Soreness यानी DOMS कहा जाता है। यह खासतौर पर तब हो सकता है जब शरीर किसी नई एक्सरसाइज या सामान्य से अधिक मेहनत का सामना करता है।
इस स्थिति में मांसपेशियों में हल्का दर्द, अकड़न, भारीपन या खिंचाव महसूस हो सकता है। सीढ़ियां चढ़ते समय, कुर्सी से उठते समय या लंबे समय तक बैठने के बाद चलने में भी थोड़ी परेशानी हो सकती है।
आमतौर पर इस तरह की परेशानी कुछ दिनों में धीरे-धीरे कम होने लगती है।
हल्का दर्द हो तो क्या करना चाहिए?
अगर दर्द हल्का है और धीरे-धीरे कम हो रहा है, तो शरीर को पर्याप्त आराम देना जरूरी है। अच्छी नींद, पर्याप्त पानी पीना और हल्की गतिविधि कई लोगों को राहत दे सकती है।
ऐसे समय पर बहुत ज्यादा भारी वर्कआउट करने के बजाय हल्की वॉक, सामान्य स्ट्रेचिंग या कम तीव्रता वाली गतिविधि की जा सकती है, बशर्ते इससे दर्द न बढ़े।
सबसे जरूरी बात यह है कि दर्द कम होने से पहले उसी मांसपेशी समूह पर बहुत ज्यादा दबाव डालने से बचें।
वर्कआउट के दौरान अचानक तेज दर्द हो तो सावधान
वर्कआउट के बाद हल्की जकड़न और एक्सरसाइज करते समय अचानक होने वाले तेज दर्द में अंतर समझना जरूरी है।
अगर एक्सरसाइज करते समय अचानक तेज, चुभने वाला या असामान्य दर्द महसूस हो, तो उसे नजरअंदाज करके वर्कआउट जारी रखना सही नहीं है। किसी खास हिस्से में अचानक खिंचाव, तेज दर्द या जलन जैसी अनुभूति मांसपेशी, टेंडन या लिगामेंट से जुड़ी चोट का संकेत हो सकती है।
ऐसी स्थिति में यह मान लेना कि दर्द जितना ज्यादा होगा, एक्सरसाइज का फायदा उतना ही ज्यादा हुआ है, गलत हो सकता है।
सूजन और नीला पड़ना भी हो सकता है चेतावनी संकेत
अगर दर्द के साथ प्रभावित हिस्से में सूजन दिखाई दे रही है या त्वचा के नीचे नीला या बैंगनी रंग दिखाई देने लगा है, तो इसे सामान्य वर्कआउट soreness मानकर छोड़ना ठीक नहीं है।
इसी तरह अगर हाथ या पैर को सामान्य तरीके से हिलाने में परेशानी हो रही है, मांसपेशियों में असामान्य कमजोरी महसूस हो रही है या चोट के बाद दर्द लगातार बढ़ता जा रहा है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
शरीर में किसी खास जगह का दर्द अगर हर दिन बढ़ रहा है, तो वर्कआउट की तीव्रता और एक्सरसाइज करने की तकनीक पर भी ध्यान देना चाहिए।
कई दिनों तक दर्द रहे तो क्या समझें?
सामान्य मांसपेशियों की जकड़न को समय के साथ कम होना चाहिए। अगर दर्द लगातार बना हुआ है या आराम करने के बावजूद स्थिति बेहतर नहीं हो रही, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कई बार लोग तेजी से फिट होने के चक्कर में रोजाना एक ही मांसपेशी समूह को बहुत अधिक ट्रेन करते हैं। इससे शरीर को रिकवरी का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता और चोट का खतरा बढ़ सकता है।
वर्कआउट प्लान में अलग-अलग मांसपेशी समूहों को आराम देने और रिकवरी का समय शामिल करना जरूरी है। एक्सरसाइज की शुरुआत हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार करनी चाहिए और धीरे-धीरे इसकी अवधि तथा तीव्रता बढ़ानी चाहिए।
सिर्फ दर्द ही नहीं, इन लक्षणों पर भी दें ध्यान
वर्कआउट के बाद अगर सामान्य थकान की जगह लगातार और असामान्य कमजोरी महसूस हो रही है, तो इसे भी गंभीरता से लेना चाहिए।
कुछ चेतावनी संकेतों में चक्कर आना, सांस लेने में असामान्य परेशानी, बेहोशी जैसा महसूस होना या दिल की धड़कन का असामान्य रूप से तेज होना शामिल हो सकता है। ऐसे लक्षणों को केवल यह सोचकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि शरीर एक्सरसाइज का आदी हो रहा है।
अगर किसी व्यक्ति को वर्कआउट के बाद बहुत ज्यादा मांसपेशियों का दर्द और कमजोरी हो तथा पेशाब का रंग असामान्य रूप से बहुत गहरा दिखाई दे, तो यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
दर्द के बावजूद एक्सरसाइज करते रहना पड़ सकता है भारी
फिटनेस की दुनिया में अक्सर यह धारणा सुनने को मिलती है कि दर्द के बिना कोई फायदा नहीं। लेकिन शरीर को लगातार दर्द में धकेलना फिटनेस का सही तरीका नहीं है।
एक्सरसाइज का उद्देश्य शरीर की ताकत, सहनशक्ति और गतिशीलता को बेहतर बनाना है। अगर किसी व्यायाम के दौरान शरीर बार-बार दर्द का संकेत दे रहा है, तो तकनीक, वजन, गति और वर्कआउट की अवधि पर दोबारा विचार करना चाहिए।
खासकर शुरुआती लोगों को भारी वजन या बहुत कठिन एक्सरसाइज से शुरुआत करने के बजाय धीरे-धीरे अपनी क्षमता बढ़ानी चाहिए।
सही तकनीक भी है बेहद जरूरी
वर्कआउट से होने वाली कई परेशानियों से बचने के लिए सही तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किसी भी एक्सरसाइज को गलत posture या जरूरत से ज्यादा वजन के साथ करने पर मांसपेशियों और जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
इसलिए नई एक्सरसाइज शुरू करते समय उसकी सही तकनीक सीखना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित फिटनेस प्रोफेशनल की मदद ली जा सकती है।
साथ ही वर्कआउट से पहले शरीर को तैयार करने और बाद में धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटने के लिए उचित वार्म-अप और कूल-डाउन भी उपयोगी हो सकते हैं।
शरीर के संकेतों को समझना सबसे जरूरी
वर्कआउट के बाद हल्की मांसपेशियों की जकड़न या दर्द कई बार सामान्य हो सकता है, खासकर तब जब शरीर लंबे समय बाद किसी नई गतिविधि का सामना कर रहा हो। लेकिन तेज, अचानक, बढ़ता हुआ या लगातार बना रहने वाला दर्द अलग स्थिति की ओर इशारा कर सकता है।
इसलिए केवल दर्द की मौजूदगी को एक्सरसाइज की सफलता का पैमाना नहीं मानना चाहिए। दर्द कब शुरू हुआ, कितना है, किस जगह है, लगातार कम हो रहा है या बढ़ रहा है और उसके साथ कोई दूसरा लक्षण तो नहीं है—इन सभी बातों पर ध्यान देना जरूरी है।
सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि वर्कआउट की शुरुआत धीरे-धीरे की जाए, सही तकनीक अपनाई जाए, शरीर को पर्याप्त आराम दिया जाए और असामान्य लक्षण दिखाई देने पर विशेषज्ञ से सलाह ली जाए।
यह सामान्य स्वास्थ्य जानकारी है। लगातार, बहुत तेज या असामान्य दर्द तथा गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लेना जरूरी है।

कोई टिप्पणी नहीं