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पिता ने सगी बेटी से कई सालों तक किया दुष्कर्म, 15 साल की नाबालिग ने बच्ची को दिया जन्म; बठिंडा में रिश्ते तार-तार



बठिंडा। पिता को अक्सर परिवार की सुरक्षा और बेटियों के सबसे बड़े सहारे के रूप में देखा जाता है। लेकिन पंजाब के बठिंडा से सामने आया एक मामला इस भरोसे को झकझोर देने वाला है। यहां एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की ने सरकारी अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया है। आरोप है कि नाबालिग के साथ उसके पिता ने ही यौन शोषण किया। मामले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म से संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।

अदालत में पेश किए जाने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है। घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि नाबालिग की मां का करीब तीन साल पहले निधन हो चुका था। इसके बाद घर में दो बेटियों की जिम्मेदारी उनके पिता पर थी। आरोप है कि जिस व्यक्ति से दोनों बहनों को सुरक्षा और सहारे की उम्मीद थी, उसी के खिलाफ नाबालिग ने गंभीर आरोप लगाए हैं।

मामला सामने आने के बाद पुलिस और बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारियों ने दोनों बहनों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। नाबालिग को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने एक बच्ची को जन्म दिया।

पड़ोसन की नजर पड़ी तो खुला पूरा मामला

बताया जा रहा है कि यह मामला अचानक सामने आया। नाबालिग और उसकी 20 वर्षीय नेत्रहीन बड़ी बहन अपने पिता के साथ रहती थीं। आरोप है कि पिता दोनों बेटियों को घर में बंद करके बाहर से ताला लगाकर चला जाता था। इस वजह से उनका आसपास के लोगों से संपर्क भी बेहद सीमित था।

करीब 10 से 12 दिन पहले नाबालिग किसी सामान के लिए घर के पास स्थित एक दुकान पर गई थी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाली एक महिला की नजर उसके शरीर में आए बदलाव पर पड़ी। महिला को कुछ असामान्य लगा तो उसने बच्ची से बातचीत करने की कोशिश की।

बताया गया है कि बातचीत के दौरान नाबालिग भावुक हो गई और रोने लगी। इसके बाद उसने महिला को अपने साथ कथित तौर पर हुई घटना के बारे में बताया। महिला ने मामले को गंभीरता से लिया और इसे दबाने के बजाय संबंधित संस्था तथा प्रशासन तक पहुंचाने का फैसला किया।

यही कदम आगे चलकर दोनों बहनों को उस स्थिति से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

संस्था ने पुलिस और बाल कल्याण विभाग से किया संपर्क

पड़ोसन ने मामले की जानकारी जस्टिस फॉर ऑल ऑर्गेनाइजेशन को दी। संस्था के प्रधान हरि ओम ठाकुर और अन्य कार्यकर्ताओं ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस तथा बाल कल्याण विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया।

संस्था और प्रशासन के समन्वय के बाद दोनों बहनों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। नाबालिग को चिकित्सकीय देखभाल के लिए बठिंडा के सरकारी अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में भर्ती कराया गया।

मेडिकल जांच के दौरान पता चला कि लड़की काफी समय से गर्भवती थी। बाद में उसने अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया।

मामले में पुलिस ने नाबालिग के बयान के आधार पर कार्रवाई शुरू की। चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए उसके मामले में बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने वाले कानून यानी पॉक्सो एक्ट के प्रावधान लागू किए गए हैं।

मां की मौत के बाद अकेली रह गई थीं दोनों बहनें

इस घटना का एक और बेहद संवेदनशील पहलू परिवार की परिस्थितियों से जुड़ा है। नाबालिग की मां की मौत करीब तीन साल पहले हो चुकी थी। मां के निधन के बाद दोनों बहनें अपने पिता के साथ रह रही थीं।

बड़ी बहन की उम्र करीब 20 वर्ष बताई गई है और वह नेत्रहीन है। ऐसे में दोनों बहनों की स्थिति पहले से ही बेहद संवेदनशील थी। परिवार में मां की अनुपस्थिति और बड़ी बहन की दृष्टिबाधिता के कारण दोनों की बाहरी दुनिया से संपर्क की स्थिति भी सीमित बताई गई।

इसी परिस्थिति के बीच नाबालिग के साथ कथित अपराध का मामला सामने आया।

रिश्तेदारों ने भी जिम्मेदारी लेने से किया इनकार

संस्था के प्रतिनिधियों के अनुसार, नाबालिग के अस्पताल में बच्ची को जन्म देने के बाद परिवार के रिश्तेदारों से संपर्क किया गया। उनसे दोनों बहनों और नवजात बच्ची की देखभाल की जिम्मेदारी लेने के बारे में पूछा गया।

हालांकि, बताया गया कि किसी रिश्तेदार ने उनकी जिम्मेदारी लेने के लिए सहमति नहीं दी। इसके बाद प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की मदद से आगे की व्यवस्था की गई।

नाबालिग मां और उसकी नवजात बच्ची को नारी निकेतन भेजा गया, जहां उनकी सुरक्षा और देखभाल की व्यवस्था की जा सके। वहीं उसकी 20 वर्षीय नेत्रहीन बहन को सखी सेंटर सुरक्षा गृह में रखा गया है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य दोनों बहनों को फिलहाल सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और उनकी जरूरतों के अनुसार सहायता सुनिश्चित करना है।

पुलिस ने आरोपी पिता को किया गिरफ्तार

थाना कैनाल कॉलोनी के एसएचओ दलजीत सिंह के अनुसार, पुलिस ने नाबालिग के बयान के आधार पर आरोपी पिता के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

मामले की जांच में पुलिस द्वारा पीड़िता के बयान, मेडिकल जांच और अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नाबालिग से जुड़े मामलों में जांच के दौरान उसकी पहचान और निजता की सुरक्षा भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।

कानून के अनुसार, नाबालिग के साथ यौन अपराध के मामलों को गंभीर अपराध माना जाता है। पॉक्सो कानून बच्चों को यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और संबंधित अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है।

नवजात बच्ची की देखभाल भी बड़ी चुनौती

इस घटना में केवल नाबालिग की सुरक्षा ही चिंता का विषय नहीं है, बल्कि जन्मी बच्ची की देखभाल भी महत्वपूर्ण है। नवजात बच्ची को ऐसी परिस्थिति में जन्म मिला है, जहां उसकी मां खुद नाबालिग है और परिवार का सामान्य सहारा उपलब्ध नहीं है।

ऐसे मामलों में प्रशासन और बाल संरक्षण व्यवस्था की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। नाबालिग मां और नवजात दोनों को सुरक्षित वातावरण, स्वास्थ्य सेवाएं, पोषण, भावनात्मक सहयोग और आगे की कानूनी सहायता की आवश्यकता हो सकती है।

इसके साथ ही नाबालिग की बड़ी बहन, जो दृष्टिबाधित है, उसके लिए भी लंबे समय तक देखभाल और पुनर्वास की जरूरत हो सकती है।

पड़ोसन की जागरूकता ने बचाई दो जिंदगियां

इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह भी सामने आती है कि यदि पड़ोस की महिला ने नाबालिग की स्थिति को देखकर उससे बातचीत नहीं की होती और उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया होता, तो मामला शायद और लंबे समय तक सामने नहीं आता।

बच्चों में अचानक व्यवहार में बदलाव, किसी व्यक्ति से डरना, घर में बंद रहना, किसी खास व्यक्ति के सामने असहज होना या स्वास्थ्य में गंभीर बदलाव जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि किसी संकेत के आधार पर खुद निष्कर्ष निकालने के बजाय ऐसी स्थिति में संबंधित बाल संरक्षण या पुलिस अधिकारियों से संपर्क करना जरूरी है।

अब सबसे जरूरी है पीड़ितों का भविष्य

बठिंडा की यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है, लेकिन फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि नाबालिग मां, उसकी नवजात बच्ची और उसकी नेत्रहीन बहन को आगे किस तरह सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल सकेगा।

आरोपित पिता गिरफ्तार हो चुका है और मामला कानूनी प्रक्रिया में है। अदालत और जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगी।

इस बीच पीड़िता की निजता की रक्षा करना समाज की जिम्मेदारी है। ऐसी घटनाओं में पीड़ित बच्चे को दोषी ठहराने या उसकी पहचान सार्वजनिक करने के बजाय उसे सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, कानूनी सहयोग और मानसिक-सामाजिक सहारा देना सबसे जरूरी होता है।

यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। अगर किसी बच्चे की बात संदिग्ध परिस्थितियों में सामने आती है, तो उसे दबाने या नजरअंदाज करने के बजाय उचित संस्था और कानून-व्यवस्था तक पहुंचाना जरूरी है। बठिंडा के इस मामले में भी एक पड़ोसन की संवेदनशीलता और समय पर उठाया गया कदम दोनों बहनों को सुरक्षित व्यवस्था तक पहुंचाने में अहम साबित हुआ।

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