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पहले नीला ड्रम, अब लोहे का बक्सा… उन्नाव में शव मिलने के बाद खुला ऐसा राज कि पुलिस भी रह गई हैरान



उत्तर प्रदेश के उन्नाव से सामने आया एक सनसनीखेज हत्याकांड इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। हाईवे किनारे एक लोहे के बक्से में शव मिलने के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मृतक की पहचान और हत्या की गुत्थी सुलझाना थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो कुछ ही घंटों में ऐसे सुराग सामने आए, जिन्होंने पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल दी।

पुलिस के मुताबिक, हाईवे किनारे बक्से में मिला शव सोनू नाम के व्यक्ति का था। जांच आगे बढ़ी तो शक की सुई किसी बाहरी अपराधी की तरफ नहीं, बल्कि मृतक के अपने घर तक पहुंच गई। पुलिस का दावा है कि सोनू की पत्नी नेहा रावत ने पड़ोसी जितेंद्र उर्फ राहुल के साथ मिलकर उसकी हत्या की साजिश रची थी। हत्या के बाद शव को चादर और कंबल में लपेटकर लोहे के बक्से में बंद किया गया और फिर लोडर की मदद से हाईवे किनारे फेंक दिया गया।

मामले में पुलिस ने मृतक की पत्नी नेहा रावत समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, एक बाल अपचारी को भी संरक्षण में लिया गया है। पुलिस ने कथित तौर पर हत्या में इस्तेमाल बट्टा, लोहे का बक्सा और शव को ले जाने वाले लोडर को भी बरामद किया है।

हाईवे किनारे बक्से में मिला शव, मचा हड़कंप

मामले की शुरुआत उस समय हुई जब हाईवे किनारे एक संदिग्ध लोहे का बक्सा दिखाई दिया। बक्से को लेकर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। जब पुलिस मौके पर पहुंची और बक्सा खोला गया तो उसके अंदर शव बरामद हुआ।

शव बक्से में मिलने की सूचना के बाद आसपास के इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। शव की पहचान कराने के साथ-साथ यह पता लगाने की कोशिश की गई कि आखिर इसे यहां कौन और कब लेकर आया था।

मामला गंभीर होने के कारण पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। यहीं से जांच को महत्वपूर्ण सुराग मिलने की शुरुआत हुई।

CCTV फुटेज ने बदली जांच की दिशा

हत्या जैसे मामलों में CCTV फुटेज अक्सर जांच के लिए बेहद अहम साबित होती है। उन्नाव के इस मामले में भी कैमरों की फुटेज ने पुलिस को आगे बढ़ने में मदद की।

पुलिस ने हाईवे और आसपास के रास्तों पर लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग को खंगाला। संदिग्ध गतिविधियों और वाहनों की आवाजाही पर विशेष ध्यान दिया गया। जांच के दौरान पुलिस को ऐसे सुराग मिले, जिनके आधार पर संदिग्धों से पूछताछ की गई।

पूछताछ आगे बढ़ने के साथ ही पुलिस को कथित तौर पर घटना के पीछे मृतक की पत्नी और उसके परिचितों की भूमिका का पता चला। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

पुलिस के मुताबिक पत्नी ने पड़ोसी के साथ मिलकर की हत्या

पुलिस के अनुसार, मृतक सोनू की पत्नी नेहा रावत ने पड़ोसी जितेंद्र उर्फ राहुल के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई थी। आरोप है कि वारदात के दौरान सोनू पर सिलबट्टे के बट्टे से हमला किया गया।

हमले में सोनू की मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। पुलिस के मुताबिक, शव को चादर और कंबल में लपेटा गया और फिर उसे लोहे के बक्से में बंद कर दिया गया।

इसके बाद शव को लोडर के जरिए हाईवे किनारे ले जाकर फेंकने का आरोप है।

इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस के सामने कई सवाल खड़े किए हैं। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि हत्या की योजना कब बनाई गई थी, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और घटना के पीछे वास्तविक वजह क्या थी।

शव को बक्से में बंद करने के पीछे क्या थी वजह?

हत्या के बाद शव को खुले में छोड़ने के बजाय बक्से में बंद करके ले जाना इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू माना जा रहा है। आरोपियों ने शव को चादर और कंबल में लपेटने के बाद लोहे के बक्से में रखा।

इसके बाद बक्से को वाहन के जरिए हाईवे तक ले जाया गया।

जांचकर्ताओं के लिए यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि बक्सा कहां से आया, उसे किसने उपलब्ध कराया और शव को हाईवे किनारे फेंकने के लिए उस स्थान को कैसे चुना गया। पुलिस इन सभी पहलुओं को जांच का हिस्सा बना सकती है।

12 घंटे में पुलिस ने किया खुलासा

पुलिस के लिए इस मामले में सबसे बड़ी सफलता यह रही कि घटना का खुलासा कथित तौर पर करीब 12 घंटे के भीतर कर दिया गया। शव मिलने के बाद शुरू हुई जांच में CCTV फुटेज, पूछताछ और अन्य सुरागों की मदद से पुलिस संदिग्धों तक पहुंची।

पुलिस ने मामले में नेहा रावत समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा एक बाल अपचारी को संरक्षण में लिया गया है।

हत्या में इस्तेमाल किए गए कथित बट्टे के अलावा लोहे का बक्सा और शव को ले जाने के लिए इस्तेमाल किया गया लोडर भी बरामद किए जाने की बात सामने आई है। बरामदगी के बाद पुलिस अब इन चीजों को मामले की जांच में अहम साक्ष्य के तौर पर देख रही है।

क्यों चर्चा में आया मामला?

उन्नाव का यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें हत्या के बाद शव को छिपाने और ठिकाने लगाने के लिए बक्से का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। हाल के वर्षों में अलग-अलग मामलों में शवों को ड्रम, बक्से या अन्य कंटेनरों में छिपाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में अपराध के बाद शव को पहचान से दूर रखने और उसे कहीं और ले जाने की कोशिश की जाती है।

हालांकि, किसी भी मामले में केवल शुरुआती पुलिस जांच के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होता। अदालत में मामले की पूरी सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति तय होगी।

अब हत्या की असली वजह पर नजर

पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अभी भी हत्या की वजह को लेकर है। आखिर सोनू की हत्या क्यों की गई? क्या इसके पीछे पारिवारिक विवाद था, व्यक्तिगत संबंधों से जुड़ा कोई मामला था या कोई अन्य कारण?

इन सवालों का जवाब पुलिस की आगे की जांच और आरोपियों से पूछताछ के बाद ही स्पष्ट होगा।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि हत्या से पहले आरोपियों के बीच किस तरह की बातचीत हुई थी और घटना के बाद शव को ठिकाने लगाने की योजना कैसे बनाई गई।

CCTV से खुला राज, लेकिन कहानी अभी बाकी

उन्नाव के इस हत्याकांड में CCTV फुटेज ने पुलिस को आरोपियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हाईवे किनारे बक्से में शव मिलने से शुरू हुई जांच कुछ ही घंटों में मृतक के करीबी लोगों तक पहुंच गई।

पुलिस के मुताबिक, सोनू की पत्नी नेहा रावत और उसके साथियों पर हत्या और शव को ठिकाने लगाने का आरोप है। तीन लोगों की गिरफ्तारी और एक बाल अपचारी को संरक्षण में लिए जाने के साथ पुलिस ने मामले की शुरुआती गुत्थी सुलझाने का दावा किया है।

अब जांच का अगला चरण हत्या के पीछे की पूरी वजह, घटनाक्रम में सभी आरोपियों की वास्तविक भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों को मजबूत करने पर केंद्रित होगा।

हाईवे किनारे पड़ा एक बंद बक्सा, उसके अंदर शव और फिर CCTV फुटेज से सामने आती कहानी—उन्नाव का यह मामला बताता है कि अपराध के बाद सबूत छिपाने की कोशिश के बावजूद जांच एजेंसियां किस तरह छोटे-छोटे सुरागों को जोड़कर आरोपियों तक पहुंच सकती हैं। हालांकि, आरोपियों पर लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में ही होगी।

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