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सोना खरीदने वालों के लिए आई बड़ी खबर! भाव गिरे तो चीन ने चली ऐसी चाल, दुनिया के गोल्ड मार्केट में मच सकती है हलचल



त्योहारी सीजन में सोना और चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए सोमवार को बाजार से एक तरफ राहत की खबर आई, तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट से ऐसी खबर सामने आई जिसने निवेशकों का ध्यान खींच लिया है। घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। वहीं, दूसरी ओर चीन का केंद्रीय बैंक लगातार सोने की खरीदारी बढ़ा रहा है।

12 अक्टूबर 2026 को MCX पर दिसंबर एक्सपायरी वाला सोना कारोबार के दौरान करीब 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रहा। सुबह के कारोबार में इसमें करीब 1,000 रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं चांदी भी कमजोर होकर करीब 2.25 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार करती दिखाई दी। बाजार में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब देश में त्योहारी खरीदारी का दौर शुरू हो चुका है।

लेकिन कहानी सिर्फ इतनी नहीं है। असली चर्चा चीन की सोने की खरीदारी को लेकर है। चीन पिछले 23 महीनों से लगातार अपने आधिकारिक गोल्ड रिजर्व में इजाफा कर रहा है। सितंबर 2026 में चीन के केंद्रीय बैंक ने करीब 23 टन सोना और खरीदा, जिससे उसका आधिकारिक गोल्ड रिजर्व बढ़कर करीब 2,410 टन हो गया है।

चीन ने सितंबर में खरीदा 23 टन से ज्यादा सोना

चीन की सोने की खरीदारी में सितंबर के दौरान तेजी देखने को मिली। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर के अंत में चीन के पास करीब 77.47 मिलियन ट्रॉय औंस सोना था, जबकि अगस्त के अंत में यह आंकड़ा 76.73 मिलियन औंस था। यानी एक महीने में करीब 7.4 लाख औंस या लगभग 23 टन की बढ़ोतरी हुई।

यह खरीदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सितंबर की खरीदारी अक्टूबर 2023 के बाद चीन की सबसे बड़ी मासिक बढ़ोतरी बताई जा रही है। इसके साथ ही चीन के केंद्रीय बैंक की सोना खरीदने की लगातार अवधि 23 महीने तक पहुंच गई है।

यानी जब दुनिया के कई बाजारों में सोने की कीमतों को डॉलर और बॉन्ड यील्ड का दबाव झेलना पड़ रहा है, उसी समय चीन अपने रिजर्व में सोना जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।

2026 में चीन ने अब तक खरीदा करीब 103 टन सोना

सितंबर की खरीदारी को शामिल करने के बाद चीन ने 2026 में अब तक लगभग 103 टन सोना अपने आधिकारिक रिजर्व में जोड़ा है। अगस्त में चीन ने करीब 20.2 टन सोना खरीदा था, जो अक्टूबर 2023 के बाद उस समय की सबसे बड़ी मासिक खरीदारी थी। अगस्त के अंत तक चीन का आधिकारिक गोल्ड रिजर्व लगभग 2,387 टन पहुंच गया था।

सितंबर में करीब 23 टन की अतिरिक्त खरीदारी के बाद यह आंकड़ा लगभग 2,410 टन हो गया।

जुलाई, अगस्त और सितंबर को मिलाकर ही चीन ने इन तीन महीनों में करीब 63 टन सोना खरीदा है। इससे पता चलता है कि केंद्रीय बैंक की खरीदारी की गति हाल के महीनों में काफी मजबूत रही है।

दुनिया में पांचवें नंबर पर चीन

आधिकारिक गोल्ड रिजर्व के मामले में चीन फिलहाल दुनिया के पांचवें सबसे बड़े धारकों में शामिल है। उससे आगे अमेरिका, जर्मनी, इटली और फ्रांस हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक चीन का आधिकारिक गोल्ड रिजर्व करीब 2,410 टन है। वहीं फ्रांस का रिजर्व करीब 2,437 टन और इटली का करीब 2,452 टन है। यानी चीन और फ्रांस के बीच अंतर लगभग 27 टन तथा चीन और इटली के बीच करीब 42 टन का रह गया है।

यही वजह है कि बाजार में यह चर्चा तेज है कि अगर चीन इसी तरह सोना खरीदता रहा तो आने वाले समय में वैश्विक गोल्ड रिजर्व रैंकिंग में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि भविष्य की रैंकिंग केवल चीन की खरीदारी पर निर्भर नहीं करेगी। दूसरे देशों के रिजर्व में बदलाव और सोने की आधिकारिक खरीद-बिक्री भी रैंकिंग को प्रभावित कर सकती है।

चीन आखिर इतनी तेजी से सोना क्यों खरीद रहा है?

चीन की लगातार सोना खरीदने की रणनीति के पीछे कई संभावित आर्थिक कारण हो सकते हैं। विशेषज्ञ लंबे समय से मानते रहे हैं कि केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।

सोना किसी दूसरे देश की सरकार की देनदारी नहीं होता। यही कारण है कि वैश्विक आर्थिक या भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौरान कई केंद्रीय बैंक अपने रिजर्व में सोने को एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में रखते हैं।

World Gold Council के अनुसार, चीन के केंद्रीय बैंक ने 2026 में मई से लगातार दोहरे अंकों में मासिक खरीदारी दर्ज की और अगस्त के अंत तक उसके आधिकारिक गोल्ड होल्डिंग्स कुल विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 9 प्रतिशत थीं।

इससे संकेत मिलता है कि चीन अपने रिजर्व पोर्टफोलियो में सोने की भूमिका को बढ़ा रहा है।

फिर आज भारत में सोने के भाव क्यों गिरे?

यह सवाल सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर चीन लगातार सोना खरीद रहा है तो फिर भारतीय बाजार में आज कीमतों में गिरावट क्यों देखने को मिली?

इसका जवाब अंतरराष्ट्रीय बाजार की दूसरी ताकतों में छिपा है।

सोने की कीमत पर अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, महंगाई के आंकड़े और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति का बड़ा असर पड़ता है। हाल के दिनों में मजबूत डॉलर और ऊंची अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड ने सोने पर दबाव बनाया है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर की शुरुआत में सोने की कीमतों पर डॉलर और अमेरिकी यील्ड में मजबूती का दबाव देखा गया था।

सोना खुद कोई ब्याज नहीं देता। इसलिए जब बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न आकर्षक होता है और डॉलर मजबूत होता है, तो कुछ निवेशकों के लिए सोने की आकर्षकता कम हो सकती है।

इसी वजह से केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और बाजार की तत्काल कीमत के बीच हमेशा सीधा संबंध नहीं होता।

त्योहारी सीजन में ग्राहकों के लिए क्या मतलब?

भारत में त्योहारी सीजन के दौरान सोने की मांग पर खास नजर रहती है। धनतेरस, दिवाली और शादी के मौसम में आभूषणों की खरीदारी बढ़ सकती है। ऐसे में कीमतों में छोटी गिरावट भी ग्राहकों के लिए आकर्षक लग सकती है।

लेकिन विशेषज्ञों की सामान्य सलाह यही रहती है कि केवल एक दिन की गिरावट देखकर बड़ी खरीदारी का फैसला नहीं करना चाहिए।

खासकर आभूषण खरीदने वालों को केवल MCX का भाव नहीं देखना चाहिए। रिटेल कीमत में सोने की शुद्धता, मेकिंग चार्ज, GST, स्थानीय बाजार की स्थिति और ज्वेलर का प्रीमियम भी शामिल हो सकता है।

इसलिए अगर कोई व्यक्ति शादी या त्योहार के लिए आभूषण खरीद रहा है तो उसे 22 कैरेट और 24 कैरेट के अंतर के साथ-साथ मेकिंग चार्ज और अंतिम बिल की कीमत भी देखनी चाहिए।

निवेशकों के लिए चीन की खरीदारी का क्या संकेत?

चीन की लगातार खरीदारी सोने के लिए दीर्घकालिक मांग का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। अगर दुनिया के केंद्रीय बैंक अपने रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाते रहते हैं तो इससे लंबे समय में सोने की मांग को समर्थन मिल सकता है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सोने की कीमत हर दिन बढ़ेगी।

सोने में भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। सितंबर में वैश्विक सोने की कीमतों में तेज गिरावट आई थी और इसके बावजूद चीन ने खरीदारी जारी रखी। Reuters के अनुसार, सितंबर में चीन के सोने के रिजर्व की मात्रा बढ़ी, जबकि सोने की कीमतों में उस महीने तेज कमजोरी देखी गई।

यह अंतर दिखाता है कि केंद्रीय बैंक की रणनीति हमेशा छोटे समय के बाजार उतार-चढ़ाव पर आधारित नहीं होती।

क्या सोना फिर महंगा हो सकता है?

आने वाले समय में सोने की दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी। अमेरिका की महंगाई, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड, वैश्विक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी इनमें प्रमुख हैं।

अगर ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ती है, डॉलर कमजोर होता है और वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है तो सोने को समर्थन मिल सकता है। इसके विपरीत मजबूत डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड सोने पर दबाव डाल सकती है।

इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मौजूदा गिरावट सोने में लंबी गिरावट की शुरुआत है या सिर्फ अस्थायी करेक्शन।

भारत में सोना खरीदने वालों को क्या करना चाहिए?

अगर खरीदारी का उद्देश्य आभूषण है और जरूरत निकट भविष्य की है तो ग्राहक को अपनी जरूरत के हिसाब से खरीदारी करनी चाहिए। केवल कीमत ऊपर या नीचे जाने की उम्मीद में जरूरी आभूषण की खरीदारी टालना हमेशा सही रणनीति नहीं हो सकती।

वहीं निवेश के लिए सोना खरीदने वालों को अपनी निवेश अवधि, जोखिम उठाने की क्षमता और पोर्टफोलियो में सोने की उचित हिस्सेदारी को ध्यान में रखना चाहिए।

सबसे अहम बात यह है कि सोने की कीमत देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर और घरेलू कीमतों के बीच संबंध को समझना जरूरी है।

चीन की चाल पर दुनिया की नजर

फिलहाल सबसे बड़ी कहानी यही है कि चीन लगातार अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ा रहा है। सितंबर में करीब 23 टन की खरीदारी के बाद उसका आधिकारिक रिजर्व लगभग 2,410 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। 2026 में उसकी आधिकारिक खरीदारी करीब 103 टन तक पहुंच चुकी है और लगातार 23वें महीने रिजर्व में बढ़ोतरी हुई है।

दूसरी तरफ, भारत में त्योहारी सीजन से ठीक पहले सोने और चांदी के दामों में नरमी ग्राहकों को कुछ राहत दे रही है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में मौजूद अनिश्चितता को देखते हुए आगे कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

यानी सोना खरीदने वालों के लिए आज की गिरावट राहत जरूर है, लेकिन चीन की लगातार बढ़ती खरीदारी और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां आने वाले महीनों में बुलियन मार्केट की कहानी को एक बार फिर बदल सकती हैं।

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