Breaking News

सेब काटते ही निकला करोड़ों का राज! 100 साल पहले चोरी हुआ था ये बेशकीमती गुलाबी हीरा, कहानी सुनकर रह जाएंगे दंग



नई दिल्ली। आमतौर पर किसी बेशकीमती हीरे की चोरी हो तो उसकी तलाश पुलिस, जासूसों, वैज्ञानिक जांच और आधुनिक तकनीक के जरिए की जाती है। लेकिन अगर किसी चोरी हुए हीरे का राज एक भूखी नौकरानी के सेब काटने से खुल जाए, तो यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगती।

फ्रांस के मशहूर गुलाबी हीरे ‘ग्रैंड कॉन्डे’ की कहानी कुछ ऐसी ही है। करीब एक सदी पहले चोरी हुआ यह दुर्लभ हीरा अब एक बार फिर लोगों के सामने आने वाला है। इस हीरे से जुड़ी चोरी, रहस्यमयी इतिहास और उसकी बरामदगी की कहानी आज भी लोगों की दिलचस्पी का कारण बनी हुई है।

करीब 9 कैरेट वजन वाला यह नाशपाती के आकार का गुलाबी हीरा अक्टूबर 1926 में फ्रांस के प्रसिद्ध शांटिली महल से चोरी हुआ था। उस समय इस चोरी ने फ्रांस ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं।

लेकिन चोरों की सबसे बड़ी गलती हीरे को चुराना नहीं, बल्कि उसे छिपाने के लिए एक ऐसा तरीका अपनाना था, जिसने आखिरकार उनका पूरा राज खोल दिया।

रात के अंधेरे में महल से गायब हो गया था हीरा

अक्टूबर 1926 की एक रात शांटिली महल में चोर दाखिल हुए। उनका निशाना कोई साधारण सामान नहीं था, बल्कि ऐतिहासिक और बेहद दुर्लभ गुलाबी हीरा ग्रैंड कॉन्डे था।

हीरे की खासियत केवल उसका आकार या वजन नहीं था। उसका गुलाबी रंग और शाही इतिहास उसे बेहद महत्वपूर्ण बनाता था। यह रत्न फ्रांस के पुराने शाही और अभिजात्य संग्रह से जुड़ा हुआ था।

चोर हीरा लेकर महल से निकलने में कामयाब हो गए। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और हीरे की तलाश तेज कर दी गई।

लेकिन उस समय जांच के साधन आज की तरह आधुनिक नहीं थे। न डीएनए जांच जैसी तकनीक थी और न ही आज जैसी निगरानी व्यवस्था। ऐसे में चोरी हुआ हीरा कहां छिपाया गया है, यह पता लगाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी।

चोरों को शायद भरोसा था कि उन्होंने हीरे को ऐसी जगह छिपा दिया है, जहां किसी को उसके बारे में पता नहीं चलेगा।

लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि उनकी पूरी योजना एक मामूली फल के सामने टिक नहीं पाएगी।

करोड़ों के हीरे को सेब के अंदर छिपाया

हीरे को छिपाने के लिए चोरों ने एक बेहद अजीब तरीका अपनाया। उन्होंने सेब के अंदर जगह बनाकर उसमें हीरा छिपा दिया।

शायद उनका मानना था कि फल के भीतर छिपी इस छोटी-सी कीमती चीज पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा। आखिर कोई यह कैसे सोच सकता था कि एक सामान्य सा दिखने वाला सेब करोड़ों रुपये के बराबर माने जाने वाले दुर्लभ हीरे को अपने अंदर छिपाए हुए है?

चोरों को लगा होगा कि उनका यह तरीका बेहद सुरक्षित है।

लेकिन अपराध की दुनिया में कई बार सबसे जटिल योजना भी एक छोटी-सी गलती से टूट जाती है।

और यहां भी कुछ ऐसा ही हुआ।

भूख लगी और नौकरानी ने काट दिया सेब

चोरी के कुछ समय बाद चोर जिस होटल में ठहरे हुए थे, वहां एक नौकरानी की नजर उन सेबों पर पड़ी।

उसे भूख लगी थी। उसने सामान्य तरीके से एक सेब उठाया और उसे काटने लगी।

जैसे ही सेब काटा गया, उसके अंदर कुछ ऐसा दिखाई दिया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

सेब के भीतर से कीमती गुलाबी हीरा सामने आ गया।

एक पल में वह पूरा राज खुल गया, जिसे चोरों ने बड़ी चालाकी से छिपाने की कोशिश की थी।

यही घटना आगे चलकर ‘ग्रैंड कॉन्डे’ की चोरी की सबसे चर्चित कहानी बन गई।

एक तरफ पुलिस महीनों से चोरी हुए हीरे की तलाश कर रही थी और दूसरी तरफ एक साधारण होटल में काम करने वाली नौकरानी ने महज सेब काटकर उस रहस्य का पर्दाफाश कर दिया।

कहानी जैसी लगती है, लेकिन घटना दर्ज है

पहली नजर में यह घटना इतनी अविश्वसनीय लगती है कि कोई इसे फिल्म की कहानी समझ सकता है।

लेकिन इस घटना का उल्लेख उस समय की रिपोर्टों और अखबारों में हुआ था। यही वजह है कि आज भी ‘ग्रैंड कॉन्डे’ की चोरी और बरामदगी की कहानी को इसके इतिहास का सबसे दिलचस्प अध्याय माना जाता है।

सेब के अंदर छिपा हीरा मिलना केवल चोरी के खुलासे की घटना नहीं थी। इसने यह भी दिखाया कि अपराधी कितनी भी सावधानी बरतें, कभी-कभी उनकी अपनी छोटी-सी योजना ही उनके खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बन जाती है।

करीब 100 साल बाद फिर दुनिया के सामने आएगा हीरा

अब लगभग एक सदी बाद ‘ग्रैंड कॉन्डे’ एक बार फिर लोगों के सामने आने जा रहा है।

फ्रांस के शांटिली महल स्थित कॉन्डे म्यूजियम में इस दुर्लभ हीरे को प्रदर्शनी के दौरान रखा जाएगा। प्रदर्शनी करीब 3 जनवरी तक चलने वाली है।

इस बार आकर्षण केवल हीरा नहीं है। संग्रहालय ने इसके साथ जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों और इसके अतीत से संबंधित सामग्री को भी प्रदर्शनी का हिस्सा बनाया है।

इससे दर्शकों को केवल एक दुर्लभ गुलाबी हीरा देखने का मौका नहीं मिलेगा, बल्कि वे यह भी जान सकेंगे कि यह रत्न सदियों के दौरान किन-किन हाथों से गुजरता हुआ आज तक कैसे सुरक्षित रहा।

क्या आज भी हीरे को चोरी का खतरा है?

‘ग्रैंड कॉन्डे’ की सार्वजनिक प्रदर्शनी ऐसे समय में हो रही है जब यूरोप के कई संग्रहालयों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं।

पिछले कुछ समय में यूरोप के संग्रहालयों में चोरी की घटनाओं ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। पेरिस के लूव्र संग्रहालय में हुई चर्चित आभूषण चोरी ने भी संग्रहालयों में रखी बेशकीमती वस्तुओं की सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी थी।

ऐसे माहौल में करीब एक सदी पहले चोरी हो चुके इस ऐतिहासिक हीरे को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना अपने आप में बड़ा कदम है।

संग्रहालय के निदेशक मैथ्यू डेल्डिक के मुताबिक हीरे की पहचान को लेकर वैज्ञानिक और अकादमिक स्तर पर अध्ययन किए गए हैं। हालांकि इसकी सुरक्षा और बीमा से जुड़ी सभी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

गुलाबी हीरे आखिर इतने खास क्यों होते हैं?

‘ग्रैंड कॉन्डे’ को खास बनाने वाली सबसे बड़ी चीज उसका प्राकृतिक गुलाबी रंग है।

प्राकृतिक रूप से मिलने वाले गुलाबी हीरे दुनिया के सबसे दुर्लभ रत्नों में गिने जाते हैं। यही कारण है कि जब ऐसे हीरे नीलामी में आते हैं तो उनकी कीमत आसमान छू सकती है।

2017 में एक गुलाबी हीरा नीलामी में करीब 7.12 करोड़ डॉलर में बिका था। भारतीय मुद्रा में उस समय इसकी कीमत कई अरब रुपये के बराबर थी।

हालांकि ‘ग्रैंड कॉन्डे’ की मौजूदा बाजार कीमत सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए किसी दूसरे गुलाबी हीरे की नीलामी कीमत के आधार पर इसकी सटीक कीमत तय करना सही नहीं होगा।

फिर भी इसकी दुर्लभता, ऐतिहासिक महत्व और शाही विरासत इसे बेहद मूल्यवान बनाती है।

हीरा आखिर आया कहां से था?

‘ग्रैंड कॉन्डे’ की कहानी का एक हिस्सा आज भी रहस्य बना हुआ है। इस हीरे की मूल उत्पत्ति को लेकर पूरी तरह स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

शांटिली महल के रिकॉर्ड के मुताबिक इसका पहला ज्ञात उल्लेख 1740 में मिलता है। उस समय प्रिंस ऑफ कॉन्डे लुई हेनरी डी बॉर्बन की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति की सूची तैयार की गई थी। इसी सूची में इस हीरे का उल्लेख मिलता है।

बाद में यह फ्रांस के राजा लुई फिलिप प्रथम की पत्नी रानी मैरी-अमेलिया ऑफ बॉर्बन-सिसिली के संग्रह का हिस्सा बना।

इसके बाद यह उनके बेटे प्रिंस हेनरी ऑफ ऑर्लियन्स, ड्यूक ऑफ ओमाल के पास पहुंचा।

ड्यूक ऑफ ओमाल ने अपनी संपत्ति इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रांस को सौंप दी। आज शांटिली महल का स्वामित्व इसी संस्थान के पास है।

यानी यह हीरा केवल एक महंगा रत्न नहीं है। यह फ्रांस के इतिहास, राजघराने, संग्रहालय और लगभग एक सदी पुरानी अपराध कहानी का हिस्सा भी है।

एक सेब ने बदल दी पूरी कहानी

‘ग्रैंड कॉन्डे’ की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही है कि जिस हीरे की तलाश में पुलिस और जांच एजेंसियां लगी थीं, उसका पता किसी अत्याधुनिक तकनीक से नहीं चला।

एक भूखी नौकरानी ने सेब काटा और हीरे का राज खुल गया।

चोरों ने जिस फल को अपने लिए सुरक्षित ठिकाना समझा था, वही उनकी योजना की सबसे कमजोर कड़ी साबित हुआ।

आज जब यह गुलाबी हीरा फिर से लोगों के सामने आने वाला है, तो उसके चमकते चेहरे के पीछे छिपी करीब 100 साल पुरानी कहानी भी उतनी ही आकर्षक है।

एक शाही हीरा, रात के अंधेरे में चोरी, सेब के अंदर छिपाया गया खजाना और एक अनजान नौकरानी के हाथों हुआ खुलासा—‘ग्रैंड कॉन्डे’ की कहानी सचमुच किसी फिल्म से कम नहीं है।

कोई टिप्पणी नहीं