लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर रातभर रौंदता रहा युवक का शव, सुबह जो दिखा उससे कांप उठे लोग! आखिर पूरी रात कहां थी पुलिस और पेट्रोलिंग टीम?
शाहजहांपुर। लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक युवक की मौत के बाद सामने आया घटनाक्रम न सिर्फ बेहद दर्दनाक है, बल्कि हाईवे पर सड़क सुरक्षा और इंसानी संवेदनशीलता को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े करता है। बताया जा रहा है कि रात के किसी समय एक युवक को किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी गंभीर थी कि युवक सड़क पर घायल होकर गिर पड़ा। आरोप है कि हादसे के बाद वाहन चालक ने रुककर उसकी मदद करने या उसे अस्पताल पहुंचाने की कोशिश नहीं की।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि घायल युवक काफी देर तक हाईवे पर पड़ा रहा। समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई। इसके बाद भी उसकी परेशानी खत्म नहीं हुई। रातभर हाईवे से गुजरते रहे वाहनों के पहिए शव को रौंदते रहे। सुबह जब ग्रामीणों की नजर शव पर पड़ी तो उसकी हालत देखकर लोगों के होश उड़ गए। शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो चुका था।
घटना ने हाईवे पर रात में होने वाली पुलिस गश्त और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की पेट्रोलिंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों व्यवस्थाओं का उद्देश्य ही यही है कि हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं या किसी आपात स्थिति की तत्काल जानकारी मिले और जरूरतमंद व्यक्ति को समय रहते मदद उपलब्ध कराई जा सके। लेकिन इस मामले में सुबह तक किसी को युवक के सड़क पर पड़े होने की जानकारी नहीं हुई।
सुबह टहलने निकले धर्मेंद्र ने देखा शव
घटना का पता सुबह करीब पांच बजे चला। कटरा से लगभग तीन किलोमीटर दूर खिरिया सकटू गांव निवासी धर्मेंद्र कुमार रोजाना की तरह सुबह टहलने निकले थे। इसी दौरान उनकी नजर हाईवे पर पड़े एक शव पर गई। पास जाकर देखने पर उन्होंने तुरंत ग्रामीणों और पुलिस को सूचना दी।
शव की हालत इतनी खराब थी कि मौके पर मौजूद लोगों के लिए उसे पहचानना भी मुश्किल था। बताया गया कि युवक का सिर और धड़ का निचला हिस्सा पूरी तरह कुचल चुका था। हाईवे पर काफी दूर तक खून के निशान दिखाई दे रहे थे। इससे अंदाजा लगाया जा रहा था कि युवक पहले किसी वाहन की चपेट में आया होगा और उसके बाद रातभर वहां से गुजरने वाले वाहनों ने उसे रौंद दिया।
सूचना मिलने के बाद आसपास के ग्रामीण भी घटनास्थल पर पहुंचने लगे। कुछ ही देर में मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर इतनी व्यस्त सड़क पर एक व्यक्ति घायल अवस्था में या बाद में मृत पड़ा रहा, लेकिन किसी की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी?
डेढ़ घंटे बाद पहुंची पुलिस
ग्रामीणों की सूचना के बाद पुलिस को मौके पर पहुंचने में करीब डेढ़ घंटे का समय लगा। पुलिस के पहुंचने तक घटनास्थल पर आसपास के काफी लोग एकत्र हो चुके थे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पहचान कराने का प्रयास शुरू किया, लेकिन तत्काल युवक की शिनाख्त नहीं हो सकी।
शव की स्थिति बेहद खराब होने के कारण पहचान करना और भी मुश्किल हो गया। पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में युवक के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश शुरू की। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि रात में किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना किसी थाने में दर्ज कराई गई है या नहीं।
प्रारंभिक तौर पर पुलिस को आशंका है कि युवक को रात के किसी समय किसी वाहन ने टक्कर मारी होगी। हादसे के बाद चालक वाहन लेकर मौके से चला गया। युवक सड़क पर घायल अवस्था में पड़ा रहा और समय पर इलाज नहीं मिल पाने के कारण उसकी मौत हो गई।
हालांकि, हादसा वास्तव में कैसे हुआ, युवक को किस वाहन ने टक्कर मारी और उसकी मृत्यु दुर्घटना के कितनी देर बाद हुई, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सबसे बड़ा सवाल- क्या समय पर मदद मिलती तो बच सकती थी जान?
इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि सड़क दुर्घटना के बाद घायल को तत्काल मदद मिली या नहीं। किसी भी गंभीर सड़क दुर्घटना में शुरुआती समय को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। चिकित्सकीय सहायता जितनी जल्दी मिलती है, गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के बचने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है।
इसी अवधि को आमतौर पर 'गोल्डन ऑवर' कहा जाता है। दुर्घटना के बाद अत्यधिक रक्तस्राव, सिर में गंभीर चोट, सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर चोटों की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता जीवन और मृत्यु के बीच अंतर पैदा कर सकती है।
ऐसे में यदि युवक को टक्कर लगने के बाद किसी राहगीर, वाहन चालक, पुलिसकर्मी या हाईवे पेट्रोलिंग टीम ने समय रहते देख लिया होता और उसे अस्पताल पहुंचाया जाता, तो क्या उसकी जान बच सकती थी? इसका निश्चित जवाब जांच और चिकित्सकीय तथ्यों के सामने आने के बाद ही मिलेगा। लेकिन यह सवाल जरूर उठ रहा है कि हादसे के बाद युवक को मदद क्यों नहीं मिली।
हाईवे कैमरों से वाहन की तलाश
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती हादसे को अंजाम देने वाले वाहन और चालक की पहचान करना है। पुलिस के अनुसार घटनास्थल या उसके आसपास ऐसा कोई सीसीटीवी कैमरा उपलब्ध नहीं है, जिससे सीधे यह पता चल सके कि रात में युवक को किस वाहन ने टक्कर मारी।
ऐसे में पुलिस अब कटरा और तिलहर की दिशा में लगे हाईवे के कैमरों की मदद लेने का प्रयास कर रही है। संभावना है कि जिस समय हादसा हुआ होगा, उसके आसपास हाईवे से गुजरने वाले वाहनों की गतिविधि कैमरों में रिकॉर्ड हुई हो।
पुलिस संबंधित कैमरों की फुटेज खंगालकर ऐसे वाहनों की पहचान करने का प्रयास कर सकती है, जो हादसे के संभावित समय पर उस मार्ग से गुजरे थे। इसके जरिए संदिग्ध वाहन तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, हाईवे पर बड़ी संख्या में वाहन लगातार चलते रहते हैं। ऐसे में किसी एक वाहन की पहचान करना आसान नहीं होगा। फिर भी कैमरों की फुटेज इस मामले में पुलिस के लिए अहम सुराग साबित हो सकती है।
रात की पुलिस गश्त और एनएचएआई की पेट्रोलिंग पर सवाल
इस घटना के बाद हाईवे की रात की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए हैं। हाईवे पर रात में पुलिस गश्त किए जाने की बात कही जाती है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की पेट्रोलिंग टीम के भी 24 घंटे सक्रिय रहने का दावा किया जाता है।
इसके बावजूद सुबह पांच बजे तक किसी टीम को सड़क पर पड़े युवक के बारे में जानकारी नहीं हुई। अगर युवक हादसे के बाद कुछ समय तक जीवित था, तो यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि आखिर वह कितनी देर तक मदद का इंतजार करता रहा।
यदि दुर्घटना के बाद युवक की मौके पर ही मृत्यु हो गई थी, तब भी शव के रातभर वाहनों से कुचले जाने की घटना हाईवे की निगरानी व्यवस्था की गंभीर कमी की ओर इशारा करती है।
हाईवे पर नियमित पेट्रोलिंग का उद्देश्य सिर्फ यातायात व्यवस्था देखना नहीं होता। दुर्घटनाग्रस्त वाहनों, सड़क पर पड़े अवरोधों, घायल व्यक्तियों और अन्य आपात स्थितियों पर नजर रखना भी इसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में इस घटना के बाद पेट्रोलिंग व्यवस्था की प्रभावशीलता पर चर्चा होना स्वाभाविक है।
राहगीर मदद करें तो मिलते हैं 25 हजार रुपये
सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए सरकार की ओर से राहवीर योजना भी चलाई जा रही है। इसका उद्देश्य आम नागरिकों को सड़क हादसों में घायल लोगों की मदद के लिए प्रोत्साहित करना है।
योजना के तहत दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले मददगार को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। इसका मकसद यह है कि लोग पुलिस या कानूनी प्रक्रिया के डर से पीछे न हटें और दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सके।
लेकिन इस घटना के संदर्भ में एक चिंताजनक तथ्य सामने आया है कि जिले में अब तक कोई राहवीर सामने नहीं आया है। यानी ऐसी व्यवस्था होने के बावजूद सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की मदद के लिए आम लोगों की सक्रिय भागीदारी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
इंसानियत और व्यवस्था दोनों की परीक्षा
लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर युवक की मौत का यह मामला केवल एक सड़क दुर्घटना भर नहीं है। यह सवाल भी खड़ा करता है कि दुर्घटना के बाद सड़क पर पड़े किसी घायल व्यक्ति की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
कानून और व्यवस्था की अपनी भूमिका है, हाईवे पेट्रोलिंग की अपनी जिम्मेदारी है और आम नागरिकों की भी मानवीय जिम्मेदारी बनती है कि वे किसी गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को देखकर मदद के लिए आगे आएं।
इस मामले में युवक की पहचान और दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद चलेगा। पुलिस अज्ञात वाहन की तलाश में जुटी है और हाईवे कैमरों की फुटेज से सुर

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