Breaking News

2030 तक खत्म होगा ये खतरनाक वायरस? भारत में करोड़ों लोगों की जांच, सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े



भारत में हेपेटाइटिस के खिलाफ अभियान को और तेज किया जा रहा है। सरकार ने 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में नियंत्रित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम (NVHCP) के तहत स्क्रीनिंग, जांच, इलाज, जागरूकता और संक्रमण की रोकथाम पर लगातार काम किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, कार्यक्रम के तहत अब तक 21 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और 6 लाख से अधिक मरीजों का इलाज किया गया है। इसके अलावा देश में 1,153 उपचार केंद्र स्थापित किए गए हैं।

हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें लिवर में सूजन हो जाती है। इसके कई प्रकार हैं, जिनमें हेपेटाइटिस A, B, C, D और E शामिल हैं। इनमें हेपेटाइटिस B और C विशेष चिंता का विषय हैं, क्योंकि ये लंबे समय तक शरीर में बने रह सकते हैं और गंभीर मामलों में लिवर सिरोसिस तथा लिवर कैंसर जैसी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2024 में दुनियाभर में हेपेटाइटिस B और C से करीब 1.3 करोड़ नहीं बल्कि 1.3 मिलियन यानी 13 लाख मौतें हुईं।

भारत ने 2030 के लिए तय किया बड़ा लक्ष्य

भारत ने वायरल हेपेटाइटिस से निपटने के लिए वर्ष 2018 में नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम शुरू किया था। इसका उद्देश्य हेपेटाइटिस C को 2030 तक देशभर में समाप्त करने की दिशा में काम करना और हेपेटाइटिस B तथा C से होने वाली बीमारी और मौतों को कम करना है। कार्यक्रम के तहत लोगों को मुफ्त जांच और आवश्यक उपचार सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

सरकार के मुताबिक कार्यक्रम को केवल एक बीमारी तक सीमित रखने के बजाय स्वास्थ्य व्यवस्था के दूसरे कार्यक्रमों से भी जोड़ा गया है। इससे गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग, संक्रमण की रोकथाम और जरूरतमंद मरीजों तक इलाज पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। जुलाई 2026 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि NVHCP के तहत 7.64 करोड़ गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।

हेपेटाइटिस B और C में क्या अंतर है?

हेपेटाइटिस B और C दोनों वायरल संक्रमण हैं, लेकिन इनके संक्रमण के तरीके और इलाज में अंतर होता है।

हेपेटाइटिस B संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के खून और शरीर के कुछ संक्रमित तरल पदार्थों के संपर्क से फैल सकता है। यह मां से बच्चे में भी संक्रमण का कारण बन सकता है। इसके खिलाफ प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध है, जिससे संक्रमण की रोकथाम में महत्वपूर्ण मदद मिलती है।

वहीं हेपेटाइटिस C मुख्य रूप से संक्रमित खून के संपर्क से फैलता है। इसके खिलाफ फिलहाल कोई सामान्य वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, लेकिन आधुनिक एंटीवायरल दवाओं की मदद से हेपेटाइटिस C का इलाज संभव है। WHO के अनुसार, उपलब्ध डायरेक्ट-एक्टिंग एंटीवायरल दवाएं कई मामलों में 8 से 12 सप्ताह के उपचार के बाद 95 प्रतिशत से अधिक संक्रमण को ठीक कर सकती हैं।

बीमारी का पता लगाना क्यों जरूरी?

हेपेटाइटिस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई संक्रमित लोगों में शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसी वजह से व्यक्ति को संक्रमण की जानकारी काफी देर से मिल सकती है।

WHO के अनुसार हेपेटाइटिस के संभावित लक्षणों में थकान, भूख कम लगना, मतली, उल्टी, पेट में असहजता, गहरे रंग का पेशाब और पीलिया जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं। हालांकि हर संक्रमित व्यक्ति में ये सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है।

इसी वजह से केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान करना पर्याप्त नहीं माना जाता। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से रक्त जांच और अन्य आवश्यक परीक्षण कराए जाते हैं।

गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग पर जोर

हेपेटाइटिस B को नियंत्रित करने में गर्भवती महिलाओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि गर्भवती महिला में संक्रमण मौजूद है तो बच्चे तक संक्रमण पहुंचने का जोखिम हो सकता है। ऐसे मामलों में समय पर पहचान और चिकित्सकीय प्रबंधन संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

भारत सरकार ने भी गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग को कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने जुलाई 2026 में राज्यों से गर्भवती महिलाओं की हेपेटाइटिस B स्क्रीनिंग को मजबूत करने और शत-प्रतिशत स्क्रीनिंग की दिशा में काम करने का आग्रह किया था। इसी दौरान सरकार ने बताया कि हेपेटाइटिस B की जन्म-खुराक कवरेज 92 प्रतिशत से अधिक पहुंच चुकी है।

मुफ्त जांच और इलाज की सुविधा

नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत सरकार का उद्देश्य मरीजों को आर्थिक कारणों से इलाज से दूर न रहने देना है। कार्यक्रम के अंतर्गत पात्र लोगों के लिए जांच और उपचार सेवाओं को मुफ्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

सरकार के अनुसार देश में वायरल हेपेटाइटिस की जांच और उपचार सेवाएं सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपलब्ध हैं। सितंबर 2024 तक कार्यक्रम से लगभग 12.79 करोड़ लोग लाभान्वित हुए थे और 4 लाख से अधिक मरीजों का उपचार किया गया था। इसके बाद जुलाई 2026 तक स्क्रीनिंग और उपचार का आंकड़ा और बढ़ा।

WHO ने भी 2030 लक्ष्य को लेकर चेताया

दुनियाभर में हेपेटाइटिस को खत्म करने के लिए 2030 का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन WHO की 2026 की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा रफ्तार से दुनिया सभी निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने की राह पर नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में दुनिया में करीब 24 करोड़ लोग क्रॉनिक हेपेटाइटिस B और लगभग 4.7 करोड़ लोग हेपेटाइटिस C के साथ रह रहे थे।

WHO ने बताया कि 2024 में हेपेटाइटिस B के करीब 90 लाख नए संक्रमण और हेपेटाइटिस C के करीब 90 लाख नए संक्रमण हुए। हेपेटाइटिस B से संबंधित मौतों में 2015 के मुकाबले वृद्धि भी दर्ज की गई, जिसका एक कारण बीमारी की देर से पहचान और उपचार तक सीमित पहुंच बताया गया है।

बचाव के लिए किन बातों का रखें ध्यान?

हेपेटाइटिस से बचाव में सावधानी बेहद महत्वपूर्ण है। संक्रमित खून के संपर्क से बचना, सुरक्षित इंजेक्शन और चिकित्सा उपकरणों का इस्तेमाल, रक्त की उचित जांच तथा जरूरत के अनुसार हेपेटाइटिस B का टीकाकरण संक्रमण रोकने में मदद कर सकता है।

किसी व्यक्ति को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से थकान, पीलिया, पेट से जुड़ी परेशानी या अन्य संदिग्ध लक्षण हैं, तो डॉक्टर से संपर्क कर आवश्यक जांच करानी चाहिए।

आगे की चुनौती क्या है?

भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल संक्रमित लोगों की पहचान करना नहीं, बल्कि उन्हें समय पर उपचार से जोड़ना भी है। कई लोग बीमारी के बारे में जानकारी न होने, सामाजिक झिझक या जांच की कमी के कारण स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं पहुंच पाते।

WHO की नई गाइडलाइन भी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में हेपेटाइटिस की जांच और उपचार को जोड़ने, आसान टेस्टिंग व्यवस्था विकसित करने और मरीजों को उपचार से जोड़ने पर जोर देती है।

भारत में 2030 का लक्ष्य हासिल करने के लिए आने वाले वर्षों में स्क्रीनिंग, टीकाकरण, सुरक्षित रक्त और इंजेक्शन व्यवस्था, गर्भवती महिलाओं की जांच, समय पर उपचार और जन-जागरूकता—इन सभी क्षेत्रों में लगातार काम करना जरूरी होगा।

हेपेटाइटिस ऐसी बीमारी है जिसे समय पर पहचान और उचित इलाज के जरिए काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। भारत का 2030 तक हेपेटाइटिस से निपटने का लक्ष्य इसी दिशा में एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयास है। सरकार के आंकड़े बताते हैं कि स्क्रीनिंग और उपचार का दायरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन WHO की वैश्विक रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि बीमारी की पहचान और उपचार को और तेजी से बढ़ाने की जरूरत है। ऐसे में जागरूकता, समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार आने वाले वर्षों में इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियां रहेंगी।

कोई टिप्पणी नहीं