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2030 तक क्या बिगड़ जाएगी स्वास्थ्य व्यवस्था? WHO के आंकड़ों ने सामने रखी चौंकाने वाली तस्वीर



दुनियाभर में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बड़ी चुनौती सामने आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में डॉक्टर, नर्स, मिडवाइफ, फार्मासिस्ट और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या पिछले वर्षों में बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद कई देशों में स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी बनी हुई है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में अनुभवी स्वास्थ्यकर्मी रिटायरमेंट की उम्र के करीब पहुंच जाएंगे।

WHO की National Health Workforce Accounts: Health Workforce Levels and Trends 2026 रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में स्वास्थ्य और देखभाल क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की संख्या अब 7 करोड़ से अधिक हो चुकी है। पिछले दो दशकों में स्वास्थ्यकर्मियों की आबादी के अनुपात में उपलब्धता भी बढ़ी है। इसके बावजूद देशों और क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्यकर्मियों का वितरण बेहद असमान है। WHO ने अनुमान लगाया है कि वर्ष 2030 तक वैश्विक स्तर पर करीब 1.11 करोड़ हेल्थ वर्कर्स की कमी हो सकती है।

हर चार में से एक डॉक्टर 55 साल से ज्यादा उम्र का

WHO की रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा स्वास्थ्यकर्मियों की बढ़ती उम्र से जुड़ा है। 122 देशों से मिले आंकड़ों के आधार पर WHO ने बताया कि औसतन लगभग हर चार में से एक डॉक्टर की उम्र 55 वर्ष से अधिक है और ऐसे डॉक्टरों के अगले दशक में रिटायर होने की संभावना है।

उच्च आय वाले देशों में यह अनुपात और अधिक है। वहां लगभग हर तीन में से एक डॉक्टर 55 वर्ष से अधिक उम्र का है। इसका मतलब यह है कि कई देशों को आने वाले वर्षों में एक साथ दो चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है—एक तरफ बुजुर्ग आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की मांग बढ़ेगी और दूसरी तरफ बड़ी संख्या में अनुभवी डॉक्टर तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मी रिटायरमेंट की ओर बढ़ेंगे।

2030 तक 67 देशों के सामने बड़ी चुनौती

WHO के अनुसार, दुनिया के 67 देशों में वर्ष 2030 तक आबादी की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मी नहीं हो सकते हैं। यह स्थिति केवल डॉक्टरों की संख्या से जुड़ी नहीं है। नर्स, मिडवाइफ, फार्मासिस्ट और दूसरे स्वास्थ्य एवं देखभाल कर्मचारियों की उपलब्धता भी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।

किसी देश में अस्पतालों की संख्या बढ़ जाने के बावजूद यदि पर्याप्त डॉक्टर, नर्स और दूसरे स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध नहीं हैं, तो स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए WHO की रिपोर्ट स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उनकी सही जगह पर उपलब्धता और प्रशिक्षण पर भी जोर देती है।

दुनिया में हेल्थ वर्कर्स की संख्या बढ़ी, लेकिन असमानता कायम

WHO के अनुसार, पिछले दो दशकों में वैश्विक स्वास्थ्यकर्मी घनत्व में करीब 52 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2006 में डॉक्टर, नर्सिंग एवं मिडवाइफरी कर्मी, डेंटिस्ट और फार्मासिस्ट को मिलाकर स्वास्थ्यकर्मियों का घनत्व प्रति 10,000 आबादी पर 44.8 था, जो 2025 में बढ़कर 67.9 हो गया।

लेकिन यह सुधार हर देश में समान रूप से नहीं हुआ है। WHO ने बताया कि यूरोपीय क्षेत्र में डॉक्टरों का घनत्व अफ्रीकी क्षेत्र की तुलना में करीब 13 गुना अधिक है। इसी तरह नर्सिंग और मिडवाइफरी कर्मचारियों का घनत्व भी यूरोपीय क्षेत्र में अफ्रीकी क्षेत्र से करीब छह गुना अधिक है।

इसका सीधा मतलब यह है कि वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्यकर्मियों की कुल संख्या बढ़ने के बावजूद कई कम और मध्यम आय वाले देशों में पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता अभी भी बड़ी समस्या है।

आबादी भी हो रही है बुजुर्ग

WHO की रिपोर्ट में सिर्फ स्वास्थ्यकर्मियों की उम्र बढ़ने की बात नहीं है। दुनिया की आबादी भी तेजी से उम्रदराज हो रही है। अधिक उम्र के लोगों को अक्सर लंबे समय तक स्वास्थ्य देखभाल, दवाओं, नियमित जांच और कई तरह की चिकित्सा सेवाओं की जरूरत पड़ सकती है।

इसलिए स्वास्थ्य व्यवस्था पर दोहरा दबाव बन सकता है। एक तरफ मरीजों की संख्या और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत बढ़ सकती है, जबकि दूसरी तरफ स्वास्थ्य क्षेत्र के अनुभवी कर्मचारी रिटायर हो सकते हैं।

WHO ने इसी वजह से स्वास्थ्यकर्मियों की उम्र बढ़ने को भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में रेखांकित किया है।

सिर्फ नए डॉक्टर बनाना ही काफी नहीं

स्वास्थ्यकर्मियों की कमी को दूर करने के लिए केवल मेडिकल कॉलेजों और प्रशिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। नए डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी तैयार करने के साथ यह भी जरूरी है कि उन्हें स्वास्थ्य व्यवस्था में रोजगार मिले और वे लंबे समय तक इस क्षेत्र में बने रहें।

WHO के अनुसार, देशों को स्वास्थ्यकर्मियों की शिक्षा, रोजगार, नियुक्ति, वितरण और रिटेंशन यानी कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखने की रणनीति पर काम करना होगा। खासतौर पर ग्रामीण, दूरदराज और कम सेवा वाले इलाकों में स्वास्थ्यकर्मियों को उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

डॉक्टरों और नर्सों का विदेश जाना भी चुनौती

कई कम आय वाले देशों में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों का दूसरे देशों में जाना भी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। जब कोई प्रशिक्षित डॉक्टर या नर्स बेहतर अवसरों के लिए दूसरे देश में काम करने चला जाता है, तो उसके मूल देश में उपलब्ध स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या प्रभावित हो सकती है।

WHO ने स्वास्थ्यकर्मियों के अंतरराष्ट्रीय माइग्रेशन को भी वैश्विक स्वास्थ्यकर्मी संकट से जोड़ते हुए बेहतर और नैतिक प्रबंधन की जरूरत पर जोर दिया है। इसका उद्देश्य यह है कि स्वास्थ्यकर्मियों की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही से किसी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर असंतुलित दबाव न पड़े।

महिलाओं की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण

वैश्विक स्वास्थ्य और देखभाल क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका बहुत बड़ी है। WHO के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के स्वास्थ्यकर्मियों में करीब 67 प्रतिशत महिलाएं हैं।

इसलिए स्वास्थ्यकर्मियों की योजना बनाते समय महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल, उचित रोजगार, नेतृत्व के अवसर और काम तथा परिवार के बीच संतुलन जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देना जरूरी है। स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती केवल कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने से नहीं होगी, बल्कि बेहतर कामकाजी परिस्थितियां उपलब्ध कराने से भी जुड़ी है।

भारत जैसे देशों के लिए इसका क्या मतलब?

WHO की रिपोर्ट वैश्विक तस्वीर पेश करती है और इसमें भारत के लिए अलग से हर निष्कर्ष लागू मानना उचित नहीं होगा। फिर भी भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश के लिए डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की पर्याप्त उपलब्धता महत्वपूर्ण है।

भारत में ग्रामीण और दूरदराज इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना लगातार एक महत्वपूर्ण लक्ष्य रहा है। ऐसे में मेडिकल शिक्षा, नर्सिंग शिक्षा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की उपलब्धता और स्वास्थ्यकर्मियों को ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए रखने की नीतियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

इसके अलावा बढ़ती उम्र की आबादी के साथ बुजुर्गों की स्वास्थ्य जरूरतों के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की आवश्यकता भी बढ़ सकती है।

WHO ने डेटा और प्लानिंग पर दिया जोर

WHO की नई रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि दुनिया के 90 प्रतिशत से अधिक WHO सदस्य देशों ने वर्ष 2025 में स्वास्थ्यकर्मियों से जुड़े आंकड़े उपलब्ध कराए। WHO के अनुसार, 2017 में National Health Workforce Accounts शुरू होने के बाद स्वास्थ्यकर्मी संबंधी डेटा की उपलब्धता में लगभग 20 गुना वृद्धि हुई है।

बेहतर आंकड़ों से सरकारों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी देश या क्षेत्र में कितने डॉक्टर, नर्स या अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की जरूरत है, कितने लोग रिटायर होने वाले हैं और भविष्य में कितने नए कर्मचारियों की आवश्यकता होगी।

आने वाले वर्षों में क्या करना होगा?

2030 की संभावित कमी को देखते हुए देशों के सामने कई स्तरों पर काम करने की जरूरत होगी। मेडिकल और नर्सिंग शिक्षा की क्षमता बढ़ाना, स्वास्थ्यकर्मियों को बेहतर रोजगार देना, ग्रामीण क्षेत्रों में नियुक्ति और रिटेंशन को मजबूत करना, अनुभवी कर्मचारियों से नई पीढ़ी के कर्मचारियों तक ज्ञान का हस्तांतरण करना और डिजिटल तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण हो सकता है।

इसके साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों के काम का बोझ कम करने और प्रशासनिक कार्यों को डिजिटल बनाने से भी उनकी उपलब्ध सेवाओं का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। WHO की रिपोर्ट में भी स्वास्थ्यकर्मियों की योजना और निवेश को भविष्य की स्वास्थ्य जरूरतों के अनुरूप बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

WHO की 2026 की रिपोर्ट ने वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने आने वाली एक महत्वपूर्ण चुनौती को सामने रखा है। दुनिया में स्वास्थ्यकर्मियों की कुल संख्या 7 करोड़ से अधिक हो चुकी है और पिछले दो दशकों में स्वास्थ्यकर्मी घनत्व में वृद्धि भी हुई है। इसके बावजूद कई देशों में डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की कमी बनी हुई है।

सबसे बड़ी चिंता आने वाले दशक की है, जब बड़ी संख्या में अनुभवी डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी रिटायरमेंट की उम्र में पहुंचेंगे। WHO के अनुमान के अनुसार 2030 तक वैश्विक स्तर पर करीब 1.11 करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों की कमी हो सकती है। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों की शिक्षा, प्रशिक्षण, रोजगार, सही वितरण और रिटेंशन पर अभी से योजना बनाना आने वाले वर्षों की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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