सोने-चांदी में फिर आएगी जबरदस्त तेजी? अगले कुछ महीनों को लेकर एक्सपर्ट ने किया चौंकाने वाला खुलासा
सोने और चांदी की कीमतों में इन दिनों जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े फैसले, डॉलर की चाल, बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमत और दुनिया भर में जारी आर्थिक एवं भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का असर कीमती धातुओं के बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि, ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बावजूद शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी ने मजबूती दिखाई। रॉयटर्स के मुताबिक 18 सितंबर को स्पॉट गोल्ड करीब 1.2 फीसदी बढ़कर 4,390 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया, जबकि चांदी भी करीब 2.3 फीसदी मजबूत हुई।
भारत में भी सोने और चांदी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक 18 सितंबर 2026 को 999 शुद्धता वाले सोने का PM रेट 1,53,727 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का रेट 2,36,908 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। ये दरें GST और मेकिंग चार्ज के बिना हैं।
इसी बीच बाजार में आगे सोने की कीमत को लेकर बड़े अनुमान सामने आ रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो आने वाले महीनों में गोल्ड और सिल्वर में एक और बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि, इन अनुमानों को निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता, क्योंकि कमोडिटी बाजार में कीमतें बेहद तेजी से बदल सकती हैं।
जेफरीज के क्रिस वुड ने दिया 10,000 डॉलर का अनुमान
सोने को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इस समय जेफरीज के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रेटेजी क्रिस्टोफर वुड के बयान की हो रही है। उन्होंने हालिया बातचीत में कहा कि लंबे समय में सोने का भाव 10,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचना संभव है। वुड का तर्क है कि अगर अमेरिका लंबे समय तक ऊंची बॉन्ड यील्ड को संभाल नहीं पाता और यील्ड को नियंत्रित करने की जरूरत पड़ती है, तो डॉलर पर दबाव आ सकता है और इससे सोने को फायदा मिल सकता है।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। 10,000 डॉलर प्रति औंस का आंकड़ा कोई निश्चित 2026 लक्ष्य नहीं है। वुड ने इसे एक संभावित दीर्घकालिक परिदृश्य के तौर पर रखा है, खासकर ऐसी स्थिति में जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को दबाने की जरूरत पड़े और डॉलर कमजोर हो। इसलिए इसे अगले कुछ महीनों में सोने के निश्चित भाव के रूप में देखना सही नहीं होगा।
भारतीय रुपये में इस स्तर का वास्तविक मूल्य डॉलर-रुपया विनिमय दर पर निर्भर करेगा। मौजूदा विनिमय दरों और घरेलू प्रीमियम के आधार पर अलग-अलग अनुमान निकल सकते हैं। इसलिए 10,000 डॉलर प्रति औंस को सीधे किसी एक निश्चित भारतीय रुपये के भाव से जोड़ना सावधानी के साथ किया जाना चाहिए।
शुक्रवार को कहां पहुंचा सोना और चांदी?
18 सितंबर को घरेलू बाजार में सोना और चांदी दोनों मजबूत रहे। IBJA के अनुसार 999 शुद्धता वाले सोने का PM भाव 1,53,727 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। 916 यानी 22 कैरेट के आसपास की शुद्धता वाले सोने का रेट 1,40,814 रुपये प्रति 10 ग्राम और 750 यानी 18 कैरेट का रेट 1,15,295 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। चांदी का PM रेट 2,36,908 रुपये प्रति किलोग्राम रहा।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी शुक्रवार को तेजी देखने को मिली। रॉयटर्स के अनुसार स्पॉट गोल्ड 4,390 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंचा और अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 4,424.90 डॉलर पर बंद हुए। चांदी करीब 66.70 डॉलर प्रति औंस तक पहुंची।
इस तेजी की एक वजह कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी रही। तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई, जिससे बाजार में सोने पर पहले से बने कुछ शॉर्ट पोजीशन को हटाने की गतिविधि भी देखने को मिली।
फेड के फैसले के बाद भी सोना क्यों संभला?
आमतौर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी को सोने के लिए दबाव वाला कारक माना जाता है। इसकी वजह यह है कि ब्याज दरें बढ़ने पर बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाली परिसंपत्तियां निवेशकों को अधिक आकर्षक लग सकती हैं। इसके अलावा डॉलर मजबूत होने पर डॉलर में कीमत वाला सोना दूसरे देशों के खरीदारों के लिए महंगा हो सकता है।
लेकिन इस बार बाजार की प्रतिक्रिया कुछ अलग रही। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की, जिसके बाद शुरुआत में सोने पर दबाव आया। इसके बावजूद शुक्रवार को सोने में रिकवरी देखने को मिली। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक बाजार में निवेशकों ने पहले से ब्याज दर बढ़ने की संभावना को काफी हद तक कीमतों में शामिल कर लिया था।
यानी बाजार केवल यह नहीं देखता कि फेड ने क्या फैसला किया, बल्कि यह भी देखता है कि फैसला पहले से कितना अपेक्षित था और आगे की मौद्रिक नीति कैसी रह सकती है।
क्या दिवाली तक ₹1.80 लाख पहुंच सकता है सोना?
बाजार में कुछ विशेषज्ञों की ओर से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर मौजूदा तेजी बनी रहती है और वैश्विक स्तर पर सोने को समर्थन देने वाले कारक मजबूत रहते हैं, तो साल के अंत तक घरेलू बाजार में सोना 1.75 लाख से 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच सकता है।
लेकिन यह अनुमान है, गारंटी नहीं। सोने की कीमतों पर डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरें, बॉन्ड यील्ड, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, ETF निवेश, भू-राजनीतिक तनाव और भारत में मांग जैसे कई कारकों का प्रभाव पड़ता है।
इसी वजह से दिवाली तक 1.80 लाख रुपये का स्तर हासिल होगा या नहीं, इसे निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है।
चांदी में भी बड़ी तेजी की उम्मीद
सोने के साथ-साथ चांदी पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। चांदी को अक्सर सोने की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली धातु माना जाता है। हालिया अंतरराष्ट्रीय कारोबार में भी चांदी ने सोने की तुलना में मजबूत दैनिक बढ़त दिखाई।
कुछ बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अगर औद्योगिक मांग, निवेश मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां चांदी के पक्ष में रहती हैं तो घरेलू बाजार में चांदी 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम या उससे ऊपर के स्तर की ओर बढ़ सकती है। हालांकि, इसमें भी जोखिम काफी ज्यादा है और तेजी के साथ तेज गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या अभी सोना-चांदी खरीद लेना चाहिए?
तेजी के बाजार में सबसे बड़ा सवाल आम निवेशक के सामने यही होता है कि अभी खरीदारी की जाए या कीमतों में गिरावट का इंतजार किया जाए। कमोडिटी बाजार के जानकारों के मुताबिक किसी भी परिसंपत्ति में केवल तेजी देखकर एकमुश्त पैसा लगाना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
खासकर जब सोना और चांदी पहले ही काफी ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहे हों, तो निवेशक को अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और जरूरत को ध्यान में रखना चाहिए। फिजिकल गोल्ड खरीदने वालों को मेकिंग चार्ज, GST, खरीद-बिक्री के अंतर और शुद्धता जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
वहीं डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF, गोल्ड फंड या अन्य निवेश माध्यमों की अपनी अलग लागत, जोखिम और नियामकीय विशेषताएं हो सकती हैं। इसलिए केवल सोशल मीडिया पर चल रहे किसी लक्ष्य भाव के आधार पर निवेश का फैसला करना उचित नहीं माना जाता।
10,000 डॉलर वाला अनुमान क्यों महत्वपूर्ण है?
क्रिस्टोफर वुड का 10,000 डॉलर का अनुमान इसलिए चर्चा में है क्योंकि यह मौजूदा स्तर से काफी ऊपर का संभावित भाव है। वुड ने लंबे समय में सोने को लेकर सकारात्मक रुख जताया है और अमेरिकी वित्तीय स्थिति तथा बॉन्ड यील्ड को इसके प्रमुख कारकों में गिना है। उन्होंने यह भी कहा है कि सोना फिलहाल कंसोलिडेशन के दौर में हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि का नजरिया सकारात्मक बना हुआ है।
वुड के अनुसार, यदि सोने की कीमत में बड़ी गिरावट आती है तो 3,800-4,000 डॉलर प्रति औंस के क्षेत्र को वह महत्वपूर्ण स्तर मानते हैं। यह उनका बाजार दृष्टिकोण है, न कि निवेशकों के लिए निश्चित खरीद निर्देश।
आगे क्या देखना होगा?
आने वाले दिनों में सोने और चांदी के लिए अमेरिकी फेड की आगे की नीति, डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमत, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे।
घरेलू बाजार में रुपये की चाल और त्योहारी मांग भी कीमतों को प्रभावित कर सकती है। भारत में दिवाली और शादी के सीजन से पहले सोने की मांग बढ़ने की संभावना बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक हो सकती है, लेकिन मांग और कीमत दोनों कई अन्य आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे।
इसलिए फिलहाल तस्वीर यह है कि सोना और चांदी दोनों ऊंचे स्तर पर हैं और इनमें तेजी की संभावनाओं को लेकर विशेषज्ञों के अनुमान सामने आ रहे हैं, लेकिन साथ ही उतार-चढ़ाव का जोखिम भी बना हुआ है। जेफरीज के क्रिस्टोफर वुड का 10,000 डॉलर प्रति औंस वाला अनुमान लंबी अवधि के एक खास आर्थिक परिदृश्य पर आधारित है, इसे तत्काल कीमत का निश्चित लक्ष्य नहीं समझना चाहिए। निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी फैसले से पहले अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखें तथा जरूरत पड़ने पर SEBI-रजिस्टर्ड वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।

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