200 से 300 शुगर पहुंचते ही क्या करें? घर पर की गई ये गलती पड़ सकती है भारी
हेल्थ डेस्क। डायबिटीज के मरीजों के लिए ब्लड शुगर का अचानक बढ़कर 200 या 300 mg/dL तक पहुंच जाना चिंता का कारण बन सकता है। खासकर जब शुगर की रीडिंग बार-बार इतनी ज्यादा आ रही हो, तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। हालांकि सिर्फ एक बार 200 या 300 की रीडिंग आने का मतलब यह नहीं है कि हर स्थिति में इमरजेंसी है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि शुगर कब मापी गई, मरीज को डायबिटीज है या नहीं, कोई बीमारी या संक्रमण तो नहीं है और शरीर में कीटोन तो नहीं बन रहे।
अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार, ब्लड ग्लूकोज 240 mg/dL से ऊपर होने पर, खासकर बीमारी या तबीयत खराब होने की स्थिति में, कीटोन की जांच करना महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर कीटोन मौजूद हैं तो व्यायाम करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है—अगर शुगर अचानक 200, 250 या 300 तक पहुंच जाए तो तुरंत क्या करें?
सबसे पहले घबराएं नहीं, दोबारा शुगर चेक करें
अगर ग्लूकोमीटर में अचानक 200-300 mg/dL की रीडिंग आती है, तो सबसे पहले घबराने के बजाय स्थिति को समझना जरूरी है। हाथ साफ करके और सही तरीके से दोबारा ब्लड शुगर जांची जा सकती है। कभी-कभी गलत तरीके से जांच करने या उंगली पर किसी मीठी चीज का अवशेष होने से भी रीडिंग प्रभावित हो सकती है।
इसके बाद यह देखें कि शुगर खाली पेट, खाना खाने के बाद या दिन के किसी दूसरे समय मापी गई है। एक अकेली रीडिंग की तुलना में बार-बार आने वाली ऊंची रीडिंग ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।
अगर किसी व्यक्ति को पहले से डायबिटीज है, तो उसे अपने डॉक्टर द्वारा बताए गए टारगेट और उपचार योजना के अनुसार आगे कदम उठाना चाहिए।
पानी पीते रहें, लेकिन इसे इलाज न समझें
ब्लड शुगर ज्यादा होने पर शरीर अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करता है। इससे बार-बार पेशाब आ सकता है और शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन हो सकता है।
इसलिए यदि डॉक्टर ने तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह नहीं दी है, तो पर्याप्त मात्रा में पानी पीना मददगार हो सकता है। CDC भी बीमारी के दौरान डायबिटीज मरीजों को पर्याप्त पानी पीने और ब्लड शुगर की नियमित निगरानी की सलाह देता है।
लेकिन यह समझना जरूरी है कि सिर्फ पानी पीने से 300 की शुगर तुरंत सामान्य नहीं हो जाती। अगर इंसुलिन की कमी या कोई गंभीर समस्या है, तो मेडिकल उपचार की जरूरत पड़ सकती है।
अपनी मर्जी से इंसुलिन या दवा की अतिरिक्त खुराक न लें
यह सबसे महत्वपूर्ण सावधानियों में से एक है। शुगर 250 या 300 देखकर कई लोग खुद से अतिरिक्त इंसुलिन या डायबिटीज की दवा लेने लगते हैं। ऐसा करना खतरनाक हो सकता है।
दवा या इंसुलिन की मात्रा मरीज की बीमारी, पहले से चल रहे उपचार, भोजन, किडनी की स्थिति और कई दूसरे कारकों पर निर्भर करती है। इसलिए डॉक्टर ने पहले से कोई correction dose बताई है तो उसी योजना का पालन करें। अपनी तरफ से नई खुराक तय न करें।
NHS भी सलाह देता है कि डायबिटीज की दवा की मात्रा को डॉक्टर या डायबिटीज टीम की सलाह के बिना बदलना या बंद करना नहीं चाहिए।
240-250 से ऊपर पहुंचने पर कीटोन क्यों महत्वपूर्ण हैं?
ब्लड शुगर ज्यादा होने के साथ शरीर में इंसुलिन की कमी होने पर शरीर ऊर्जा के लिए फैट तोड़ना शुरू कर सकता है। इससे कीटोन बनते हैं। बहुत अधिक कीटोन जमा होने पर डायबिटिक कीटोएसिडोसिस यानी DKA हो सकता है।
DKA एक गंभीर और जानलेवा स्थिति हो सकती है। CDC के अनुसार, अगर किसी डायबिटीज मरीज की शुगर 250 mg/dL या उससे ज्यादा है और वह बीमार है, तो कीटोन की जांच करना जरूरी हो सकता है।
कीटोन की जांच ब्लड कीटोन मीटर या यूरिन कीटोन स्ट्रिप से की जा सकती है। जिन मरीजों को DKA का खतरा है, उन्हें अपने डॉक्टर से पहले ही पूछ लेना चाहिए कि किस स्तर पर कीटोन की जांच करनी है और परिणाम आने पर क्या करना है।
शुगर 300 है तो एक्सरसाइज कर लें? हर बार नहीं
कई लोग सोचते हैं कि ज्यादा शुगर को कम करने के लिए तेज चलना या एक्सरसाइज करना चाहिए। लेकिन यह हर स्थिति में सही नहीं है।
अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के मुताबिक, अगर ब्लड ग्लूकोज 240 mg/dL से ऊपर है तो कीटोन की जांच करनी चाहिए। अगर कीटोन मौजूद हैं तो एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे ब्लड शुगर और बढ़ सकती है।
इसलिए 250-300 की रीडिंग आने पर बिना स्थिति समझे जोरदार एक्सरसाइज करना सही कदम नहीं है।
कब समझें कि मामला गंभीर हो रहा है?
सिर्फ शुगर की संख्या नहीं, बल्कि मरीज के लक्षण भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। अगर हाई शुगर के साथ इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे तो तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत हो सकती है—
लगातार उल्टी या मतली
पेट में तेज दर्द
बहुत ज्यादा प्यास और मुंह का सूखना
बार-बार पेशाब आना
सांस लेने में परेशानी या बहुत तेज सांस चलना
सांस से फल जैसी गंध आना
अत्यधिक कमजोरी या नींद आना
भ्रम या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
कीटोन का स्तर ज्यादा आना
ये लक्षण DKA जैसी गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं।
शुगर 300 लगातार बनी रहे तो क्या करें?
अगर ब्लड शुगर 300 mg/dL या उससे ऊपर बनी रहती है, खासकर दोबारा जांच में भी इतनी ही आती है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। CDC के अनुसार, शुगर 300 mg/dL या उससे ऊपर बनी रहने, फल जैसी गंध वाली सांस, उल्टी, तरल पदार्थ न पी पाने या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों में तुरंत इमरजेंसी चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
ऐसी स्थिति में घर पर प्रयोग करना, कोई घरेलू नुस्खा आजमाना या घंटों इंतजार करना सही नहीं है।
बीमारी या संक्रमण में क्यों बढ़ जाती है शुगर?
कई बार मरीज नियमित दवा लेने के बावजूद अचानक हाई शुगर की शिकायत करता है। इसके पीछे सिर्फ खान-पान ही जिम्मेदार नहीं होता।
सर्दी-जुकाम, बुखार, संक्रमण, मानसिक तनाव, कम शारीरिक गतिविधि, दवा या इंसुलिन की खुराक छूट जाना और सामान्य से ज्यादा खाना ब्लड शुगर बढ़ा सकते हैं। CDC के मुताबिक बीमारी और तनाव के दौरान शरीर में ऐसे हार्मोन निकल सकते हैं जो ब्लड शुगर को बढ़ाते हैं।
इसलिए अगर अचानक शुगर बढ़ी है तो हाल की तबीयत, दवा की खुराक और खान-पान पर भी ध्यान देना चाहिए।
अगर बार-बार 200 से ऊपर आ रही है तो क्या करें?
एक-दो बार हाई रीडिंग आने के बजाय अगर कई दिनों तक शुगर 200 के आसपास या उससे ऊपर बनी रहती है, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर भोजन, दवाओं, इंसुलिन, शारीरिक गतिविधि और जरूरत के अनुसार HbA1c जैसे परीक्षणों की समीक्षा कर सकते हैं।
लगातार हाई ब्लड शुगर लंबे समय में आंखों, नसों, किडनी, हृदय और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने का जोखिम बढ़ा सकती है।
एक बात हमेशा याद रखें
200 या 300 की शुगर देखकर सिर्फ नंबर से फैसला न लें। पहले दोबारा सही तरीके से जांच करें, पर्याप्त पानी लें यदि आपके लिए तरल पदार्थ सीमित नहीं हैं, अपनी निर्धारित दवा/इंसुलिन योजना का पालन करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
अगर शुगर बहुत ज्यादा है और साथ में उल्टी, पेट दर्द, तेज या मुश्किल सांस, भ्रम, अत्यधिक नींद या फल जैसी सांस की गंध है, तो यह सामान्य हाई शुगर से आगे की समस्या हो सकती है और तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी है।
निष्कर्ष यही है कि 200-300 mg/dL की ब्लड शुगर को न तो हर बार इमरजेंसी समझकर घबराने की जरूरत है और न ही इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करना चाहिए। सही कदम है—रीडिंग की पुष्टि करना, लक्षणों पर नजर रखना, कीटोन की जरूरत होने पर जांच करना और डॉक्टर की तय उपचार योजना के अनुसार कार्रवाई करना।

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