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₹7,000 बोनस की सीलिंग पर मचा बवाल! 8वें वेतन आयोग से पहले कर्मचारियों के हाथ लगेगा ₹27,694 का बड़ा फायदा?



नई दिल्ली। आठवें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। इसी बीच अब बोनस की पुरानी सीमा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले बोनस की गणना के लिए ₹7,000 की पुरानी सीलिंग बरकरार रहने की खबर ने कर्मचारी संगठनों को नाराज कर दिया है।

मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि सरकार की ओर से जारी एक नए गजट नोटिफिकेशन में बोनस की गणना से जुड़े प्रावधानों को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है। इसके बाद कर्मचारी संगठन सरकार से सवाल कर रहे हैं कि जब न्यूनतम वेतन और कर्मचारियों का बेसिक वेतन पहले की तुलना में काफी बढ़ चुका है, तो बोनस की गणना के लिए दशकों पुरानी सीमा क्यों लागू रखी जा रही है?

कर्मचारी संगठनों ने अब बोनस की सीमा बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। कुछ संगठनों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में बोनस की गणना ₹7,000 की सीमा के बजाय वास्तविक न्यूनतम वेतन या बेसिक वेतन के आधार पर होनी चाहिए।

सरकारी गजट में क्या है प्रावधान?

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन में कोड ऑन वेजेज, 2019 की धारा 26 के तहत बोनस की गणना से संबंधित प्रावधान का उल्लेख किया गया है।

इसके मुताबिक, यदि किसी कर्मचारी का वेतन ₹7,000 प्रतिमाह से अधिक है, तो बोनस की गणना के लिए ₹7,000 या सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम मजदूरी में से जो भी अधिक हो, उसे आधार बनाया जाएगा।

यही प्रावधान अब कर्मचारी संगठनों की बहस का केंद्र बन गया है। संगठनों का तर्क है कि जब न्यूनतम मजदूरी का स्तर ₹7,000 से काफी अधिक है, तो बोनस की गणना में केवल ₹7,000 की सीमा को आधार बनाना कर्मचारियों के हित में नहीं है।

यानी सवाल सीधा है—जब वेतन बढ़ गया तो बोनस की सीमा वहीं क्यों अटकी हुई है?

NC-JCM ने सरकार के सामने रखी बड़ी मांग

गजट नोटिफिकेशन के बाद नेशनल काउंसिल-स्टाफ साइड (NC-JCM) भी सक्रिय हो गई है। संगठन के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने कैबिनेट सेक्रेटरी को पत्र लिखकर बोनस सीलिंग बढ़ाने की मांग रखी है।

पत्र में तर्क दिया गया है कि जब केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम मजदूरी का स्तर ₹21,000 बताया जा रहा है, तो बोनस की गणना के लिए ₹7,000 की सीमा बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है।

कर्मचारी संगठन की मांग है कि बोनस की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाली सीमा को बढ़ाकर ₹21,000 किया जाना चाहिए।

इस मांग के पीछे तर्क यह है कि बोनस की गणना का आधार कर्मचारी की वास्तविक न्यूनतम आय के अनुरूप होना चाहिए। यदि वेतन और महंगाई लगातार बढ़ रही है तो बोनस की सीमा को भी उसी अनुपात में संशोधित किया जाना चाहिए।

₹18,000 बेसिक वेतन पर कितना बनता है बोनस?

बोनस की मौजूदा व्यवस्था को लेकर कर्मचारी संगठनों ने एक और गणित सामने रखा है।

ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉईज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने दावा किया है कि अगर केंद्रीय कर्मचारियों के वर्तमान न्यूनतम बेसिक वेतन ₹18,000 को बोनस की गणना का आधार बनाया जाए, तो निर्धारित फॉर्मूले के अनुसार बोनस की रकम करीब ₹17,763 हो सकती है।

गणना के लिए उन्होंने यह फॉर्मूला बताया है:

₹18,000 × 30 ÷ 30.4 = लगभग ₹17,763

यही गणित कर्मचारी संगठनों के तर्क का आधार बन रहा है। उनका कहना है कि जब केंद्रीय कर्मचारियों के न्यूनतम बेसिक वेतन को ₹18,000 माना जाता है, तो बोनस की गणना के लिए ₹7,000 की सीमा लागू करना कर्मचारियों की वास्तविक आय से मेल नहीं खाता।

कर्मचारी संगठनों का सवाल—आखिर ₹7,000 ही क्यों?

कर्मचारी संगठनों की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण यही है कि बोनस सीलिंग लंबे समय से चर्चा का विषय रही है।

महंगाई, जीवन-यापन की लागत और कर्मचारियों के वेतन ढांचे में समय के साथ बड़ा बदलाव आया है। ऐसे में संगठनों का कहना है कि बोनस की गणना के लिए पुरानी सीमा को लगातार इस्तेमाल करना व्यावहारिक नहीं है।

उनका तर्क है कि अगर कर्मचारी की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 है, तो बोनस की गणना ₹7,000 पर सीमित करने से कर्मचारी को मिलने वाली वास्तविक राहत काफी कम हो जाती है।

यही वजह है कि अब कर्मचारी संगठन सरकार से बोनस सीलिंग को नए सिरे से तय करने की मांग कर रहे हैं।

8वें वेतन आयोग से भी बड़ी उम्मीद

आठवें वेतन आयोग की चर्चाओं के बीच बोनस का मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो गया है। कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि नए वेतन ढांचे के साथ बोनस की गणना का आधार भी बदला जा सकता है।

ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉईज फेडरेशन ने आगामी आठवें वेतन आयोग में बोनस की सीमा को बढ़ाकर ₹27,694 किए जाने की मांग रखी है।

संगठन का तर्क है कि अगर नए वेतन आयोग में कर्मचारियों के वेतन ढांचे को संशोधित किया जाता है तो बोनस की गणना भी उसी के अनुरूप होनी चाहिए।

इस मांग के पीछे यह सोच है कि बोनस को केवल एक पुरानी निर्धारित सीमा से जोड़ने के बजाय कर्मचारी के न्यूनतम बेसिक वेतन और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर तय किया जाए।

10 साल के इंतजार के बाद क्या मिलेगा बड़ा फायदा?

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बोनस सीलिंग में बदलाव की मांग कोई नई नहीं है। लंबे समय से कर्मचारी संगठन इसे बढ़ाने की मांग करते रहे हैं।

अब आठवें वेतन आयोग की संभावनाओं के बीच यह मुद्दा फिर से जोर पकड़ रहा है। यदि सरकार बोनस की गणना के आधार को बदलने का फैसला करती है तो लाखों केंद्रीय कर्मचारियों को इसका फायदा मिल सकता है।

हालांकि, फिलहाल सरकार की ओर से बोनस सीलिंग को ₹27,694 करने या ₹21,000 के आधार पर गणना करने का कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। कर्मचारी संगठनों की ओर से मांग और तर्क जरूर रखे गए हैं।

असली लड़ाई अब बोनस की गणना के फॉर्मूले पर

पूरे विवाद को अगर सरल भाषा में समझें तो कर्मचारियों की मांग यह है कि बोनस की गणना के लिए ₹7,000 की पुरानी सीमा को हटाकर वर्तमान न्यूनतम वेतन या बेसिक वेतन को आधार बनाया जाए।

एक तरफ कर्मचारी संगठन ₹21,000 तक की सीलिंग की मांग कर रहे हैं, वहीं आठवें वेतन आयोग के संदर्भ में ₹27,694 बोनस की मांग भी सामने आ चुकी है।

अब देखना यह होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है। यदि बोनस की सीमा में बदलाव किया जाता है तो कर्मचारियों को मिलने वाली बोनस राशि में बड़ा अंतर आ सकता है।

फिलहाल ₹7,000 की पुरानी बोनस सीलिंग बनाम बढ़ी हुई न्यूनतम सैलरी का मुद्दा केंद्रीय कर्मचारियों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। आठवें वेतन आयोग की तस्वीर साफ होने के साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सरकार बोनस की गणना के पुराने फॉर्मूले को जारी रखती है या कर्मचारियों की मांग के मुताबिक इसमें बड़ा बदलाव करती है।

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