Breaking News

24 यात्री घायल… फिर पायलट का हुआ टेस्ट, रिपोर्ट में जो निकला उससे एयर इंडिया ने तुरंत कर दिया बाहर!



नई दिल्ली। एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट से जुड़ी जांच में बेहद गंभीर मामला सामने आया है। विमान के पायलट-इन-कमांड यानी मुख्य पायलट की जांच में साइकोएक्टिव सब्सटेंस (मादक/नशीला पदार्थ) के सेवन की पुष्टि हुई है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद एयर इंडिया ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पायलट की नौकरी खत्म कर दी है।

एयर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि विमानन सुरक्षा, पायलट की फिटनेस और नियमों के उल्लंघन के मामलों में कंपनी की जीरो-टॉलरेंस नीति है। इसी नीति के तहत पायलट को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया गया।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब इसी उड़ान को यात्रा के दौरान गंभीर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा था और दिल्ली पहुंचने के बाद कई यात्रियों को मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ी थी। घटना की जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की ओर से की जा रही है।

जांच रिपोर्ट में सामने आया चौंकाने वाला तथ्य

एयर इंडिया के प्रवक्ता के मुताबिक, फुकेट-दिल्ली उड़ान के पायलट-इन-कमांड की जांच में एक साइकोएक्टिव पदार्थ पाया गया। इसके बाद एयरलाइन ने बिना किसी देरी के पायलट के खिलाफ कार्रवाई की।

एयर इंडिया ने कहा कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। विमान संचालन में किसी भी तरह की लापरवाही या सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पायलट को नौकरी से हटाए जाने के बाद अब यह मामला विमानन सुरक्षा के नजरिए से भी महत्वपूर्ण हो गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उड़ान के दौरान पायलट की स्थिति और घटना के बीच कोई संबंध था या नहीं।

फ्लाइट में सवार थे 145 लोग

यह मामला एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट AI 2379 से जुड़ा है। इस उड़ान का संचालन एयरबस A320-251N विमान से किया जा रहा था। विमान का रजिस्ट्रेशन नंबर VT-EXO बताया गया है।

फ्लाइट में दोनों पायलटों और चालक दल के छह सदस्यों समेत कुल 145 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान विमान को टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा था।

दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान के उतरने के बाद स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 24 लोगों को मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई गई। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से चार लोगों को गंभीर चोटें आई थीं।

यात्रियों के घायल होने के बाद घटना को सामान्य टर्बुलेंस की घटना मानने के बजाय इसकी विस्तृत जांच शुरू की गई।

AAIB ने बताई 'गंभीर चिंता' की बात

विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो यानी AAIB ने जांच के दौरान मुख्य पायलट से संबंधित साइकोएक्टिव सब्सटेंस की रिपोर्ट का उल्लेख किया है। एजेंसी के मुताबिक, जांच में पायलट की रिपोर्ट 'निगेटिव नहीं' पाई गई।

AAIB ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया है। एजेंसी ने इस मामले में नागरिक विमानन महानिदेशालय (DGCA) से प्राथमिकता के आधार पर उचित कार्रवाई की सिफारिश भी की।

यह जानकारी सामने आने के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है, क्योंकि विमान उड़ाते समय पायलट की शारीरिक और मानसिक फिटनेस विमानन सुरक्षा का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।

पहले टर्बुलेंस की मिली थी जानकारी

जांच की शुरुआत में AAIB को सूचना दी गई थी कि फुकेट से दिल्ली के रास्ते में विमान को टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा था।

टर्बुलेंस के दौरान विमान में अचानक झटके लगने से यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को चोट लग सकती है। इस मामले में भी विमान के दिल्ली पहुंचने के बाद यात्रियों को चोटें आने की जानकारी सामने आई थी।

AAIB ने उपलब्ध साक्ष्यों और विमान में सवार लोगों को लगी चोटों के आकलन के आधार पर इस घटना को दुर्घटना की श्रेणी में रखा।

अब जांच एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि उड़ान के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और किन परिस्थितियों में यात्रियों को चोटें आईं।

दोनों पायलटों से अलग-अलग पूछताछ

AAIB की जांच केवल पायलट की मेडिकल रिपोर्ट तक सीमित नहीं है। जांच दल ने दिल्ली एयरपोर्ट पर चालक दल और उड़ान दल के सदस्यों से बातचीत की।

जांच एजेंसी के मुताबिक, उड़ान दल के दोनों सदस्यों से बाद में अलग-अलग पूछताछ की गई। इसके अलावा घटना से जुड़े अलग-अलग आंकड़ों, रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया जा रहा है।

अलग-अलग लोगों से पूछताछ किए जाने का मकसद घटनाक्रम की स्वतंत्र जानकारी हासिल करना और अलग-अलग बयानों की तुलना करना है।

अब जांच के दायरे में कई सवाल

मुख्य पायलट की जांच में साइकोएक्टिव पदार्थ की पुष्टि होने के बाद अब कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पदार्थ की मौजूदगी किस स्तर की थी और इसका उड़ान के दौरान पायलट की क्षमता पर कोई प्रभाव पड़ा था या नहीं।

इसके साथ ही जांच एजेंसियां यह भी देख सकती हैं कि पायलट ने उड़ान से पहले अनिवार्य मेडिकल और फिटनेस प्रक्रियाओं का पालन किया था या नहीं।

हालांकि, केवल किसी पदार्थ की जांच में मौजूदगी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि टर्बुलेंस या यात्रियों के घायल होने की घटना उसी वजह से हुई। इन दोनों पहलुओं के बीच संबंध है या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

एयर इंडिया की जीरो-टॉलरेंस नीति

एयर इंडिया ने इस मामले में अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। एयरलाइन के मुताबिक, सुरक्षा और फिटनेस से जुड़े नियमों का उल्लंघन किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इसी के तहत पायलट की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। एयरलाइन की कार्रवाई यह संकेत देती है कि वह उड़ान सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करना चाहती।

फिलहाल AAIB और संबंधित विमानन प्राधिकरणों की जांच जारी है। जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि उड़ान के दौरान क्या परिस्थितियां बनी थीं, यात्रियों को किस वजह से चोटें आईं और पायलट की मेडिकल रिपोर्ट का पूरे घटनाक्रम से कोई संबंध था या नहीं।

फुकेट-दिल्ली फ्लाइट से जुड़ा यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक तरफ विमान को टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा और दूसरी तरफ उसके मुख्य पायलट की जांच में साइकोएक्टिव पदार्थ की पुष्टि हुई। अब जांच की अगली कड़ी यह तय करेगी कि इन दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध था या यह केवल एक संयोग था।

कोई टिप्पणी नहीं