दुनिया का सबसे शानदार मॉल बनने वाला था ये सपना, फिर ऐसा क्या हुआ कि उसी इमारत में कैदियों की चीखें गूंजने लगीं?
इंसान जब किसी इमारत की नींव रखता है तो उसके पीछे अक्सर तरक्की, सुविधा और खूबसूरती का सपना होता है। लेकिन इतिहास में ऐसी कई इमारतें भी हैं, जिनका भविष्य उनकी कल्पना से बिल्कुल उलट निकला। ऐसी ही एक इमारत वेनेजुएला की राजधानी कराकस में मौजूद अल हेलिकॉइड है।
एक समय इसे दुनिया के सबसे आधुनिक और भव्य शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में शामिल करने की योजना बनाई गई थी। यहां सैकड़ों दुकानें, आलीशान होटल, सिनेमा, स्विमिंग पूल और दूसरी आधुनिक सुविधाएं होनी थीं। लेकिन राजनीतिक उथल-पुथल ने इस पूरे सपने को अधूरा छोड़ दिया।
धीरे-धीरे यह अधूरी इमारत ऐसी जगह में बदल गई, जिसका नाम आज वेनेजुएला के सबसे विवादित और खौफनाक हिरासत केंद्रों में लिया जाता है।
पहाड़ी पर बनी थी बेहद अनोखी इमारत
अल हेलिकॉइड कराकस के सैन अगस्टिन इलाके की एक पहाड़ी पर बनाई गई थी। इसकी सबसे खास बात इसका घुमावदार और आधुनिक डिजाइन था। इमारत का डिजाइन आर्किटेक्ट्स पेद्रो न्यूबर्गर, डिर्क बोर्नहॉर्स्ट और जॉर्ज रोमेरो गुतिरेज ने तैयार किया था।
1950 के दशक में वेनेजुएला के तत्कालीन शासक मार्कोस पेरेज जिमेनेज के शासनकाल के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू हुआ था।
उस दौर में इसका उद्देश्य सिर्फ एक सामान्य बाजार बनाना नहीं था। इसे ऐसा आधुनिक शॉपिंग और मनोरंजन केंद्र बनाने की योजना थी, जो उस समय के हिसाब से बेहद अनोखा होता।
कार से सीधे दुकान तक पहुंचने की थी योजना
इस प्रोजेक्ट की सबसे दिलचस्प विशेषताओं में से एक करीब 2.5 मील लंबी घुमावदार रैंप थी। योजना थी कि लोग अपनी कार चलाते हुए इमारत के भीतर ऊपर तक जा सकें और अपनी पसंद की दुकान के सामने वाहन पार्क कर सकें।
परियोजना में 300 से ज्यादा दुकानें, पांच सितारा होटल, सात स्क्रीन वाला सिनेमाघर, जिम, स्विमिंग पूल और प्रदर्शनी हॉल जैसी सुविधाएं शामिल करने की योजना थी।
उस समय के लिहाज से यह किसी भविष्य की इमारत जैसा सपना था।
दुनिया की नजर इस इमारत पर पड़ी
अल हेलिकॉइड का डिजाइन इतना आकर्षक और अलग था कि इसकी चर्चा वेनेजुएला से बाहर भी होने लगी। न्यूयॉर्क के म्यूजियम ऑफ मॉडर्न आर्ट में इसके डिजाइन को प्रदर्शित किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे काफी पहचान मिली।
कला और वास्तुकला की दुनिया से जुड़े कई बड़े नाम भी इससे प्रभावित हुए। इस इमारत को लेकर उस समय की उम्मीदें इतनी बड़ी थीं कि इसे आधुनिक वास्तुकला की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाने लगा।
लेकिन जिस इमारत को आधुनिक वेनेजुएला की पहचान बनना था, उसकी कहानी जल्द ही बदलने वाली थी।
एक राजनीतिक बदलाव ने रोक दिया पूरा प्रोजेक्ट
1958 में वेनेजुएला में बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ और पेरेज जिमेनेज का शासन समाप्त हो गया। सत्ता परिवर्तन के बाद इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए सरकार का रवैया बदल गया।
इमारत का निर्माण काफी आगे बढ़ चुका था, लेकिन नई सरकार ने पुराने शासन से जुड़े इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में रुचि नहीं दिखाई। परिणाम यह हुआ कि काम धीरे-धीरे रुक गया और 1961 तक निर्माण पूरी तरह ठप हो गया।
इसके बाद इमारत कई वर्षों तक अधूरी खड़ी रही। कानूनी विवाद, आर्थिक परेशानियां और दिवालिया होने की प्रक्रियाओं ने भी इसकी स्थिति को और जटिल बना दिया।
आखिरकार 1975 में यह अधूरी इमारत सरकार के कब्जे में आ गई।
शानदार मॉल की जगह बन गया हजारों लोगों का ठिकाना
इसके बाद अल हेलिकॉइड का इस्तेमाल एक और बिल्कुल अलग रूप में होने लगा।
1979 में भूस्खलन से प्रभावित और बेघर हुए लोगों ने इस अधूरी इमारत में शरण लेना शुरू किया। धीरे-धीरे यहां बड़ी संख्या में लोग रहने लगे।
कुछ वर्षों के भीतर यहां हजारों लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया। उपलब्ध विवरणों के मुताबिक, करीब 10 हजार से ज्यादा लोग किसी समय इस विशाल परिसर में रहने लगे थे।
लेकिन हालात ज्यादा समय तक सामान्य नहीं रहे। इमारत में अवैध गतिविधियों और अपराध से जुड़े आरोप सामने आने लगे। इसके बाद 1982 में सरकार ने बलपूर्वक कब्जाधारियों को वहां से बाहर निकाल दिया।
एक बार फिर सवाल उठा कि आखिर इस विशाल लेकिन अधूरे ढांचे का इस्तेमाल किस काम के लिए किया जाए।
म्यूजियम बनाने की योजना भी रह गई अधूरी
सरकार ने एक समय अल हेलिकॉइड को इतिहास और मानव विज्ञान के संग्रहालय में बदलने का विचार भी रखा। अगर यह योजना सफल होती तो शायद इस इमारत की कहानी बिल्कुल अलग होती।
लेकिन यह योजना भी जमीन पर नहीं उतर सकी।
इसके बजाय कुछ वर्षों बाद इमारत का इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों के लिए किया जाने लगा और 1984 में वेनेजुएला की सीक्रेट पुलिस ने इसे अपने मुख्यालय के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
यहीं से अल हेलिकॉइड की कहानी ने सबसे भयावह मोड़ लिया।
शोरूम बनने थे, लेकिन बन गए हिरासत कक्ष
जिस जगह पर कभी ब्रांडेड सामान की दुकानें और आधुनिक शोरूम बनने थे, वहां बाद में हिरासत कक्ष और पूछताछ से जुड़े कमरे बनाए गए।
इमारत की अनोखी रैंप प्रणाली, जिसे कभी ग्राहकों को कार से सीधे दुकानों तक पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया था, अब सुरक्षा अधिकारियों और वाहनों की आवाजाही का रास्ता बन गई।
अल हेलिकॉइड में राजनीतिक विरोधियों और अन्य बंदियों को रखे जाने के आरोप लगते रहे। मानवाधिकार संगठनों ने यहां हिरासत में रखे गए लोगों के साथ कथित दुर्व्यवहार और यातना को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं।
मानवाधिकारों को लेकर उठे गंभीर सवाल
अल हेलिकॉइड को लेकर वर्षों से मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की चिंता सामने आती रही है। विभिन्न रिपोर्टों में यहां हिरासत में रखे गए लोगों के साथ कथित अमानवीय व्यवहार और यातना के आरोपों का उल्लेख किया गया है।
आपके दिए विवरण के मुताबिक, 2014 से 2016 के बीच यहां 145 से अधिक गंभीर यातना के मामले दर्ज होने का दावा किया गया था। वहीं, 2012 में मानवाधिकारों की अंतर-अमेरिकी अदालत से जुड़े निरीक्षण में भी इस जगह की हिरासत स्थितियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
इन आरोपों ने अल हेलिकॉइड को सिर्फ एक अधूरी इमारत नहीं रहने दिया, बल्कि इसे वेनेजुएला के राजनीतिक और मानवाधिकार इतिहास से जोड़ दिया।
जिस इमारत में सपने बिकने थे, वहां आजादी छीनने के आरोप
अल हेलिकॉइड की कहानी इसलिए भी विचलित करने वाली है क्योंकि इसकी शुरुआत जिस मकसद से हुई थी, उसका आज की पहचान से कोई मेल नहीं बैठता।
जहां कभी सैकड़ों दुकानों में खरीदारी करने वालों की भीड़ होनी थी, वहां हिरासत और पूछताछ की कहानियां जुड़ गईं। जिस रैंप को आधुनिक शॉपिंग अनुभव के लिए डिजाइन किया गया था, वह सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन गया।
एक ऐसी इमारत, जिसे कभी आधुनिकता और भविष्य की वास्तुकला का प्रतीक माना गया था, समय के साथ राजनीतिक संघर्ष, सत्ता परिवर्तन और मानवाधिकार विवादों का प्रतीक बन गई।
अल हेलिकॉइड की कहानी आखिर क्या सिखाती है?
अल हेलिकॉइड सिर्फ वेनेजुएला की एक इमारत की कहानी नहीं है। यह इस बात का उदाहरण है कि राजनीतिक परिस्थितियां और सत्ता परिवर्तन किसी निर्माण की किस्मत किस तरह बदल सकते हैं।
एक महत्वाकांक्षी शॉपिंग सेंटर का सपना अधूरा रह गया। फिर वही जगह हजारों विस्थापित लोगों का आश्रय बनी। उसके बाद इसे सुरक्षा एजेंसी के मुख्यालय के रूप में इस्तेमाल किया गया और अंततः यह राजनीतिक हिरासत और मानवाधिकार विवादों से जुड़ गई।
जिस इमारत में कभी दुनिया भर के लोग खरीदारी करने आने वाले थे, उसकी पहचान ही ऐसी बदल गई कि आज उसका नाम सुनते ही आधुनिक मॉल की नहीं, बल्कि वेनेजुएला की एक काली और विवादित कहानी की याद आती है।

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