सोना खरीदने से पहले रुक जाइए! PM मोदी की अपील के बाद अचानक बदला बाजार, 1.54 लाख के पार Gold में क्यों आई गिरावट?
भारतीय सर्राफा बाजार से लेकर ग्लोबल कमोडिटी मार्केट तक इस समय सोने और चांदी की कीमतों को लेकर जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। एक तरफ दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने को सुरक्षित निवेश माना जा रहा है, तो दूसरी तरफ ब्याज दरों और महंगाई से जुड़ी चिंताओं ने इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की अपील की है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से कहा कि जब तक सोना खरीदना बेहद जरूरी न हो, तब तक इसकी खरीदारी से परहेज किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री की इस अपील के बीच मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को घरेलू वायदा बाजार यानी MCX में सोने की कीमतों में शुरुआती कारोबार के दौरान कमजोरी दिखाई दी। दूसरी तरफ चांदी ने थोड़ी मजबूती दिखाई और इसके भाव में तेजी दर्ज की गई।
MCX पर सोने का भाव दबाव में
मंगलवार के शुरुआती कारोबार में MCX पर सोना करीब 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ लगभग 1,54,282 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
वहीं चांदी ने इसके उलट प्रदर्शन किया। MCX पर चांदी करीब 0.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,34,907 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गई।
यानी बाजार में इस समय तस्वीर कुछ ऐसी है कि सोने पर दबाव है, जबकि चांदी में हल्की रिकवरी देखने को मिल रही है।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर सोने जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्ति में अचानक दबाव क्यों देखने को मिल रहा है?
इसके पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण काम कर रहे हैं।
मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, फिर भी सोने को नहीं मिला पूरा सहारा
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर पूरी दुनिया के कमोडिटी बाजार की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ने की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान की ओर से क्षेत्र में हमलों की खबरों ने हालात को और गंभीर बना दिया है। इसका सीधा असर ऊर्जा बाजार पर देखने को मिल रहा है।
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी आई है। तेल महंगा होने का मतलब है कि दुनिया के कई हिस्सों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
यही वह स्थिति है जो सोने के लिए एक साथ दो तरह के संकेत पैदा करती है। भू-राजनीतिक संकट सोने की मांग बढ़ा सकता है, लेकिन बढ़ती महंगाई केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों के मोर्चे पर सख्त रुख अपनाने के लिए मजबूर कर सकती है।
कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई चिंता
मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में करीब तीन सप्ताह की सबसे बड़ी तेजी देखने को मिली थी और मंगलवार को भी इसकी मजबूती जारी रही।
अगर लंबे समय तक तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं, तो इसका असर परिवहन से लेकर उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं तक पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा होती है।
ऐसे माहौल में केंद्रीय बैंकों के सामने मुश्किल स्थिति बन जाती है। उन्हें आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।
यही वजह है कि अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति बैठक पर टिक गई है।
सोने की कीमत पर ब्याज दरों का इतना असर क्यों?
सोना अपने आप में कोई ब्याज नहीं देता। इसका मतलब यह है कि जब बैंकिंग और बॉन्ड बाजार में ब्याज दरें आकर्षक होती हैं, तो निवेशकों के लिए सोने की तुलना में ब्याज देने वाली संपत्तियां ज्यादा आकर्षक हो सकती हैं।
अगर अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना मजबूत होती है, तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर बॉन्ड जैसी संपत्तियों में लगा सकते हैं।
इसके अलावा ऊंची ब्याज दरों से अमेरिकी डॉलर भी मजबूत हो सकता है। डॉलर मजबूत होने की स्थिति में आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में कीमत वाले सोने पर दबाव देखने को मिल सकता है।
यही कारण है कि इस समय सोने के निवेशकों की नजर केवल युद्ध और भू-राजनीतिक घटनाओं पर नहीं, बल्कि अमेरिकी महंगाई और फेड की ब्याज दर नीति पर भी है।
दो दिनों में सोने में बड़ी गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में हाल के दिनों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। रिपोर्टों के मुताबिक, लगातार दो कारोबारी सत्रों में सोने की कीमत में 3.5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
इस गिरावट के बाद निवेशकों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या सोने की तेजी का दौर फिलहाल थम गया है या फिर यह सिर्फ मुनाफावसूली का दौर है?
अगस्त महीने में सोने में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। लेकिन अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर सख्त संकेत मिलने के बाद निवेशकों का रुख बदलता नजर आया।
फेड की बैठक पर टिकी बाजार की नजर
अब बाजार की निगाहें सितंबर में होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर हैं। निवेशक यह अनुमान लगाने में जुटे हैं कि केंद्रीय बैंक आगे ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला करता है।
अगर फेड महंगाई को लेकर सख्त रुख अपनाता है और ब्याज दरें ऊंची रहने के संकेत देता है, तो सोने पर और दबाव बन सकता है।
इसके उलट अगर फेड नरम रुख अपनाता है या ब्याज दरों में कटौती के संकेत देता है, तो सोने को दोबारा मजबूती मिल सकती है।
इसलिए आने वाले दिनों में अमेरिकी महंगाई के आंकड़े, फेड के बयान, डॉलर की चाल और मिडिल ईस्ट की स्थिति सोने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
PM मोदी की सोना न खरीदने की अपील क्यों महत्वपूर्ण है?
पीएम मोदी की अपील को केवल सोने की कीमतों से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। इसका संबंध देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा से भी है।
भारत अपनी सोने की मांग का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। जब देश में सोने का आयात बढ़ता है तो इसके लिए विदेशी मुद्रा खर्च होती है।
ऐसे में गैर-जरूरी सोने की खरीदारी कम होने पर आयात की मांग में कमी आ सकती है और विदेशी मुद्रा पर दबाव भी घट सकता है।
प्रधानमंत्री का जोर इसी बात पर है कि भारतीय जहां तक संभव हो, गैर-जरूरी आयात और खर्च को कम करें तथा देश के भीतर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दें।
क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?
सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए निवेशकों के लिए जल्दबाजी में फैसला लेना जोखिम भरा हो सकता है। सोने की कीमत कई अंतरराष्ट्रीय कारकों से प्रभावित होती है और इस समय बाजार में अनिश्चितता काफी अधिक है।
अगर कोई व्यक्ति शादी, पारिवारिक जरूरत या किसी अन्य जरूरी उद्देश्य के लिए सोना खरीद रहा है, तो उसकी स्थिति निवेश से अलग हो सकती है। वहीं केवल कीमत बढ़ने की उम्मीद में खरीदारी करने वाले निवेशकों को बाजार के जोखिमों को समझना चाहिए।
एक बात साफ है—सोने का बाजार इस समय कई बड़े संकेतों के बीच फंसा हुआ है। एक तरफ मिडिल ईस्ट का तनाव इसे सुरक्षित निवेश के रूप में सहारा दे सकता है, तो दूसरी तरफ ब्याज दरों और महंगाई से जुड़ी चिंता इसकी कीमत पर दबाव डाल सकती है।
आगे सोना या चांदी, किसमें दिखेगी तेजी?
फिलहाल सोने और चांदी दोनों में तेज उतार-चढ़ाव का दौर बना हुआ है। सोने की दिशा मुख्य रूप से अमेरिकी फेड के फैसले, डॉलर, महंगाई और वैश्विक तनाव से प्रभावित हो सकती है।
चांदी पर भी वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का असर पड़ता है, लेकिन औद्योगिक मांग के कारण इसकी कीमतों में अलग तरह की चाल देखने को मिल सकती है।
इसलिए आने वाले दिनों में निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि “सोना कितना महंगा होगा?”, बल्कि यह भी होगा कि वैश्विक बाजार में ब्याज दरों, महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव की दिशा क्या रहती है।
फिलहाल मंगलवार के कारोबार ने इतना संकेत जरूर दिया है कि सोने की चमक के बीच बाजार में सतर्कता बढ़ गई है। पीएम मोदी की गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की अपील और अंतरराष्ट्रीय बाजार की उठापटक ने इस पीली धातु को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

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