बाथरूम में टीनशेड के अंदर छिपा था मोबाइल, छात्रा की नजर पड़ते ही खुला ऐसा राज कि पूरे हॉस्टल में मच गया हंगामा!
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मोहद्दीपुर इलाके में स्थित एक गर्ल्स हॉस्टल के बाथरूम में कथित तौर पर मोबाइल फोन छिपाकर वीडियो रिकॉर्ड किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद छात्राओं में हड़कंप मच गया। मामला सामने आते ही हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं ने विरोध शुरू कर दिया और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला कैंट थाना क्षेत्र के मोहद्दीपुर स्थित एक गर्ल्स हॉस्टल का है। यहां कॉलेज में पढ़ाई करने वाली छात्राओं के अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाली युवतियां भी रहती हैं। हॉस्टल में करीब 20 कमरों में 26 छात्राओं के रहने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में बाथरूम में मोबाइल कैमरा मिलने की खबर ने वहां रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा और निजता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रात में बाथरूम गई छात्रा की नजर मोबाइल पर पड़ी
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब एक छात्रा रात के वक्त हॉस्टल के बाथरूम में गई। वहां उसकी नजर टीनशेड में फंसे हुए एक मोबाइल फोन पर पड़ी। छात्रा को मोबाइल फोन का वहां इस तरह छिपा होना संदिग्ध लगा। उसने तुरंत इसकी जानकारी हॉस्टल की दूसरी छात्राओं को दी।
इसके बाद कई छात्राएं मौके पर पहुंचीं और मोबाइल फोन को बाहर निकाला गया। छात्राओं ने जब मोबाइल को चेक किया तो उसमें कई वीडियो होने की बात सामने आई। बताया जा रहा है कि छात्राओं को मोबाइल में हॉस्टल की कई लड़कियों से संबंधित वीडियो मिले। यह देखकर छात्राओं का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने हॉस्टल में हंगामा शुरू कर दिया।
छात्राओं का आरोप है कि मोबाइल फोन को इस तरह से रखा गया था कि उसका कैमरा बाथरूम के अंदर की तरफ रिकॉर्डिंग कर सके। उनका कहना है कि फोन सामान्य रूप से वहां पड़ा हुआ नहीं था, बल्कि उसे छिपाने की कोशिश की गई थी।
मोबाइल में कई वीडियो मिलने का दावा
छात्राओं के मुताबिक मोबाइल फोन मिलने के बाद जब उन्होंने उसमें मौजूद वीडियो देखे तो उन्हें कई रिकॉर्डिंग मिलीं। इन वीडियो को लेकर छात्राओं में काफी नाराजगी फैल गई। उनका आरोप है कि अगर मोबाइल कैमरा बाथरूम की तरफ करके रिकॉर्डिंग के लिए लगाया गया था तो यह उनकी निजता का गंभीर उल्लंघन है।
मामला सामने आने के बाद छात्राओं ने हॉस्टल प्रबंधन से जवाब मांगा। इसी दौरान महिला वार्डन की ओर से मोबाइल कैमरा लगाए जाने को लेकर एक अलग ही वजह बताई गई।
वार्डन ने दी सैनिटरी पैड की निगरानी वाली सफाई
हंगामे के बीच महिला वार्डन ने कथित तौर पर सफाई देते हुए कहा कि मोबाइल कैमरा किसी गलत इरादे से नहीं लगाया गया था। उनका कहना था कि हॉस्टल के बाथरूम में डस्टबीन होने के बावजूद कुछ लड़कियां सैनिटरी पैड इधर-उधर फेंक देती थीं, जिसके कारण वहां गंदगी फैलती थी।
वार्डन के मुताबिक वह यह पता लगाना चाहती थीं कि आखिर कौन सी छात्राएं ऐसा कर रही हैं। इसी वजह से मोबाइल फोन के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की गई कि सैनिटरी पैड इधर-उधर फेंकने वाली लड़कियां कौन हैं।
हालांकि, वार्डन की इस सफाई से मामला शांत होने के बजाय और गंभीर सवालों के घेरे में आ गया। छात्राओं का कहना है कि अगर किसी को बाथरूम में साफ-सफाई को लेकर शिकायत थी तो इसके लिए अन्य तरीके अपनाए जा सकते थे। बाथरूम जैसी निजी जगह पर मोबाइल कैमरा लगाना छात्राओं की निजता से जुड़ा बेहद गंभीर विषय है।
छात्राओं ने किया विरोध, पुलिस पहुंची
मोबाइल फोन में वीडियो मिलने की जानकारी सामने आने के बाद छात्राओं ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते हॉस्टल का माहौल तनावपूर्ण हो गया। छात्राओं ने मामले की जानकारी पुलिस को दी।
सूचना मिलते ही कैंट थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जानकारी ली। पुलिस ने छात्राओं से बातचीत की और मोबाइल फोन को जांच के लिए अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि मोबाइल फोन किसने लगाया था, उसमें वीडियो कब से रिकॉर्ड हो रहे थे और फोन में मौजूद वीडियो किसके हैं।
पुलिस के सामने यह भी अहम सवाल है कि मोबाइल फोन में मिली रिकॉर्डिंग कितनी पुरानी है और क्या उसे किसी अन्य व्यक्ति के पास भेजा गया था या नहीं। इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मोबाइल फोन में मौजूद वीडियो के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ की गई है या नहीं।
हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं में डर का माहौल
घटना सामने आने के बाद हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं के बीच डर और असुरक्षा का माहौल बताया जा रहा है। छात्राएं इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर वास्तव में लंबे समय तक मोबाइल कैमरे से रिकॉर्डिंग की गई तो उनकी निजी गतिविधियों से जुड़े वीडियो किसी के पास पहुंच सकते हैं।
हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं के लिए बाथरूम और वॉशरूम जैसी जगहें पूरी तरह निजी मानी जाती हैं। ऐसे स्थान पर कैमरा या रिकॉर्डिंग डिवाइस मिलने से मामला केवल हॉस्टल के अनुशासन तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि निजता और संभावित आपराधिक कृत्य की जांच का विषय बन जाता है।
छात्राओं का कहना है कि उन्हें इस बात का जवाब चाहिए कि मोबाइल फोन वहां किसने रखा था और आखिर कितने समय तक रिकॉर्डिंग होती रही। साथ ही वे यह भी जानना चाहती हैं कि मोबाइल में मौजूद वीडियो का इस्तेमाल कहीं किसी दूसरे उद्देश्य से तो नहीं किया गया।
दो दिन पहले हॉस्टल आई थी छात्रा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिस छात्रा की नजर सबसे पहले मोबाइल फोन पर पड़ी, वह करीब दो दिन पहले ही हॉस्टल में आई थी। रात में बाथरूम जाने के दौरान उसकी नजर टीनशेड में फंसे मोबाइल पर पड़ी। अगर वह मोबाइल पर ध्यान नहीं देती तो संभव है कि यह मामला कुछ और समय तक सामने नहीं आता।
छात्रा ने मोबाइल मिलने के बाद उसका वीडियो बनाकर दूसरी छात्राओं को इसकी जानकारी दी। इसके बाद अन्य छात्राएं भी वहां पहुंचीं और मोबाइल की जांच की गई। मोबाइल में कई वीडियो मिलने के बाद उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया और पुलिस को सूचना दी।
जांच में सामने आएगा पूरा सच
फिलहाल पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान मोबाइल फोन की तकनीकी जांच भी महत्वपूर्ण होगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि फोन कब से इस्तेमाल हो रहा था, उसमें कितनी रिकॉर्डिंग मौजूद है और रिकॉर्डिंग किस तरीके से की गई।
पुलिस हॉस्टल में लगे अन्य कैमरों, मोबाइल फोन की गतिविधियों और वहां रहने वाले लोगों से पूछताछ के जरिए भी मामले की कड़ियां जोड़ सकती है। यह भी जांच का विषय होगा कि फोन किसके नाम पर है और उसे बाथरूम में किसने तथा किस उद्देश्य से रखा था।
सफाई की आड़ में निजता से समझौता तो नहीं?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हॉस्टल में सफाई व्यवस्था की समस्या का पता लगाने के लिए किसी छात्रा की निजता से समझौता किया जा सकता है। वार्डन की ओर से सैनिटरी पैड इधर-उधर फेंके जाने की बात कही गई है, लेकिन बाथरूम में मोबाइल कैमरा लगाना इस समस्या का उचित समाधान था या नहीं, यह जांच का अहम हिस्सा है।
फिलहाल छात्राओं की नजर पुलिस की कार्रवाई पर है। मोबाइल से मिले कथित वीडियो और उसकी रिकॉर्डिंग की वास्तविकता जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। पुलिस की जांच से यह सामने आने की उम्मीद है कि मोबाइल कैमरा किसने लगाया, उसका वास्तविक उद्देश्य क्या था और रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल कहीं किसी अन्य तरीके से तो नहीं किया गया।
गोरखपुर की यह घटना एक बार फिर हॉस्टल और पीजी में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा तथा निजता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। छात्राओं का कहना है कि उन्हें ऐसी जगहों पर सुरक्षित महसूस करने का अधिकार है, जहां वे बिना किसी डर के अपनी पढ़ाई और दैनिक जीवन जारी रख सकें। अब इस मामले में जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि बाथरूम में मोबाइल लगाने के पीछे वास्तव में क्या वजह थी और इस मामले में जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

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