आखिरी मैसेज में लिखा- “पापा, मैं निकल गई हूं…” फिर गायब हो गया NRI कपल, नेपाल बॉर्डर पर टूटा संपर्क
पटना: नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए पटना के एक NRI दंपती के लापता होने से परिवार की चिंता बढ़ गई है। पटना के गोला रोड स्थित अपने घर से कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए निकले अंकित रंजन और उनकी पत्नी अंकिता चंद्रा 26 अगस्त की सुबह से अपने परिजनों के संपर्क में नहीं हैं। आखिरी बार अंकिता ने अपने पिता को संदेश भेजकर बताया था कि वह कैलाश मानसरोवर के लिए निकल रही हैं। इसके कुछ समय बाद ही दोनों के मोबाइल फोन बंद हो गए।
बताया जा रहा है कि यह दंपती नेपाल के रास्ते तिब्बत की ओर कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जा रहा था। रसुवा बॉर्डर के आसपास आपदा की स्थिति बनने के बाद यात्रियों के इस दल से संपर्क टूट गया। इस समूह में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा समेत कई देशों से आए NRI श्रद्धालु शामिल बताए जा रहे हैं। दंपती से संपर्क टूटने के बाद पटना में रह रहे उनके परिवार के लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
लंदन में रहते हैं अंकित और अंकिता
अंकित रंजन और अंकिता चंद्रा मूल रूप से पटना के रहने वाले हैं, लेकिन पिछले कई वर्षों से लंदन में रह रहे हैं। दोनों के पास ब्रिटिश पासपोर्ट होने के साथ-साथ NRI-OCI कार्ड भी होने की जानकारी सामने आई है।
अंकित पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि उनकी पत्नी अंकिता ब्रिटिश सरकार के टैक्स विभाग में अधिकारी के तौर पर काम करती हैं। करीब छह साल पहले दोनों की शादी हुई थी।
परिवार के मुताबिक, कैलाश मानसरोवर यात्रा से पहले दोनों 21 अगस्त को लंदन से पटना पहुंचे थे। पटना आने के बाद उन्होंने परिवार के साथ कुछ समय बिताया। घर में खुशी का माहौल था और किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही दिनों बाद परिवार को ऐसी चिंता का सामना करना पड़ेगा।
दो दिन पटना में रुकने के बाद दोनों 23 अगस्त को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए रवाना हुए।
काठमांडू पहुंचने के बाद दूसरे श्रद्धालुओं से जुड़े
परिवार के मुताबिक, पटना से निकलने के बाद अंकिता और अंकित काठमांडू पहुंचे। वहां कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले दूसरे श्रद्धालुओं का समूह भी उनके साथ जुड़ा।
अंकिता के मामा एसके ओझा के अनुसार, इस दल में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों से आए NRI श्रद्धालु भी शामिल थे। यात्रा का आयोजन नेपाल टूर प्लानर प्राइवेट लिमिटेड और कैलाश जर्नी द्वारा संयुक्त रूप से किए जाने की जानकारी दी गई है।
शुरुआत में सब कुछ सामान्य था। अंकिता लगातार अपने परिवार के संपर्क में थीं और यात्रा से जुड़ी जानकारी अपने पिता को देती रहती थीं। परिवार भी उनकी यात्रा को लेकर उत्साहित था।
लेकिन 26 अगस्त की सुबह आया एक छोटा-सा संदेश परिवार के लिए उनका आखिरी संदेश बन गया।
“पापा… मैं कैलाश मानसरोवर के लिए निकल गई हूं”
26 अगस्त की सुबह करीब आठ बजे अंकिता ने पटना में मौजूद अपने पिता रमेश चंद्र को मैसेज किया।
मैसेज में उन्होंने लिखा था—“पापा... मैं कैलाश मानसरोवर के लिए निकल गई हूं।”
परिवार के लिए यह एक सामान्य संदेश था। उन्हें क्या पता था कि इसके बाद अंकिता और अंकित से संपर्क करना मुश्किल हो जाएगा।
बताया गया है कि इसके बाद यात्रियों का दल नेपाल-तिब्बत सीमा के पास स्थित रसुवा बॉर्डर की तरफ आगे बढ़ा। इसी दौरान नेपाल में प्राकृतिक आपदा की खबर सामने आने लगी।
परिवार ने जैसे ही आपदा की जानकारी सुनी, उन्होंने तुरंत अंकिता और अंकित से संपर्क करने की कोशिश की। लगातार फोन किए गए, लेकिन दोनों के मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिले।
परिजनों ने मैसेज भेजे, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।
एक फोन बंद हुआ तो पूरे परिवार की बढ़ गई चिंता
शुरुआत में परिवार को लगा कि शायद आपदा प्रभावित क्षेत्र में नेटवर्क की समस्या के कारण फोन बंद हो गया होगा। लेकिन जब काफी समय तक कोई संपर्क नहीं हुआ तो चिंता गहराने लगी।
सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह थी कि केवल अंकिता और अंकित ही नहीं, बल्कि उनके साथ यात्रा कर रहे यात्रियों के पूरे समूह से संपर्क टूटने की बात सामने आई।
इसके बाद परिवार ने अलग-अलग माध्यमों से उनके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश शुरू की। हर फोन कॉल के साथ परिवार को उम्मीद रहती कि शायद कोई अच्छी खबर मिल जाए, लेकिन अभी तक दोनों का कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिल पाया है।
पटना स्थित उनके घर में इस समय चिंता और बेचैनी का माहौल है। परिजन लगातार इस उम्मीद में हैं कि दोनों सुरक्षित होंगे और जल्द ही उनसे संपर्क हो जाएगा।
ब्रिटिश दूतावास से भी मदद की गुहार
अंकिता और अंकित दोनों ब्रिटिश पासपोर्ट धारक हैं। उनके पास NRI-OCI कार्ड भी होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में परिवार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार और काठमांडू स्थित ब्रिटिश दूतावास को दोनों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और जानकारियां उपलब्ध कराई हैं।
परिजनों की मांग है कि नेपाल के रसुवा बॉर्डर और आसपास के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में दोनों की तलाश तेज की जाए।
परिवार अब केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से भी मदद की अपील कर रहा है। परिजनों का कहना है कि भारतीय और ब्रिटिश अधिकारियों के बीच समन्वय के जरिए खोज अभियान को गति मिल सकती है।
परिवार को हर पल किसी फोन का इंतजार
अंकिता के पिता रमेश चंद्र पटना में सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं। बेटी और दामाद के लापता होने के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उन्हें यह तक पता नहीं है कि दोनों इस समय कहां हैं और किस स्थिति में हैं।
परिवार के लिए अंकिता का आखिरी संदेश बार-बार आंखों के सामने आ रहा है—“पापा... मैं कैलाश मानसरोवर के लिए निकल गई हूं।”
एक पिता के लिए बेटी का यह सामान्य-सा संदेश अब चिंता का सबसे बड़ा कारण बन गया है। परिजनों को उम्मीद है कि आपदा प्रभावित क्षेत्र में संचार व्यवस्था या परिस्थितियां सामान्य होने के बाद दोनों से संपर्क हो सकेगा।
आपदा क्षेत्र में खोजबीन पर टिकी उम्मीद
कैलाश मानसरोवर यात्रा नेपाल के रास्ते करने वाले यात्रियों को कई दुर्गम और पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरना पड़ता है। रसुवा बॉर्डर क्षेत्र में किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में सड़क, संचार और आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
ऐसे में परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि प्रशासन और संबंधित दूतावास प्रभावित क्षेत्रों में खोजबीन कर अंकिता और अंकित का जल्द पता लगाए।
फिलहाल परिवार की निगाहें नेपाल सरकार, ब्रिटिश दूतावास और भारत सरकार की ओर हैं। हर गुजरते घंटे के साथ परिजनों की बेचैनी बढ़ रही है, लेकिन उम्मीद अभी कायम है।
पटना का यह परिवार अब बस एक फोन कॉल का इंतजार कर रहा है—वह फोन जिसमें अंकिता या अंकित की आवाज सुनाई दे और वे कहें कि वे सुरक्षित हैं।

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