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बेटी का शव घर पहुंचा… पति को अलग ले जाकर क्या हुआ था? आरजी कर केस में मां के दावे ने फिर खड़े किए बड़े सवाल!



कोलकाता: आरजी कर मेडिकल कॉलेज की महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या का मामला एक बार फिर चर्चा में है। मृतका की मां और पानीहाटी से बीजेपी विधायक रत्ना देबनाथ ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि बेटी की मौत के बाद उनके परिवार पर चुप रहने के लिए दबाव बनाया गया था। रत्ना देबनाथ के मुताबिक, उनके पति को कथित तौर पर बंदूक दिखाकर डराया गया और उन्हें पैसे देने की पेशकश भी की गई।

हालांकि, ये सभी बातें फिलहाल परिवार की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इनके हर पहलू की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही हो सकेगी। मामले से जुड़े आरोपों और दावों को अंतिम सत्य मानने से पहले जांच एजेंसियों के निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी है।

बेटी का शव घर पहुंचने वाली रात क्या हुआ?

रत्ना देबनाथ ने पानीहाटी स्थित अपने कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उस रात का जिक्र किया, जब उनकी बेटी का शव अस्पताल से ग्रीन कॉरिडोर के रास्ते उनके घर लाया गया था।

उनका दावा है कि इसी दौरान कुछ स्थानीय नेताओं और तत्कालीन डीसी नॉर्थ की मौजूदगी में उनके पति को घर के रसोई वाले हिस्से के बाहर बने गलियारे में ले जाया गया।

रत्ना के मुताबिक, वहां उनके पति से कथित तौर पर चुप रहने के लिए कहा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार को पैसे देने की पेशकश भी की गई। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि उनके पति को बंदूक की नोक पर धमकाया गया।

परिवार के अनुसार, घटना इतनी भयावह थी कि उनके पति ने शुरुआत में उन्हें भी इस बारे में जानकारी नहीं दी।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है। इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को परिवार के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

परिवार पर दबाव बनाने का आरोप

बेटी की मौत के बाद परिवार पहले से ही गहरे सदमे में था। ऐसे समय में अगर परिवार पर किसी तरह का दबाव डाला गया हो, तो यह मामले की जांच के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है।

रत्ना देबनाथ का कहना है कि परिवार को अपनी बेटी की मौत के बाद कई तरह के दबावों का सामना करना पड़ा। उनका दावा है कि उन्हें मीडिया से बात करने से भी रोका गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे एक ऐसा वीडियो रिकॉर्ड कराया गया जिसकी स्क्रिप्ट पहले से तैयार थी।

अगर ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो इससे घटना के बाद की परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। लेकिन फिलहाल इन दावों की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।

दोबारा पोस्टमार्टम की मांग क्यों उठी?

रत्ना देबनाथ का कहना है कि उनकी बेटी की मौत के बाद परिवार चाहता था कि शव को सुरक्षित रखा जाए ताकि निष्पक्ष जांच के लिए दोबारा पोस्टमार्टम कराया जा सके।

उनके अनुसार, परिवार को आशंका थी कि मामले की जांच में कई सवालों के जवाब अभी बाकी हैं। इसलिए वे चाहते थे कि शव को सुरक्षित रखकर मेडिकल जांच के दूसरे विकल्पों पर विचार किया जाए।

लेकिन उनका आरोप है कि परिवार की इस मांग को स्वीकार नहीं किया गया।

पोस्टमार्टम किसी भी संदिग्ध मौत के मामले में बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। ऐसे मामलों में शरीर से जुड़े चिकित्सकीय साक्ष्य जांच की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

हालांकि, इस मामले में दोबारा पोस्टमार्टम को लेकर परिवार की मांग और उसे लेकर सामने आए दावों पर अंतिम स्थिति न्यायिक और जांच प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।

CBI की जांच पर भी उठाए सवाल

रत्ना देबनाथ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI की जांच को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

उनका कहना है कि उन्होंने कई बार अपनी बात जांच एजेंसी तक पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन पीड़िता की मां होने के बावजूद उनका बयान उस तरीके से दर्ज नहीं किया गया जिसकी वह उम्मीद कर रही थीं।

उन्होंने जांच की रफ्तार पर भी सवाल उठाया है। रत्ना के मुताबिक, सरकार बदलने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि मामले में तेजी आएगी, लेकिन उन्हें न्याय की प्रक्रिया में अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दिया।

उनका कहना है कि केवल सरकार बदलने से समस्या खत्म नहीं होगी। जब तक जांच और न्याय की प्रक्रिया में ठोस प्रगति नहीं होती, तब तक परिवार की परेशानी खत्म नहीं होगी।

“मेरी बेटी डॉक्टर थी, अपराधी डॉक्टर है तो गिरफ्तारी क्यों नहीं?”

रत्ना देबनाथ ने उन आरोपों और सवालों को भी उठाया जो डॉक्टरों की भूमिका से जुड़े हैं।

उनका तर्क है कि अगर किसी डॉक्टर पर गंभीर अपराध में शामिल होने का आरोप है तो सिर्फ डॉक्टर होने के कारण उसे कार्रवाई से अलग नहीं रखा जाना चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी बेटी भी डॉक्टर थी। अगर कोई डॉक्टर उनकी बेटी की हत्या में शामिल होने के संदेह के घेरे में है, तो उसकी भूमिका की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?

यहां यह समझना भी जरूरी है कि किसी व्यक्ति पर आरोप लगना और अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाना दो अलग बातें हैं। जांच एजेंसियों को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करनी होती है और अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया में होता है।

कोर्ट की प्रक्रिया पर भी परिवार की नजर

आरजी कर मामले में समय-समय पर अदालत में कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठते रहे हैं। परिवार की ओर से घटना के बाद की परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

अब परिवार चाहता है कि बेटी की मौत के साथ-साथ घटना के बाद क्या हुआ, इसकी भी पूरी जांच हो।

कथित धमकी, पैसे की पेशकश, परिवार को चुप कराने का प्रयास, मीडिया से बात करने से रोकने और दोबारा पोस्टमार्टम की मांग जैसे मुद्दे इसी बड़े सवाल का हिस्सा बन गए हैं।

जांच एजेंसियों के सामने चुनौती यह है कि परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों को उपलब्ध रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के साथ मिलाकर देखा जाए।

राजनीति में आने का फैसला क्यों लिया?

रत्ना देबनाथ ने यह भी बताया कि वह पहले राजनीति में आने के बारे में नहीं सोचती थीं।

उनके अनुसार, उनका परिवार सामान्य जीवन जी रहा था और उनके पति कारोबार करते थे। उनकी बेटी भी चाहती थी कि परिवार राजनीति से दूर रहे।

लेकिन 9 अगस्त 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज में उनकी डॉक्टर बेटी के साथ हुई घटना ने परिवार की जिंदगी पूरी तरह बदल दी।

बेटी की मौत के बाद रत्ना ने सार्वजनिक रूप से न्याय की मांग उठानी शुरू की। इसके बाद वह राजनीति में आईं और पानीहाटी से बीजेपी विधायक बनीं।

उनका कहना है कि राजनीति में आने का उनका मुख्य उद्देश्य अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाना है।

“सरकार बदलने से सब कुछ नहीं बदला”

रत्ना देबनाथ का कहना है कि सरकार बदलने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि आरजी कर मामले में जांच और न्याय की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव दिखाई देगा।

उनके मुताबिक, लोगों ने उनसे कहा था कि नई सरकार आने के बाद स्थिति बदल जाएगी। लेकिन उनका दावा है कि न्याय की प्रक्रिया के कुछ हिस्से अब भी अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़े हैं।

उन्होंने कहा कि केवल सरकार बदलना पर्याप्त नहीं है। व्यवस्था में बदलाव और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई भी जरूरी है।

हालांकि, जांच की प्रक्रिया में कई कानूनी और तकनीकी चरण होते हैं। इसलिए किसी मामले में देरी या प्रक्रिया को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और अदालत के रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

अब परिवार की मांग क्या है?

पीड़िता का परिवार चाहता है कि उनकी बेटी की मौत से जुड़े हर सवाल का जवाब सामने आए। परिवार की ओर से लगातार निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की जा रही है।

रत्ना देबनाथ का कहना है कि अब वह पीछे हटने वाली नहीं हैं। उनका कहना है कि बेटी के लिए न्याय की लड़ाई जारी रहेगी।

उनका भरोसा न्यायपालिका और मौजूदा सरकार पर भी है। वह उम्मीद कर रही हैं कि जांच प्रक्रिया के जरिए उन सभी सवालों का जवाब सामने आएगा जिनको लेकर परिवार लंबे समय से सवाल उठा रहा है।

आरोपों की सच्चाई जांच से ही होगी साफ

आरजी कर मामले में सामने आए ताजा आरोपों ने एक बार फिर कई पुराने सवालों को चर्चा में ला दिया है। पीड़िता की मां ने जिस तरह बंदूक दिखाकर धमकाने, पैसे देने की पेशकश और परिवार पर दबाव बनाने का दावा किया है, वह बेहद गंभीर आरोप हैं।

लेकिन इन आरोपों को साबित करने के लिए जांच एजेंसियों को ठोस साक्ष्य जुटाने होंगे। किसने धमकी दी, क्या वास्तव में बंदूक दिखाई गई, पैसे की पेशकश किसने की और परिवार पर किस स्तर पर दबाव बनाया गया—इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकते हैं।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि आरजी कर मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और पीड़ित परिवार की ओर से उठाए जा रहे नए सवालों ने मामले की जांच के साथ-साथ घटना के बाद की परिस्थितियों को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जांच एजेंसियां इन आरोपों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ाती हैं और आने वाले समय में अदालत के सामने क्या तथ्य रखे जाते हैं।

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