छात्र-छात्राएं बेहोश, SP के हेलमेट पर लगा पत्थर; पटना में आंदोलन ने लिया उग्र रूप, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा
पटना: बिहार की राजधानी पटना में सोमवार को विभिन्न मांगों को लेकर निकाला गया छात्र-किसान-मजदूर मार्च उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई जगहों पर टकराव की स्थिति बन गई। गांधी मैदान से लोक भवन की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने जेपी गोलंबर और डाकबंगला चौराहे के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों की ओर से बैरिकेड हटाने और आगे बढ़ने के प्रयास के बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद स्थिति और बिगड़ी तथा पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को पीछे हटाया।
रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन में किसान, खेत मजदूर, छात्र, महिला संगठन, ट्रेड यूनियन और विभिन्न वामपंथी संगठनों से जुड़े लोग शामिल थे। इसी प्रदर्शन में बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज से जुड़े नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्र-छात्राएं भी अपनी मांगों को लेकर शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों के घायल होने और बेहोश होने की सूचना मिली, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजे जाने की बात सामने आई है। हालांकि घायलों की सटीक संख्या को लेकर अभी अलग-अलग दावे सामने आए हैं और आधिकारिक आंकड़ा स्पष्ट नहीं है।
गांधी मैदान से शुरू हुआ मार्च
सोमवार सुबह से ही पटना के गांधी मैदान में अलग-अलग संगठनों के कार्यकर्ता और प्रदर्शनकारी जुटने लगे थे। किसान, मजदूर, छात्र और विभिन्न जनसंगठनों के लोग अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का प्रस्तावित मार्च गांधी मैदान से शुरू होकर लोक भवन की ओर जाना था।
प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन, बिहार राज्य किसान सभा, खेत मजदूर संगठनों और ट्रेड यूनियन से जुड़े कार्यकर्ताओं की भागीदारी की रिपोर्ट सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में सीपीआई और उससे जुड़े संगठनों की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को रद्द करने की मांग का भी उल्लेख है।
प्रदर्शनकारियों ने बाढ़ पीड़ितों को राहत और मुआवजा, महंगाई, बेरोजगारी, कृषि संकट, शिक्षा और श्रमिकों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई।
जेपी गोलंबर पर बैरिकेडिंग के बाद बढ़ा तनाव
गांधी मैदान से आगे बढ़ते हुए प्रदर्शनकारी जेपी गोलंबर पहुंचे। यहां पुलिस ने पहले से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा रखी थी। मार्च को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए गए थे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक खींचतान की स्थिति बनी रही।
रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के एक हिस्से ने बैरिकेड हटाने की कोशिश की और बाद में बैरिकेड पार कर डाकबंगला की तरफ बढ़ गया। इसके बाद पुलिस ने डाकबंगला और आसपास के रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी।
प्रशासन की ओर से बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग के साथ-साथ भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।
डाकबंगला चौराहे पर वाटर कैनन का इस्तेमाल
प्रदर्शनकारियों के डाकबंगला चौराहे की ओर पहुंचने के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पानी की बौछार के बावजूद प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते रहे और बैरिकेड हटाने की कोशिश करते रहे।
इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलना शुरू किया। इस दौरान भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। छात्र-छात्राएं और अन्य प्रदर्शनकारी अलग-अलग दिशाओं में भागते दिखाई दिए। कई लोगों के घायल होने की सूचना सामने आई है।
प्रत्यक्षदर्शियों और प्रदर्शनकारियों की ओर से कुछ छात्रों के बेहोश होने की बात कही गई है। उन्हें एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल भेजे जाने की सूचना है। हालांकि घायल और अस्पताल में भर्ती लोगों की अंतिम संख्या प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया जाना बाकी है।
नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्रों की अलग मांगें
इस पूरे प्रदर्शन में बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज से जुड़े नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं का मुद्दा भी प्रमुख रहा। छात्रों ने परीक्षा परिणाम और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े विषयों को लेकर विरोध जताया।
प्रदर्शनकारी छात्रों का दावा है कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी परीक्षा में असफल हुए हैं। कुछ रिपोर्टों में करीब 80 प्रतिशत छात्रों के फेल होने का दावा किया गया है। छात्र परीक्षा परिणाम की समीक्षा और विश्वविद्यालय के कुलपति को हटाने जैसी मांगें उठा रहे हैं। हालांकि 80 प्रतिशत छात्रों के फेल होने के आंकड़े की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं हुई है, इसलिए इसे छात्रों का दावा माना जा रहा है।
छात्रों का कहना है कि परीक्षा परिणाम का सीधा असर उनके शैक्षणिक भविष्य पर पड़ रहा है। इसी वजह से वे विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले की समीक्षा और समाधान की मांग कर रहे हैं।
लाठीचार्ज में कई छात्रों के घायल होने का दावा
डाकबंगला चौराहे पर पुलिस की कार्रवाई के बाद कई प्रदर्शनकारियों ने घायल होने की बात कही। कुछ छात्राओं के बेहोश होने की खबर भी सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ घायल प्रदर्शनकारियों को अस्पताल ले जाया गया।
हालांकि प्रदर्शन के दौरान घायल लोगों की संख्या और चोटों की गंभीरता को लेकर अभी अलग-अलग जानकारी सामने आ रही है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी आधिकारिक तौर पर कुल घायलों की एक निश्चित संख्या सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि कुल कितने लोग घायल हुए।
एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर जरूरत से अधिक बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, पुलिस की कार्रवाई से पहले प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड हटाने और आगे बढ़ने की कोशिश की गई थी। इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी की भी रिपोर्ट सामने आई है।
पुलिस अधिकारी के हेलमेट पर लगा पत्थर
प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी की घटना भी सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, पटना ग्रामीण एसपी कोमल मीणा के हेलमेट पर पत्थर लगा। हेलमेट पहने होने के कारण गंभीर चोट से बचाव हुआ, हालांकि घटना के दौरान उनके घायल होने की सूचना सामने आई है।
पत्थरबाजी की घटना के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए फिर से बल प्रयोग किया। इसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
डाकबंगला चौराहे को कराया गया खाली
लगातार बढ़ते तनाव के बाद प्रशासन ने डाकबंगला चौराहे को खाली कराने की कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग दिशाओं में पीछे हटाया। कुछ लोगों को पुलिस बसों में बैठाकर हिरासत में ले जाया गया।
दोपहर बाद तक डाकबंगला चौराहे पर पुलिस की मौजूदगी काफी बढ़ गई थी। पुलिस ने इलाके में स्थिति सामान्य करने की कोशिश की। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 3 बजे के आसपास डाकबंगला क्षेत्र को प्रदर्शनकारियों से खाली करा लिया गया।
प्रदर्शन के कारण पटना के कई प्रमुख रास्तों पर यातायात प्रभावित हुआ। प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया था ताकि स्थिति दोबारा न बिगड़े।
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें?
प्रदर्शनकारी संगठनों की ओर से अलग-अलग मुद्दों को लेकर मांगें उठाई गईं। इनमें बाढ़ पीड़ितों को राहत और मुआवजा, महंगाई पर नियंत्रण, बेरोजगारों को रोजगार और किसानों की समस्याओं के समाधान जैसे मुद्दे शामिल हैं।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में नई उर्वरक नीति में बदलाव, नई शिक्षा नीति का विरोध, शुल्क वृद्धि और चार लेबर कोड को वापस लेने की मांग भी शामिल बताई गई है। इसके अलावा कृषि ऋण माफी और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग भी उठाई गई।
बेरोजगारों और बुजुर्गों के लिए 10 हजार रुपये मासिक पेंशन देने की मांग भी प्रदर्शन के प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। इसके अलावा भ्रष्टाचार, अपराध और महंगाई पर नियंत्रण की मांग को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की।
कई संगठनों की रही भागीदारी
इस प्रदर्शन में किसान, मजदूर, छात्र, महिला और कर्मचारी संगठनों से जुड़े लोगों की भागीदारी रही। रिपोर्टों में अखिल भारतीय किसान सभा, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, महिला संगठनों, रसोइया संघ, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका संगठनों और खेत मजदूर संगठनों का उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं का आंदोलन भी इसी दौरान पटना की सड़कों पर दिखाई दिया। अलग-अलग संगठनों की मांगें भले अलग रही हों, लेकिन सोमवार को राजधानी में इन प्रदर्शनों के कारण पुलिस-प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई।
आगे क्या होगा?
पटना में हुए इस प्रदर्शन के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि घायल छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों की स्थिति क्या है तथा हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ पुलिस क्या कार्रवाई करती है। दूसरी ओर, नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्र परीक्षा परिणाम से जुड़े अपने मुद्दों पर आगे की रणनीति बना सकते हैं।
वहीं किसान और मजदूर संगठनों ने बाढ़, बेरोजगारी, महंगाई, कृषि और श्रमिकों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं। प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प, पुलिस के बल प्रयोग और पत्थरबाजी की घटनाओं को लेकर भी आगे प्रशासनिक स्तर पर जानकारी सामने आ सकती है।
फिलहाल सोमवार की घटना ने पटना के डाकबंगला चौराहे और आसपास के इलाकों में कई घंटे तक तनाव की स्थिति बनाए रखी। पुलिस की कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा दिया गया, लेकिन जिन मुद्दों को लेकर आंदोलन किया गया था, वे अब भी चर्चा के केंद्र में हैं।

कोई टिप्पणी नहीं