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नेपाल में कुछ सेकेंड में ढह गया पूरा पहाड़, काली गंडकी में समाया मलबा… 24 मौतों के बाद बढ़ी दहशत

 


काठमांडू: नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश ने एक बार फिर तबाही मचा दी है। बाढ़ और भूस्खलन के बीच सामने आए एक खौफनाक वीडियो ने लोगों को हैरान कर दिया है। वीडियो में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे गिरता दिखाई दे रहा है और कुछ ही सेकेंड में चट्टानों, मिट्टी और मलबे का पूरा ढेर काली गंडकी नदी में समा जाता है। आसपास मौजूद लोगों की चीख-पुकार के बीच देखते ही देखते नदी का रास्ता मलबे से भर जाता है।

नेपाल के कई पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। कई जगह नदियां उफान पर हैं तो कहीं पहाड़ों से मलबा और चट्टानें नीचे गिर रही हैं। बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने की खबर है, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। घरों, सड़कों और पुलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

कुछ सेकेंड में ढह गया पूरा पहाड़

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में पहाड़ की ढलान शुरुआत में सामान्य दिखाई देती है। इसके बाद अचानक ऊपर का हिस्सा टूटने लगता है। देखते ही देखते मिट्टी और बड़े-बड़े पत्थरों का मलबा तेजी से ढलान से नीचे की ओर आने लगता है।

भूस्खलन की रफ्तार इतनी तेज थी कि कुछ ही पलों में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा काली गंडकी नदी में जा गिरा। नदी के किनारे मौजूद लोग इस दृश्य को देखकर घबरा गए। आसपास से लोगों के चिल्लाने की आवाजें सुनाई देती हैं।

पहाड़ से गिरा मलबा सीधे नदी में पहुंचने के कारण कुछ समय के लिए नदी का प्रवाह भी प्रभावित हुआ। इस घटना ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि लगातार बारिश के दौरान नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक भूस्खलन कितना खतरनाक हो सकता है।

लगातार बारिश से बिगड़े हालात

नेपाल में पिछले कई दिनों से भारी बारिश का दौर जारी है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश होने के कारण जमीन के भीतर पानी की मात्रा बढ़ गई है। इससे मिट्टी और चट्टानों की पकड़ कमजोर होने पर भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है।

कई इलाकों में बारिश के कारण छोटी-बड़ी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा और बढ़ गया है। वहीं पहाड़ी सड़कों पर मलबा आने के कारण कई रास्ते बंद हो गए हैं।

प्रशासन और राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटी हैं। हालांकि कई जगह सड़क संपर्क टूट जाने के कारण राहत और बचाव कार्य में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं।

पांच जिलों में सबसे ज्यादा तबाही

नेपाल के मनांग, म्याग्दी, बागलुंग, पर्वत और पाल्पा जिले भारी बारिश और भूस्खलन से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में बताए जा रहे हैं। इन क्षेत्रों में घरों को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं।

उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक बागलुंग में 10 लोगों की मौत हुई है, जबकि म्याग्दी में 6 और मनांग में 2 लोगों की जान गई है। लुंबिनी प्रांत के पाल्पा में भी 5 लोगों की मौत की सूचना है। इसके अलावा धनुषा जिले की मिथिला नगरपालिका में भूस्खलन की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत बताई गई है।

कई लोग अभी भी लापता हैं। इनमें मनांग, म्याग्दी और बागलुंग के लोग शामिल बताए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से लापता लोगों की तलाश के लिए राहत और बचाव दलों को लगाया गया है।

हालांकि अलग-अलग समय पर जारी सरकारी और मीडिया रिपोर्टों में मृतकों और लापता लोगों की संख्या में अंतर देखने को मिल रहा है। राहत अभियान आगे बढ़ने के साथ इन आंकड़ों में बदलाव की संभावना है।

747 परिवारों पर टूटा बारिश का कहर

भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन का सीधा असर सैकड़ों परिवारों पर पड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 747 परिवार प्रभावित हुए हैं। बड़ी संख्या में घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि कई मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।

गंडकी क्षेत्र में नुकसान काफी ज्यादा बताया जा रहा है। यहां कई मकान पूरी तरह तबाह हुए हैं और बड़ी संख्या में अन्य घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है। करीब 1,500 लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

पर्वत जिले में भी भारी नुकसान की सूचना है। यहां बड़ी संख्या में घर पूरी तरह नष्ट हुए हैं। घरों के क्षतिग्रस्त होने के कारण कई परिवारों के सामने रहने और खाने-पीने की समस्या खड़ी हो गई है।

काली गंडकी नदी का बढ़ा खतरा

काली गंडकी नदी नेपाल की प्रमुख नदियों में से एक है। भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ-साथ आसपास के इलाकों में भी खतरा बढ़ गया है।

इसी नदी में पहाड़ का बड़ा हिस्सा गिरने की घटना ने लोगों को और डरा दिया है। नदी में भारी मात्रा में मलबा आने से जलप्रवाह प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। यदि बड़ी मात्रा में मलबा नदी के रास्ते में जमा हो जाए तो अचानक पानी का दबाव बढ़ सकता है और आसपास के इलाकों में खतरा पैदा हो सकता है।

काली गंडकी नदी से जुड़े कई इलाकों में बाढ़ और कटाव की स्थिति भी सामने आई है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को प्रशासन की ओर से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।

सड़क और पुलों को भी भारी नुकसान

प्राकृतिक आपदा का असर नेपाल के परिवहन नेटवर्क पर भी पड़ा है। कई जगह सड़कें मलबे से बंद हो गई हैं। पुलों के क्षतिग्रस्त होने से गांवों और शहरों के बीच संपर्क प्रभावित हुआ है।

पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कें पहले से ही कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच बनी होती हैं। ऐसे में भारी बारिश के बाद जब चट्टानें और मिट्टी सड़क पर गिरती हैं तो आवाजाही पूरी तरह रुक सकती है।

राहत टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि प्रभावित इलाकों तक जल्द से जल्द पहुंचकर लोगों को सुरक्षित निकाला जाए। जहां सड़कें बंद हैं, वहां वैकल्पिक रास्तों की तलाश की जा रही है।

हजारों लोगों के सामने विस्थापन का संकट

भूस्खलन और बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। कई लोग फिलहाल सुरक्षित स्थानों या अस्थायी राहत केंद्रों में रह रहे हैं।

जिन परिवारों के घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उनके सामने आने वाले दिनों में रहने की बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। बारिश का दौर जारी रहने की स्थिति में नए भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है।

प्रशासन के लिए चुनौती सिर्फ प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देने की नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थायी रूप से बसाने और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा तैयार करने की भी होगी।

राहत और बचाव अभियान जारी

नेपाल में स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियां और राहत दल प्रभावित इलाकों में अभियान चला रहे हैं। लापता लोगों की तलाश की जा रही है और जोखिम वाले क्षेत्रों से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

बारिश के कारण कई इलाकों में बचाव कार्य प्रभावित भी हो सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में खराब मौसम के कारण राहत सामग्री पहुंचाना और घायलों को अस्पताल तक ले जाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लोगों की जान बचाने, लापता लोगों की तलाश करने और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता पहुंचाने की है।

काठमांडू तक दिखा बारिश का असर

भारी बारिश का असर सिर्फ पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं रहा। राजधानी काठमांडू में भी बारिश से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। बाजारों में सब्जियों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी असर पड़ने की खबरें सामने आई हैं।

सड़क संपर्क प्रभावित होने से पहाड़ी इलाकों से राजधानी और दूसरे शहरों तक सामान पहुंचाने में दिक्कत आ सकती है। इसका असर आने वाले दिनों में बाजारों पर भी दिखाई दे सकता है।

आने वाले दिनों में भी खतरा बरकरार

नेपाल की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बना रहता है। पहाड़ी क्षेत्रों में जमीन खिसकने की घटनाएं अचानक हो सकती हैं। यही वजह है कि प्रशासन प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा रहा है।

काली गंडकी नदी में पहाड़ के गिरने का वीडियो इसी खतरे की एक भयावह तस्वीर सामने रखता है। कुछ ही सेकेंड में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा नीचे आ गया और नदी में समा गया। इस घटना ने आसपास रहने वाले लोगों के साथ-साथ राहत एजेंसियों की चिंता भी बढ़ा दी है।

फिलहाल नेपाल में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है। मृतकों और लापता लोगों की संख्या में आगे बदलाव हो सकता है। सबसे बड़ी चुनौती उन परिवारों तक मदद पहुंचाना है, जिन्होंने इस प्राकृतिक आपदा में अपने घर और अपनों को खो दिया है।

नेपाल में पहाड़ से मलबा गिरने की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि भारी बारिश के दौरान पहाड़ी इलाकों में हालात कितनी तेजी से बदल सकते हैं। कुछ सेकेंड पहले जहां पहाड़ स्थिर दिखाई दे रहा था, वहीं अगले ही पल उसका बड़ा हिस्सा नदी में समा गया। इस खौफनाक घटना के बाद अब प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है।

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