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तीन बजे घर लौटना पड़ा भारी… पत्नी को आशिक संग देखा तो उसी रात रची गई मौत की साजिश, 12 घंटे घर में छिपी रही लाश



सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के शक्तिनगर थाना क्षेत्र से सामने आया एक सनसनीखेज हत्याकांड प्रेम संबंध, विश्वासघात और कथित तौर पर करोड़ों रुपये के आर्थिक लाभ की साजिश से जुड़ा बताया जा रहा है। एनसीएल बीना परियोजना में सीनियर ओवरमैन के पद पर तैनात रमाशंकर मिश्रा की मौत को पहले सड़क हादसा बताने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो कहानी कुछ और ही निकली। पुलिस के मुताबिक, मृतक की पत्नी प्रियंका मिश्रा का विकास चौहान नामक युवक से प्रेम संबंध था। आरोप है कि 22 अगस्त को रमाशंकर अचानक तय समय से पहले घर पहुंच गए और वहां पत्नी को विकास के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया। इसके बाद विवाद हुआ और कथित तौर पर दोनों ने मिलकर रमाशंकर की हत्या कर दी।

हत्या के बाद वारदात को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई। पुलिस का दावा है कि शव को करीब 12 घंटे तक घर के अंदर छिपाकर रखा गया और रात में उसे बाहर ले जाकर सड़क पर रखा गया। इसके बाद कार से शव को कुचलकर ऐसा दिखाने का प्रयास किया गया कि रमाशंकर की मौत सड़क दुर्घटना में हुई है। मामले में पुलिस ने मृतक की पत्नी प्रियंका मिश्रा, उसके कथित प्रेमी विकास चौहान समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

तय समय से दो घंटे पहले घर पहुंचे थे रमाशंकर

मूल रूप से मध्य प्रदेश के रीवा जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के बेलवा बड़गैय्यान निवासी रमाशंकर मिश्रा पुत्र द्वारिका प्रसाद मिश्रा एनसीएल बीना में सीनियर ओवरमैन के पद पर कार्यरत थे। उनकी सामान्य ड्यूटी शाम करीब चार बजे समाप्त होती थी और वह लगभग पांच बजे तक बीना कॉलोनी स्थित अपने आवास बी-264 पहुंचते थे।

लेकिन 22 अगस्त को शनिवार होने के कारण उनकी ड्यूटी जल्दी खत्म हो गई। वह सामान्य समय से पहले ही घर पहुंच गए। पुलिस जांच के अनुसार, घर पहुंचने पर उन्होंने पत्नी प्रियंका मिश्रा और विकास चौहान को कथित रूप से आपत्तिजनक स्थिति में देखा। अचानक हुए इस घटनाक्रम के बाद घर में विवाद शुरू हो गया।

पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान स्थिति इतनी बिगड़ गई कि रमाशंकर पर हमला किया गया। जांच में सामने आया कि उनका गला दबाया गया और जमीन पर सिर पटककर उन्हें गंभीर रूप से घायल किया गया। बाद में उनकी मौत हो गई।

घर में करीब 12 घंटे छिपाकर रखा गया शव

पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद आरोपियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती शव को ठिकाने लगाने की थी। आरोप है कि वारदात को तत्काल बाहर ले जाने के बजाय शव को लगभग 12 घंटे तक आवास के अंदर ही छिपाकर रखा गया।

इस दौरान घटना को सामान्य दिखाने और किसी को शक न हो, इसके लिए कथित तौर पर योजना बनाई गई। बाद में शव को चादर और गमछे में लपेटकर घर से बाहर ले जाया गया।

जांच में पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि शव को सड़क किनारे रखकर दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई। पुलिस का दावा है कि एक ब्रेजा कार को शव के ऊपर दो बार आगे-पीछे किया गया, ताकि शरीर पर ऐसी चोटें दिखाई दें जिनसे प्रथम दृष्टया सड़क हादसे की कहानी बनाई जा सके।

सड़क हादसे की कहानी पर पुलिस को क्यों हुआ शक?

घटना की सूचना मिलने के बाद शुरुआती तौर पर मामला सड़क दुर्घटना जैसा प्रतीत हुआ, लेकिन घटनास्थल की परिस्थितियों ने पुलिस को संदेह में डाल दिया। शव की स्थिति, चोटों के स्वरूप, वाहन और घटनास्थल से जुड़े भौतिक साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण किया गया।

मृतक के जूतों का अलग-अलग स्थानों पर मिलना और घटनास्थल से जुड़े अन्य तथ्य भी पुलिस की जांच का हिस्सा बने। पुलिस ने दुर्घटना की सामान्य कहानी मानने के बजाय हर पहलू से जांच शुरू की।

इसके बाद मृतक और संदिग्ध लोगों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच की गई। तकनीकी साक्ष्यों को घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों तथा अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों से मिलाया गया। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को घटना के पीछे प्रेम संबंध और कथित साजिश की कड़ियां मिलती गईं।

पत्नी और विकास के रिश्ते ने खोला हत्या का राज

पुलिस की जांच में मृतक की पत्नी प्रियंका मिश्रा और विकास चौहान के बीच कथित प्रेम संबंध की बात सामने आई। जांच के दौरान पुलिस ने दोनों से पूछताछ की और घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों को एक-दूसरे से मिलाया।

पुलिस के अनुसार, 22 अगस्त को रमाशंकर के अचानक घर पहुंचने के बाद दोनों के सामने स्थिति बिगड़ गई। इसके बाद कथित तौर पर रमाशंकर की हत्या कर दी गई। हत्या के बाद शव को छिपाने और फिर सड़क दुर्घटना का रूप देने की योजना पर काम किया गया।

पुलिस ने इस मामले में विकास चौहान के अलावा अनुराग सिंह उर्फ बादल और सोनू गुप्ता को भी आरोपी बनाया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों पर शव को ठिकाने लगाने और घटना को दुर्घटना जैसा दिखाने में सहयोग करने का आरोप है।

बीमा और फंड की रकम पर भी पुलिस की नजर

इस हत्याकांड की सबसे चौंकाने वाली कड़ी आर्थिक लाभ से जुड़ी बताई जा रही है। पुलिस की जांच में कथित तौर पर यह पहलू भी सामने आया कि दुर्घटना का रूप देकर मृतक के बीमा या एनसीएल से मिलने वाली अन्य वित्तीय राशि पर नजर थी।

मृतक के पिता ने भी आरोप लगाया है कि उनके बेटे की मृत्यु के बाद कुछ लोग मृतक आश्रित के रूप में मिलने वाली नौकरी, जमीन-जायदाद और अन्य आर्थिक लाभ हासिल करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि इन आरोपों में किसकी कितनी भूमिका थी, इसका अंतिम निर्धारण पुलिस की विवेचना और न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

एनसीएल में कार्यरत कर्मचारी की मौत से जुड़े होने के कारण मामले में आर्थिक लाभ का यह पहलू भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस ने घटना से जुड़े सभी संभावित आर्थिक कारणों की जांच शुरू कर दी है।

दोनों बेटियों के सामने हुआ पूरा घटनाक्रम?

मामले का एक बेहद संवेदनशील पहलू मृतक की दोनों बेटियों से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों बेटियां घटना के दौरान वहां मौजूद थीं और उन्होंने घटनाक्रम को देखा। यह आरोप भी सामने आया है कि बेटियों को कथित तौर पर डराकर रखा जाता था।

हालांकि इस संबंध में बच्चों के बयान और उनकी भूमिका से जुड़ी जानकारी पुलिस की जांच का विषय है। ऐसे मामलों में बच्चों के बयान को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ दर्ज किया जाना महत्वपूर्ण होता है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि बेटियों ने क्या देखा, घटना से पहले घर में क्या हुआ और हत्या के बाद उनसे क्या कहा गया।

चार आरोपी गिरफ्तार, 24 घंटे में खुलासा

शक्तिनगर थाना पुलिस के मुताबिक, मुकदमा अपराध संख्या 162/2026 धारा 103(2)/238 बीएनएस के तहत दर्ज किया गया। पुलिस ने दावा किया कि मुकदमा दर्ज होने के 24 घंटे के भीतर ही मामले का खुलासा कर दिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों में मृतक की पत्नी प्रियंका मिश्रा, कथित प्रेमी विकास चौहान, अनुराग सिंह उर्फ बादल और सोनू गुप्ता शामिल हैं।

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटना से संबंधित ब्रेजा कार संख्या UP 64 AZ 75-66, शव को लपेटने में इस्तेमाल की गई एक डबल बेड की चादर और दो गमछे बरामद किए हैं। पुलिस ने इन वस्तुओं को विवेचना में महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर शामिल किया है।

पुलिस टीम ने ऐसे जोड़ीं हत्या की कड़ियां

प्रभारी निरीक्षक सत्येंद्र कुमार राय के नेतृत्व में शक्तिनगर पुलिस ने मामले की जांच की। बीना चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक अजय कुमार श्रीवास्तव और पुलिस टीम के अन्य सदस्यों ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।

पुलिस के अनुसार, शुरुआत में जो मामला सड़क दुर्घटना जैसा दिखाई दे रहा था, उसकी परतें खुलने के बाद हत्या की कहानी सामने आई। तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को आपस में जोड़ने पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची।

अब कई सवालों के जवाब बाकी

चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी इस मामले में कई सवालों के जवाब पुलिस की विवेचना में सामने आने बाकी हैं। हत्या की पूरी योजना कब बनी? इसमें कितने लोग शामिल थे? आर्थिक लाभ की वास्तविक योजना क्या थी? मृतक के बीमा, एनसीएल फंड और मृतक आश्रित नौकरी को लेकर किस स्तर तक साजिश रची गई थी? बेटियों ने घटना के दौरान क्या देखा? इन तमाम सवालों की जांच अभी जारी है।

फिलहाल पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को जेल भेज दिया है और मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई चल रही है। अदालत में आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने बीना कॉलोनी समेत शक्तिनगर क्षेत्र में लोगों को झकझोर दिया है। जिस मौत को शुरुआत में सड़क हादसा समझा गया, उसके पीछे कथित तौर पर रिश्तों की दरार, प्रेम संबंध और आर्थिक फायदे की साजिश सामने आने से मामला बेहद सनसनीखेज बन गया है।

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