Breaking News

चप्पल पकड़ने 2 कदम बढ़ा 12 साल का हम्माद… बारिश के पानी के नीचे छिपी थी मौत, 500 मीटर दूर पाइप में मिला शव



बिजनौर। बारिश के मौसम में सड़क पर जमा पानी कई बार सिर्फ परेशानी नहीं, बल्कि जानलेवा खतरा भी बन जाता है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के किरतपुर में शनिवार को ऐसा ही दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां बारिश के पानी ने सड़क किनारे मौजूद एक खुले नाले को पूरी तरह ढक दिया। 12 वर्षीय हम्माद को अंदाजा भी नहीं था कि जिस रास्ते से वह गुजर रहा है, वहां कुछ कदम आगे मौत उसका इंतजार कर रही है। बारिश के पानी में उसकी चप्पल बह गई। उसे पकड़ने के लिए जैसे ही वह आगे बढ़ा, उसका पैर खुले नाले में चला गया। देखते ही देखते तेज बहाव उसे अपने साथ बहाकर ले गया।

स्थानीय लोगों ने बच्चे को बचाने की कोशिश की। नाले में उसकी तलाश शुरू हुई। काफी मशक्कत के बाद घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर एक पाइप में हम्माद फंसा हुआ मिला। लोगों ने उसे बाहर निकालने का प्रयास किया और पाइप से बाहर निकालने का पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हुआ। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। हम्माद की सांसें थम चुकी थीं।

इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। जिस बच्चे के घर लौटने का इंतजार किया जा रहा था, उसकी मौत की खबर पहुंचते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। हादसे ने इलाके के लोगों को भी झकझोर दिया है और बारिश के दौरान खुले नालों तथा जलभराव की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बारिश ने छिपा दिया था सड़क किनारे का खुला नाला

दर्दनाक हादसा किरतपुर थाना क्षेत्र के मोहल्ला अंसारियान में हुआ। शनिवार को इलाके में तेज बारिश हो रही थी। लगातार बारिश के कारण सड़क पर पानी भर गया था। पानी का स्तर इतना बढ़ गया था कि सड़क किनारे मौजूद खुला नाला दिखाई देना मुश्किल हो गया था।

मोहल्ला अंसारियान निवासी अफजल का 12 वर्षीय बेटा हम्माद ईदगाह रोड की तरफ जा रहा था। बताया जा रहा है कि जब वह इस्लामिया इंटर कॉलेज के गेट के सामने पहुंचा तो बारिश के पानी में उसकी चप्पल बह गई। चप्पल को बहते देखकर बच्चा उसे पकड़ने के लिए आगे बढ़ा।

उसे क्या पता था कि पानी के नीचे सड़क नहीं, बल्कि खुला नाला है।

जैसे ही हम्माद का पैर नाले में गया, वह अपना संतुलन खो बैठा और तेज बहाव के साथ नाले में गिर गया। बारिश के पानी का बहाव इतना तेज था कि बच्चे को संभलने या बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।

कुछ ही सेकेंड में पानी में गायब हो गया बच्चा

इस हादसे को देखकर आसपास मौजूद लोग भी घबरा गए। इस्लामिया इंटर कॉलेज के गेट के सामने सब्जी की ठेली लगाने वाले कुछ लोगों ने हम्माद को नाले में गिरते और बहते हुए देखा। उन्होंने शोर मचाकर आसपास के लोगों को घटना की जानकारी दी।

इसके बाद मौके पर भीड़ जमा होने लगी। लोगों ने तत्काल बच्चे की तलाश शुरू की। जिस दिशा में पानी बह रहा था, उसी दिशा में लोग नाले के किनारे तलाश करते हुए आगे बढ़ने लगे।

बारिश लगातार हो रही थी और पानी का बहाव भी तेज था। ऐसे में बच्चे को ढूंढना बेहद मुश्किल था। लोगों को आशंका थी कि तेज बहाव हम्माद को काफी दूर तक बहाकर ले गया होगा।

स्थानीय लोगों ने नाले, पानी के बहाव वाले रास्तों और आसपास के हिस्सों में तलाश जारी रखी।

500 मीटर दूर पाइप में फंसा मिला हम्माद

काफी देर तक तलाश करने के बाद घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर एक पाइप के पास लोगों को हम्माद के फंसे होने का पता चला। वह पाइप में फंसा हुआ था।

लोगों ने किसी तरह उसे बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। आसपास मौजूद लोगों ने मिलकर बच्चे को पाइप से बाहर निकाला। इस पूरी कोशिश का घटनाक्रम सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गया।

सीसीटीवी फुटेज में स्थानीय लोग पाइप के पास पहुंचते और बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश करते दिखाई देते हैं। लोग उम्मीद कर रहे थे कि शायद हम्माद की सांसें चल रही होंगी और समय रहते उसे बचाया जा सकेगा।

लेकिन बच्चे को बाहर निकालने के बाद स्थिति बेहद दुखद थी। उसकी मौत हो चुकी थी।

कुछ देर पहले तक जिस बच्चे को लोग बचाने के लिए पानी में तलाश कर रहे थे, वही बच्चा जिंदगी की जंग हार चुका था।

घर में मचा चीख-पुकार, पिता चलाते हैं रिक्शा

हम्माद की मौत की खबर जैसे ही उसके परिवार तक पहुंची, घर में चीख-पुकार मच गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अचानक हुए इस हादसे ने परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया।

बताया गया है कि हम्माद दो भाइयों में से एक था। उसके पिता अफजल रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार के लिए हम्माद सिर्फ एक बच्चा नहीं, बल्कि घर की खुशियों का हिस्सा था।

सुबह तक जिस घर में सामान्य दिन की तरह जिंदगी चल रही थी, कुछ ही घंटों बाद वहां मातम पसर गया। परिवार को यह यकीन करना मुश्किल हो रहा था कि जिस बच्चे को कुछ देर पहले तक वह अपने सामने देख रहे थे, वह अब उनके बीच नहीं रहा।

बारिश का वह पानी, चप्पल और खुला नाला परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया।

सड़क पर पानी बना मौत का रास्ता

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी भी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान इलाके की सड़कों पर पानी भर जाता है। सड़क किनारे बने खुले नाले इस पानी में पूरी तरह छिप जाते हैं।

ऐसी स्थिति में राहगीरों को यह पता ही नहीं चल पाता कि कहां सड़क खत्म हो रही है और कहां खुला नाला शुरू हो रहा है।

सबसे ज्यादा खतरा बच्चों, बुजुर्गों और उन लोगों के लिए रहता है जिन्हें इलाके की भौगोलिक स्थिति की जानकारी नहीं होती। पानी की सतह एक जैसी दिखाई देने के कारण कोई भी व्यक्ति अनजाने में खुले नाले की तरफ जा सकता है।

हम्माद के साथ हुआ हादसा इसी खतरे की गंभीर तस्वीर सामने रखता है।

क्या हादसे का इंतजार कर रहा था प्रशासन?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नाले को सुरक्षित तरीके से ढका गया होता या जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया गया होता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

अब सवाल यह है कि बारिश के दौरान जलभराव वाले स्थानों को पहले से चिन्हित क्यों नहीं किया गया? खुले नालों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई? सड़क पर इतना पानी जमा होने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित रास्ता दिखाने के लिए कोई व्यवस्था क्यों नहीं थी?

इन सवालों का जवाब प्रशासन और संबंधित विभागों से मांगा जा रहा है।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि क्षेत्र में मौजूद सभी खुले नालों का सर्वे कराया जाए और जहां भी खतरा है, वहां उन्हें तत्काल ढका जाए। इसके अलावा जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त करने की भी मांग की गई है।

सिर्फ एक हादसा नहीं, व्यवस्था के लिए चेतावनी

किरतपुर में 12 वर्षीय हम्माद की मौत को सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा मानकर भूल जाना शायद इस घटना का सबसे बड़ा सबक नजरअंदाज करना होगा। बारिश के मौसम में देश के कई शहरों और कस्बों में जलभराव की समस्या सामने आती है। लेकिन जब जलभराव खुले नालों, गड्ढों और टूटे रास्तों को छिपा देता है, तब सामान्य सड़क भी जानलेवा बन सकती है।

हम्माद चप्पल पकड़ने के लिए सिर्फ कुछ कदम आगे बढ़ा था। उसे नहीं मालूम था कि बारिश के पानी के नीचे एक खुला नाला मौजूद है। तेज बहाव उसे करीब 500 मीटर दूर तक बहाकर ले गया और आखिरकार वह पाइप में फंसा मिला।

इस हादसे ने एक परिवार से उसका 12 साल का बेटा छीन लिया। अब परिवार के पास सिर्फ यादें हैं और स्थानीय लोगों के पास कई सवाल।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हर बारिश के बाद किसी और हम्माद के साथ ऐसा हादसा होने का इंतजार किया जाएगा, या खुले नालों और जलभराव के खिलाफ समय रहते ठोस कदम उठाए जाएंगे?

किरतपुर की यह घटना प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि बारिश के पानी की निकासी के साथ-साथ उन जगहों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए, जहां पानी जमा होने से सड़क के नीचे छिपे खतरे दिखाई नहीं देते। अगर समय रहते ऐसे स्थानों को सुरक्षित नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में कोई और परिवार इसी तरह अपने बच्चे को खो सकता है।

कोई टिप्पणी नहीं