चीन से जंग की तैयारी? अमेरिका ने चला ऐसा हथियार वाला दांव, हजारों ‘एंथम’ मिसाइलें बनेंगी; दुनिया की बढ़ी टेंशन!
दुनिया के रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल के संघर्षों में बड़ी मात्रा में लंबी दूरी के हथियारों के इस्तेमाल के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के सामने हथियारों के भंडार और उत्पादन क्षमता को लेकर नई चिंता खड़ी हुई है। इसी बीच अमेरिकी डिफेंस स्टार्टअप कोवेनेंट ने एक ऐसी लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल पेश की है, जिसे कम लागत में बड़े पैमाने पर तैयार करने की योजना है।
कंपनी ने अपनी नई ‘एंथम’ मिसाइल को पेश करते हुए इसे लंबी दूरी और भारी पेलोड वाली क्रूज मिसाइल बताया है। कोवेनेंट का लक्ष्य इस हथियार को हजारों की संख्या में तैयार करना है। कंपनी अमेरिका, जर्मनी और इजराइल में उत्पादन सुविधाएं विकसित कर रही है। जर्मनी के सैक्सोनी क्षेत्र में इसका उत्पादन 2027 से शुरू करने की योजना बताई गई है।
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि कंपनी की प्रेसिडेंट एबी डेनबर्ग के मुताबिक, एंथम को चीन के खिलाफ संभावित इंडो-पैसिफिक संघर्ष को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इससे यह मिसाइल सिर्फ एक नए हथियार के तौर पर नहीं, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की भविष्य की सैन्य रणनीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
क्या है एंथम मिसाइल?
एंथम एक ग्राउंड-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल है। इसे इस तरह विकसित करने का दावा किया गया है कि यह भारी पेलोड ले जा सके और अपेक्षाकृत कम कीमत पर बड़ी संख्या में तैयार की जा सके।
कंपनी के मुताबिक, मिसाइल 200 किलोग्राम से अधिक का वॉरहेड ले जाने में सक्षम है। इसकी सटीक अधिकतम रेंज सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए इसकी तुलना मौजूदा लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों से करते समय सावधानी जरूरी है।
कंपनी का दावा है कि पिछले एक साल में एंथम के 200 से ज्यादा टेस्ट फ्लाइट किए जा चुके हैं। इन परीक्षणों का उद्देश्य मिसाइल की तकनीक और विश्वसनीयता को लगातार बेहतर करना बताया गया है।
लॉन्च के लिए रॉकेट, उड़ान के लिए जेट इंजन
एंथम में लॉन्च और क्रूज उड़ान के लिए अलग-अलग प्रणोदन प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया है।
मिसाइल को लॉन्च के समय शुरुआती गति देने के लिए सॉलिड रॉकेट मोटर का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद क्रूज फ्लाइट के दौरान हेवी-फ्यूल जेट इंजन लंबी दूरी की उड़ान को बनाए रखने में मदद करता है।
इस तरह की व्यवस्था लंबी दूरी तक मिसाइल को स्थिर तरीके से उड़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। हालांकि इसकी वास्तविक युद्धक क्षमता और प्रदर्शन का आकलन व्यापक तैनाती के बाद ही किया जा सकेगा।
सबसे बड़ा दावा—कम कीमत
एंथम की सबसे खास बात इसकी कीमत बताई जा रही है।
कंपनी का लक्ष्य पूर्ण उत्पादन शुरू होने के बाद मिसाइल की कीमत को करीब 5 लाख डॉलर के स्तर पर रखने का है। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 4 से 4.5 करोड़ रुपये के आसपास बैठती है, हालांकि वास्तविक कीमत उत्पादन, अनुबंध और अन्य परिस्थितियों के आधार पर अलग हो सकती है।
अगर कंपनी अपने इस लक्ष्य को हासिल कर लेती है तो यह पारंपरिक महंगी क्रूज मिसाइलों की तुलना में काफी सस्ता विकल्प हो सकता है।
यही वजह है कि एंथम को लेकर रक्षा विशेषज्ञों की दिलचस्पी बढ़ी है। आधुनिक युद्ध में केवल अत्याधुनिक हथियार होना पर्याप्त नहीं है। लंबे संघर्ष में बड़ी संख्या में हथियारों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में कम कीमत पर बड़ी मात्रा में मिसाइल बनाना किसी भी देश की सैन्य क्षमता को बढ़ा सकता है।
ब्रह्मोस और टॉमहॉक से कितनी अलग?
एंथम की तुलना भारत-रूस की ब्रह्मोस और अमेरिका की टॉमहॉक जैसी क्रूज मिसाइलों से की जा रही है। हालांकि तीनों मिसाइलों का डिजाइन, भूमिका और परिचालन अवधारणा अलग है, इसलिए केवल कीमत या रेंज के आधार पर सीधी तुलना करना पूरी तरह सही नहीं होगा।
ब्रह्मोस अपनी बेहद तेज सुपरसोनिक गति के लिए जानी जाती है, जबकि टॉमहॉक लंबी दूरी की सबसोनिक क्रूज मिसाइल के रूप में इस्तेमाल होती रही है। एंथम का मुख्य जोर तेज गति के बजाय कम लागत और बड़े पैमाने पर उत्पादन पर दिखाई देता है।
यानी इसका लक्ष्य यह हो सकता है कि किसी संभावित बड़े संघर्ष में बड़ी संख्या में मिसाइलें उपलब्ध रहें और महंगे हथियारों के भंडार पर दबाव कम किया जा सके।
अमेरिका के हथियार भंडार को लेकर चिंता
हाल के वर्षों में हुए विभिन्न सैन्य संघर्षों ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के सामने हथियारों के भंडार को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
लंबी दूरी की मिसाइलों और एयर डिफेंस इंटरसेप्टर जैसे हथियारों की खपत बढ़ने से यह चिंता सामने आई है कि अगर किसी बड़ी सैन्य शक्ति के साथ लंबा युद्ध होता है तो मौजूदा उत्पादन क्षमता कितनी तेजी से हथियारों की भरपाई कर पाएगी।
यही कारण है कि अमेरिकी रक्षा क्षेत्र में अब ऐसी मिसाइलों पर जोर बढ़ रहा है जिन्हें कम समय में और बड़ी संख्या में बनाया जा सके।
एंथम इसी सोच का हिस्सा मानी जा रही है। कंपनी का दावा है कि उसने उत्पादन प्रक्रिया को शुरुआत से ही बड़े पैमाने पर निर्माण के हिसाब से तैयार किया है।
अमेरिका से जर्मनी तक बनेंगे उत्पादन केंद्र
कोवेनेंट केवल एक देश में उत्पादन पर निर्भर रहने के बजाय कई स्थानों पर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
अमेरिका के डलास में एक बड़े उत्पादन केंद्र की योजना है। इसकी पूरी क्षमता लगभग 5,000 मिसाइल प्रति वर्ष तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया गया है।
जर्मनी के सैक्सोनी में भी उत्पादन सुविधा विकसित की जा रही है। यहां 2027 में उत्पादन शुरू करने की योजना है। शुरुआती चरण में लगभग 1,000 मिसाइल प्रति वर्ष बनाने और बाद में उत्पादन क्षमता को करीब 5,000 प्रति वर्ष तक बढ़ाने का लक्ष्य बताया गया है।
उत्तरी इजराइल में भी एक उत्पादन केंद्र तैयार करने की योजना है, जिसकी क्षमता करीब 2,000 मिसाइल सालाना बताई गई है।
अगर ये सभी योजनाएं निर्धारित क्षमता तक पहुंचती हैं तो कंपनी की कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता हजारों मिसाइलों तक पहुंच सकती है।
सप्लाई चेन को मजबूत करने की तैयारी
बड़े पैमाने पर मिसाइलों का उत्पादन करने के लिए सिर्फ फैक्ट्री काफी नहीं होती। इसके लिए इंजन, रॉकेट मोटर और दूसरे महत्वपूर्ण हिस्सों की लगातार आपूर्ति जरूरी होती है।
कोवेनेंट ने इसके लिए कई सप्लायरों के साथ समझौते करने की बात कही है। कंपनी के मुताबिक, उसने तीन सॉलिड-रॉकेट मोटर प्रदाताओं के साथ काम करने की व्यवस्था बनाई है।
इसके अलावा कंपनी ने हजारों जेट इंजनों की आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक समझौते किए हैं।
इसका उद्देश्य किसी एक सप्लायर पर निर्भरता कम करना और युद्ध जैसी स्थिति में उत्पादन को लगातार जारी रखना है।
चीन क्यों है निशाने पर?
एंथम को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सवाल चीन से जुड़ा हुआ है।
कंपनी की प्रेसिडेंट एबी डेनबर्ग के मुताबिक, इसे संभावित इंडो-पैसिफिक युद्ध को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। अमेरिका और चीन के बीच सैन्य प्रतिस्पर्धा पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में लंबी दूरी की मिसाइलों का महत्व इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि संभावित संघर्ष में बड़े समुद्री क्षेत्र, द्वीप और दूर-दराज के सैन्य ठिकाने शामिल हो सकते हैं।
ऐसे में कम कीमत पर बड़ी संख्या में लंबी दूरी की मिसाइलें उपलब्ध होना किसी देश को ज्यादा विकल्प दे सकता है।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि चीन के साथ युद्ध की कोई निश्चित स्थिति नहीं है। एंथम की भूमिका भी फिलहाल संभावित सैन्य परिदृश्यों और कंपनी की घोषित रणनीति के संदर्भ में ही देखी जानी चाहिए।
नौसैनिक संस्करण पर भी काम
कोवेनेंट एंथम का नौसैनिक संस्करण विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है।
अगर यह संस्करण सफल होता है तो मिसाइल को समुद्री प्लेटफॉर्म से भी इस्तेमाल करने की क्षमता विकसित हो सकती है। इससे भविष्य में इसकी भूमिका जमीन आधारित हमलों से आगे बढ़कर समुद्री सैन्य रणनीति में भी हो सकती है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को देखते हुए यह पहल खास महत्व रखती है, क्योंकि यहां समुद्री शक्ति और लंबी दूरी के हथियारों का संयोजन किसी भी संभावित संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
क्या एंथम सच में गेम चेंजर बनेगी?
एंथम को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह वास्तव में रक्षा क्षेत्र में गेम चेंजर साबित होगी।
कम कीमत और बड़े पैमाने पर उत्पादन की योजना निश्चित रूप से इसकी बड़ी ताकत है। लेकिन किसी भी मिसाइल की वास्तविक क्षमता सिर्फ उसके कागजी आंकड़ों से तय नहीं होती। उसकी विश्वसनीयता, सटीकता, उत्पादन की गुणवत्ता, लगातार सप्लाई और वास्तविक परिस्थितियों में प्रदर्शन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
कंपनी ने बड़ी संख्या में परीक्षण किए जाने का दावा किया है, लेकिन युद्ध के मैदान में इसका वास्तविक प्रदर्शन अभी सामने नहीं आया है।
फिर भी एंथम की अवधारणा एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करती है। भविष्य के बड़े युद्धों में केवल बेहद महंगी और सीमित संख्या वाली मिसाइलों पर निर्भर रहने के बजाय कम लागत वाली और बड़े पैमाने पर उत्पादित मिसाइलों की जरूरत बढ़ सकती है।
अगर कोवेनेंट अपनी घोषित उत्पादन क्षमता हासिल करने में सफल रहती है, तो अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए लंबी दूरी के हथियारों के भंडार को तेजी से बढ़ाने का यह एक नया रास्ता साबित हो सकता है।
और सबसे बड़ा सवाल अब यही है—क्या हजारों की संख्या में तैयार होने वाली एंथम मिसाइलें आने वाले समय में इंडो-पैसिफिक की सैन्य रणनीति बदल देंगी? इसका जवाब आने वाले वर्षों में इसकी तैनाती, परीक्षण और वास्तविक सैन्य उपयोग से ही स्पष्ट होगा।

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