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UP वालों हो जाओ तैयार! 5 राज्यों में चुनाव का काउंटडाउन शुरू, जानिए कब पड़ सकते हैं वोट?



लखनऊ। उत्तर प्रदेश समेत देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल अभी से तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। राजनीतिक दल जहां अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं अब चुनावी तैयारियों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी तस्वीर धीरे-धीरे साफ होती नजर आ रही है।

केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड के गैर-बर्फीले क्षेत्रों में जनगणना-2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना की तारीख आगे बढ़ा दी है। इन राज्यों में जनगणना अब 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 के बीच कराई जाएगी। इसके बाद 5 से 9 जनवरी 2027 तक संशोधन चरण चलेगा। जनगणना की यह कवायद चुनावी राज्यों में सरकारी कर्मचारियों की उपलब्धता को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इस फैसले के बाद संकेत मजबूत हुए हैं कि पांचों राज्यों में विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च 2027 के दौरान कराए जा सकते हैं। हालांकि मतदान की अंतिम तारीखों की घोषणा चुनाव आयोग ही करेगा।

जनगणना और चुनाव के बीच क्यों है इतना बड़ा कनेक्शन?

विधानसभा चुनाव और जनगणना दोनों ही बड़े प्रशासनिक अभियान हैं। दोनों कार्यों में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है। इनमें शिक्षक, राजस्व कर्मचारी और दूसरे विभागों के कर्मचारी भी शामिल होते हैं।

अगर जनगणना और विधानसभा चुनाव एक ही समय पर होते, तो कर्मचारियों की तैनाती को लेकर बड़ी प्रशासनिक चुनौती पैदा हो सकती थी। ऐसे में चार चुनावी राज्यों में जनसंख्या गणना को जनवरी की शुरुआत तक पूरा करने का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार की अधिसूचना के मुताबिक उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड के संबंधित क्षेत्रों में 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा। इसके बाद 1 दिसंबर से घर-घर जाकर जनसंख्या गणना शुरू होगी।

यानी जनवरी 2027 के पहले सप्ताह तक जनगणना का मुख्य काम पूरा करने की कोशिश होगी। इसके बाद चुनावी तैयारियों के लिए प्रशासनिक मशीनरी को पर्याप्त समय मिल सकेगा।

सबसे पहले मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल होगा खत्म

पांचों राज्यों में सबसे पहले मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल 13 मार्च 2027 को खत्म हो रहा है। इसके बाद गोवा विधानसभा का कार्यकाल 14 मार्च, पंजाब का 16 मार्च और उत्तराखंड का 28 मार्च 2027 को समाप्त होगा।

उत्तर प्रदेश की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल सबसे बाद में यानी 22 मई 2027 को समाप्त होगा।

भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी इन पांचों राज्यों की विधानसभा की कार्यकाल समाप्ति की तारीखें दर्ज हैं।

इस क्रम को देखते हुए चुनाव आयोग के सामने ऐसी स्थिति बनती है कि पांचों राज्यों के चुनावों की प्रक्रिया समय रहते पूरी करनी होगी, खासकर मणिपुर में नई विधानसभा का गठन 13 मार्च से पहले होना जरूरी होगा।

यूपी में कार्यकाल खत्म होने से करीब दो महीने पहले वोटिंग?

उत्तर प्रदेश इस चुनावी कवायद का सबसे बड़ा राज्य है। यूपी विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 22 मई 2027 को खत्म होना है। ऐसे में अगर फरवरी या मार्च 2027 में मतदान कराया जाता है, तो प्रदेश में विधानसभा चुनाव कार्यकाल खत्म होने से काफी पहले हो जाएंगे।

यूपी में 403 विधानसभा सीटें हैं और यह चुनाव राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण चुनावों में से एक माना जाएगा। चुनाव की संभावित टाइमिंग को देखते हुए राजनीतिक दलों को अगले कुछ महीनों में संगठन, उम्मीदवारों और चुनावी मुद्दों पर तेजी से काम करना होगा।

हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फरवरी-मार्च 2027 की संभावित अवधि का मतलब यह नहीं है कि चुनाव की तारीखें आधिकारिक रूप से घोषित हो चुकी हैं। अंतिम कार्यक्रम चुनाव आयोग द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद ही स्पष्ट होगा।

मणिपुर में जनगणना को लेकर अलग फैसला

चार राज्यों में जनगणना की तारीख आगे बढ़ाई गई है, जबकि मणिपुर में स्थिति अलग है। वहां मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए जनगणना के हाउस-लिस्टिंग ऑपरेशन को स्थगित किया गया है।

मणिपुर की विधानसभा का कार्यकाल पांचों राज्यों में सबसे पहले खत्म हो रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग के लिए राज्य में चुनावी प्रक्रिया समय पर पूरी करना विशेष चुनौती होगी।

यही वजह है कि मणिपुर और बाकी चार राज्यों के लिए प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अलग-अलग तरीके से देखा जा रहा है।

पांचों राज्यों में कब खत्म हो रहा विधानसभा का कार्यकाल?

राज्यविधानसभा कार्यकाल समाप्ति
मणिपुर13 मार्च 2027
गोवा14 मार्च 2027
पंजाब16 मार्च 2027
उत्तराखंड28 मार्च 2027
उत्तर प्रदेश22 मई 2027

इन तारीखों की पुष्टि चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड से होती है।

चुनावी राज्यों में अब तेज होगी राजनीतिक तैयारी

जनगणना की नई तारीख सामने आने के बाद राजनीतिक दलों के पास भी अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए सीमित समय बचा है। उत्तर प्रदेश में जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सीधा राजनीतिक मुकाबला देखने को मिलेगा, वहीं पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भी अलग-अलग स्थानीय मुद्दे चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनेंगे।

उत्तर प्रदेश का चुनाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा क्योंकि यह देश का सबसे अधिक विधानसभा सीटों वाला राज्य है। यहां चुनाव परिणाम का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ता है।

दूसरी ओर पंजाब में मौजूदा राजनीतिक समीकरण, उत्तराखंड में सरकार के कामकाज और स्थानीय मुद्दे, गोवा में क्षेत्रीय राजनीति और मणिपुर में सुरक्षा एवं सामान्य स्थिति जैसे विषय चुनावी बहस के केंद्र में रह सकते हैं।

वोटर लिस्ट पर भी रहेगी नजर

इन चुनावों से पहले मतदाता सूची का अंतिम रूप भी बेहद महत्वपूर्ण होगा। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में बदलाव की चर्चा पहले से ही राजनीतिक बहस का विषय बनी हुई है।

ऐसे में आने वाले महीनों में अंतिम मतदाता सूची, नए मतदाताओं के नाम जुड़ने, नाम हटने और आपत्तियों के निस्तारण पर राजनीतिक दलों की खास नजर रहेगी।

क्या फरवरी में ही शुरू हो जाएगी वोटिंग?

मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए फरवरी-मार्च 2027 चुनावी गतिविधियों का संभावित समय माना जा रहा है। जनगणना को चार राज्यों में दिसंबर-जनवरी में पूरा कराने का फैसला भी इस टाइमलाइन के साथ मेल खाता है।

लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मतदान किस तारीख से शुरू होगा या कितने चरणों में कराया जाएगा। खासकर उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें होने के कारण मतदान कई चरणों में होने की संभावना रहती है, लेकिन अंतिम चरणों और तारीखों का फैसला चुनाव आयोग करेगा।

अब आगे क्या होगा?

आने वाले महीनों में सबसे पहले मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया, प्रशासनिक तैयारियां और चुनावी राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। इसके बाद चुनाव आयोग पर्यवेक्षकों, मतदान केंद्रों, सुरक्षा बलों और कर्मचारियों की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर विस्तृत तैयारी करेगा।

जनगणना का मुख्य चरण 4 जनवरी 2027 तक पूरा होना प्रस्तावित है और 5 से 9 जनवरी तक संशोधन चरण चलेगा। इसके बाद चुनावी मशीनरी को चुनाव की तैयारियों के लिए अपेक्षाकृत स्पष्ट समय मिल जाएगा।

यानी फिलहाल तस्वीर यह है कि उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में फरवरी-मार्च 2027 के आसपास विधानसभा चुनाव होने की संभावना मजबूत हो गई है। लेकिन वोटिंग की वास्तविक तारीख, चरणों की संख्या और मतदान कार्यक्रम को लेकर अंतिम फैसला चुनाव आयोग की घोषणा के बाद ही होगा।

राजनीतिक दलों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनावी बिगुल कब बजेगा और किस राज्य में पहले मतदान कराया जाएगा। जैसे-जैसे 2027 नजदीक आएगा, इन पांचों राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।

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