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बैड कोलेस्ट्रॉल को लेकर बड़ा खुलासा! डाइट में शामिल करें ये चीज, लेकिन जानें जरूरी सावधानी



आजकल बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतों का असर लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। लंबे समय तक बाहर का खाना, ज्यादा तला-भुना भोजन, पैकेज्ड फूड, कम शारीरिक गतिविधि, तनाव और अनियमित दिनचर्या जैसी आदतें शरीर के मेटाबॉलिज्म और हृदय स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। इन्हीं कारणों से कई लोगों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने की समस्या भी देखने को मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए जरूरी पदार्थ है, लेकिन इसकी मात्रा असंतुलित होने पर परेशानी बढ़ सकती है। खासतौर पर LDL यानी लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन को आम तौर पर 'बैड कोलेस्ट्रॉल' कहा जाता है। रक्त में LDL का स्तर ज्यादा होने पर धमनियों में प्लाक जमा होने का जोखिम बढ़ सकता है, जिससे हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।

ऐसे में केवल किसी एक खाद्य पदार्थ या पेय पर निर्भर रहने के बजाय पूरी डाइट और लाइफस्टाइल को संतुलित करना जरूरी है। इसी संदर्भ में ग्रीन टी को लेकर भी कई शोध हुए हैं। कुछ अध्ययनों में ग्रीन टी के सेवन और LDL कोलेस्ट्रॉल में मामूली कमी के बीच संबंध पाया गया है।

ग्रीन टी को लेकर क्या कहते हैं शोध?

ग्रीन टी में कैटेचिन नामक प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें EGCG भी शामिल है। वैज्ञानिकों ने इसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों पर कई अध्ययन किए हैं। एक मेटा-एनालिसिस में 31 ट्रायल और कुल 3,321 प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था। इसमें ग्रीन टी के सेवन से कुल कोलेस्ट्रॉल और LDL कोलेस्ट्रॉल में छोटी लेकिन सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण कमी देखी गई।

एक अन्य मेटा-एनालिसिस में 14 रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल और 1,136 प्रतिभागियों के आंकड़ों को देखा गया। इसमें भी ग्रीन टी या उसके एक्सट्रैक्ट के सेवन के बाद कुल कोलेस्ट्रॉल और LDL में कमी पाई गई, हालांकि HDL यानी 'गुड कोलेस्ट्रॉल' में महत्वपूर्ण बदलाव नहीं देखा गया।

हालांकि, इन परिणामों का मतलब यह नहीं है कि ग्रीन टी शरीर में जमा 'गंदगी' को साफ कर देती है या अकेले ही हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या को खत्म कर सकती है। ग्रीन टी को एक संतुलित और हृदय के लिए बेहतर खान-पान का हिस्सा माना जा सकता है, लेकिन इसे कोलेस्ट्रॉल की दवा का विकल्प नहीं समझना चाहिए।

रोजाना ग्रीन टी पीने से क्या फायदा हो सकता है?

बिना चीनी वाली ग्रीन टी को संतुलित डाइट में शामिल किया जा सकता है। इसमें कैलोरी कम होती है और इसमें मौजूद पौधों से मिलने वाले यौगिकों पर स्वास्थ्य संबंधी शोध हुए हैं। कुछ अध्ययनों में इसके सेवन को LDL और कुल कोलेस्ट्रॉल में मामूली कमी से जोड़ा गया है।

लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति दिनभर तला-भुना खाना खाता है, शारीरिक गतिविधि बहुत कम करता है और फिर केवल एक कप ग्रीन टी पीकर यह उम्मीद करता है कि उसका कोलेस्ट्रॉल सामान्य हो जाएगा, तो ऐसा मानना सही नहीं होगा।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए खान-पान, वजन, शारीरिक गतिविधि, नींद और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों पर एक साथ ध्यान देना जरूरी है।

ओट्स और जौ को डाइट में करें शामिल

अगर LDL कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं तो डाइट में फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को जगह देना उपयोगी हो सकता है। ओट्स और जौ इसके अच्छे उदाहरण हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, साबुत अनाज और डाइटरी फाइबर रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बेहतर बनाने और हृदय स्वास्थ्य को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं।

सुबह के नाश्ते में ओट्स को फल और बिना ज्यादा चीनी वाले विकल्पों के साथ लिया जा सकता है। इसी तरह जौ को भोजन में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, खाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। अगर फाइबर वाले भोजन में बहुत ज्यादा चीनी, मक्खन या संतृप्त वसा जोड़ दी जाए, तो भोजन का कुल स्वास्थ्य प्रभाव बदल सकता है।

दाल और बीन्स भी हैं फायदेमंद विकल्प

दालें, बीन्स और अन्य लेग्यूम्स प्रोटीन और फाइबर के अच्छे स्रोत हो सकते हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन भी हृदय के लिए बेहतर खान-पान में बीन्स, दालें, साबुत अनाज, सब्जियां, फल, नट्स और बीजों को शामिल करने की सलाह देता है।

इसलिए भोजन में राजमा, चना, मूंग, मसूर, लोबिया और अन्य दालों को शामिल किया जा सकता है। इनका सेवन करते समय अत्यधिक तेल, घी या मक्खन का इस्तेमाल कम रखना बेहतर है।

फल और सब्जियां बढ़ाएं

फल और सब्जियां भी संतुलित डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें फाइबर, विटामिन, मिनरल और अन्य पौधों से मिलने वाले पोषक तत्व पाए जाते हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की 2026 की डाइटरी गाइडेंस में भी सब्जियों और फलों की पर्याप्त मात्रा, साबुत अनाज और स्वस्थ प्रोटीन स्रोतों को हृदय-स्वस्थ खान-पान का हिस्सा बताया गया है।

फलों को जूस के बजाय साबुत फल के रूप में खाना फाइबर के लिहाज से बेहतर विकल्प हो सकता है। उदाहरण के लिए सेब, अमरूद, संतरा, नाशपाती और अन्य मौसमी फलों को डाइट में शामिल किया जा सकता है।

नट्स और बीजों को भी दें जगह

बादाम, अखरोट, पिस्ता और अन्य बिना नमक वाले नट्स स्वस्थ वसा, प्रोटीन और कई पोषक तत्व प्रदान करते हैं। बीज भी संतुलित मात्रा में डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।

लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि नट्स में कैलोरी भी अधिक होती है। इसलिए इन्हें जरूरत से ज्यादा खाने के बजाय सीमित मात्रा में लेना बेहतर है।

किन चीजों से दूरी बनाना जरूरी?

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने की कोशिश में केवल कुछ अच्छी चीजें डाइट में जोड़ना ही पर्याप्त नहीं है। उतना ही जरूरी यह भी है कि ज्यादा संतृप्त वसा और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन कम किया जाए।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, संतृप्त और ट्रांस फैट को कम करना तथा सब्जियों, फलों, साबुत अनाज, बीन्स, नट्स और स्वस्थ वसा वाले खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।

इसलिए बार-बार तला हुआ भोजन, प्रोसेस्ड मीट, अत्यधिक फैटी भोजन, ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थ और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करना चाहिए।

सिर्फ डाइट नहीं, एक्सरसाइज भी जरूरी

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण है। नियमित शारीरिक गतिविधि LDL को कम करने और HDL को बेहतर करने में मदद कर सकती है। पैदल चलना, तैराकी, साइकिल चलाना, डांस या अपनी क्षमता के अनुसार अन्य गतिविधियों को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाया जा सकता है।

इसके अलावा पर्याप्त नींद लेना, धूम्रपान से बचना और वजन को स्वस्थ सीमा में रखने की कोशिश करना भी हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

हाई कोलेस्ट्रॉल है तो जांच कराना जरूरी

कई बार हाई कोलेस्ट्रॉल के कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए केवल शरीर में कोई परेशानी महसूस न होने के आधार पर यह मान लेना सही नहीं है कि कोलेस्ट्रॉल सामान्य है। रक्त जांच के माध्यम से LDL, HDL, ट्राइग्लिसराइड और अन्य लिपिड स्तरों की जानकारी मिल सकती है।

अगर किसी व्यक्ति की रिपोर्ट में LDL काफी अधिक है या उसे पहले से हृदय रोग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर अथवा अन्य जोखिम हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। कुछ लोगों में केवल लाइफस्टाइल बदलाव पर्याप्त नहीं होते और चिकित्सक कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा की सलाह दे सकते हैं।

ग्रीन टी को समझें डाइट का हिस्सा, इलाज नहीं

कुल मिलाकर ग्रीन टी को संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। उपलब्ध शोधों में इसके सेवन से LDL और कुल कोलेस्ट्रॉल में मामूली कमी के संकेत मिले हैं, लेकिन इसका प्रभाव व्यक्ति-दर-व्यक्ति अलग हो सकता है।

इसलिए अगर आप कोलेस्ट्रॉल कम करने की कोशिश कर रहे हैं तो सिर्फ ग्रीन टी पर निर्भर रहने के बजाय ओट्स, जौ, दाल, बीन्स, फल, सब्जियां, नट्स और बीज जैसे फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करें। साथ ही संतृप्त वसा और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन को कम करें और नियमित शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या में जगह दें।

यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। ग्रीन टी या किसी भी खाद्य पदार्थ को हाई कोलेस्ट्रॉल का इलाज न समझें। अगर आपकी कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट असामान्य है, आप पहले से कोई दवा ले रहे हैं या आपको हृदय, डायबिटीज अथवा अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो डाइट या दवा में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।

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