कालकाजी गैंगरेप केस में बड़ा खुलासा: 45 मिनट तक पार्क में घूमते रहे आरोपी, हथियार और निरोध लेकर पहुंचे थे; पहले भी जोड़ों को चाकू दिखाने का आरोप
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दिल्ली के कालकाजी स्थित करीब 142 एकड़ में फैले आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई गंभीर जानकारियां सामने आ रही हैं। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर वारदात से पहले पार्क में करीब 45 मिनट तक घूमते रहे और सुनसान जगह पर मौजूद लोगों को तलाशते रहे। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के पास हथियार थे और उनके पास कंडोम भी मिले। इन परिस्थितियों के आधार पर पुलिस ने मामले में साजिश से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी हैं और यह जांच की जा रही है कि वारदात पहले से योजनाबद्ध थी या नहीं।
मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आसिफ और दो भाइयों हेमंत तथा मुकेश के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक तीनों ने कथित तौर पर खुद को पुलिसकर्मी बताकर पीड़िता और उसके दोस्त को डराया था। इसके बाद दोनों को अलग किया गया और नाबालिग को पार्क के एक सुनसान हिस्से में ले जाकर अपराध को अंजाम देने का आरोप है। पुलिस ने तीनों को घटना के कुछ ही घंटों के भीतर गिरफ्तार कर लिया था।
45 मिनट तक पार्क में घूमने का दावा
पुलिस जांच में सामने आया सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरोपी कथित तौर पर वारदात से पहले काफी देर तक पार्क में घूम रहे थे। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पूछताछ में सामने आया कि तीनों करीब 45 मिनट तक पार्क में किसी निशाने की तलाश में घूमते रहे। इसी दौरान उन्होंने एक सुनसान हिस्से में बैठे नाबालिग लड़की और उसके दोस्त को देखा। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद आरोपियों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर दोनों को डराने की रणनीति अपनाई।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या तीनों का उस दिन पार्क में जाने का कोई दूसरा उद्देश्य था या फिर उन्होंने मौके पर ही अपराध करने का फैसला लिया। हथियार और अन्य सामान मिलने के कारण जांचकर्ता इसे गंभीरता से देख रहे हैं।
इसी वजह से दिल्ली पुलिस ने FIR में साजिश से संबंधित धाराएं भी जोड़ी हैं। हालांकि, पुलिस की जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य पेश होने से पहले इसे अंतिम रूप से पूर्व नियोजित अपराध कहना उचित नहीं होगा।
पहले भी पार्क में लोगों को धमकाने के आरोप
जांच का एक और अहम पहलू मुख्य आरोपी आसिफ से जुड़ा है। पुलिस ने स्थानीय लोगों, पार्क स्टाफ, सुरक्षा गार्ड और आसपास के लोगों से पूछताछ की है। कुछ लोगों ने कथित तौर पर बताया कि आसिफ को पहले भी पार्क में चाकू के साथ देखा गया था और वह वहां आने वाले कुछ जोड़ों को परेशान करता था।
हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने पहले मौखिक रूप से पार्क के स्टाफ और गार्डों को शिकायतें दी थीं, लेकिन इन शिकायतों को लेकर कोई औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज नहीं हुई थी। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या आरोपी पहले भी इसी तरह की घटनाओं में शामिल रहे हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट में पुलिस जांच के हवाले से बताया गया है कि आरोपी के मोबाइल फोन से एक वीडियो भी मिला है, जिसमें वह कथित तौर पर पार्क में एक जोड़े को रिकॉर्ड करते हुए उन्हें धमकाता नजर आता है। पुलिस इस वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
हथियार और अन्य सामान मिलने से बढ़ा शक
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी आसिफ को गिरफ्तार किए जाने के समय उसके पास से एक अवैध हथियार और चाकू बरामद हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि घटना के दिन आरोपियों के पास कम से कम एक आग्नेयास्त्र, चाकू और कंडोम थे।
पुलिस का कहना है कि इन परिस्थितियों को एक साथ देखते हुए यह जांच जरूरी है कि क्या आरोपियों ने पहले से किसी अपराध की तैयारी की थी। हालांकि, केवल इन वस्तुओं की बरामदगी के आधार पर अदालत के स्तर पर अपराध की मंशा या साजिश का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। पुलिस अभी सभी परिस्थितिजन्य और फॉरेंसिक साक्ष्यों को जोड़ रही है।
खुद को पुलिसकर्मी बताकर बनाया दबाव
पुलिस के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर पुलिस की भाषा और कानूनी शब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे। उन्होंने लड़की और उसके दोस्त को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वे पुलिसकर्मी हैं और दोनों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने इसी डर का इस्तेमाल करके दोनों को नियंत्रित किया। पुलिस के मुताबिक, एक आरोपी ने लड़की के दोस्त को रोककर रखा, जबकि पीड़िता को पार्क के दूसरे हिस्से में ले जाया गया। इसके बाद कथित अपराध हुआ।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और POCSO Act के तहत मामला दर्ज किया है। पीड़िता की मेडिकल जांच कराई गई है और घटनास्थल से संबंधित साक्ष्यों को भी फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित किया गया है।
वारदात के बाद रेस्तरां गए, फिर कपड़े धोए
जांच में आरोपियों के कथित व्यवहार को लेकर एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, हेमंत और मुकेश घटना के बाद सीधे घर नहीं गए। दोनों कथित तौर पर पहले एक रेस्तरां में खाना खाने गए और उसके बाद श्रीनिवासपुरी स्थित अपने घर पहुंचे।
पुलिस का आरोप है कि घर पहुंचने के बाद दोनों ने घटना के समय पहने कपड़े धो दिए ताकि संभावित फॉरेंसिक साक्ष्य नष्ट हो सकें। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को उनके धुले हुए कपड़े मिले, जिन्हें जांच का हिस्सा बनाया गया है। दोनों के मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं।
पुलिस ने बताया कि मोबाइल फोन में मौजूद डेटा की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। कुछ डेटा या सर्च हिस्ट्री को कथित तौर पर हटाया गया था, जिसे विशेषज्ञ तकनीकी प्रक्रिया के जरिए रिकवर करने की कोशिश कर रहे हैं।
आरोपियों की पढ़ाई और पृष्ठभूमि भी जांच के दायरे में
पुलिस जांच में आरोपियों की व्यक्तिगत और शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी सामने आई है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, हेमंत ने कानून की पढ़ाई की है, जबकि उसका भाई मुकेश बीएससी गणित का अंतिम वर्ष का छात्र बताया गया है। आसिफ के बारे में पुलिस ने बताया कि वह ओखला मंडी में प्याज का कारोबार करता था।
पुलिस अब तीनों के पुराने रिकॉर्ड और उनके संपर्कों की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि तीनों के बीच किस तरह का संपर्क था और क्या वे पहले से मिलकर पार्क में आते-जाते थे।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि तीनों की एक-दूसरे से पुरानी पहचान थी और वे पहले भी आस्था कुंज पार्क में जाते थे। पुलिस अब इस पहलू को भी जांच रही है कि क्या वहां आने वाले अन्य लोगों को भी इसी तरह धमकाया गया था।
पुलिस एनकाउंटर में पकड़ा गया मुख्य आरोपी
घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए कई टीमें लगाईं। मंगलवार सुबह अमर कॉलोनी इलाके में पुलिस टीम ने आसिफ को पकड़ने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक, आसिफ ने कथित तौर पर पुलिस टीम पर गोली चलाई। एक गोली हेड कांस्टेबल की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी।
इसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आसिफ के पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से अवैध हथियार और चाकू बरामद होने की बात पुलिस ने कही है। इसके बाद हेमंत और मुकेश को श्रीनिवासपुरी स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया गया।
आस्था कुंज पार्क की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
इस घटना ने पार्क की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आस्था कुंज करीब 142 एकड़ में फैला बड़ा पार्क है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पार्क कई जगहों से आसानी से पहुंच योग्य है और कुछ हिस्सों में रोशनी तथा सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने की समस्या सामने आई है।
जांच के दौरान पार्क में गश्त, प्रवेश-निकास और निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है। घटना के बाद सुरक्षा बढ़ाई गई है और पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने की जानकारी सामने आई है।
पार्क के आसपास स्थित शैक्षणिक संस्थानों में भी इस घटना को लेकर चिंता देखी गई। लेडी श्रीराम कॉलेज ने सुरक्षा को लेकर अपनी नियमित कक्षाओं को ऑनलाइन करने का फैसला लिया था। इससे पता चलता है कि घटना का असर केवल पार्क तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के छात्र समुदाय में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।
पुराने मामलों की भी जांच कर रही पुलिस
अब पुलिस की जांच का एक बड़ा हिस्सा इस सवाल पर केंद्रित है कि क्या आरोपी इससे पहले भी किसी अन्य व्यक्ति या जोड़े को निशाना बना चुके थे। स्थानीय लोगों के कथित बयानों, मोबाइल फोन, पुराने वीडियो, CCTV फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड को मिलाकर पुलिस घटनाओं की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन पुराने आरोपों की जानकारी सामने आई है, उनकी स्वतंत्र पुष्टि और साक्ष्य जुटाना अभी बाकी है। इसलिए किसी पुराने मामले में आरोपियों की संलिप्तता को अदालत के अंतिम निर्णय से पहले तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
आस्था कुंज पार्क में नाबालिग के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला अब केवल एक आपराधिक घटना की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। पुलिस के सामने एक तरफ तीनों आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को मजबूत करने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ यह पता लगाने का सवाल भी है कि क्या पार्क में पहले भी इसी तरह की घटनाएं हुई थीं।
45 मिनट तक पार्क में घूमने, हथियार और अन्य सामान मिलने, खुद को पुलिसकर्मी बताकर लोगों को डराने, घटना के बाद कथित तौर पर कपड़े धोने और मोबाइल से डेटा हटाने जैसी जानकारियां जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई हैं। पुलिस इन सभी तथ्यों को फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों के साथ जोड़कर मामले की पूरी तस्वीर सामने लाने की कोशिश कर रही है।
सबसे अहम बात यह है कि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए उसकी पहचान और निजी जानकारी को सार्वजनिक करना कानून और पत्रकारिता की दृष्टि से उचित नहीं है। मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है और अंतिम दोषसिद्धि अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी।

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