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हार्ट मरीजों के लिए बड़ा बदलाव! इलाज के बाद सिर्फ दवा नहीं, अब इन 4 चीजों पर देना होगा खास ध्यान



नई दिल्ली। हृदय रोग से जूझ रहे मरीजों के लिए इलाज पूरा होने के बाद की जिंदगी को बेहतर और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। वर्धमान मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल ने हृदय रोगियों के लिए नई कार्डियक रिहैबिलिटेशन गाइडलाइन जारी की है। इसका उद्देश्य मरीजों को इलाज के बाद दोबारा सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद करना और भविष्य में हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम को कम करना है।

नई गाइडलाइन में इस बात पर खास जोर दिया गया है कि हृदय रोग से उबरने के बाद मरीज की देखभाल केवल दवाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मरीज को अपनी शारीरिक क्षमता वापस हासिल करने, खान-पान में सुधार करने, मानसिक तनाव कम करने और रोजमर्रा की जीवनशैली को स्वस्थ बनाने के लिए भी व्यवस्थित सहायता मिलनी चाहिए।

कार्डियक रिहैबिलिटेशन यानी हृदय रोग के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया को इसी व्यापक सोच के साथ तैयार किया गया है। इसमें मरीज की जरूरत और उसकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार व्यायाम, डाइट, मानसिक स्वास्थ्य और जीवनशैली में बदलाव को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।

हृदय रोगियों को मिलेगी इलाज के बाद नई दिशा

दिल की बीमारी के उपचार के बाद कई मरीजों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सामान्य दिनचर्या में वापस लौटने की होती है। हार्ट अटैक, एंजियोप्लास्टी, बाईपास सर्जरी या अन्य हृदय संबंधी उपचार के बाद मरीज अक्सर शारीरिक गतिविधियों को लेकर आशंकित रहते हैं। कई बार वे जरूरत से ज्यादा आराम करने लगते हैं, जबकि कुछ मरीज बिना उचित चिकित्सकीय सलाह के सामान्य गतिविधियां शुरू कर देते हैं।

नई गाइडलाइन का उद्देश्य इसी अंतर को दूर करना है। इसके तहत मरीज को उसकी स्थिति के अनुसार यह समझाने पर जोर दिया जाएगा कि वह कब और किस तरह व्यायाम शुरू कर सकता है, किस प्रकार का भोजन उसके लिए बेहतर रहेगा और रोजमर्रा की गतिविधियों में किस तरह धीरे-धीरे वापसी की जा सकती है।

इस पूरी प्रक्रिया में मरीज की शारीरिक और मानसिक स्थिति दोनों को महत्वपूर्ण माना गया है।

कार्यक्रम में जुटे वरिष्ठ विशेषज्ञ

नई गाइडलाइन जारी करने के लिए शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में देश के कई जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञ और वरिष्ठ चिकित्सक शामिल हुए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जाने-माने वैज्ञानिक और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. निर्मल कुमार गांगुली रहे। डॉ. हर्षवर्धन और डॉ. विजय मोहन कोहली विशिष्ट अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में शामिल हुए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन-एसईएआरओ की क्षेत्रीय सलाहकार डॉ. ताशी टोबगे समेत कई वरिष्ठ डॉक्टर और विशेषज्ञ भी इस अवसर पर मौजूद रहे। कार्यक्रम में हृदय रोगों की बढ़ती चुनौती और इलाज के बाद मरीजों के पुनर्वास की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई।

डॉ. निर्मल कुमार गांगुली ने देश में बढ़ती हृदय संबंधी बीमारियों को देखते हुए ऐसी सेवाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भारतीय परिस्थितियों और स्वास्थ्य व्यवस्था को ध्यान में रखकर तैयार की गई गाइडलाइन की

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