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सत्य निकेतन हादसे के बाद बड़ा एक्शन, दिल्ली में 5 मंजिल वाली अवैध इमारतें होंगी सील; अफसरों पर भी गिरेगी गाज



नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत के दर्दनाक हादसे में छह लोगों की मौत के बाद दिल्ली सरकार ने राजधानी में अवैध और नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए भवनों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का फैसला किया है। रविवार को हुई इस घटना में एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई थी। इसके बाद सोमवार को प्रशासन ने न सिर्फ राहत और बचाव अभियान पर ध्यान केंद्रित किया, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अवैध निर्माणों की पहचान और कार्रवाई का दायरा भी बढ़ा दिया है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्य निकेतन घटनास्थल का दोबारा दौरा कर राहत और बचाव अभियान की स्थिति की समीक्षा की। इसके साथ ही अधिकारियों को नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए भवनों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए। MCD ने भी स्पष्ट किया है कि चार मंजिल से अधिक वाले अवैध निर्माणों को तत्काल सील किया जाएगा और ऐसे निर्माणों को अनुमति देने या समय पर कार्रवाई नहीं करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।

सत्य निकेतन हादसे ने खोली अवैध निर्माण की पोल

सत्य निकेतन में रविवार दोपहर एक पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई थी। यह भवन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित था और इसमें बड़ी संख्या में छात्र PG के रूप में रह रहे थे। हादसे के बाद मलबे में लोगों के दबे होने की सूचना मिली, जिसके बाद दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और अन्य एजेंसियों ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया।

रातभर चले राहत अभियान के दौरान एक और शव बरामद होने के बाद मृतकों की संख्या छह हो गई। हादसे में कई लोग घायल भी हुए हैं।

यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब दिल्ली में पुराने और अनधिकृत भवनों में छात्रों और कामकाजी लोगों के रहने को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सत्य निकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में PG और किराये के मकान हैं, जहां सीमित जगह में बड़ी संख्या में लोग रहते हैं।

चार मंजिल से ज्यादा के अवैध भवनों पर सीधी नजर

हादसे के बाद MCD ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा है कि चार मंजिल से अधिक वाले सभी अवैध निर्माणों को तत्काल सील किया जाएगा। इसके अलावा ऐसे निर्माणों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। MCD की ओर से कहा गया है कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें बर्खास्तगी तक का प्रावधान बताया गया है।

इस फैसले के बाद अब राजधानी के उन इलाकों पर विशेष नजर रहेगी, जहां पुरानी इमारतों में अतिरिक्त मंजिलें या कमरे जोड़कर उनका इस्तेमाल PG, हॉस्टल या किराये के आवास के तौर पर किया जा रहा है।

सरकार का मकसद यह पता लगाना है कि कहीं भवन मालिकों ने स्वीकृत नक्शे के विपरीत अतिरिक्त निर्माण तो नहीं किया है। इसके साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि संबंधित निर्माण के खिलाफ पहले कभी शिकायत हुई थी या नहीं और अगर हुई थी तो अधिकारियों ने उस पर क्या कार्रवाई की।

सत्य निकेतन के PG और आसपास की इमारतों की होगी जांच

सत्य निकेतन और इसके आसपास के इलाकों में अब PG तथा दूसरे भवनों की सघन जांच की जाएगी। खासतौर पर उन इमारतों पर नजर रखी जाएगी, जिनमें निर्धारित सीमा से ज्यादा मंजिलें बनाई गई हैं या जिनमें बिना अनुमति के अतिरिक्त निर्माण किया गया है।

सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक है। इस वजह से यहां बड़ी संख्या में छात्र किराये के कमरों और PG में रहते हैं। समय के साथ कई भवनों में अतिरिक्त कमरे, फ्लोर और दूसरे स्ट्रक्चरल बदलाव किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

हादसे के बाद अब प्रशासन यह जांच करेगा कि इन भवनों की संरचनात्मक स्थिति कैसी है और क्या वे छात्रों को रहने के लिए सुरक्षित हैं।

जिस इमारत में हादसा हुआ, उसकी जांच में क्या सामने आया?

सत्य निकेतन में जिस इमारत के गिरने से छह लोगों की जान गई, वह पुरानी इमारत थी और उसका इस्तेमाल छात्रों के लिए PG के तौर पर किया जा रहा था। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार इमारत करीब पांच दशक पुरानी बताई जा रही है। हादसे के समय भवन में निर्माण या मरम्मत से जुड़ा काम चलने की बात भी सामने आई है।

मलबा हटाने के दौरान अधिकारियों और जांच टीमों की नजर बेसमेंट और भवन की संरचना पर भी रही। शुरुआती जांच में भवन की संरचनात्मक कमजोरी, पानी और निर्माण गतिविधियों जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है। हालांकि, हादसे की अंतिम और आधिकारिक वजह अभी जांच का विषय है।

यही वजह है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इमारत केवल अवैध निर्माण की वजह से गिरी। जांच में भवन की उम्र, निर्माण की गुणवत्ता, संरचनात्मक बदलाव, मरम्मत कार्य और बेसमेंट में चल रही गतिविधियों समेत कई पहलुओं को देखा जा रहा है।

भवन मालिक के खिलाफ FIR, मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

सत्य निकेतन हादसे के मामले में भवन मालिक के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। दिल्ली सरकार ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के भी आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, जो भी व्यक्ति हादसे के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि भवन में किसी तरह का अनधिकृत निर्माण या संरचनात्मक बदलाव हुआ था या नहीं। इसके अलावा हादसे से पहले चल रहे renovation और construction work की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

क्या अधिकारियों की भी तय होगी जिम्मेदारी?

इस पूरे मामले में अब सिर्फ भवन मालिक ही नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है। MCD ने साफ संकेत दिया है कि यदि किसी अधिकारी ने नियमों का उल्लंघन होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की या अवैध निर्माण को संरक्षण दिया, तो उसके खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।

यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी अवैध निर्माण का लंबे समय तक मौजूद रहना केवल भवन मालिक की जिम्मेदारी नहीं माना जा सकता। अगर संबंधित विभागों को निर्माण के बारे में जानकारी थी और इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रशासनिक स्तर पर भी जवाबदेही तय करने की मांग उठ सकती है।

दिल्ली में अब शुरू होगी अवैध इमारतों की छंटनी

सत्य निकेतन हादसे के बाद सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन इमारतों की पहचान करना है, जहां बिना अनुमति के अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई हैं या भवन का इस्तेमाल उसकी स्वीकृत क्षमता से अधिक लोगों के लिए किया जा रहा है।

PG और हॉस्टल के मामले में यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि एक ही भवन में बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं। ऐसे में भवन की संरचना कमजोर होने या आग, भूकंप अथवा किसी अन्य आपदा की स्थिति में बड़ी संख्या में लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

इसी को देखते हुए सरकार अब सत्य निकेतन के साथ-साथ आसपास के इलाकों में भी जांच अभियान चलाने की तैयारी में है।

हादसे ने उठाए कई गंभीर सवाल

सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में भवन सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि अगर किसी भवन में अतिरिक्त मंजिल या कमरे बनाए जा रहे थे, तो उसकी निगरानी किस स्तर पर हुई? PG के तौर पर इस्तेमाल होने वाले भवनों की नियमित सुरक्षा जांच कितनी प्रभावी है? और अगर किसी भवन की हालत पहले से खराब थी तो वहां छात्रों को रहने की अनुमति कैसे मिली?

इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

फिलहाल सरकार ने कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। चार मंजिल से अधिक के अवैध निर्माणों की सीलिंग, PG और आसपास की इमारतों की जांच तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई—इन तीन मोर्चों पर प्रशासन का फोकस है।

सत्य निकेतन हादसे में छह लोगों की मौत ने दिल्ली को झकझोर दिया है। अब सरकार के सामने सिर्फ इस हादसे की जिम्मेदारी तय करने की चुनौती नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी जिम्मेदारी है कि राजधानी में कोई और परिवार ऐसी त्रासदी का शिकार न हो।

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