शुगर बढ़ी तो सिर्फ डायबिटीज नहीं! शरीर के इन 4 अंगों पर पड़ सकता है खतरनाक असर, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती?
Diabetes Complications: डायबिटीज को अक्सर लोग सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने वाली बीमारी समझते हैं। बहुत से लोगों को लगता है कि अगर शुगर की रिपोर्ट कंट्रोल में आ गई तो खतरा भी खत्म हो गया। लेकिन डायबिटीज का असर केवल खून में ग्लूकोज की मात्रा तक सीमित नहीं रहता। अगर लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा हुआ रहे और बीमारी का सही तरीके से प्रबंधन न किया जाए, तो शरीर की रक्त वाहिकाओं और नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इसका असर धीरे-धीरे शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञ संस्थाओं के अनुसार डायबिटीज से जुड़े प्रमुख जोखिमों में हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी की बीमारी, आंखों की समस्या और नर्व डैमेज शामिल हैं। यही वजह है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए सिर्फ शुगर की जांच करवाना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि समय-समय पर अन्य स्वास्थ्य जांच भी जरूरी होती है।
तो आइए जानते हैं कि लंबे समय तक बढ़ी हुई ब्लड शुगर शरीर के किन चार महत्वपूर्ण हिस्सों को प्रभावित कर सकती है और इसके पीछे क्या कारण है।
1. दिल: बढ़ सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा
डायबिटीज का सबसे गंभीर असर हृदय और रक्त वाहिकाओं पर पड़ सकता है। लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके साथ हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं भी मौजूद हों तो हृदय संबंधी जोखिम और बढ़ सकता है।
CDC के अनुसार डायबिटीज वाले लोगों में हृदय रोग या स्ट्रोक का जोखिम डायबिटीज न होने वाले लोगों की तुलना में लगभग दोगुना हो सकता है। रक्त वाहिकाओं में प्लाक जमा होने से धमनियां संकरी हो सकती हैं और हृदय या मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
यही कारण है कि डायबिटीज के मरीजों को केवल शुगर ही नहीं, बल्कि ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर भी नजर रखनी चाहिए।
किन संकेतों को नजरअंदाज न करें?
सीने में दर्द या दबाव, सांस लेने में परेशानी, असामान्य कमजोरी या अचानक शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी जैसे लक्षण गंभीर हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को डायबिटीज समझकर घर पर इंतजार करना सही नहीं है और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
हालांकि, यह भी जरूरी है कि कई हृदय संबंधी समस्याएं शुरुआत में स्पष्ट लक्षण नहीं देतीं। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण है।
2. किडनी: धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है फिल्टर करने की क्षमता
डायबिटीज का असर किडनी पर भी पड़ सकता है। किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने के लिए खून को फिल्टर करती है। लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं और फिल्टरिंग सिस्टम को नुकसान हो सकता है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि डायबिटीज से जुड़ी क्रॉनिक किडनी डिजीज शुरुआती चरणों में अक्सर बहुत कम लक्षण देती है। कई लोगों को तब पता चलता है जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है।
CDC के अनुसार डायबिटीज वाले लगभग हर तीन वयस्कों में से एक को क्रॉनिक किडनी डिजीज हो सकती है।
अगर किडनी की कार्यक्षमता लगातार कम होती जाए तो गंभीर मामलों में डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है।
किडनी को कैसे बचाएं?
डायबिटीज वाले लोगों के लिए नियमित ब्लड और यूरिन टेस्ट के जरिए किडनी की स्थिति की जांच करना महत्वपूर्ण है। ब्लड शुगर के साथ ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित रखना किडनी की सुरक्षा में मदद कर सकता है।
3. आंखें: धुंधली नजर से लेकर दृष्टि हानि तक
डायबिटीज का असर आंखों की छोटी रक्त वाहिकाओं पर भी पड़ सकता है। लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर रेटिना की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इस स्थिति को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है।
शुरुआती चरणों में व्यक्ति को कोई खास परेशानी महसूस नहीं हो सकती। लेकिन बीमारी बढ़ने पर धुंधला दिखाई देना और दृष्टि में बदलाव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। गंभीर स्थिति में स्थायी दृष्टि हानि भी हो सकती है। WHO डायबिटीज को दृष्टि हानि और अंधेपन के महत्वपूर्ण कारणों में शामिल करता है।
डायबिटीज से केवल रेटिनोपैथी ही नहीं, बल्कि मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी आंखों की समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।
आंखों की जांच क्यों जरूरी?
डायबिटीज में आंखों की नियमित जांच इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शुरुआती चरणों में रेटिना में बदलाव बिना किसी स्पष्ट लक्षण के हो सकते हैं। समय पर जांच से समस्या की पहचान और उपचार का अवसर मिल सकता है।
अगर नजर अचानक धुंधली हो, आंखों के सामने अचानक बहुत सारे धब्बे या फ्लोटर्स दिखाई दें या दृष्टि में अचानक बदलाव आए तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
4. नसें और पैर: सुन्नपन को हल्के में न लें
डायबिटीज का एक और आम प्रभाव नसों पर पड़ सकता है। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। हाई ब्लड शुगर लंबे समय तक रहने पर नसों को नुकसान पहुंच सकता है। यह समस्या अक्सर पैरों और पंजों से शुरू होती है।
इसके लक्षणों में पैरों या हाथों में झुनझुनी, जलन, दर्द, सुन्नपन या कमजोरी शामिल हो सकती है। कुछ लोगों में संवेदना कम हो जाने के कारण चोट या छाला होने का पता भी देर से चलता है।
यह समस्या इसलिए गंभीर हो सकती है क्योंकि डायबिटीज में पैरों में रक्त का प्रवाह भी प्रभावित हो सकता है। अगर किसी छोटे कट या घाव का समय पर पता न चले और वह संक्रमित हो जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है। WHO के अनुसार डायबिटीज से जुड़ी न्यूरोपैथी और कम रक्त प्रवाह पैरों में अल्सर और संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकते हैं और गंभीर मामलों में अंग काटने की जरूरत तक पड़ सकती है।
पैरों की रोज जांच करें
डायबिटीज वाले लोगों को अपने पैरों में कट, छाला, लालिमा, सूजन या किसी अन्य बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। पैरों में लगातार दर्द, जलन, सुन्नपन या ऐसा घाव जो ठीक नहीं हो रहा हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
क्या सिर्फ शुगर कंट्रोल करना काफी है?
ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन डायबिटीज मैनेजमेंट सिर्फ ग्लूकोज तक सीमित नहीं है। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, वजन, शारीरिक गतिविधि, खान-पान और धूम्रपान जैसी चीजों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
CDC के अनुसार प्रभावी ब्लड शुगर मैनेजमेंट आंखों, किडनी और नसों से जुड़ी जटिलताओं के जोखिम को कम कर सकता है। वहीं ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना हृदय और रक्त वाहिकाओं की सुरक्षा में मदद करता है।
इसका मतलब यह है कि डायबिटीज को केवल एक नंबर यानी शुगर की रिपोर्ट से नहीं समझना चाहिए। मरीज की पूरी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।
किन जांचों पर ध्यान देना चाहिए?
डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच करवानी चाहिए। इसमें ब्लड शुगर और HbA1c के साथ ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की जांच शामिल हो सकती है।
किडनी की स्थिति जानने के लिए डॉक्टर ब्लड और यूरिन टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। वहीं आंखों की नियमित जांच से डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी समस्या का जल्दी पता लगाने में मदद मिल सकती है। पैरों और नसों की जांच भी महत्वपूर्ण है।
कौन-सी जांच कितनी बार करवानी है, यह व्यक्ति की उम्र, डायबिटीज के प्रकार, बीमारी की अवधि और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए अपने डॉक्टर से व्यक्तिगत जांच कार्यक्रम तय करना बेहतर है।
डायबिटीज को कंट्रोल में रखना क्यों जरूरी?
डायबिटीज को नियंत्रित रखने का उद्देश्य केवल शुगर की रिपोर्ट को बेहतर बनाना नहीं है, बल्कि लंबे समय में होने वाली जटिलताओं को रोकना या देर से आने देना भी है।
WHO के मुताबिक स्वस्थ आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन बनाए रखना और तंबाकू से बचना टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। जिन लोगों को पहले से डायबिटीज है, उनके लिए खान-पान, शारीरिक गतिविधि, दवाओं और नियमित जांच के जरिए बीमारी को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है।
डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या नहीं है। लंबे समय तक अनियंत्रित हाई ब्लड शुगर शरीर की रक्त वाहिकाओं और नसों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिसका असर दिल, किडनी, आंखों और नसों पर पड़ सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन जटिलताओं को हमेशा पूरी तरह रोकना संभव न हो, लेकिन नियमित जांच और सही प्रबंधन से इनके जोखिम को कम किया जा सकता है और कई समस्याओं की पहचान शुरुआती चरण में की जा सकती है।
अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज है, तो उसे अपनी दवाएं डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेना, शुगर की नियमित निगरानी करना और समय-समय पर आंख, किडनी, हृदय तथा पैरों की जांच करवाने पर ध्यान देना चाहिए।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। यह किसी व्यक्ति के लिए व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। लगातार हाई ब्लड शुगर, नजर में बदलाव, सीने में दर्द, पैरों में गंभीर घाव या अन्य चिंताजनक लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

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