'वो सिर्फ Delivery Boy नहीं था'… सड़क पर बैठे एजेंट को देखकर क्यों भर आईं महिला की आंखें? मिला जिंदगी बदल देने वाला सबक
ऑनलाइन शॉपिंग आज हमारी जिंदगी का बेहद सामान्य हिस्सा बन चुकी है। मोबाइल पर कुछ क्लिक किए, पसंद का सामान घर पर मंगाया और पसंद नहीं आया तो उतनी ही आसानी से उसे वापस भी कर दिया। रिटर्न रिक्वेस्ट डालने के बाद पिकअप एजेंट घर पहुंचता है, सामान लेता है और कुछ ही मिनटों में प्रक्रिया पूरी हो जाती है। ग्राहक के लिए यह महज एक सामान्य ऑनलाइन शॉपिंग प्रक्रिया होती है।
लेकिन कर्नाटक की रहने वाली एक महिला के लिए ज्वैलरी का एक रिटर्न ऑर्डर जिंदगी का ऐसा अनुभव बन गया, जिसने उन्हें कुछ देर के लिए भावुक कर दिया। उन्होंने जब अपनी आंखों के सामने एक पिकअप एजेंट को सड़क किनारे बैठकर अपना काम पूरा करते देखा, तो उन्हें अचानक महसूस हुआ कि जिस सुविधा को ग्राहक सिर्फ एक क्लिक की प्रक्रिया समझता है, उसके पीछे किसी इंसान की मेहनत और संघर्ष भी छिपा होता है।
इस पूरे अनुभव का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है, जो अब लोगों का ध्यान खींच रहा है। वीडियो देखने के बाद कई यूजर्स ने कहा कि रोजमर्रा की सुविधाओं के पीछे काम करने वाले लोगों को हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।
ज्वैलरी रिटर्न करने पहुंचा था पिकअप एजेंट
कर्नाटक की शीतल प्रसाद ने इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन ज्वैलरी ऑर्डर की थी, लेकिन बाद में किसी वजह से उसे वापस करने का फैसला किया। इसके बाद कंपनी की ओर से पिकअप एजेंट ज्वैलरी वापस लेने उनके पास पहुंचा।
यहां तक सब कुछ बिल्कुल सामान्य था। एजेंट ने ज्वैलरी का बॉक्स लिया और रिटर्न की प्रक्रिया पूरी करने लगा। लेकिन इसी दौरान कुछ ऐसा हुआ जिसने शीतल का पूरा नजरिया बदल दिया।
सामान लेने के बाद पिकअप एजेंट सड़क किनारे बैठ गया। वह वहीं बैठकर अपने मोबाइल फोन पर रिटर्न से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने लगा। शीतल की नजर जब उस पर पड़ी तो वह कुछ देर तक उसे देखती रहीं।
उन्हें महसूस हुआ कि ग्राहक के लिए रिटर्न महज एक क्लिक है, लेकिन उस क्लिक को वास्तविकता में पूरा करने के लिए किसी व्यक्ति को सड़क पर निकलना पड़ता है, एक जगह से दूसरी जगह जाना पड़ता है और फिर धूप, बारिश या अन्य परिस्थितियों के बीच अपना काम करना पड़ता है।
एक छोटे से पल ने बदल दी सोच
शीतल ने अपने पोस्ट में बताया कि आमतौर पर हम ऑनलाइन सामान खरीदते समय सिर्फ अपने अनुभव और सुविधा के बारे में सोचते हैं। सामान पसंद आया तो खुशी होती है और पसंद नहीं आया तो उसे वापस कर देते हैं।
लेकिन उस दिन उन्होंने पहली बार इस प्रक्रिया के दूसरे पक्ष को करीब से देखा।
उनके सामने बैठा वह पिकअप एजेंट भी किसी परिवार का हिस्सा है। उसके पास भी अपनी जिम्मेदारियां हैं, अपने खर्च हैं और शायद ऐसे कई सपने हैं, जिनके बारे में ग्राहक को कुछ भी पता नहीं होता।
शीतल के लिए यही एहसास बेहद भावुक कर देने वाला था।
उन्होंने महसूस किया कि किसी ऐप पर दिखाई देने वाला 'Pickup Scheduled' या 'Return Successful' का मैसेज केवल तकनीकी जानकारी नहीं है। उसके पीछे एक वास्तविक व्यक्ति की मेहनत जुड़ी होती है।
'हर डिलीवरी के पीछे एक इंसान है'
शीतल ने इसी भावना को अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की। उनका संदेश था कि हमें डिलीवरी और पिकअप एजेंटों को केवल एक सर्विस देने वाले व्यक्ति के तौर पर नहीं देखना चाहिए।
वे भी हमारी तरह इंसान हैं।
उनका भी परिवार है, जिम्मेदारियां हैं और अपनी जिंदगी की परेशानियां हैं। दिनभर अलग-अलग जगहों पर जाकर सामान पहुंचाना और वापस लेना उनके काम का हिस्सा जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनका काम आसान है।
कई बार हम किसी डिलीवरी के देर से पहुंचने पर नाराज हो जाते हैं या रिटर्न पिकअप में थोड़ी देरी होने पर शिकायत कर देते हैं। लेकिन उस समय शायद हम यह नहीं सोचते कि सामने वाला व्यक्ति उस दिन कितनी दूर से आया है, कितने ऑर्डर पूरे कर चुका है और उसे आगे कितनी जगहों पर जाना है।
शीतल के मुताबिक, इसी एहसास ने उन्हें भावुक कर दिया।
वीडियो में दिखा सड़क किनारे बैठकर काम करता एजेंट
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में शीतल पिकअप एजेंट को ज्वैलरी का बॉक्स लौटाती दिखाई देती हैं। सामान लेने के बाद एजेंट सड़क किनारे बैठकर रिटर्न की प्रक्रिया पूरी करता नजर आता है।
यही दृश्य इस वीडियो का सबसे भावुक हिस्सा बन गया।
शीतल के लिए यह महज सड़क किनारे बैठा एक डिलीवरी कर्मचारी नहीं था। उस पल उन्हें ऑनलाइन शॉपिंग की पूरी प्रक्रिया के पीछे काम करने वाले हजारों-लाखों लोगों की याद आई।
ग्राहक के घर तक सामान पहुंचाने वाले डिलीवरी एजेंट, सामान वापस लेने वाले पिकअप कर्मचारी और दूसरे लॉजिस्टिक्स वर्कर्स हमारी सुविधा को आसान बनाने के लिए लगातार काम करते हैं।
हम उनके नाम तक नहीं जानते, लेकिन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने भी जताई सहमति
वीडियो वायरल होने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने शीतल की बात से सहमति जताई। लोगों ने कहा कि आधुनिक जीवन में सुविधा बढ़ने के साथ-साथ हम उन लोगों को भूलते जा रहे हैं, जो इन सुविधाओं को हमारे दरवाजे तक पहुंचाते हैं।
एक यूजर ने कहा कि सम्मान और सहानुभूति के बीच अंतर समझना जरूरी है। डिलीवरी एजेंट भी पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ अपना काम करते हैं और उनके काम को भी सम्मान मिलना चाहिए।
वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि किसी अनजान व्यक्ति की परिस्थिति को देखकर उसके प्रति संवेदना महसूस करना अपने आप में इंसानियत की निशानी है। यूजर ने यह भी कहा कि कई बार किसी से प्यार और सम्मान से बात कर लेना या उससे पानी के लिए पूछ लेना भी उसके दिन को बेहतर बना सकता है।
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि ग्राहक और डिलीवरी एजेंट के बीच संबंध सिर्फ 'कस्टमर और सर्विस प्रोवाइडर' तक सीमित नहीं होना चाहिए। दोनों तरफ इंसान हैं और दोनों को एक-दूसरे के प्रति सम्मान रखना चाहिए।
एक साधारण रिटर्न बना इंसानियत का संदेश
शीतल के लिए यह घटना शायद कुछ मिनटों की थी, लेकिन उस छोटे से अनुभव ने उन्हें एक बड़ी बात समझा दी।
ऑनलाइन शॉपिंग की दुनिया में हमारे लिए ऑर्डर करना, पेमेंट करना, डिलीवरी लेना और सामान वापस करना बेहद आसान हो गया है। लेकिन इस सुविधा के पीछे हजारों लोगों की मेहनत शामिल है।
किसी ऐप पर ऑर्डर का स्टेटस बदलना हमारे लिए भले ही एक सामान्य डिजिटल प्रक्रिया हो, लेकिन उस स्टेटस को बदलने के लिए कोई व्यक्ति वास्तव में सड़क पर मेहनत कर रहा होता है।
यही वजह है कि शीतल का वीडियो सिर्फ एक रिटर्न पिकअप की कहानी नहीं रह गया। इसने लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया कि हमारी सुविधा के पीछे कितने ऐसे चेहरे हैं, जिन्हें हम रोज देखते तो हैं, लेकिन उनके संघर्ष के बारे में शायद ही कभी सोचते हैं।
कभी-कभी जिंदगी हमें बड़े सबक बड़ी घटनाओं से नहीं, बल्कि ऐसे ही छोटे-छोटे पलों से देती है। शीतल के लिए सड़क किनारे बैठा वह पिकअप एजेंट भी ऐसा ही एक पल था।
एक साधारण ज्वैलरी रिटर्न ने उन्हें यह एहसास दिलाया कि हर डिलीवरी के पीछे एक इंसान है, हर पिकअप के पीछे एक मेहनत है और हर सुविधा के पीछे किसी न किसी की अनदेखी कहानी छिपी है।

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