Breaking News

80 साल के दादा ने आखिरी दम तक हटाया मलबा, लेकिन सामने का मंजर देखकर टूट गए… एक साथ गईं 3 जानें



उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के हवालबाग ब्लॉक में प्राकृतिक आपदा ने एक परिवार की खुशियों को पलभर में मातम में बदल दिया। वड्यूड़ा गांव में हुए दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई। मृतकों में मां प्रेमा देवी, उनकी बेटी कल्पना आर्या और बेटा मनीष शामिल हैं। जिस घर में महज चार महीने बाद बेटी की शादी की तैयारियां शुरू होनी थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है।

बुधवार को पातलीबगड़ राममंदिर के पास ब्रह्मघाट गंऊधार में जब तीनों की एक साथ अंत्येष्टि हुई तो माहौल बेहद गमगीन हो गया। परिवार के लोगों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण भी अंतिम विदाई देने पहुंचे। किसी के लिए भी यह विश्वास करना आसान नहीं था कि कुछ समय पहले तक जिस घर में शादी की तैयारियों और खुशियों की बातें हो रही थीं, उसी परिवार की तीन जिंदगियां अब हमेशा के लिए खत्म हो चुकी हैं।

बेटी की शादी के सपने देख रहा था परिवार

बताया गया कि परिवार बेटी कल्पना आर्या की शादी को लेकर तैयारियों में जुटने वाला था। शादी में अभी करीब चार महीने का समय बाकी था। घर में शादी को लेकर खुशियां थीं और परिवार भविष्य की योजनाएं बना रहा था।

लेकिन बुधवार से पहले आई प्राकृतिक आपदा ने परिवार के सभी सपनों को मलबे के नीचे दबा दिया।

राजेंद्र राम के लिए यह हादसा जिंदगी का सबसे बड़ा दुख बन गया। उन्होंने अपनी पत्नी प्रेमा देवी, बेटी कल्पना आर्या और बेटे मनीष को एक साथ खो दिया। दिल्ली से अल्मोड़ा तक का उनका सफर भी इस त्रासदी के बाद बेहद पीड़ादायक बन गया।

जिस उम्मीद के साथ परिवार बेटी की शादी की तैयारियों के लिए आगे बढ़ने वाला था, उसी परिवार को अब एक साथ तीन अपनों को अंतिम विदाई देनी पड़ी।

अचानक आया मलबा और देखते ही देखते बदल गया सबकुछ

वड्यूड़ा गांव में आपदा के दौरान हालात अचानक बिगड़ गए। परिवार के सदस्य अपने घर में मौजूद थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ पल उनकी जिंदगी का सबसे भयावह अध्याय बनने वाले हैं।

घर के भीतर अचानक मलबा आया और प्रेमा देवी, उनकी बेटी कल्पना और बेटा मनीष उसकी चपेट में आ गए। हादसा इतना अचानक हुआ कि उन्हें संभलने या सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का मौका तक नहीं मिला।

मलबे के नीचे दबे अपनों को देखकर परिवार के बुजुर्ग दादा ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की। लेकिन भारी मलबे और विकट परिस्थितियों के सामने उनकी कोशिशें सफल नहीं हो सकीं।

80 साल के दादा ने हाथों से हटाया मलबा

इस हादसे का सबसे भावुक और झकझोर देने वाला पहलू परिवार के 80 वर्षीय दादा से जुड़ा है।

हादसे के समय वह बगल वाले कमरे में सो रहे थे। अचानक हुए घटनाक्रम के बाद जब उन्होंने सामने का मंजर देखा तो उनकी आंखों के सामने बहू, नाती और नातिन मलबे में दब चुके थे।

उम्र काफी अधिक होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। उन्होंने अपने हाथों से मलबा हटाने की कोशिश शुरू कर दी। बूढ़ी काया उनका साथ भले ही पूरी तरह नहीं दे रही थी, लेकिन अपनों को बचाने की उम्मीद ने उन्हें लगातार प्रयास करने की ताकत दी।

वह मलबे को हटाते रहे और आखिरी समय तक अपने परिवार के सदस्यों को बचाने की कोशिश करते रहे।

लेकिन प्राकृतिक आपदा के सामने उनकी कोशिशें बेबस हो गईं।

यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भी बेहद भावुक करने वाला था। एक बुजुर्ग अपने परिवार के तीन सदस्यों को बचाने के लिए मलबे में हाथ डालकर उन्हें खोज रहा था, लेकिन हालात उसके नियंत्रण से बाहर थे।

एक साथ जलीं तीन चिताएं

बुधवार का दिन इस परिवार के लिए कभी न भूल पाने वाला दिन बन गया।

पातलीबगड़ राममंदिर के पास ब्रह्मघाट गंऊधार में प्रेमा देवी, कल्पना आर्या और मनीष की एक साथ अंत्येष्टि की गई।

एक ही परिवार की तीन चिताएं जब एक साथ जलीं तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। परिवार के सदस्य लगातार अपने आंसुओं को रोकने की कोशिश करते रहे, लेकिन अपनों को खोने का दर्द इतना गहरा था कि हर आंख नम थी।

जिस घर में बेटी की शादी की तैयारियों को लेकर शहनाई बजने की उम्मीद थी, वहां अब तीन अपनों की अंतिम विदाई का दर्द था।

परिवार और ग्रामीणों के लिए यह दृश्य बेहद पीड़ादायक था।

छोटे भाई केदार ने दी मुखाग्नि

गमगीन माहौल में राजेंद्र राम के छोटे भाई केदार ने अपनी भाभी प्रेमा देवी, भतीजे मनीष और भतीजी कल्पना आर्या की चिताओं को मुखाग्नि दी।

एक साथ तीन पारिवारिक सदस्यों को अंतिम विदाई देना किसी भी व्यक्ति के लिए असहनीय स्थिति होती है। केदार के सामने एक तरफ परिवार के तीन सदस्यों को खोने का दुख था तो दूसरी तरफ पूरे परिवार को संभालने की जिम्मेदारी भी थी।

अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे और परिवार को सांत्वना दी।

जिस घर में शादी की तैयारी होनी थी, वहां पसरा सन्नाटा

कल्पना आर्या की शादी कुछ महीनों बाद होनी थी। परिवार के लोग इस मौके को लेकर उत्साहित थे। घर में रिश्तेदारों के आने-जाने, खरीदारी और शादी की तैयारियों को लेकर चर्चाएं होनी थीं।

लेकिन प्राकृतिक आपदा ने परिवार की पूरी तस्वीर बदल दी।

अब उसी घर में शादी की तैयारियों के बजाय मातम पसरा है। जिन सामानों और योजनाओं को बेटी की शादी से जोड़कर देखा जाना था, वे सब इस त्रासदी के सामने बेमानी हो गए हैं।

ग्रामीणों के लिए भी यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे गांव को झकझोर देने वाली घटना है।

जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने जताया दुख

वड्यूड़ा गांव में हुए इस हादसे पर जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने गहरा दुख जताया है।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा, पूर्व राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा, महेश नयाल, राजेंद्र बाराकोटी, अजय पाल, रमेश भाकुनी, शिवराज नयाल, बीडीसी आशीष कुमार, सुंदर राम, पान सिंह और गोविंद राम समेत कई जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

लोगों ने इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े रहने की बात कही और मृतकों को श्रद्धांजलि दी।

प्राकृतिक आपदा ने फिर दिखाया अपना भयावह रूप

पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाएं अक्सर बेहद तेजी से अपना असर दिखाती हैं। भूस्खलन, भारी बारिश और अचानक आने वाला मलबा लोगों को संभलने तक का मौका नहीं देता।

वड्यूड़ा गांव का यह हादसा भी इसी खतरे की भयावह तस्वीर सामने लाता है। कुछ ही पलों में एक परिवार के तीन सदस्य हमेशा के लिए दुनिया से चले गए।

सबसे दर्दनाक बात यह रही कि परिवार की खुशियों का केंद्र बनने वाली बेटी ही इस हादसे का शिकार हो गई। चार महीने बाद जिस घर में शादी की शहनाई गूंजनी थी, वहां अब तीन चिताओं की राख और अपनों को खोने का गहरा दर्द रह गया है।

दादा की वह कोशिश हमेशा याद रहेगी

इस हादसे में 80 वर्षीय दादा द्वारा अपने हाथों से मलबा हटाकर बहू, नाती और नातिन को बचाने की कोशिश की कहानी हर किसी को भावुक कर देती है।

उम्र और परिस्थितियों ने भले ही उनकी ताकत सीमित कर दी थी, लेकिन अपनों को बचाने की इच्छा ने उन्हें आखिरी क्षण तक प्रयास करने के लिए मजबूर किया।

दुर्भाग्य से वह अपने परिवार के तीन सदस्यों को नहीं बचा सके।

बुधवार को जब तीनों की चिताएं एक साथ जलीं तो दादा के सामने हादसे का वह मंजर फिर से ताजा हो गया होगा, जब उन्होंने अपनी आंखों के सामने अपनों को मलबे में समाते देखा था।

चार महीने बाद जिस घर में बेटी की शादी के गीत गूंजने वाले थे, वहां अब मातम है। एक प्राकृतिक आपदा ने मां, बेटा और बेटी को हमेशा के लिए छीन लिया और परिवार के सपनों को मलबे में दफन कर दिया।

कोई टिप्पणी नहीं