टूटकर बिखरा सोना! अब अमेरिका के ये आंकड़े तय करेंगे अगली चाल, खरीदने से पहले समझ लें पूरा मामला
अगर आप सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो इस समय बाजार की चाल को समझना बेहद जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में हाल के ऊपरी स्तर से तेज गिरावट देखने को मिली है। सोना करीब 4,697 डॉलर प्रति औंस के तीन महीने के ऊपरी स्तर तक पहुंचने के बाद अब 4,300 डॉलर के आसपास कारोबार करता नजर आया है। यानी ऊपरी स्तर से करीब 9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
सोने के साथ-साथ चांदी पर भी दबाव बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर है। खासकर रोजगार और महंगाई के आंकड़े आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
दरअसल, इन आंकड़ों के आधार पर निवेशक यह अनुमान लगाने की कोशिश करेंगे कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर आगे क्या फैसला ले सकता है। अगर ब्याज दरों को लेकर सख्ती का संकेत मिलता है तो सोने और चांदी पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं कमजोर आर्थिक आंकड़े ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद पैदा कर सकते हैं, जिससे कीमती धातुओं को सहारा मिल सकता है।
4,697 डॉलर से 4,300 डॉलर तक फिसला सोना
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने ने हाल ही में 4,697 डॉलर प्रति औंस का स्तर छुआ था। उस समय निवेशकों में सोने को लेकर काफी उत्साह दिखाई दे रहा था। लेकिन इसके बाद बाजार का माहौल तेजी से बदला और सोने की कीमत में लगातार कमजोरी देखने को मिली।
करीब 4,300 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंचने के साथ सोना अपने हाल के ऊपरी स्तर से लगभग 9 फीसदी नीचे आ गया।
यही गिरावट अब निवेशकों के बीच सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रही है कि क्या सोना और नीचे जाएगा या फिर मौजूदा स्तरों से दोबारा तेजी शुरू हो सकती है।
जानकारों के मुताबिक, फिलहाल छोटी अवधि में सोने और चांदी दोनों का रुख कमजोर दिखाई दे रहा है। हालांकि, बाजार में किसी भी दिशा में तेज बदलाव आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक घटनाक्रम के आधार पर हो सकता है।
आखिर क्यों गिर रहा है सोना?
सोने की कीमतों पर दबाव की सबसे बड़ी वजह अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बदली हुई उम्मीदों को माना जा रहा है। हाल के दिनों में निवेशकों का ध्यान इस बात पर ज्यादा केंद्रित है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक आगे ब्याज दरों को किस दिशा में ले जाएगा।
जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो बिना ब्याज वाले निवेश जैसे सोने की तुलना में बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले विकल्प आकर्षक हो सकते हैं। इसका असर सोने की मांग पर पड़ सकता है।
इसके अलावा अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती भी सोने के लिए चुनौती बनती है। आम तौर पर डॉलर मजबूत होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में कीमत तय होने वाले सोने पर दबाव देखने को मिल सकता है।
यही वजह है कि इस समय निवेशक अमेरिका से आने वाले हर बड़े आर्थिक आंकड़े पर नजर बनाए हुए हैं।
मिडिल ईस्ट का तनाव भी बना बड़ा कारण
सोने और चांदी की कीमतों पर वैश्विक घटनाक्रम का भी असर पड़ता है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है।
तेल की कीमतें बढ़ने से वैश्विक स्तर पर महंगाई का खतरा बढ़ सकता है। अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकता है।
यही संभावना निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
बाजार में अब यह चर्चा तेज है कि अगर फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है या लंबे समय तक सख्त रुख बनाए रखता है तो सोने और चांदी की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव आ सकता है।
25 बेसिस पॉइंट की दर बढ़ोतरी पर नजर
निवेशकों की नजर अमेरिका की अगली फेड बैठक पर भी है। बाजार में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 फीसदी की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना को लेकर काफी चर्चा है।
अगर ब्याज दर बढ़ती है तो इसका सीधा असर सोने की निवेश मांग पर पड़ सकता है। हालांकि, केवल ब्याज दर का फैसला ही कीमत तय नहीं करेगा। बाजार पहले से ही संभावित फैसले को कीमतों में शामिल करना शुरू कर देता है।
इसलिए वास्तविक फैसला आने से पहले और उसके बाद बाजार की प्रतिक्रिया अलग-अलग हो सकती है।
अब सबसे ज्यादा नजर अमेरिका के रोजगार आंकड़ों पर
इस सप्ताह अमेरिका के रोजगार आंकड़े बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। शुक्रवार को आने वाले नॉन-फार्म पेरोल यानी रोजगार के आंकड़ों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती का अंदाजा लगाया जाएगा।
अगर रोजगार बाजार कमजोर दिखाई देता है तो फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों को लेकर नरम रुख अपनाने का दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में सोने और चांदी को राहत मिल सकती है।
इसके उलट अगर रोजगार के आंकड़े उम्मीद से मजबूत आते हैं तो बाजार यह मान सकता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत है और फेड को ब्याज दरों में सख्ती जारी रखने की गुंजाइश है।
ऐसी स्थिति में सोने और चांदी पर दबाव और बढ़ सकता है।
अगले सप्ताह महंगाई के आंकड़े भी होंगे अहम
रोजगार आंकड़ों के बाद अगले सप्ताह अमेरिका के महंगाई संबंधी आंकड़ों पर भी बाजार की नजर रहेगी।
महंगाई का आंकड़ा अगर उम्मीद से ज्यादा आता है तो ब्याज दरों में कटौती या नरमी की उम्मीद कमजोर हो सकती है। इससे डॉलर और बॉन्ड यील्ड को समर्थन मिल सकता है और सोने पर दबाव बढ़ सकता है।
वहीं महंगाई उम्मीद से कम रहने पर फेड के रुख में नरमी की संभावना बढ़ सकती है। इससे सोने में दोबारा खरीदारी लौट सकती है।
यानी आने वाले कुछ दिन सोने और चांदी के निवेशकों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
भारत में भी सोने को लेकर बदला माहौल
भारत में भी सोने को लेकर बाजार का माहौल चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से जरूरत न होने पर सोना खरीदने से बचने की अपील की है।
यह किसी तरह की सरकारी पाबंदी नहीं है। इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत में आम लोगों को सोना खरीदने से रोक दिया गया है। यह एक अपील है, जिसमें घरेलू खर्च और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
इस अपील का असर सोने से जुड़ी कंपनियों और बाजार की धारणा पर भी देखने को मिला है। सोने की मांग और आयात को लेकर भी बाजार में चर्चा तेज हुई है।
MCX पर कौन से स्तर महत्वपूर्ण?
घरेलू वायदा बाजार यानी MCX पर सोने की कीमतों को लेकर भी कई महत्वपूर्ण स्तरों पर नजर रखी जा रही है।
जानकारों के मुताबिक करीब ₹1,50,000 का स्तर मौजूदा समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीचे की तरफ ₹1,47,700 और ₹1,46,400 अहम सपोर्ट स्तर माने जा रहे हैं।
अगर कीमत इन स्तरों के नीचे जाती है तो कमजोरी और बढ़ सकती है।
वहीं ऊपर की तरफ ₹1,55,000 और ₹1,59,000 महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस स्तर बताए जा रहे हैं। अगर सोना इन स्तरों को पार करके मजबूती दिखाता है तो बाजार में दोबारा तेजी की उम्मीद बन सकती है।
हालांकि, इन स्तरों को निश्चित भविष्यवाणी के तौर पर नहीं देखना चाहिए। बाजार में अचानक होने वाली वैश्विक घटनाएं इन तकनीकी स्तरों को तेजी से बदल सकती हैं।
चांदी में भी क्यों दिख रही कमजोरी?
सोने की तरह चांदी पर भी अमेरिका की ब्याज दरों, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का असर पड़ता है। चांदी की एक खासियत यह है कि इसका इस्तेमाल निवेश के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर होता है।
इसलिए वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में कमजोरी की आशंका होने पर चांदी की औद्योगिक मांग को लेकर भी चिंता पैदा हो सकती है।
यही कारण है कि इस समय चांदी में भी उतार-चढ़ाव काफी तेज है।
क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?
यह सवाल इस समय सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। लेकिन इसका कोई एक जवाब सभी निवेशकों के लिए सही नहीं हो सकता।
अगर किसी व्यक्ति को शादी या किसी जरूरी काम के लिए सोना खरीदना है तो उसे अपनी जरूरत, बजट और समय सीमा के हिसाब से फैसला करना चाहिए। वहीं केवल कीमत बढ़ने की उम्मीद में निवेश करने वाले लोगों के लिए बाजार की मौजूदा अस्थिरता को समझना जरूरी है।
एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय बाजार की स्थिति, निवेश अवधि और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल सोने और चांदी की दिशा मुख्य रूप से अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के रुख पर निर्भर करती दिखाई दे रही है।
अगर रोजगार और महंगाई के आंकड़े नरम आते हैं तो ब्याज दरों को लेकर सख्ती की उम्मीद कम हो सकती है और सोने-चांदी में खरीदारी लौट सकती है।
लेकिन अगर आंकड़े मजबूत रहे और महंगाई ऊंची बनी रही तो फेड के सख्त रुख की आशंका बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में कीमती धातुओं पर दबाव कुछ और समय तक जारी रह सकता है।
इसलिए मौजूदा समय में सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर फैसला न लें। बाजार में अगले कुछ दिनों में अमेरिका के रोजगार और महंगाई के आंकड़ों के बाद तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।

कोई टिप्पणी नहीं