सिर्फ ₹42 महीने जमा करके पाएं ₹1,000 की पेंशन! सरकार की इस स्कीम का राज जानकर चौंक जाएंगे
रिटायरमेंट के बाद नियमित आमदनी का इंतजाम करना हर व्यक्ति के लिए जरूरी होता है। नौकरी या कारोबार के दौरान कमाई होती रहती है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ काम करने की क्षमता और आय के साधन सीमित हो सकते हैं। ऐसे में अगर पहले से ही छोटी-छोटी रकम बचाकर पेंशन की व्यवस्था कर ली जाए तो बुढ़ापे में आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार की अटल पेंशन योजना (Atal Pension Yojana-APY) चलाई जा रही है।
यह एक स्वैच्छिक, अंशदान आधारित पेंशन योजना है, जिसमें पात्र व्यक्ति अपनी उम्र और चुनी गई पेंशन राशि के अनुसार नियमित योगदान करता है। 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद योजना के तहत 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की न्यूनतम गारंटीड मासिक पेंशन का प्रावधान है। पेंशन की पांच श्रेणियां 1,000, 2,000, 3,000, 4,000 और 5,000 रुपये प्रति माह हैं।
18 साल की उम्र में शुरू करने पर योगदान काफी कम
अटल पेंशन योजना की खास बात यह है कि जितनी कम उम्र में व्यक्ति इसमें शामिल होता है, उतने लंबे समय तक उसे योगदान करने का अवसर मिलता है और चुनी गई पेंशन के हिसाब से मासिक योगदान भी अपेक्षाकृत कम रहता है।
उदाहरण के तौर पर 18 वर्ष की उम्र में योजना में शामिल होने वाले व्यक्ति के लिए 1,000 रुपये की मासिक पेंशन के विकल्प पर योगदान 42 रुपये प्रति माह से शुरू होता है। इसी उम्र में 2,000 रुपये पेंशन के लिए 84 रुपये, 3,000 रुपये के लिए 126 रुपये, 4,000 रुपये के लिए 168 रुपये और 5,000 रुपये की मासिक पेंशन के लिए 210 रुपये का योगदान निर्धारित है।
यानी 18 वर्ष की उम्र में यदि कोई व्यक्ति 5,000 रुपये की पेंशन का विकल्प चुनता है तो निर्धारित योगदान के अनुसार उसे हर महीने 210 रुपये जमा करने होंगे। हालांकि, वास्तविक योगदान राशि उम्र, चुनी गई पेंशन और योगदान की आवृत्ति पर निर्भर करती है।
40 साल की उम्र में कितना देना होगा?
अगर कोई व्यक्ति योजना में अपेक्षाकृत अधिक उम्र में शामिल होता है तो उसके लिए मासिक योगदान बढ़ जाता है, क्योंकि 60 वर्ष की उम्र तक योगदान करने की अवधि कम रह जाती है।
उदाहरण के लिए 40 वर्ष की उम्र में प्रवेश करने वाले व्यक्ति के लिए 1,000 रुपये की पेंशन के विकल्प पर मासिक योगदान 291 रुपये है। इसी तरह 2,000 रुपये की पेंशन के लिए 582 रुपये, 3,000 रुपये के लिए 873 रुपये, 4,000 रुपये के लिए 1,164 रुपये और 5,000 रुपये मासिक पेंशन के लिए 1,454 रुपये का योगदान निर्धारित है।
इससे साफ है कि APY में जल्दी शुरुआत करने से योगदान की मासिक राशि कम रखी जा सकती है। यही वजह है कि युवाओं के लिए रिटायरमेंट प्लानिंग के लिहाज से योजना का शुरुआती चरण महत्वपूर्ण हो सकता है।
60 साल की उम्र के बाद मिलेगी गारंटीड न्यूनतम पेंशन
अटल पेंशन योजना के तहत ग्राहक को 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद चुनी गई श्रेणी के अनुसार न्यूनतम गारंटीड पेंशन मिलती है। इसमें 1,000 रुपये से लेकर अधिकतम 5,000 रुपये प्रति माह तक के विकल्प उपलब्ध हैं।
मसलन, यदि किसी ग्राहक ने 5,000 रुपये की पेंशन श्रेणी चुनी है और योजना के नियमों के मुताबिक योगदान किया है, तो 60 वर्ष की उम्र के बाद उसे 5,000 रुपये की न्यूनतम गारंटीड मासिक पेंशन का लाभ मिलता है। इसी तरह 1,000 रुपये की श्रेणी चुनने वाले ग्राहक को 1,000 रुपये की न्यूनतम मासिक पेंशन मिलती है।
यहां यह समझना जरूरी है कि 42 रुपये जमा करने पर हर व्यक्ति को 5,000 रुपये की पेंशन नहीं मिलेगी। 42 रुपये वाला उदाहरण 18 वर्ष की उम्र में 1,000 रुपये मासिक पेंशन विकल्प के लिए लागू है। पेंशन राशि बढ़ाने के साथ योगदान भी बढ़ता है।
ग्राहक की मृत्यु के बाद पति या पत्नी को भी लाभ
APY की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसका लाभ केवल ग्राहक तक सीमित नहीं रहता। PFRDA के अनुसार, ग्राहक की मृत्यु के बाद उसके जीवनसाथी को ग्राहक के बराबर वही गारंटीड पेंशन मिलती रहती है, जब तक जीवनसाथी जीवित रहता है।
उदाहरण के तौर पर यदि ग्राहक को 60 वर्ष की उम्र के बाद 5,000 रुपये मासिक पेंशन मिल रही थी और उसकी मृत्यु हो जाती है, तो पात्र जीवनसाथी को भी 5,000 रुपये प्रति माह की पेंशन मिलती रहेगी।
इस प्रावधान की वजह से APY को परिवार की दीर्घकालिक वित्तीय योजना के नजरिए से भी देखा जाता है।
पति-पत्नी दोनों अलग-अलग ले सकते हैं योजना का लाभ
यदि पति और पत्नी दोनों पात्रता शर्तें पूरी करते हैं तो दोनों अपने-अपने नाम से अटल पेंशन योजना में खाता खोल सकते हैं। ऐसे में दोनों अलग-अलग योगदान कर सकते हैं और 60 वर्ष की उम्र के बाद अपने-अपने चुने गए पेंशन विकल्प के अनुसार लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
इसलिए किसी परिवार में यदि पति और पत्नी दोनों योजना के लिए पात्र हैं, तो वे अपनी-अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार पेंशन श्रेणी का चयन कर सकते हैं।
दोनों की मृत्यु के बाद नॉमिनी को मिलता है पेंशन वेल्थ
APY में केवल पेंशन का ही प्रावधान नहीं है, बल्कि ग्राहक और उसके जीवनसाथी की मृत्यु के बाद नॉमिनी को भी पेंशन वेल्थ वापस करने का प्रावधान है।
PFRDA के अनुसार, ग्राहक और उसके जीवनसाथी दोनों की मृत्यु के बाद नामित व्यक्ति को ग्राहक की 60 वर्ष की उम्र तक जमा हुई पेंशन वेल्थ लौटाई जाती है।
इसका मतलब यह है कि योजना में जमा राशि से जुड़े लाभ की एक व्यवस्था ग्राहक के बाद उसके परिवार या नामित व्यक्ति के लिए भी रखी गई है।
महीने, तिमाही या छमाही आधार पर कर सकते हैं योगदान
अटल पेंशन योजना में योगदान की प्रक्रिया को भी आसान रखा गया है। योगदान मासिक, तिमाही या छमाही आधार पर किया जा सकता है। आम तौर पर ग्राहक के बैंक खाते से निर्धारित राशि ऑटो-डेबिट के माध्यम से काटी जाती है।
इससे ग्राहक को हर बार बैंक जाकर रकम जमा करने की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि खाते में पर्याप्त राशि रखना जरूरी है, ताकि निर्धारित तारीख पर योगदान की राशि काटी जा सके और योजना में योगदान नियमित बना रहे।
कौन ले सकता है APY का लाभ?
अटल पेंशन योजना भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध है, लेकिन इसमें शामिल होने के लिए निर्धारित पात्रता शर्तें लागू होती हैं। योजना में प्रवेश के लिए आयु सीमा 18 से 40 वर्ष के बीच है और व्यक्ति के पास बचत बैंक खाता या डाकघर बचत बैंक खाता होना आवश्यक है।
एक महत्वपूर्ण बदलाव 1 अक्टूबर 2022 से लागू हुआ। PFRDA के अनुसार, उस तारीख से कोई व्यक्ति जो आयकरदाता है या रहा है, APY में नया खाता खोलने के लिए पात्र नहीं है। हालांकि पहले से जुड़े ग्राहकों के संबंध में अलग नियम लागू होते हैं। इसलिए आवेदन करने से पहले वर्तमान पात्रता की पुष्टि बैंक या संबंधित आधिकारिक माध्यम से करना जरूरी है।
टैक्स छूट को लेकर क्या नियम हैं?
अटल पेंशन योजना के योगदान को लेकर आयकर कानून में पेंशन योजनाओं से संबंधित धारा 80CCD के तहत कटौती के प्रावधान मौजूद हैं। आयकर विभाग की मौजूदा जानकारी में धारा 80CCD(1) और 80CCD(1B) के तहत केंद्र सरकार की पेंशन योजना में किए गए योगदान से संबंधित कटौती का उल्लेख है। 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त 50,000 रुपये तक की कटौती का प्रावधान दिया गया है, हालांकि वास्तविक टैक्स लाभ व्यक्ति की कर स्थिति, लागू व्यवस्था और अन्य शर्तों पर निर्भर करता है।
इसलिए केवल यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर APY ग्राहक को अपने योगदान पर स्वतः एक निश्चित टैक्स छूट मिल जाएगी। टैक्स लाभ का दावा करने से पहले मौजूदा आयकर नियम और अपनी कर व्यवस्था की जांच करना जरूरी है।
योजना में योगदान बंद होने पर क्या होगा?
APY एक नियमित योगदान आधारित योजना है। इसलिए ग्राहक को अपनी प्रवेश आयु से 60 वर्ष तक निर्धारित योगदान करना होता है। PFRDA के FAQ के अनुसार, समय पर योगदान न होने की स्थिति में खाते से संबंधित नियम लागू होते हैं और योगदान में देरी या खाते की स्थिति के आधार पर निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाती है।
यही कारण है कि योजना में शामिल होने से पहले यह देखना जरूरी है कि चुनी गई मासिक योगदान राशि लंबे समय तक नियमित रूप से जमा की जा सकती है या नहीं।
निवेश करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अटल पेंशन योजना में निवेश शुरू करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों को समझना जरूरी है। सबसे पहले अपनी उम्र और आर्थिक क्षमता के अनुसार पेंशन विकल्प चुनें। इसके बाद यह सुनिश्चित करें कि बैंक खाते में निर्धारित योगदान के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध रहे।
दूसरी बात, APY को केवल छोटी रकम जमा करके बड़ी रकम हासिल करने वाली सामान्य निवेश योजना समझना सही नहीं है। यह मुख्य रूप से निर्धारित योगदान के आधार पर 60 वर्ष की उम्र के बाद न्यूनतम गारंटीड पेंशन देने वाली योजना है।
तीसरी बात, पात्रता नियम समय के साथ बदल सकते हैं। इसलिए खाता खोलने से पहले बैंक, डाकघर या PFRDA के आधिकारिक नियमों से वर्तमान पात्रता और योगदान राशि की पुष्टि करना जरूरी है।
छोटी रकम से लंबी अवधि की पेंशन योजना
अटल पेंशन योजना उन लोगों के लिए एक सरकारी पेंशन विकल्प है जो अपने रिटायरमेंट के वर्षों में नियमित न्यूनतम पेंशन की व्यवस्था करना चाहते हैं। इसमें 1,000 से 5,000 रुपये तक की न्यूनतम गारंटीड मासिक पेंशन श्रेणियां उपलब्ध हैं और ग्राहक की मृत्यु के बाद जीवनसाथी तथा उसके बाद नॉमिनी के लिए भी निर्धारित प्रावधान हैं।
हालांकि, किसी भी वित्तीय योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी पात्रता, योगदान राशि, टैक्स नियम और अपने व्यक्तिगत वित्तीय लक्ष्य को समझना जरूरी है। APY में भी केवल कम मासिक योगदान देखकर फैसला लेने के बजाय यह देखना चाहिए कि चुनी गई पेंशन और योगदान आपकी लंबी अवधि की जरूरतों के अनुरूप हैं या नहीं।

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