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नेपाल में 35 दिन बाद भी खत्म नहीं हुई अपनों की तलाश! 1036 शव मिले, 911 की पहचान नहीं… 4308 लापता लोगों का क्या हुआ?



काठमांडू। नेपाल में भोटेकोशी नदी की भयावह बाढ़ को 35 दिन बीत चुके हैं, लेकिन इस प्राकृतिक आपदा के जख्म अब भी ताजा हैं। किसी ने अपना बच्चा खोया है, किसी ने माता-पिता तो किसी परिवार का पूरा सहारा ही इस आपदा की भेंट चढ़ गया। राहत और बचाव अभियान लगातार चल रहा है, लेकिन बड़ी संख्या में परिवार आज भी अपने अपनों की एक खबर का इंतजार कर रहे हैं।

नेपाल के जिला प्रशासन रसुवा ने बुधवार सुबह 8 बजे तक का अद्यतन विवरण जारी किया है। आंकड़े इस त्रासदी की भयावहता को साफ तौर पर सामने रखते हैं। प्रशासन के मुताबिक बाढ़ प्रभावित इलाकों में खोज, उद्धार और राहत कार्यों के लिए नेपाल पुलिस के 7,992 जवानों को तैनात किया गया है। अभियान के दौरान 65 लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि 25 लोगों से अब तक संपर्क नहीं हो सका है।

सबसे दर्दनाक स्थिति उन परिवारों की है जिन्हें अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि उनके लापता परिजन जिंदा हैं या नहीं।

35 दिन बाद भी अपनों की तलाश

भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने रसुवा और आसपास के क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई थी। बाढ़ का पानी इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कई घर, सड़कें और दूसरी संरचनाएं इसकी चपेट में आ गईं।

अब आपदा के 35 दिन गुजर चुके हैं, लेकिन खोज अभियान पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सुरक्षा बल और राहत दल उन संभावित स्थानों पर लगातार तलाश कर रहे हैं, जहां बाढ़ के दौरान लोग फंस गए होंगे या मलबे में दबे हो सकते हैं।

जिला प्रशासन के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब तक 1,036 शव बरामद किए जा चुके हैं।

इनमें 31 बालक, 45 बालिकाएं, 226 महिलाएं और 307 पुरुष शामिल हैं। इसके अलावा 427 शवों के आंशिक अंग भी बरामद किए गए हैं।

इन आंकड़ों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपदा कितनी भयानक रही होगी।

911 शवों की पहचान अब भी बाकी

आपदा के बाद शवों की बरामदगी के साथ प्रशासन के सामने एक और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है—मृतकों की पहचान।

अब तक बरामद शवों में से केवल 95 शव संबंधित पक्षों को सौंपे जा सके हैं। वहीं 911 शवों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।

प्रशासन ने इन अज्ञात शवों का विवरण अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है, ताकि लापता लोगों के परिवार और संबंधित पक्ष उपलब्ध जानकारी के आधार पर अपने परिजनों की पहचान करने में मदद कर सकें।

इतनी बड़ी संख्या में शवों की पहचान न हो पाना उन परिवारों की पीड़ा को और बढ़ा रहा है, जिनके परिजन बाढ़ के बाद से लापता हैं।

कई परिवारों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनका अपना व्यक्ति आखिर कहां है। अगर किसी शव की पहचान नहीं हो पाती, तो परिवारों की उम्मीद और चिंता दोनों लंबे समय तक बनी रहती हैं।

1,113 शवों का किया गया लाश जांच-मुचुल्का

जिला प्रशासन के अनुसार अब तक 1,113 शवों का लाश जांच-मुचुल्का भी किया जा चुका है।

आपदा के बाद बरामद शवों की कानूनी प्रक्रिया पूरी करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इससे मृतकों से संबंधित रिकॉर्ड तैयार करने और आगे की पहचान प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में मदद मिलती है।

प्रशासन की ओर से बरामद शवों और आंशिक अंगों का विवरण भी रिकॉर्ड किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य में किसी भी संभावित पहचान प्रक्रिया को आसान बनाना है।

4308 लोगों की जानकारी प्रशासन के रिकॉर्ड में

लापता लोगों की तलाश का अभियान केवल स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के आधार पर नहीं चलाया जा रहा है। प्रशासन ने देश और विदेश से प्राप्त शिकायतों और सूचनाओं को भी अपने रिकॉर्ड में शामिल किया है।

ताजा प्रशासनिक रिकॉर्ड में 4,308 लोगों का विवरण दर्ज किया गया है। इसमें नेपाली नागरिकों के साथ-साथ विदेशी नागरिकों से संबंधित जानकारी भी शामिल है।

इससे पता चलता है कि भोटेकोशी की बाढ़ का असर केवल स्थानीय आबादी तक सीमित नहीं था। अलग-अलग स्थानों से लोगों के लापता होने की सूचनाएं प्रशासन तक पहुंचती रही हैं।

अब इन सूचनाओं को आधार बनाकर खोज अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।

6,451 लोगों को घायल अवस्था में निकाला गया

राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक 6,451 लोगों को घायल अवस्था में निकालने और उनका उद्धार करने का विवरण दर्ज किया गया है।

इनमें पुरुष, महिलाएं और ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनकी तत्काल पहचान नहीं हो सकी थी।

बचाव दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना रही। बाढ़ के कारण कई जगहों पर रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए थे और मलबे ने आवागमन को मुश्किल बना दिया था।

इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियों और राहत टीमों ने लगातार अभियान चलाकर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का प्रयास किया।

7,992 पुलिसकर्मी संभाल रहे हैं मोर्चा

भोटेकोशी बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर राहत और खोज अभियान चलाने के लिए नेपाल पुलिस के 7,992 जवानों को तैनात किया गया है।

इन जवानों की जिम्मेदारी केवल लापता लोगों की तलाश तक सीमित नहीं है। प्रभावित इलाकों में राहत व्यवस्था बनाए रखना, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, बरामद शवों की प्रक्रिया में सहयोग करना और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाना भी अभियान का हिस्सा है।

इतने बड़े स्तर पर पुलिस बल की तैनाती बताती है कि प्रशासन इस आपदा के बाद की स्थिति को कितनी गंभीरता से संभाल रहा है।

25 लोगों से अब भी संपर्क नहीं

प्रशासन के ताजा आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि अभियान में शामिल लोगों में से 25 लोगों से अब तक संपर्क नहीं हो सका है।

संचार व्यवस्था और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई क्षेत्रों में लोगों से संपर्क स्थापित करना चुनौतीपूर्ण रहा है।

लापता लोगों के परिवार लगातार प्रशासन से जानकारी मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। कई मामलों में परिजनों की ओर से दी गई जानकारी को भी खोज अभियान का हिस्सा बनाया गया है।

देश-विदेश से मिल रही सूचनाओं के आधार पर तलाश

लापता लोगों की तलाश में नेपाल प्रशासन को देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेशों से भी सूचनाएं और शिकायतें मिल रही हैं।

इन सूचनाओं को रिकॉर्ड में शामिल करके सुरक्षा एजेंसियां संभावित स्थानों पर खोज कर रही हैं। किसी व्यक्ति के बारे में मिली छोटी-सी जानकारी भी कई बार उसके परिवार तक पहुंचने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

इसी कारण प्रशासन ने लापता लोगों से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से रिकॉर्ड करना शुरू किया है।

बाढ़ ने पीछे छोड़ा गहरा दर्द

भोटेकोशी की बाढ़ ने केवल इमारतों और सड़कों को नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी।

कई लोगों ने अपने प्रियजनों को हमेशा के लिए खो दिया। वहीं हजारों परिवार आज भी इस इंतजार में हैं कि शायद उनके लापता परिजन किसी अस्पताल, राहत शिविर या किसी दूसरे स्थान पर मिल जाएं।

1036 शवों की बरामदगी और 911 शवों की पहचान बाकी होने के आंकड़े इस आपदा की गंभीरता को सामने रखते हैं। दूसरी तरफ 4308 लोगों से संबंधित जानकारी प्रशासन के रिकॉर्ड में दर्ज होना बताता है कि लापता लोगों की तलाश अभी भी एक बहुत बड़ा अभियान है।

तलाश अभी खत्म नहीं हुई

भोटेकोशी की बाढ़ को 35 दिन बीत चुके हैं, लेकिन राहत और खोज अभियान अभी भी जारी है। सुरक्षा बलों की बड़ी संख्या प्रभावित इलाकों में काम कर रही है। बरामद शवों की पहचान की प्रक्रिया चल रही है और देश-विदेश से मिल रही सूचनाओं के आधार पर लापता लोगों की तलाश की जा रही है।

प्रशासन के सामने अब दो बड़ी जिम्मेदारियां हैं—लापता लोगों का पता लगाना और अज्ञात शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाना।

इस आपदा में जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया है, उनके लिए हर दिन उम्मीद और दर्द के बीच गुजर रहा है।

भोटेकोशी की बाढ़ का पानी भले ही उतर गया हो, लेकिन हजारों परिवारों की आंखों में अपने अपनों की तलाश अब भी जारी है। 35 दिन बाद भी सवाल वही है—लापता लोग आखिर कहां हैं और कितने परिवारों को अभी अपने प्रियजनों की खबर मिलने का इंतजार है?

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