100 डॉलर पार हुआ कच्चा तेल, अब पेट्रोल-डीजल और LPG की बारी? तेल कंपनियों के घाटे ने बढ़ाई टेंशन
अगर आप पेट्रोल या डीजल से चलने वाला वाहन इस्तेमाल करते हैं तो अंतरराष्ट्रीय बाजार से आई यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कच्चे तेल की कीमत एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड में तेज उछाल आया है और इसका सीधा असर भारत की तेल विपणन कंपनियों पर पड़ रहा है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगातार महंगा हो रहा है। ऐसे में सरकारी तेल कंपनियों के ईंधन कारोबार पर दबाव बढ़ गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, तेल कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर करीब 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 23 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। घरेलू एलपीजी पर भी करीब 200 रुपये प्रति सिलेंडर तक की अंडर-रिकवरी की स्थिति बताई जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं तो क्या आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ सकते हैं?
100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 2.5 फीसदी की तेजी दर्ज की गई और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड की कीमत में भी करीब 2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंता मानी जा रही है। यदि तनाव लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
भारत के लिए यह स्थिति इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। भारत दुनिया के प्रमुख तेल आयातकों में शामिल है और अपनी जरूरत का करीब 88 फीसदी कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है।
ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारत के आयात बिल पर पड़ता है।
तेल कंपनियों को पेट्रोल-डीजल पर कितना नुकसान?
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बावजूद अगर पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम स्थिर रखे जाते हैं तो तेल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 23 रुपये प्रति लीटर की नकारात्मक मार्केटिंग मार्जिन का सामना करना पड़ रहा है।
एलपीजी के मामले में भी कंपनियों पर दबाव बढ़ा है और घरेलू गैस सिलेंडर पर करीब 200 रुपये तक की अंडर-रिकवरी बताई जा रही है।
हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि ग्राहकों को फिलहाल पेट्रोल पर सीधे 5 रुपये या डीजल पर 23 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा। यह कंपनियों की लागत और मौजूदा बिक्री कीमत के बीच के अंतर को दर्शाता है।
अगर यह अंतर लंबे समय तक बना रहता है तो कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर दबाव बढ़ सकता है और भविष्य में कीमतों की समीक्षा की जरूरत पैदा हो सकती है।
क्या फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की कोई पक्की घोषणा नहीं हुई है। लेकिन कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों ने भविष्य में संभावित मूल्य वृद्धि की आशंका जरूर बढ़ा दी है।
जानकारों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं और पश्चिम एशिया का तनाव जारी रहता है तो पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
दूसरी तरफ अगर कच्चे तेल की कीमतें कुछ समय बाद नीचे आती हैं तो घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में तेल कंपनियों को कुछ राहत मिल सकती है।
इसलिए आने वाले दिनों में सबसे ज्यादा नजर कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर रहेगी।
महंगा पेट्रोल-डीजल सिर्फ वाहन चालकों की समस्या नहीं
ईंधन की कीमत बढ़ने का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव अर्थव्यवस्था के कई हिस्सों पर दिखाई देता है।
ट्रक, बस, टैक्सी और दूसरे व्यावसायिक वाहनों में पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल होता है। ईंधन महंगा होने पर माल ढुलाई और परिवहन की लागत बढ़ सकती है। इसके बाद कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा उत्पादों और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकती हैं।
यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमत में तेजी को महंगाई के लिए भी बड़ा जोखिम माना जाता है।
ईंधन महंगा होने से परिवहन, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और उत्पादन लागत प्रभावित हो सकती है। इसका अप्रत्यक्ष असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ सकता है।
सब्जियों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक असर
अगर माल ढुलाई महंगी होती है तो खेत से मंडी और मंडी से बाजार तक सामान पहुंचाने की लागत बढ़ सकती है। सब्जियों, फलों और दूसरी आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई में डीजल का बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है।
इसके अलावा फैक्ट्रियों में मशीनरी, जनरेटर, माल ढुलाई और अन्य गतिविधियों की लागत भी बढ़ सकती है। पैकेजिंग से लेकर डिलीवरी तक कई स्तरों पर ईंधन लागत जुड़ी होती है।
इसलिए पेट्रोल-डीजल की कीमत में संभावित बढ़ोतरी का असर अप्रत्यक्ष रूप से रोजमर्रा के सामान पर भी पड़ सकता है।
किसानों पर भी पड़ सकता है असर
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर ईंधन की कीमतों का असर काफी महत्वपूर्ण होता है। खेती में ट्रैक्टर, डीजल पंपसेट, हार्वेस्टर और कृषि उत्पादों की ढुलाई के लिए डीजल का इस्तेमाल किया जाता है।
अगर डीजल महंगा होता है तो जुताई, सिंचाई, फसल कटाई और फसल को बाजार तक पहुंचाने की लागत बढ़ सकती है। इससे किसानों की कुल उत्पादन लागत पर दबाव बढ़ने की संभावना रहती है।
छोटे दुकानदारों और कारोबारियों के लिए भी महंगा ईंधन परेशानी बढ़ा सकता है। सामान मंगाने और ग्राहकों तक पहुंचाने की लागत बढ़ने से उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
भारत के आयात बिल पर भी बढ़ेगा दबाव
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत बढ़ने का एक बड़ा असर भारत के आयात बिल पर पड़ता है। देश को अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदना पड़ता है।
इसलिए प्रति बैरल कीमत में होने वाली बढ़ोतरी बड़े स्तर पर अतिरिक्त विदेशी मुद्रा खर्च में बदल सकती है। इससे व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके अलावा कच्चे तेल का भुगतान आमतौर पर डॉलर में होता है। ऐसे में महंगा तेल रुपये की विनिमय दर पर भी दबाव बढ़ा सकता है।
अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है तो सरकार, तेल कंपनियों और आम उपभोक्ताओं—तीनों के लिए चुनौती बढ़ सकती है।
पेट्रोल-डीजल की मौजूदा कीमतें
देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम इस प्रकार बताए जा रहे हैं:
दिल्ली: पेट्रोल 102.12 रुपये, डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर
मुंबई: पेट्रोल 111.31 रुपये, डीजल 97.97 रुपये प्रति लीटर
कोलकाता: पेट्रोल 113.51 रुपये, डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर
चेन्नई: पेट्रोल 107.78 रुपये, डीजल 99.56 रुपये प्रति लीटर
गुरुग्राम: पेट्रोल 102.97 रुपये, डीजल 95.94 रुपये प्रति लीटर
पटना: पेट्रोल 113.35 रुपये, डीजल 99.36 रुपये प्रति लीटर
नागपुर: पेट्रोल 111.90 रुपये, डीजल 98.20 रुपये प्रति लीटर
शिमला: पेट्रोल 102.31 रुपये, डीजल 94.34 रुपये प्रति लीटर
ग्वालियर: पेट्रोल 114.30 रुपये, डीजल 99.35 रुपये प्रति लीटर
अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अंतर का एक बड़ा कारण राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स और वैट हैं।
25 मई को हुई थी आखिरी बढ़ोतरी
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 मई को करीब 2.61 रुपये प्रति लीटर और 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद से खुदरा कीमतों में बड़ी स्थिरता देखने को मिली है।
लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के 100 डॉलर के पार जाने से एक बार फिर कीमतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
अभी राहत, लेकिन आगे क्या?
फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बावजूद पेट्रोल और डीजल की घरेलू खुदरा कीमतों में तत्काल कोई नई बढ़ोतरी घोषित नहीं की गई है।
लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगातार ऊंची बनी रहती है, तो तेल कंपनियों पर बढ़ता घाटा लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कीमतों को लेकर स्थिति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि कच्चे तेल की कीमत कितने समय तक 100 डॉलर के ऊपर रहती है और पश्चिम एशिया का तनाव किस दिशा में जाता है।
यानी फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने की कोई तत्काल पुष्टि नहीं है, लेकिन कच्चे तेल की 100 डॉलर के पार की छलांग ने आने वाले दिनों में महंगे ईंधन की आशंका जरूर बढ़ा दी है।

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