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भाई की शादी में अड़चन बताकर पत्नी-सास से कपड़े उतारो टोटका​​ करवाया , फिर खींची निजी तस्वीरें; पति की करतूत से मचा हड़कंप



महाराष्ट्र के नवी मुंबई से अंधविश्वास, धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी एक व्यक्ति ने कथित तौर पर काले जादू और टोटके का सहारा लेकर अपनी पत्नी और सास को मानसिक दबाव में लिया और फिर उनकी निजी तस्वीरों का इस्तेमाल उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए किया। मामला सामने आने के बाद पीड़िता ने पुलिस से शिकायत की, जिसके आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है।

बताया जा रहा है कि आरोपी अपनी पत्नी और सास के साथ नवी मुंबई में किराए के मकान में रहता था। परिवार के मुताबिक, आरोपी का व्यवहार पहले से कुछ असामान्य था। लेकिन अप्रैल 2025 के दौरान उसने कथित तौर पर ऐसा दावा किया, जिसके बाद परिवार की परेशानी बढ़ती चली गई।

आरोपी ने कथित तौर पर पत्नी से कहा कि उसके छोटे भाई की शादी में कुछ बाधाएं आ रही हैं। इन बाधाओं को दूर करने के लिए एक विशेष टोटका करना जरूरी है। आरोप है कि इसी बहाने उसने अपनी पत्नी और सास को ऐसी गतिविधि करने के लिए मजबूर किया, जिससे दोनों महिलाएं बेहद असहज और शर्मिंदा हुईं।

शादी की अड़चन दूर करने का बताया टोटका

परिवार की शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने दावा किया था कि शादी में आ रही कथित बाधाओं को दूर करने के लिए एक खास धार्मिक प्रक्रिया या टोटका करना होगा। उसने अपनी पत्नी और सास को इस प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए दबाव डाला।

आरोप है कि दोनों महिलाओं को यह विश्वास दिलाया गया कि अगर उन्होंने बताए गए तरीके से टोटका नहीं किया तो परिवार में शादी से जुड़ी समस्या दूर नहीं होगी। परिवार की भलाई की चिंता में दोनों ने उसकी बात मान ली।

लेकिन आरोप है कि आरोपी का मकसद किसी धार्मिक प्रक्रिया को पूरा करना नहीं था। उसने कथित तौर पर इस मौके का फायदा उठाकर दोनों की निजी तस्वीरें बना लीं।

यहां से मामला कथित अंधविश्वास से निकलकर ब्लैकमेलिंग और धमकी तक पहुंच गया।

निजी तस्वीरों को बनाया ब्लैकमेलिंग का हथियार

आरोप है कि तस्वीरें लेने के बाद आरोपी ने अपनी पत्नी को धमकाना शुरू कर दिया। उसने कथित तौर पर कहा कि अगर उसकी बात नहीं मानी गई तो तस्वीरों को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक कर दिया जाएगा।

इस तरह की धमकी ने पीड़िता को मानसिक दबाव में डाल दिया। निजी तस्वीरों के सार्वजनिक होने का डर किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। आरोप है कि इसी डर का फायदा उठाकर आरोपी अपनी पत्नी पर दबाव बनाता रहा।

मामले की शिकायत के अनुसार, आरोपी ने बाद में पत्नी को अजमेर बुलाया और उसे कथित तौर पर उन तस्वीरों के साथ वहां पहुंचने के लिए कहा। पीड़िता पहले से ही डर और तनाव में थी, लेकिन परिवार और सामाजिक प्रतिष्ठा को लेकर चिंता के कारण वह वहां पहुंच गई।

अजमेर में सामने आया कथित अगला कदम

पीड़िता के आरोप के मुताबिक, अजमेर पहुंचने के बाद आरोपी ने उसकी निजी तस्वीरों का इस्तेमाल एक बार फिर दबाव बनाने के लिए किया। आरोप है कि उसने तस्वीरों को पीड़िता के पिता और भाई के व्हाट्सऐप नंबर पर भेज दिया।

जब पीड़िता के परिवार को इस बात की जानकारी मिली तो मामला और गंभीर हो गया। परिवार ने कथित घटना की जानकारी पुलिस को देने का फैसला किया।

इसके बाद पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर पुलिस के सामने अपनी पूरी आपबीती बताई। उसने आरोप लगाया कि उसके पति ने काले जादू और टोटके के नाम पर उसे और उसकी मां को मानसिक दबाव में लिया और फिर निजी तस्वीरों का इस्तेमाल धमकी देने के लिए किया।

पुलिस में दर्ज हुई शिकायत

मामले में पीड़िता की शिकायत के आधार पर वाशी पुलिस स्टेशन में कार्रवाई शुरू की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस ने 3 जुलाई 2025 को आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।

आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी कानून और महाराष्ट्र के काला जादू एवं अंधविश्वास विरोधी कानून के तहत भी कार्रवाई की गई है।

मामले में आपराधिक धमकी और जानबूझकर अपमान से संबंधित प्रावधानों को भी शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि किसी मामले में धाराओं का अंतिम निर्धारण जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होता है।

शिकायत के बाद फरार हुआ आरोपी

पुलिस के अनुसार, शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी फरार हो गया। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी है। उसके संभावित ठिकानों और संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित तौर पर तस्वीरें कब और किस परिस्थिति में बनाई गईं, उन्हें किन लोगों को भेजा गया और आरोपी ने पीड़िता को किस तरह धमकी दी।

इसके अलावा पुलिस इस बात की भी जांच कर सकती है कि मामले में डिजिटल साक्ष्य किस रूप में मौजूद हैं। व्हाट्सऐप संदेश, तस्वीरें, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

अंधविश्वास के नाम पर अपराध का सवाल

यह मामला केवल ब्लैकमेलिंग के आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि अंधविश्वास के नाम पर लोगों को मानसिक रूप से प्रभावित किए जाने के खतरे को भी सामने लाता है।

भारत में आज भी कई लोग बीमारी, शादी, पारिवारिक विवाद, आर्थिक परेशानी या अन्य समस्याओं के समाधान के लिए तंत्र-मंत्र और टोटकों का सहारा लेते हैं। धार्मिक आस्था रखना अलग बात है, लेकिन किसी व्यक्ति को डराकर, दबाव बनाकर या धोखे से कोई काम करवाना गंभीर मामला बन सकता है।

विशेषज्ञ भी लंबे समय से लोगों को सलाह देते रहे हैं कि किसी भी परेशानी का समाधान अंधविश्वास या डर के आधार पर तलाशने के बजाय उचित विशेषज्ञ और कानूनी सहायता लेनी चाहिए।

खासकर जब कोई व्यक्ति यह दावा करे कि परिवार की समस्या दूर करने के लिए किसी को अपनी निजी सीमाएं पार करनी होंगी या कोई असामान्य गतिविधि करनी होगी, तो ऐसे मामले में सावधान हो जाना चाहिए।

निजी तस्वीरों को लेकर रहें सतर्क

इस मामले से एक और महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है—निजी तस्वीरों और डिजिटल सामग्री की सुरक्षा। किसी भी व्यक्ति की निजी तस्वीर को उसकी अनुमति के बिना साझा करना या उसका इस्तेमाल धमकी देने के लिए करना गंभीर कानूनी समस्या पैदा कर सकता है।

अगर कोई व्यक्ति निजी तस्वीरों को वायरल करने की धमकी देता है तो पीड़ित को डरकर उसकी मांग मानने के बजाय पुलिस या साइबर क्राइम अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए। डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण है।

पीड़ित व्यक्ति संबंधित संदेशों, स्क्रीनशॉट, कॉल डिटेल या अन्य उपलब्ध प्रमाणों को सुरक्षित रख सकता है ताकि जांच में मदद मिल सके।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी कहानी

फिलहाल मामले में आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। आरोपी का पक्ष सामने आने और जांच पूरी होने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

यह मामला एक बार फिर बताता है कि अंधविश्वास के नाम पर शुरू होने वाली कोई भी गतिविधि अगर डर, दबाव, धमकी या शोषण में बदल जाए तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। परिवार और समाज के डर से चुप रहने के बजाय पीड़ित को कानूनी मदद लेनी चाहिए।

फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपी को तलाशना और मामले से जुड़े डिजिटल व अन्य साक्ष्यों को जुटाना है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी स्पष्ट होगा कि कथित टोटके की पूरी कहानी क्या थी और निजी तस्वीरों के जरिए आरोपी ने पीड़िता पर किस तरह दबाव बनाया।

खबर में लगाए गए आरोप पुलिस शिकायत और उपलब्ध विवरण पर आधारित हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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