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सुबह उठते ही मुंह से बदबू? ब्रश करने के बाद भी नहीं जा रही तो शरीर दे रहा है ये बड़ा संकेत, वजह जानकर चौंक जाएंगे!



सुबह सोकर उठने के बाद मुंह से हल्की बदबू आना बहुत आम बात है। रातभर खाना-पीना बंद रहने के कारण मुंह में लार का प्रवाह कम हो जाता है और बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं। इसी वजह से कई लोगों को सुबह उठते ही सांसों में दुर्गंध महसूस होती है। ब्रश और जीभ की सफाई करने के बाद यह समस्या आमतौर पर कम हो जाती है।

लेकिन अगर सुबह की बदबू बहुत तेज हो, रोजाना बनी रहती हो या ब्रश करने के बाद भी जल्दी वापस आ जाती हो, तो इसे केवल दांतों की सफाई से जोड़कर देखना सही नहीं है। सांसों की दुर्गंध यानी हैलिटोसिस के पीछे मुंह और दांतों से जुड़ी समस्याओं के अलावा मुंह का सूखापन, मसूड़ों की बीमारी, साइनस या गले की समस्या, एसिड रिफ्लक्स और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं।

इसलिए अगर बदबू लगातार बनी हुई है, तो उसके कारण को समझना जरूरी है।

सुबह उठते ही मुंह से बदबू क्यों आती है?

रात में सोते समय लार बनना कम हो जाता है। लार मुंह को साफ रखने और बैक्टीरिया को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब लार कम होती है तो मुंह में मौजूद बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं।

ये बैक्टीरिया भोजन के छोटे कणों और मुंह में मौजूद दूसरे पदार्थों को तोड़ते हैं। इस प्रक्रिया में ऐसे यौगिक बन सकते हैं जिनसे सांसों में दुर्गंध आती है।

यही वजह है कि सुबह उठते समय सांसों में बदबू होना हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहे या इसके साथ दूसरे लक्षण दिखाई दें, तो दांतों और मसूड़ों की जांच के साथ अन्य कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए।

1. मसूड़ों की बीमारी हो सकती है वजह

लगातार मुंह से बदबू आने का एक आम कारण मसूड़ों से जुड़ी बीमारी हो सकता है। अगर दांतों पर प्लाक जमा रहता है और उसकी नियमित सफाई नहीं होती, तो मसूड़ों में सूजन और संक्रमण हो सकता है।

मसूड़ों से खून आना, लाल या सूजे हुए मसूड़े, दांतों में दर्द, चबाते समय परेशानी और लगातार खराब सांस जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं।

अगर ब्रश करने के बावजूद बदबू बनी रहती है और मसूड़ों से खून भी आता है, तो इसे सामान्य समझकर टालना ठीक नहीं है। ऐसे में डेंटिस्ट से जांच कराना जरूरी हो सकता है।

2. जीभ की सफाई न करना भी बड़ा कारण

कई लोग रोजाना दांतों पर तो ब्रश करते हैं, लेकिन जीभ की सफाई पर ध्यान नहीं देते। जीभ की सतह पर बैक्टीरिया, मृत कोशिकाएं और भोजन के छोटे कण जमा हो सकते हैं।

खासकर जीभ के पिछले हिस्से पर बैक्टीरिया जमा होने की संभावना ज्यादा रहती है। इससे सांसों में दुर्गंध पैदा करने वाले यौगिक बन सकते हैं।

इसलिए रोजाना ब्रश करने के साथ जीभ को भी धीरे-धीरे साफ करना मुंह की स्वच्छता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि जीभ को बहुत जोर से रगड़ने से जलन या चोट हो सकती है, इसलिए सावधानी जरूरी है।

3. मुंह का सूखापन भी हो सकता है कारण

अगर रात में मुंह सूखता रहता है तो सुबह बदबू ज्यादा महसूस हो सकती है। इसे ड्राई माउथ या ज़ेरोस्टोमिया कहा जाता है।

मुंह में लार कम होने पर बैक्टीरिया को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। कुछ दवाएं, शरीर में पानी की कमी, मुंह से सांस लेने की आदत और कुछ स्वास्थ्य स्थितियां मुंह सूखने का कारण बन सकती हैं।

जो लोग रात में खर्राटे लेते हैं या नाक बंद होने के कारण मुंह खोलकर सोते हैं, उनमें भी सुबह मुंह सूखने और सांसों में बदबू की समस्या हो सकती है।

अगर रोजाना सुबह मुंह बेहद सूखा रहता है और पानी पीने के बाद भी समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर या डेंटिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।

4. नाक और साइनस की समस्या से भी जुड़ी हो सकती है बदबू

सांसों की दुर्गंध का कारण हमेशा मुंह के अंदर ही नहीं होता। नाक और गले से जुड़ी कुछ समस्याएं भी बदबूदार सांस का कारण बन सकती हैं।

साइनस संक्रमण, नाक बंद रहना या गले के पीछे बलगम जमा होने जैसी स्थितियों में मुंह से दुर्गंध महसूस हो सकती है।

अगर बदबू के साथ लगातार नाक बंद रहती है, चेहरे में दबाव या दर्द महसूस होता है, गले में खराश रहती है या लंबे समय तक गले के पीछे बलगम जमा होने जैसा एहसास होता है, तो डॉक्टर से जांच कराना उचित है।

5. एसिड रिफ्लक्स भी हो सकता है जिम्मेदार

कुछ लोगों में पेट का एसिड ऊपर की ओर भोजन नली में आने लगता है। इसे एसिड रिफ्लक्स कहा जाता है। इससे मुंह में खट्टा स्वाद, सीने में जलन, गले में जलन या बार-बार डकार जैसी समस्या हो सकती है।

कुछ मामलों में रिफ्लक्स सांसों की दुर्गंध में भी योगदान दे सकता है।

अगर सुबह की बदबू के साथ बार-बार सीने में जलन, खट्टे स्वाद का एहसास या रात में खाना ऊपर आने जैसी परेशानी होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

6. रात में खाने-पीने की आदत भी डाल सकती है असर

सोने से ठीक पहले खाना खाने और उसके बाद मुंह की अच्छी तरह सफाई न करने से भी सुबह सांसों में बदबू बढ़ सकती है।

खाने के छोटे कण दांतों के बीच या जीभ पर रह सकते हैं। रातभर लार का प्रवाह कम होने पर बैक्टीरिया इन कणों पर सक्रिय होते हैं और दुर्गंध पैदा कर सकते हैं।

इसलिए सोने से पहले दांतों की सफाई करना, दांतों के बीच फंसे भोजन को हटाना और जीभ की सफाई करना महत्वपूर्ण है।

7. कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में भी सांस की गंध बदल सकती है

ज्यादातर मामलों में लगातार बदबू का कारण मुंह, दांत या मसूड़ों से जुड़ा होता है। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में सांस की गंध में बदलाव अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से भी जुड़ा हो सकता है।

उदाहरण के लिए अनियंत्रित डायबिटीज में सांस में असामान्य मीठी या फल जैसी गंध आ सकती है। गंभीर स्थिति में यह डायबिटिक कीटोएसिडोसिस जैसी आपातकालीन समस्या से जुड़ी हो सकती है, खासकर जब बहुत ज्यादा प्यास, बार-बार पेशाब, उल्टी, पेट दर्द, गहरी या तेज सांस और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण भी मौजूद हों।

ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता की जरूरत हो सकती है।

इसलिए हर तरह की बदबू को डायबिटीज या किसी गंभीर बीमारी का संकेत मानना भी सही नहीं है। सांस की गंध में बदलाव के साथ मौजूद दूसरे लक्षणों को भी देखना जरूरी है।

क्या सिर्फ माउथवॉश से समस्या खत्म हो जाएगी?

मुंह की बदबू छिपाने के लिए माउथवॉश इस्तेमाल करने से कुछ समय के लिए सांसों की गंध बेहतर हो सकती है। लेकिन अगर बदबू के पीछे मसूड़ों की बीमारी, दांतों में संक्रमण, ड्राई माउथ या कोई दूसरी समस्या है तो केवल माउथवॉश इसका स्थायी समाधान नहीं है।

कुछ माउथवॉश में मौजूद तत्व बैक्टीरिया को कम करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल दांतों की ब्रशिंग और फ्लॉसिंग का विकल्प नहीं है।

अगर बदबू लगातार बनी हुई है तो पहले कारण का पता लगाना ज्यादा जरूरी है।

सुबह की बदबू कम करने के लिए क्या करें?

मुंह की अच्छी स्वच्छता सांसों की दुर्गंध को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके लिए कुछ आदतों को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।

सबसे पहले, दिन में कम से कम दो बार फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट से दांत साफ करें।

दूसरा, रोजाना जीभ की सफाई करें और दांतों के बीच फंसे भोजन को फ्लॉस या इंटरडेंटल क्लीनिंग की मदद से हटाएं।

तीसरा, पूरे दिन पर्याप्त पानी पीते रहें ताकि मुंह सूखने से बच सके।

चौथा, धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाएं, क्योंकि ये सांसों की दुर्गंध के साथ मसूड़ों और मुंह की दूसरी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ा सकते हैं।

पांचवां, अगर कोई दवा लेने के बाद मुंह बहुत ज्यादा सूखने लगा है तो डॉक्टर से बात करें। अपनी दवा खुद से बंद न करें।

कब डेंटिस्ट या डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

अगर सुबह की बदबू केवल कभी-कभार होती है और ब्रश करने के बाद खत्म हो जाती है तो आमतौर पर चिंता की जरूरत नहीं होती।

लेकिन अगर कई हफ्तों तक लगातार सांसों से दुर्गंध आती रहे, अच्छी मौखिक सफाई के बावजूद समस्या दूर न हो या साथ में मसूड़ों से खून, दांतों में दर्द, दांत हिलना, मुंह में घाव, निगलने में परेशानी या लगातार मुंह सूखना जैसे लक्षण हों, तो डेंटिस्ट से जांच करानी चाहिए।

अगर डेंटिस्ट को मुंह से जुड़ी कोई वजह नहीं मिलती, तो जरूरत के अनुसार डॉक्टर नाक, गले, पेट या अन्य स्वास्थ्य कारणों की जांच कर सकते हैं।

हर सुबह की बदबू का मतलब बीमारी नहीं

सुबह उठने के बाद मुंह से बदबू आना बहुत सामान्य समस्या है और इसके पीछे अक्सर रातभर कम हुई लार और मुंह में बैक्टीरिया की गतिविधि होती है। इसलिए सिर्फ सुबह बदबू आने से घबराने की जरूरत नहीं है।

लेकिन अगर बदबू तेज है, रोजाना रहती है, ब्रश करने के बाद भी जल्दी लौट आती है या दूसरे लक्षणों के साथ दिखाई देती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मुंह की नियमित सफाई, पर्याप्त पानी, दांतों और मसूड़ों की देखभाल और समय-समय पर डेंटल चेकअप इस समस्या को समझने और नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सांसों की दुर्गंध को केवल छिपाने के बजाय उसके पीछे की वजह समझी जाए। कई बार कारण बेहद सामान्य होता है, लेकिन लगातार बनी रहने वाली समस्या में सही जांच ही सबसे बेहतर रास्ता है।

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