कॉपर के बाद सोना-चांदी में भी भूचाल! एक झटके में ₹10,000 से ज्यादा गिरे दाम, आखिर क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
Gold Silver Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार शाम अचानक बड़ी गिरावट देखने को मिली। शाम करीब 6:30 बजे तक घरेलू वायदा बाजार से लेकर ग्लोबल बुलियन मार्केट तक दोनों कीमती धातुओं पर भारी दबाव नजर आया। खास तौर पर चांदी में आई गिरावट ने बाजार को चौंका दिया। चांदी की कीमत एक ही कारोबारी सत्र में 4 फीसदी से ज्यादा नीचे चली गई, जबकि सोने में भी 2,000 रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
इस अचानक गिरावट के पीछे मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिका के महंगाई आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बढ़ी अनिश्चितता को प्रमुख वजह माना जा रहा है। निवेशक अब अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इन आंकड़ों का असर डॉलर, बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों की उम्मीदों पर पड़ सकता है।
ऐसे माहौल में हाल के ऊंचे स्तरों पर पहुंच चुके सोने और चांदी में मुनाफावसूली भी देखने को मिली है।
एमसीएक्स पर सोना अचानक ₹2,364 टूटा
गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोने के भाव में अचानक तेज गिरावट आई। अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना कारोबार के दौरान 2,364 रुपये तक टूट गया।
गिरावट के बाद सोने का भाव 1,51,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच गया। यह उस कारोबारी सत्र का निचला स्तर रहा।
दिन के कारोबार के दौरान सोने ने 1,54,450 रुपये प्रति 10 ग्राम का ऊपरी स्तर भी देखा था। यानी ऊपरी स्तर से निचले स्तर तक कीमत में काफी बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
इससे पहले सोना 1,53,763 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। ऐसे में गुरुवार की गिरावट ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
हाल के दिनों में सोने की कीमतों में जिस तरह तेजी बनी हुई थी, उसके बाद अचानक आई यह गिरावट बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
चांदी में सोने से भी बड़ा क्रैश
अगर सोने की गिरावट ने निवेशकों को चौंकाया तो चांदी में आया 4 फीसदी से ज्यादा का क्रैश उससे भी बड़ा झटका रहा।
एमसीएक्स पर चांदी की कीमत में 10,632 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद चांदी का भाव गिरकर 2,33,581 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। यह कारोबार के दौरान चांदी का निचला स्तर रहा।
दिन के कारोबार में चांदी ने 2,44,300 रुपये प्रति किलोग्राम का ऊपरी स्तर भी देखा था। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,44,213 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।
इस तरह एक तरफ जहां सोने में हजारों रुपये की गिरावट देखी गई, वहीं चांदी में भी कुछ ही समय में 10 हजार रुपये से ज्यादा की गिरावट ने बुलियन मार्केट में हलचल पैदा कर दी।
आखिर अचानक क्यों टूटे सोने-चांदी के भाव?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जिस सोने और चांदी में तेजी का माहौल बना हुआ था, उसमें अचानक इतनी बड़ी गिरावट क्यों आ गई?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं।
आरमनी की सीनियर रिसर्च मैनेजर मौमिता सामंता के मुताबिक बाजार में महंगाई के नए आंकड़ों का इंतजार है। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर भी निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और क्रूड ऑयल 103 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से महंगाई का डर फिर बढ़ गया है।
यही चिंता अब निवेशकों को परेशान कर रही है।
महंगा क्रूड फिर बढ़ा सकता है महंगाई का डर
कच्चे तेल की कीमतों का पूरी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है। जब क्रूड महंगा होता है तो ईंधन से लेकर परिवहन और उत्पादन लागत तक बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर महंगाई पर पड़ सकता है।
अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती को टाल सकते हैं या मौद्रिक नीति को ज्यादा सख्त रख सकते हैं।
अमेरिका के मामले में यह स्थिति सोने और चांदी जैसे एसेट के लिए महत्वपूर्ण है।
यही वजह है कि मिडिल ईस्ट के तनाव के साथ-साथ क्रूड की तेजी को भी बुलियन मार्केट के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।
अमेरिका के महंगाई आंकड़ों पर टिकी नजर
अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आने वाले महंगाई के आंकड़े इस समय बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। गुरुवार को Producer Price Index यानी PPI के आंकड़ों पर निवेशकों की नजर है, जबकि शुक्रवार को Consumer Price Index यानी CPI से जुड़े आंकड़े सामने आने हैं।
इन आंकड़ों से बाजार को यह समझने में मदद मिलेगी कि अमेरिका में महंगाई किस दिशा में जा रही है।
अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा मजबूत रहती है तो फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती को लेकर बाजार की उम्मीद बदल सकती है। इसका असर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर पड़ सकता है।
और यही दोनों फैक्टर सोने-चांदी की कीमतों पर सीधा प्रभाव डाल सकते हैं।
फेड के फैसले से पहले निवेशक सतर्क
कोटक सिक्योरिटीज की AVP कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला के मुताबिक निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी फैसले को लेकर काफी सतर्क हैं।
गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,400 डॉलर और चांदी 66.5 डॉलर के नीचे फिसल गई।
बाजार की नजर अब अमेरिका के महंगाई आंकड़ों पर है। अगर आंकड़े बाजार की उम्मीद से मजबूत आते हैं तो ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका बढ़ सकती है।
ऐसी स्थिति में सोने और चांदी पर दबाव और बढ़ सकता है।
ब्याज दरों का सोने से क्या संबंध है?
सोने पर ब्याज नहीं मिलता। इसलिए जब ब्याज दरें ज्यादा होती हैं और बॉन्ड जैसे सुरक्षित निवेश से बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ती है, तो कुछ निवेशक सोने से पैसा निकालकर दूसरे विकल्पों की ओर जा सकते हैं।
इसके उलट ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ने पर सोने को समर्थन मिल सकता है।
इसी वजह से फेडरल रिजर्व की नीति और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का असर अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों पर काफी तेजी से दिखाई दे सकता है।
डॉलर और ट्रेजरी यील्ड भी बन रहे हैं दबाव की वजह
सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित करने वाले दूसरे बड़े कारकों में अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड भी शामिल हैं।
अगर डॉलर मजबूत होता है तो डॉलर में कीमत वाली कीमती धातुएं दूसरे देशों के निवेशकों के लिए महंगी हो सकती हैं। इससे मांग पर दबाव पड़ सकता है।
इसी तरह अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी होने पर भी निवेशकों का एक हिस्सा सोने जैसे गैर-ब्याज वाले एसेट की तुलना में बॉन्ड को ज्यादा आकर्षक मान सकता है।
फिलहाल डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव के कारण बुलियन मार्केट में अनिश्चितता बनी हुई है।
क्या आगे भी जारी रह सकती है गिरावट?
गुरुवार की तेज गिरावट के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सोने और चांदी में आगे भी दबाव जारी रहेगा या फिर कीमतें दोबारा संभल सकती हैं?
इसका जवाब आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और मिडिल ईस्ट की स्थिति पर काफी हद तक निर्भर करेगा।
अगर महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा मजबूत आते हैं और ब्याज दरों में कटौती की संभावना कमजोर होती है, तो सोने और चांदी पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं अगर आंकड़े कमजोर आते हैं और बाजार को ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद मिलती है, तो कीमती धातुओं को फिर से सहारा मिल सकता है।
यानी फिलहाल बुलियन मार्केट में दोनों तरफ का जोखिम बना हुआ है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
सोने और चांदी की कीमतें इस समय सिर्फ घरेलू मांग और त्योहारों से तय नहीं हो रही हैं। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, युद्ध, कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी महंगाई, डॉलर और फेडरल रिजर्व की नीति जैसे कई कारक एक साथ इनकी दिशा तय कर रहे हैं।
गुरुवार की गिरावट ने यह भी दिखा दिया कि ऊंचे स्तरों पर पहुंच चुकी कीमती धातुओं में अचानक तेज मुनाफावसूली हो सकती है।
इसलिए सिर्फ एक दिन की गिरावट या तेजी देखकर भविष्य की कीमत का अनुमान लगाना जोखिम भरा हो सकता है।
आगे क्या होगा, इस पर सबकी नजर
सोने और चांदी में गुरुवार की अचानक गिरावट ने बाजार में हलचल जरूर बढ़ा दी है, लेकिन अब असली परीक्षा अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और फेड के रुख की होगी। मिडिल ईस्ट में तनाव और 103 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा क्रूड अगर महंगाई की चिंता को और बढ़ाता है, तो बुलियन मार्केट पर दबाव बना रह सकता है।
वहीं, अगर आने वाले आंकड़े बाजार की उम्मीदों के मुताबिक नरम रहते हैं, तो सोने-चांदी में फिर से खरीदारी लौट सकती है।
फिलहाल ₹2,364 की सोने में गिरावट और ₹10,632 की चांदी में गिरावट ने निवेशकों को साफ संकेत दे दिया है कि रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास कारोबार कर रही कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव काफी तेज हो सकता है।

कोई टिप्पणी नहीं