पैर में अचानक दौड़ने लगती हैं ‘चींटियां’! आखिर शरीर का कौन सा सिग्नल दे रहा है ये इशारा?
कई बार लंबे समय तक एक ही जगह बैठने, पैर मोड़कर बैठने या सोते समय शरीर का वजन किसी हाथ-पैर पर पड़ जाने के बाद अचानक पैर सुन्न पड़ जाता है। इसके साथ ही ऐसा महसूस होता है जैसे पैर के अंदर हजारों चींटियां चल रही हों, हल्की चुभन हो रही हो या करंट जैसा झटका लग रहा हो। कुछ सेकंड या कुछ मिनट तक रहने वाली यह अजीब-सी sensation इतनी तेज हो सकती है कि व्यक्ति तुरंत पैर हिलाने लगता है।
लेकिन आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या यह सिर्फ खून का प्रवाह रुकने की वजह से होता है या इसके पीछे नसों का भी बड़ा रोल है? दरअसल, पैर में होने वाली यह झनझनाहट शरीर के नर्वस सिस्टम से मिलने वाला एक खास तरह का संकेत हो सकती है।
इसे मेडिकल भाषा में क्या कहते हैं?
पैर या हाथ में सुन्नपन, झनझनाहट, चुभन या चींटियां चलने जैसी अनुभूति को मेडिकल भाषा में Paresthesia (पेरेस्थीसिया) कहा जाता है। यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक लक्षण है।
जब किसी हिस्से पर लंबे समय तक दबाव पड़ता है तो वहां मौजूद नसों पर दबाव बन सकता है। इससे नसों के सामान्य तरीके से सिग्नल भेजने में कुछ समय के लिए बाधा आती है। जैसे ही दबाव हटता है और नस दोबारा सक्रिय होने लगती है, मस्तिष्क तक असामान्य या तेज सिग्नल पहुंच सकते हैं।
यही वजह है कि पैर में अचानक झनझनाहट, सुई चुभने या चींटियां चलने जैसा एहसास होने लगता है।
शरीर कौन सा सिग्नल भेज रहा होता है?
हमारे शरीर की नसें लगातार मस्तिष्क और शरीर के अलग-अलग हिस्सों के बीच संदेश पहुंचाती हैं। इन्हीं संदेशों की मदद से हमें स्पर्श, गर्मी, ठंड, दर्द और दबाव जैसी चीजों का एहसास होता है।
जब पैर की कोई नस दब जाती है, तो कुछ समय के लिए उसका सिग्नल प्रभावित हो सकता है। दबाव हटने के बाद नसों की गतिविधि सामान्य होने लगती है। इस दौरान मस्तिष्क को मिलने वाले इलेक्ट्रिकल सिग्नल सामान्य स्पर्श जैसे नहीं होते।
नतीजा यह होता है कि दिमाग उस गतिविधि को झनझनाहट, चुभन या चींटियां चलने जैसी sensation के रूप में महसूस कर सकता है।
यानी शरीर मूल रूप से यह संकेत दे रहा होता है कि जिस हिस्से की नस पर दबाव पड़ा था, वहां नर्व सिग्नल सामान्य स्थिति में लौट रहे हैं।
क्या इसका मतलब खून का प्रवाह रुक गया था?
अक्सर लोग मान लेते हैं कि पैर सुन्न होने का मतलब उस हिस्से में खून पूरी तरह रुक गया। लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता।
कई सामान्य परिस्थितियों में मुख्य कारण नस पर पड़ने वाला दबाव होता है। हालांकि लंबे समय तक किसी हिस्से पर दबाव पड़ने से रक्त प्रवाह भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए पैर में भारीपन या सुन्नपन के साथ अलग तरह की sensation महसूस हो सकती है।
उदाहरण के लिए अगर आप काफी देर तक पैर मोड़कर बैठते हैं, तो घुटने या आसपास की नसों पर दबाव पड़ सकता है। उठते ही पैर अजीब महसूस हो सकता है और कुछ देर तक ठीक से जमीन पर रखने में भी परेशानी हो सकती है।
पैर हिलाने पर झनझनाहट क्यों बढ़ जाती है?
सुन्न पैर को जैसे ही आप हिलाते हैं या उस पर वजन डालते हैं, sensation कुछ समय के लिए और ज्यादा महसूस हो सकती है। इसकी एक वजह यह है कि नसें दोबारा सक्रिय हो रही होती हैं और मस्तिष्क तक कई तरह के सिग्नल पहुंच रहे होते हैं।
इसी दौरान ऐसा लग सकता है कि पैर में सुई चुभ रही है या हजारों चींटियां एक साथ चल रही हैं।
आमतौर पर यह sensation कुछ समय में खुद कम हो जाती है।
किन स्थितियों में यह सामान्य माना जा सकता है?
अगर पैर कभी-कभार लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने के बाद सुन्न होता है और थोड़ी देर में सामान्य हो जाता है, तो अक्सर यह चिंता की बात नहीं होती।
ऐसा इन परिस्थितियों में हो सकता है—
लंबे समय तक पैर मोड़कर बैठने पर
एक ही पोजिशन में देर तक बैठे रहने पर
सोते समय हाथ या पैर के नीचे शरीर का वजन आने पर
लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहने पर
किसी नस पर थोड़ी देर दबाव पड़ने पर
ऐसी स्थिति में आमतौर पर पोजिशन बदलने और पैर को धीरे-धीरे हिलाने से sensation कम होने लगती है।
लेकिन बार-बार ऐसा हो तो सावधान!
अगर बिना किसी स्पष्ट वजह के पैर बार-बार सुन्न पड़ता है, लंबे समय तक झनझनाहट रहती है या समस्या धीरे-धीरे बढ़ रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बार-बार होने वाली paresthesia के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें नसों पर दबाव, रीढ़ से जुड़ी समस्याएं, कुछ पोषक तत्वों की कमी, डायबिटीज से जुड़ी nerve damage और कुछ अन्य neurological या circulatory समस्याएं शामिल हो सकती हैं।
खासकर अगर झनझनाहट दोनों पैरों में लगातार बनी रहती है, रात में बढ़ती है या इसके साथ जलन और दर्द भी होता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
कमर की नस दबने पर भी हो सकता है ऐसा
कभी-कभी समस्या पैर में नहीं बल्कि कमर से निकलने वाली नसों में हो सकती है।
रीढ़ की हड्डी से निकलने वाली नसें पैरों तक जाती हैं। कमर के किसी हिस्से में नस पर दबाव पड़ने की स्थिति में कमर से लेकर पैर तक दर्द, सुन्नपन या झनझनाहट महसूस हो सकती है।
कुछ लोगों में यह sensation एक खास हिस्से तक सीमित रहती है, जबकि कुछ मामलों में पैर के बड़े हिस्से में महसूस हो सकती है।
डायबिटीज में क्यों बढ़ सकता है खतरा?
लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने पर शरीर की नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है।
इस स्थिति में पैरों में जलन, सुन्नपन, चुभन या चींटियां चलने जैसी sensation हो सकती है। कई बार व्यक्ति को चोट लगने या गर्म चीज छूने का एहसास भी सामान्य से कम हो सकता है।
इसलिए डायबिटीज वाले व्यक्ति के लिए पैरों में लगातार होने वाले सुन्नपन या झनझनाहट को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।
विटामिन की कमी भी हो सकती है एक वजह
कुछ मामलों में पोषक तत्वों की कमी, खासकर विटामिन B12 की कमी, नसों से जुड़े लक्षणों का कारण बन सकती है। इसमें हाथ-पैर में झनझनाहट या सुन्नपन जैसी समस्या दिखाई दे सकती है।
हालांकि केवल पैर में कभी-कभार होने वाली झनझनाहट को देखकर किसी विटामिन की कमी मान लेना सही नहीं है। लगातार लक्षण होने पर डॉक्टर जरूरत के अनुसार जांच की सलाह दे सकते हैं।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर पैर अचानक सुन्न पड़ने के साथ कमजोरी, चलने में परेशानी, बोलने में दिक्कत, चेहरे का एक हिस्सा झुकना, तेज चक्कर या शरीर के एक तरफ अचानक सुन्नपन जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह आपात स्थिति हो सकती है और तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
इसी तरह अचानक बहुत तेज कमर दर्द के साथ पैरों में कमजोरी या पेशाब-मल पर नियंत्रण में बदलाव हो तो भी तुरंत चिकित्सा जांच जरूरी है।
क्या करें जब पैर में चींटियां चलने जैसा लगे?
सबसे पहले उस स्थिति को बदलें जिसकी वजह से पैर पर दबाव पड़ा हो। पैर को आराम से सीधा करें और धीरे-धीरे हिलाएं। अचानक बहुत जोर से मालिश करने या पैर पर पूरा वजन डालने से बचें, खासकर तब जब पैर अभी भी काफी सुन्न हो।
अगर कुछ ही देर में sensation खत्म हो जाती है और यह केवल कभी-कभार होता है, तो आमतौर पर चिंता की जरूरत नहीं होती। लेकिन यदि यह बार-बार, लंबे समय तक या बिना किसी स्पष्ट कारण के हो रहा है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
आखिर शरीर क्या बता रहा होता है?
पैर में कुछ देर के लिए चींटियां चलने जैसा महसूस होना अक्सर शरीर की नसों से जुड़े अस्थायी बदलाव का संकेत होता है। नस पर दबाव पड़ने के बाद जब उसकी गतिविधि सामान्य होती है, तो मस्तिष्क को मिलने वाले सिग्नल कुछ समय के लिए असामान्य महसूस हो सकते हैं।
इसलिए अगली बार पैर सुन्न होने पर घबराने के बजाय पहले अपनी स्थिति बदलें। लेकिन अगर शरीर बार-बार यही संकेत दे रहा है, तो उस संकेत को नजरअंदाज करने के बजाय उसके पीछे की वजह समझना ज्यादा जरूरी है।

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