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A और B ब्लड ग्रुप वालों के लिए बड़ा खतरा? रिसर्च में सामने आई ऐसी बात, जानकर रह जाएंगे हैरान



आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और खून से जुड़ी दूसरी गंभीर बीमारियां चिंता का विषय बनी हुई हैं। खराब खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ता तनाव और खराब नींद जैसे कई कारक हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकते हैं। लेकिन वैज्ञानिक शोधों में एक और ऐसे कारक का संबंध सामने आया है जिसे व्यक्ति अपनी इच्छा से बदल नहीं सकता—ब्लड ग्रुप

ABO ब्लड ग्रुप सिस्टम पर हुई कई रिसर्च में पाया गया है कि O ब्लड ग्रुप की तुलना में non-O यानी A, B और AB ब्लड ग्रुप वाले लोगों में कुछ प्रकार के थक्के और हृदय संबंधी घटनाओं का जोखिम अधिक हो सकता है। हालांकि इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि A या B ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को हार्ट अटैक होना तय है। ब्लड ग्रुप केवल संभावित जोखिम कारकों में से एक है और इसका प्रभाव दूसरे जोखिम कारकों की तुलना में सीमित हो सकता है।

A और B ब्लड ग्रुप को लेकर क्या सामने आया?

एक बड़े अध्ययन में 4,06,755 लोगों के आनुवंशिक और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था। इसमें ABO ब्लड ग्रुप और कई स्वास्थ्य स्थितियों के बीच संबंध देखा गया। शोध में पाया गया कि O ब्लड ग्रुप की तुलना में A और B ब्लड ग्रुप कुछ थ्रोम्बोएम्बोलिक यानी खून के थक्कों से संबंधित घटनाओं के अधिक जोखिम से जुड़े थे।

इसके अलावा कई अन्य अध्ययनों और एक बड़े systematic review में भी non-O ब्लड ग्रुप तथा हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी कुछ बीमारियों के बीच संबंध देखा गया है। उदाहरण के लिए, एक umbrella review में O की तुलना में A ब्लड ग्रुप में myocardial infarction यानी हार्ट अटैक का जोखिम अधिक पाया गया, हालांकि ऐसे अध्ययनों के परिणामों को कारण और प्रभाव के सीधे प्रमाण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

यानी ब्लड ग्रुप को लेकर वैज्ञानिक चर्चा केवल सोशल मीडिया के दावों पर आधारित नहीं है, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से शोध हो रहे हैं।

ब्लड ग्रुप और हार्ट अटैक का क्या संबंध है?

अब सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर ब्लड ग्रुप का दिल की बीमारी से क्या संबंध हो सकता है?

इसका एक संभावित कारण blood clotting यानी खून के थक्के बनने की प्रक्रिया से जुड़ा है। शरीर में खून जमाने की प्रक्रिया में कई प्रोटीन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें von Willebrand factor यानी VWF और factor VIII भी शामिल हैं।

शोधों में पाया गया है कि non-O ब्लड ग्रुप वाले लोगों में O ब्लड ग्रुप की तुलना में VWF और factor VIII का स्तर सामान्यतः अधिक हो सकता है। ये दोनों रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसी वजह से non-O ब्लड ग्रुप और thrombosis यानी खून के थक्के बनने के बीच संबंध पर लंबे समय से अध्ययन किए जाते रहे हैं।

क्या A और B ब्लड ग्रुप वालों में थक्के ज्यादा बनते हैं?

रिसर्च के अनुसार non-O ब्लड ग्रुप वाले लोगों में venous thromboembolism यानी नसों में खून के थक्के बनने का जोखिम O ब्लड ग्रुप की तुलना में अधिक पाया गया है। एक बड़े अध्ययन में 11 लाख से ज्यादा blood donors के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था। इसमें O की तुलना में non-O ब्लड ग्रुप वालों में venous और कुछ arterial thromboembolic घटनाओं की दर अधिक पाई गई।

एक meta-analysis में 38 अध्ययनों और 10,305 VTE मामलों को शामिल किया गया था। उसमें भी non-O ब्लड ग्रुप और venous thromboembolism के बीच संबंध पाया गया।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। खून के थक्कों का बढ़ा हुआ जोखिम और सीधे हार्ट अटैक का जोखिम एक ही बात नहीं है। अलग-अलग अध्ययनों में हृदय संबंधी घटनाओं के परिणामों की ताकत अलग रही है। इसलिए केवल ब्लड ग्रुप देखकर किसी व्यक्ति के हार्ट अटैक का भविष्य तय नहीं किया जा सकता।

क्या O ब्लड ग्रुप वाले लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं?

बिल्कुल नहीं।

अगर किसी व्यक्ति का ब्लड ग्रुप O है, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा नहीं है। हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, धूम्रपान, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और परिवार में हृदय रोग का इतिहास जैसे कारक हृदय स्वास्थ्य पर कहीं अधिक महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।

इसी तरह A, B या AB ब्लड ग्रुप होने का मतलब यह भी नहीं कि व्यक्ति को निश्चित रूप से दिल की बीमारी होगी।

इसलिए ब्लड ग्रुप को एक संभावित जैविक जोखिम कारक के रूप में समझना चाहिए, न कि बीमारी की भविष्यवाणी करने वाले टेस्ट के रूप में।

हार्ट अटैक के असली बड़े जोखिम कारक कौन से हैं?

हृदय की सेहत को प्रभावित करने वाले कई ऐसे कारण हैं जिन पर व्यक्ति काफी हद तक नियंत्रण कर सकता है। इनमें हाई ब्लड प्रेशर, हाई LDL cholesterol, डायबिटीज, धूम्रपान, मोटापा, कम शारीरिक गतिविधि, अस्वास्थ्यकर भोजन और अत्यधिक शराब का सेवन प्रमुख हैं।

यही कारण है कि किसी व्यक्ति को अपना ब्लड ग्रुप पता चलने के बाद डरने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय उन जोखिम कारकों पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है जिन्हें नियंत्रित किया जा सकता है।

दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

विशेषज्ञों की सामान्य सलाह के अनुसार हृदय को स्वस्थ रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद महत्वपूर्ण हैं।

डाइट में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, मेवे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। बहुत ज्यादा नमक, चीनी, ट्रांस फैट और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन को सीमित करना फायदेमंद हो सकता है।

नियमित व्यायाम भी महत्वपूर्ण है। अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए सप्ताह में कम से कम 150 मिनट moderate-intensity physical activity का लक्ष्य सामान्य स्वास्थ्य दिशानिर्देशों में शामिल है।

इसके साथ ही ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की समय-समय पर जांच कराना भी जरूरी है।

तनाव को भी हल्के में न लें

लगातार तनाव शरीर पर कई तरह से प्रभाव डाल सकता है। तनाव के दौरान नींद खराब होना, अस्वास्थ्यकर भोजन करना, शारीरिक गतिविधि कम होना या धूम्रपान जैसी आदतें बढ़ना हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

इसलिए तनाव कम करने के लिए पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, योग, ध्यान और परिवार या दोस्तों के साथ स्वस्थ सामाजिक संपर्क मददगार हो सकते हैं।

अगर ब्लड ग्रुप A या B है तो क्या करें?

अगर आपका ब्लड ग्रुप A, B या AB है तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। ब्लड ग्रुप जन्म से निर्धारित होता है और इसे बदला नहीं जा सकता। लेकिन अच्छी बात यह है कि हृदय रोग के अधिकांश प्रमुख जोखिम कारकों को नियंत्रित किया जा सकता है।

अगर परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक का इतिहास है, ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, डायबिटीज है या धूम्रपान की आदत है, तो डॉक्टर से नियमित स्वास्थ्य जांच और व्यक्तिगत जोखिम मूल्यांकन कराना अधिक महत्वपूर्ण है।

सबसे जरूरी बात—ब्लड ग्रुप को बीमारी की गारंटी न समझें

वैज्ञानिक प्रमाण यह बताते हैं कि ABO ब्लड ग्रुप और thrombosis तथा कुछ cardiovascular outcomes के बीच संबंध मौजूद हो सकता है। लेकिन इसका प्रभाव व्यक्ति के पूरे स्वास्थ्य जोखिम की तुलना में अकेले निर्णायक नहीं है। अलग-अलग अध्ययनों में जोखिम का आकार भी अलग पाया गया है।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि A या B ब्लड ग्रुप वाले लोगों को निश्चित रूप से हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा है या O ब्लड ग्रुप वाले पूरी तरह सुरक्षित हैं।

असल संदेश यह है कि अगर आपका ब्लड ग्रुप non-O है तो इसे अपनी स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के एक कारण के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन डरने की जरूरत नहीं है। नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, धूम्रपान से दूरी, स्वस्थ वजन, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण तथा समय पर मेडिकल जांच—ये कदम दिल की सेहत के लिए कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।

सीने में दबाव या दर्द, सांस लेने में अचानक परेशानी, ठंडा पसीना, चक्कर, उल्टी या दर्द का हाथ, जबड़े या पीठ तक फैलना जैसे लक्षण दिखाई दें तो इन्हें नजरअंदाज न करें और तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

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