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यूपी में 48 घंटे की बारिश से मचा हाहाकार! 28 सितंबर से थमेगा तूफान या फिर बढ़ेगी आफत?



लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सितंबर के आखिरी दिनों में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले करीब 48 घंटे से लगातार बारिश का दौर जारी है। कहीं सड़कें पानी में डूब गई हैं तो कहीं पेड़ गिरने से रास्ते बाधित हुए हैं। कई इलाकों में नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने से प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है। नेपाल से सटे जिलों में विशेष निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि पड़ोसी नेपाल में भी बारिश के कारण जलस्तर बढ़ने की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

इस बीच मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान ने लोगों को थोड़ी राहत की उम्मीद दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के 26 सितंबर के पूर्वानुमान के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश में 26 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी थी, जबकि 27 सितंबर को भी भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई। वहीं 28 सितंबर से उत्तर प्रदेश के दोनों हिस्सों के लिए कोई मौसम चेतावनी नहीं है। इसका मतलब यह है कि 28 सितंबर से तेज बारिश की गतिविधि में कमी आने की संभावना है, हालांकि स्थानीय स्तर पर हल्की बारिश या गरज-चमक की स्थिति पूरी तरह खत्म होगी, यह जरूरी नहीं है।

ऐसे में अगले 24 से 36 घंटे उत्तर प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। प्रशासन लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की अपील कर रहा है।

27 सितंबर तक मौसम दिखाएगा तेवर

मौसम विभाग के ताजा उपखंडवार पूर्वानुमान में 27 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना भी जताई गई है। 28 सितंबर को दोनों क्षेत्रों के लिए कोई चेतावनी नहीं दी गई है।

यानी फिलहाल लोगों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि बारिश पूरी तरह खत्म हो चुकी है। रविवार यानी 27 सितंबर को भी कई इलाकों में मौसम खराब रह सकता है। खासकर जिन जिलों में पहले से जलभराव या नदी-नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ है, वहां स्थिति पर लगातार निगरानी जरूरी होगी।

मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर प्रशासन भी संवेदनशील इलाकों पर नजर रख रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को नुकसान की खबरें भी सामने आई हैं। लखनऊ में शनिवार सुबह तक 21 घंटे में 125.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई है।

63 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

बारिश की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश के 63 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पिछले 24 घंटों में उत्तर प्रदेश में सामान्य से करीब 19 गुना अधिक बारिश दर्ज होने की रिपोर्ट है। फर्रुखाबाद में सामान्य से करीब 200 गुना, कानपुर नगर में 160 गुना और कन्नौज, कानपुर देहात तथा हरदोई में सामान्य से करीब 130 गुना अधिक बारिश दर्ज होने की जानकारी दी गई है।

भदोही, देवरिया और अलीगढ़ में सामान्य बारिश दर्ज की गई, जबकि गाजीपुर में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई। दूसरी ओर बागपत, गाजियाबाद, मथुरा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ जैसे कुछ जिलों में बारिश नहीं होने की रिपोर्ट है।

इससे साफ है कि पूरे प्रदेश में बारिश का असर एक जैसा नहीं है। कुछ क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश से जनजीवन प्रभावित है, जबकि कुछ जिलों में मौसम अपेक्षाकृत सामान्य बना हुआ है।

नेपाल सीमा वाले जिलों पर विशेष नजर

पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिले नेपाल सीमा के करीब हैं। लगातार बारिश के बीच इन क्षेत्रों में नदियों के जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति पर प्रशासन की विशेष नजर है। रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल में भी भारी बारिश के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है।

बारिश के दौरान पहाड़ों और ऊपरी क्षेत्रों से पानी आने के कारण सीमावर्ती मैदानी इलाकों की नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। यही वजह है कि प्रशासन को नदियों और निचले इलाकों की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत पड़ रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी जलभराव वाले रास्तों और तेज बहाव वाली जगहों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।

लखनऊ में बारिश ने खोली जलनिकासी व्यवस्था की पोल

राजधानी लखनऊ में शुक्रवार और शनिवार की बारिश ने कई इलाकों में नगर की जलनिकासी व्यवस्था की मुश्किलें सामने ला दीं। तेज बारिश के बाद कई प्रमुख सड़कों पर पानी जमा हो गया। कई जगह सड़क और नाली का अंतर तक समझना मुश्किल हो गया।

रिपोर्टों के अनुसार गोमतीनगर, भूतनाथ, जानकीपुरम, आशियाना और महानगर सहित कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। कुछ जगहों पर लोगों को पानी से होकर गुजरना पड़ा। तेज बारिश के दौरान यातायात भी प्रभावित हुआ।

दिन में जब बारिश अपेक्षाकृत हल्की रही तो कुछ स्थानों पर पानी निकलता रहा, लेकिन तेज बारिश होते ही निचले इलाकों में दोबारा जलभराव की समस्या सामने आ गई।

लखनऊ में 21 घंटे के भीतर 125.8 मिमी बारिश दर्ज होने से शहर की सड़कों और निचले इलाकों पर इसका सीधा असर पड़ा।

तापमान में भी आई बड़ी गिरावट

लगातार बारिश का असर तापमान पर भी दिखाई दिया। बादलों और बारिश के कारण दिन का तापमान सामान्य से काफी नीचे रहा। बारिश के कारण मौसम में ठंडक बढ़ गई और लोगों को सितंबर के आखिरी सप्ताह में ही अपेक्षाकृत ठंडे मौसम का अनुभव होने लगा।

राजधानी में लगातार बारिश के कारण घरों और दुकानों में भी सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं। कई लोग जरूरी काम होने पर ही बाहर निकले। बारिश और जलभराव के कारण दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा।

पेड़ गिरने और रास्ते बंद होने की भी समस्या

तेज बारिश के साथ चल रही हवाओं के कारण कई जगह पेड़ और उनकी बड़ी शाखाएं गिरने की घटनाएं भी सामने आईं। इससे कुछ सड़कों पर आवागमन बाधित हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के खंभों और तारों पर भी पेड़ गिरने का खतरा बढ़ गया।

ऐसी स्थिति में लोगों को टूटे हुए बिजली के तारों से दूर रहने और जलभराव वाले स्थानों पर बिजली के उपकरणों से सावधानी बरतने की जरूरत है।

बारिश के दौरान सड़क पर पानी भरा होने पर यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि उसके नीचे गड्ढा है या सड़क क्षतिग्रस्त है। इसलिए प्रशासन की ओर से लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जा रही है।

किसानों की बढ़ी चिंता

लगातार बारिश ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में कई इलाकों में खेतों में खड़ी फसलों पर लगातार बारिश का असर पड़ सकता है। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को नुकसान की खबर भी सामने आई है।

जिन खेतों में पानी लंबे समय तक जमा रहता है, वहां फसल को नुकसान का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में बारिश थमने के बाद कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों का आकलन करना होगा।

28 सितंबर से राहत की उम्मीद

अच्छी खबर यह है कि मौसम विभाग के मौजूदा पूर्वानुमान में 28 सितंबर से पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए कोई चेतावनी नहीं है। इससे संकेत मिलता है कि 27 सितंबर के बाद बारिश की तीव्रता में कमी आ सकती है।

हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरे प्रदेश में एक साथ मौसम पूरी तरह साफ हो जाएगा। स्थानीय स्तर पर हल्की बारिश, बादल या गरज-चमक की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। इसलिए लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट देखते रहना चाहिए।

लोगों से सावधानी बरतने की अपील

मौसम खराब रहने के दौरान प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित रखना है। लोगों से अपील की जा रही है कि बहुत जरूरी न हो तो बारिश के दौरान घर से बाहर न निकलें। नदी, नाले, तालाब और तेज बहाव वाले पानी के पास जाने से बचें।

अगर सड़क पर पानी भरा है तो उसमें वाहन लेकर जाने से पहले स्थिति का आकलन करना जरूरी है। बच्चों और बुजुर्गों को जलभराव वाले इलाकों से दूर रखना भी जरूरी है।

उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर 1070 हेल्पलाइन दी गई है। आपदा या आपात स्थिति में सहायता के लिए इस नंबर का उपयोग किया जा सकता है।

अभी 24 घंटे अहम, फिर बदल सकता है मौसम

फिलहाल उत्तर प्रदेश में बारिश का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 27 सितंबर को भी पूर्वी यूपी में भारी और पश्चिमी यूपी में बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। इसके साथ तेज हवाएं और गरज-चमक भी परेशानी बढ़ा सकती हैं।

लेकिन 28 सितंबर से मौसम में बदलाव के संकेत हैं और आईएमडी के मौजूदा पूर्वानुमान में उस दिन यूपी के लिए कोई चेतावनी नहीं दी गई है।

ऐसे में अगले 24 घंटे प्रशासन और आम लोगों दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। फिलहाल सबसे जरूरी है कि लोग मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें, अनावश्यक यात्रा से बचें और जलभराव तथा नदी-नालों के आसपास विशेष सावधानी बरतें। अगर पूर्वानुमान के मुताबिक 28 सितंबर से बारिश की तीव्रता कम होती है, तो लगातार बारिश से परेशान उत्तर प्रदेश के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।

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