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किसिंग से सच में बढ़ रहा है गले का कैंसर? वायरल दावे के पीछे छिपा हैरान करने वाला सच, एक्सपर्ट्स ने बताया पूरा राज



नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दावा तेजी से चर्चा में है कि किसिंग या ओरल इंटिमेसी की वजह से गले के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इसका खतरा तंबाकू से भी ज्यादा हो गया है। इस दावे के साथ कुछ पोस्ट में नए शोध का हवाला देकर लोगों को डराया जा रहा है। लेकिन इस दावे को समझने के लिए जरूरी है कि किसिंग, ओरल सेक्स, HPV संक्रमण और कैंसर के बीच वास्तविक वैज्ञानिक संबंध को अलग-अलग समझा जाए।

वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार, ह्यूमन पैपिलोमा वायरस यानी HPV, खासकर HPV-16, ऑरोफैरिंक्स कैंसर का एक स्थापित जोखिम कारक है। ऑरोफैरिंक्स गले का वह हिस्सा है जिसमें टॉन्सिल और जीभ का पिछला आधार शामिल होता है। हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि किसी व्यक्ति को किसिंग या ओरल सेक्स करने से कैंसर हो जाएगा। ज्यादातर HPV संक्रमण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली खुद नियंत्रित कर लेती है और वे कैंसर में तब्दील नहीं होते। 

आखिर HPV क्या है?

HPV यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस वायरस का एक बड़ा समूह है। इसके कई प्रकार होते हैं। इनमें कुछ प्रकार सामान्य संक्रमण या मस्सों से जुड़े होते हैं, जबकि कुछ हाई-रिस्क प्रकार कैंसर से जुड़े पाए गए हैं।

इनमें HPV-16 विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार HPV-16 संक्रमण और ऑरोफैरिंक्स कैंसर के बीच मजबूत वैज्ञानिक संबंध पाया गया है। मुंह में HPV-16 संक्रमण होने पर ऑरोफैरिंक्स कैंसर का जोखिम उन लोगों की तुलना में काफी अधिक हो सकता है जिनमें यह संक्रमण नहीं है।

HPV मुख्य रूप से यौन संपर्क से फैलता है। ओरल संपर्क के दौरान वायरस मुंह और गले तक पहुंच सकता है। लेकिन संक्रमण होना और कैंसर होना दो अलग-अलग बातें हैं।

क्या किसिंग से कैंसर हो सकता है?

यही वह हिस्सा है जहां सोशल मीडिया की पोस्ट सबसे ज्यादा भ्रम पैदा करती हैं।

सिर्फ सामान्य किसिंग को सीधे गले के कैंसर का कारण बताना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।

HPV के फैलने और ओरल HPV संक्रमण के बारे में शोध जरूर हुआ है, लेकिन सोशल मीडिया पर "किसिंग से कैंसर" जैसी सीधी लाइन वास्तविक वैज्ञानिक तस्वीर को बहुत ज्यादा सरल बना देती है।

विशेषज्ञों की चिंता मुख्य रूप से हाई-रिस्क HPV संक्रमण, खासकर लंबे समय तक बने रहने वाले संक्रमण से जुड़ी है।

इसलिए यह कहना कि किसी व्यक्ति ने किसिंग की और इसलिए उसे कैंसर हो जाएगा, पूरी तरह गलत निष्कर्ष होगा।

फिर ओरल सेक्स की चर्चा क्यों होती है?

HPV के संक्रमण का मुख्य रास्ता यौन संपर्क है। ओरल सेक्स के दौरान संक्रमित व्यक्ति के साथ संपर्क होने पर HPV मुंह और गले में पहुंच सकता है।

अगर हाई-रिस्क HPV का संक्रमण लंबे समय तक शरीर में बना रहता है, तो कुछ मामलों में कोशिकाओं में ऐसे बदलाव हो सकते हैं जो आगे चलकर कैंसर से जुड़े हो सकते हैं।

लेकिन यहां भी एक महत्वपूर्ण बात समझनी जरूरी है—HPV संक्रमण होना अपने आप में कैंसर की पुष्टि नहीं है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार HPV बेहद आम संक्रमण है और अधिकांश संक्रमण बीमारी पैदा नहीं करते। समस्या मुख्य रूप से तब होती है जब हाई-रिस्क HPV संक्रमण शरीर में लंबे समय तक बना रहता है। 

क्या HPV अब तंबाकू से बड़ा खतरा बन गया है?

सोशल मीडिया पर यह दावा भी किया जा रहा है कि HPV का खतरा अब तंबाकू से ज्यादा हो गया है। यह बात बिना संदर्भ के सही नहीं है।

तंबाकू आज भी कई तरह के सिर और गर्दन के कैंसर का बेहद महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। इसमें मुंह, गले, वॉयस बॉक्स और अन्य हिस्सों के कैंसर शामिल हैं। राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार तंबाकू का सेवन इन कैंसर के जोखिम को काफी बढ़ाता है। 

हालांकि कुछ देशों, विशेष रूप से अमेरिका जैसे उच्च-आय वाले देशों में, ऑरोफैरिंक्स कैंसर के पैटर्न में बड़ा बदलाव देखा गया है।

वहां धूम्रपान से जुड़े कुछ ऑरोफैरिंक्स कैंसर कम हुए हैं, जबकि HPV से जुड़े ऑरोफैरिंक्स कैंसर बढ़े हैं। राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार अमेरिका में HPV-पॉजिटिव ऑरोफैरिंक्स कैंसर की घटनाएं बढ़ी हैं, जबकि HPV-नेगेटिव, धूम्रपान से जुड़े मामलों में गिरावट आई है। 

इसका मतलब यह नहीं है कि HPV हर प्रकार के गले के कैंसर का मुख्य कारण है या तंबाकू अब खतरनाक नहीं रहा।

किस तरह का कैंसर HPV से ज्यादा जुड़ा है?

HPV से सबसे मजबूत संबंध ऑरोफैरिंक्स कैंसर के साथ पाया गया है।

ऑरोफैरिंक्स में मुख्य रूप से गले का पिछला हिस्सा, टॉन्सिल और जीभ का आधार शामिल होता है।

राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार HPV-16 विशेष रूप से ऑरोफैरिंक्स कैंसर से जुड़ा हुआ है। दूसरी ओर, मुंह और वॉयस बॉक्स के कई कैंसरों में तंबाकू और शराब अब भी प्रमुख जोखिम कारक हैं। 

यानी "गले का कैंसर" एक बहुत व्यापक शब्द है। अलग-अलग हिस्सों के कैंसर के कारण भी अलग-अलग हो सकते हैं।

ज्यादातर HPV संक्रमित लोगों को कैंसर क्यों नहीं होता?

यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।

HPV संक्रमण बहुत आम है। लेकिन अधिकांश लोगों में संक्रमण लंबे समय तक नहीं रहता। शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अक्सर वायरस को नियंत्रित कर लेती है।

कैंसर का जोखिम खास तौर पर persistent यानी लंबे समय तक बने रहने वाले हाई-रिस्क HPV संक्रमण से जुड़ा है।

इसलिए अगर किसी व्यक्ति में HPV संक्रमण पाया जाता है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि उसे कैंसर है या भविष्य में निश्चित रूप से कैंसर होगा।

यह अंतर समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि सोशल मीडिया पर डर पैदा करने वाली पोस्ट अक्सर संक्रमण और कैंसर को एक ही चीज की तरह प्रस्तुत कर देती हैं।

HPV-16 को लेकर क्यों है ज्यादा चिंता?

HPV के कई प्रकार हैं, लेकिन सभी कैंसर पैदा करने वाले नहीं होते।

HPV-16 उन हाई-रिस्क प्रकारों में शामिल है जिनका ऑरोफैरिंक्स कैंसर के साथ मजबूत संबंध पाया गया है। राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार मुंह में HPV-16 संक्रमण ऑरोफैरिंक्स कैंसर के जोखिम को काफी बढ़ा सकता है।

यही कारण है कि HPV संक्रमण की रोकथाम पर दुनिया भर में जोर दिया जाता है।

HPV वैक्सीन क्यों है महत्वपूर्ण?

HPV से जुड़े कैंसर के खतरे को कम करने के लिए HPV वैक्सीन सबसे महत्वपूर्ण रोकथाम उपायों में से एक है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन HPV वैक्सीनेशन को कैंसर की रोकथाम की महत्वपूर्ण रणनीति मानता है। वैक्सीन हाई-रिस्क HPV प्रकारों से संक्रमण के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है और इसे संक्रमण के संपर्क में आने से पहले देना सबसे प्रभावी माना जाता है। 

कई देशों में किशोर उम्र में HPV वैक्सीनेशन की सलाह दी जाती है। वैक्सीन किस उम्र में और कितनी डोज में दी जानी चाहिए, यह देश की गाइडलाइन और व्यक्ति की उम्र तथा स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर कर सकता है।

इसलिए वैक्सीनेशन को लेकर डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

तंबाकू छोड़ना भी उतना ही जरूरी

अगर कोई व्यक्ति तंबाकू का सेवन करता है तो HPV के बारे में चिंता करने के साथ-साथ तंबाकू छोड़ना भी बेहद जरूरी है।

सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, खैनी और अन्य तंबाकू उत्पाद मुंह और गले के कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं।

राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार तंबाकू छोड़ने से समय के साथ मुंह, गले और सिर-गर्दन के कुछ कैंसर का जोखिम कम होता है। 

शराब और तंबाकू का कॉम्बिनेशन ज्यादा खतरनाक

शराब का अत्यधिक सेवन भी सिर और गर्दन के कैंसर के जोखिम से जुड़ा है।

जब कोई व्यक्ति भारी मात्रा में शराब और तंबाकू दोनों का सेवन करता है तो जोखिम और बढ़ सकता है। राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार दोनों जोखिम कारकों का संयोजन अकेले किसी एक कारक की तुलना में अधिक नुकसानदायक हो सकता है। 

इसलिए कैंसर से बचाव के लिए केवल HPV से बचाव ही पर्याप्त नहीं है। तंबाकू और अत्यधिक शराब से दूरी बनाना भी जरूरी है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

ऑरोफैरिंक्स कैंसर के शुरुआती लक्षण हमेशा स्पष्ट नहीं होते। लेकिन कुछ लगातार बने रहने वाले बदलावों पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

इनमें शामिल हो सकते हैं—

  • लंबे समय तक गले में खराश

  • निगलने में लगातार परेशानी

  • निगलते समय दर्द

  • आवाज में लगातार बदलाव

  • गर्दन में गांठ

  • कान में लगातार दर्द

  • मुंह या गले में ऐसा घाव जो ठीक न हो

  • बिना वजह वजन कम होना

राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार गले में गांठ और लगातार गले में खराश जैसे लक्षण ऑरोफैरिंक्स कैंसर में दिखाई दे सकते हैं। 

हालांकि इन लक्षणों का मतलब कैंसर होना बिल्कुल नहीं है। इनके पीछे संक्रमण या दूसरी सामान्य बीमारियां भी हो सकती हैं। लेकिन अगर कोई लक्षण लंबे समय तक बना रहता है तो डॉक्टर से जांच करवाना बेहतर है।

क्या हर व्यक्ति को HPV टेस्ट करवाना चाहिए?

ऑरोफैरिंक्स कैंसर के लिए आम आबादी में वैसा नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट उपलब्ध नहीं है जैसा सर्वाइकल कैंसर के लिए स्क्रीनिंग की जाती है।

इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से टेस्ट करवाने या किसी सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर कैंसर की आशंका मान लेने की जरूरत नहीं है।

अगर किसी व्यक्ति में लगातार लक्षण हैं या वह किसी विशेष जोखिम समूह में है तो डॉक्टर आवश्यक जांचों का फैसला कर सकते हैं।

सोशल मीडिया के दावे से क्या समझें?

वायरल पोस्ट में अगर यह लिखा है कि "किसिंग से कैंसर तेजी से फैल रहा है", तो इसे सीधे सच मानना सही नहीं होगा।

वास्तविक वैज्ञानिक तस्वीर इससे कहीं ज्यादा जटिल है।

HPV-16 एक हाई-रिस्क वायरस है और इसका ऑरोफैरिंक्स कैंसर से मजबूत संबंध है। HPV यौन संपर्क के माध्यम से फैल सकता है और ओरल संपर्क भी संक्रमण का एक रास्ता हो सकता है। लेकिन ज्यादातर HPV संक्रमण कैंसर में नहीं बदलते। 

इसी तरह यह कहना भी गलत होगा कि HPV ने हर प्रकार के गले के कैंसर में तंबाकू को पीछे छोड़ दिया है। कुछ देशों में HPV से जुड़े ऑरोफैरिंक्स कैंसर का पैटर्न बदला है, जबकि तंबाकू अभी भी कई सिर और गर्दन के कैंसर का बड़ा जोखिम कारक बना हुआ है।

बचाव के लिए क्या करें?

कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं।

पहला, तंबाकू का सेवन पूरी तरह बंद करें।

दूसरा, शराब का अत्यधिक सेवन न करें।

तीसरा, HPV वैक्सीन को लेकर डॉक्टर से सलाह लें।

चौथा, सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाएं।

पांचवां, लंबे समय तक बने रहने वाले गले, मुंह या गर्दन से जुड़े लक्षणों को नजरअंदाज न करें।

छठा, सोशल मीडिया पर वायरल स्वास्थ्य दावों को बिना जांचे आगे शेयर न करें।

सोशल मीडिया पर किसिंग और गले के कैंसर को लेकर वायरल हो रही पोस्ट में कुछ वैज्ञानिक तथ्यों का आधार जरूर है, लेकिन उसे सनसनीखेज तरीके से पेश किया जा रहा है। HPV-16 वास्तव में ऑरोफैरिंक्स कैंसर का महत्वपूर्ण जोखिम कारक है और ओरल यौन संपर्क HPV के मुंह तथा गले तक पहुंचने का एक रास्ता हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसिंग या ओरल इंटिमेसी करने वाला हर व्यक्ति कैंसर की चपेट में आ जाएगा।

सबसे अहम बात यह है कि HPV संक्रमण आम है और ज्यादातर संक्रमण कैंसर में नहीं बदलते। लंबे समय तक बने रहने वाला हाई-रिस्क HPV संक्रमण चिंता का मुख्य कारण है।

वहीं तंबाकू और अत्यधिक शराब अभी भी सिर और गर्दन के कई कैंसर के प्रमुख जोखिम कारक हैं। इसलिए सोशल मीडिया के डरावने दावों से घबराने के बजाय वैज्ञानिक जानकारी, HPV वैक्सीनेशन, तंबाकू से दूरी और जरूरत पड़ने पर समय पर डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देना चाहिए।

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