Breaking News

रक्षाबंधन पर 9:48 बजे के बाद राखी बांधना होगा अशुभ? एक समय खत्म होते ही बदल जाएगा पूरा मुहूर्त, जानिए क्या करें



नई दिल्ली: रक्षाबंधन 2026 को लेकर इस बार भाई-बहनों के बीच एक सवाल तेजी से चर्चा में है—क्या 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे के बाद राखी नहीं बांधी जा सकेगी? दरअसल, इस साल श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह 9:48 बजे समाप्त हो रही है। इसी वजह से राखी बांधने के शुभ समय को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बन रही है।

पंचांग के अनुसार, रक्षाबंधन शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन राखी बांधने का मुख्य मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया जा रहा है। यानी करीब 3 घंटे 51 मिनट का समय मुख्य मुहूर्त के रूप में मिल रहा है।

लेकिन सवाल यह है कि देशभर में रहने वाले उन भाई-बहनों का क्या होगा, जो अलग-अलग शहरों में रहते हैं? किसी को ट्रेन से आना है, किसी को बस या कार से कई घंटे की यात्रा करनी है। ऐसे में सुबह 9:48 बजे से पहले भाई-बहन का एक जगह पहुंच पाना हर किसी के लिए संभव नहीं होगा।

तो क्या 9:48 बजे के बाद राखी बांधना अशुभ माना जाएगा? क्या इसके बाद रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मनाया जा सकता? इन सवालों को लेकर ज्योतिष और पंचांग की मान्यताओं को समझना जरूरी है।

28 अगस्त को ही क्यों मनाया जाएगा रक्षाबंधन?

इस साल श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त, गुरुवार सुबह 9:08 बजे शुरू हुई और 28 अगस्त, शुक्रवार सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी। रक्षाबंधन के लिए तिथि, भद्रा और शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है।

रक्षाबंधन के दिन भद्रा से जुड़े समय को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है। परंपरा के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है। इस साल 28 अगस्त को सूर्योदय के समय भद्रा समाप्त हो चुकी होगी, इसलिए इस दिन रक्षाबंधन मनाने की मान्यता है।

यही वजह है कि 28 अगस्त को देशभर में भाई-बहन रक्षाबंधन का पर्व मनाएंगे।

सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक मुख्य मुहूर्त

इस साल राखी बांधने का मुख्य समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया जा रहा है। इस तरह भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए करीब 3 घंटे 51 मिनट का समय उपलब्ध रहेगा।

इस अवधि में बहनें पूजा-पाठ करके भाई को राखी बांध सकती हैं। भाई भी बहन को उपहार देकर उसके सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना कर सकते हैं।

हालांकि अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के समय में अंतर होने के कारण मुहूर्त की शुरुआत में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना ज्यादा उचित माना जाता है।

क्या 9:48 बजे के बाद राखी बांधना पूरी तरह मना है?

यही सबसे बड़ा सवाल है।

श्रावण पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे समाप्त हो रही है। इसलिए इस समय तक का मुहूर्त पूर्णिमा तिथि पर आधारित मुख्य राखी मुहूर्त माना जा रहा है।

लेकिन इसका यह अर्थ निकालना कि 9:48 बजे के बाद राखी बांधना बिल्कुल संभव नहीं है, हर परंपरा और हर परिवार के लिए एक समान नियम नहीं माना जा सकता।

धार्मिक परंपराओं में मुहूर्त की गणना अलग-अलग पंचांग और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार की जाती है। कुछ परंपराओं में शुभ चौघड़िया, अभिजीत मुहूर्त या अन्य शुभ समय को भी ध्यान में रखा जाता है।

इसलिए जिन भाई-बहनों के लिए सुबह का समय संभव नहीं है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। वे अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार वैकल्पिक शुभ समय देखकर रक्षाबंधन की रस्म पूरी कर सकते हैं।

दूसरे शहर से आने वालों के लिए क्या है रास्ता?

मान लीजिए बहन दिल्ली में रहती है और उसका भाई लखनऊ में रहता है। उसे सुबह ट्रेन पकड़कर लखनऊ पहुंचना है। ऐसी स्थिति में सुबह 9:48 बजे तक पहुंचना हमेशा संभव नहीं होगा।

इसी तरह कई भाई दूसरे राज्यों में नौकरी करते हैं और त्योहार पर घर पहुंचने के लिए लंबी यात्रा करते हैं। अगर यात्रा में ही कई घंटे लग जाएं तो मुख्य मुहूर्त में राखी बांधना मुश्किल हो सकता है।

ऐसे परिवारों को पहले से योजना बनानी चाहिए। अगर सुबह का मुहूर्त निकल जाता है तो स्थानीय पंचांग में उपलब्ध दूसरे शुभ समय को देखा जा सकता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि किसी सोशल मीडिया पोस्ट को देखकर घबराने के बजाय अपने क्षेत्र के विश्वसनीय पंचांग या ज्योतिषाचार्य से समय की पुष्टि कर लें।

राहुकाल और यमगंड का भी रखा जाता है ध्यान

कुछ परिवार शुभ कार्यों के दौरान राहुकाल और यमगंड जैसे समय से बचने की परंपरा का पालन करते हैं। ऐसे समय को लेकर भी इस बार अलग-अलग जगहों पर अलग गणनाएं सामने आ रही हैं।

कानपुर क्षेत्र की गणना के अनुसार 28 अगस्त को राहुकाल लगभग 10:33 बजे से 12:09 बजे तक और यमगंड लगभग दोपहर 3:21 बजे से शाम 4:57 बजे तक बताया जा रहा है।

हालांकि ये समय शहर के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, वाराणसी या किसी अन्य शहर में रहने वाले लोगों को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना चाहिए।

क्या दोपहर में राखी बांधी जा सकती है?

अगर किसी परिवार में सुबह राखी बांधना संभव नहीं हो पाया तो दोपहर या शाम के समय उपलब्ध शुभ मुहूर्त देखा जा सकता है।

कुछ पंचांगों में रक्षाबंधन के लिए अपराह्न काल को भी महत्व दिया जाता है। इसलिए यह कहना कि सुबह 9:48 बजे के बाद राखी बांधने का कोई विकल्प ही नहीं है, सही नहीं होगा।

हालांकि अगर परिवार किसी विशेष धार्मिक परंपरा या संप्रदाय का पालन करता है तो उस परंपरा के अनुसार निर्णय लेना बेहतर रहेगा।

“पूरे दिन पूर्णिमा” वाली बात पर ध्यान दें

रक्षाबंधन को लेकर सोशल मीडिया पर एक दावा यह भी चल रहा है कि 28 अगस्त को पूरे दिन श्रावण पूर्णिमा रहेगी। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार यह बात सही नहीं है।

श्रावण पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे समाप्त हो रही है। इसके बाद अगली तिथि शुरू हो जाती है।

इसलिए यह कहना ज्यादा सही होगा कि रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा, जबकि पूर्णिमा तिथि सुबह 9:48 बजे तक रहेगी।

यही अंतर समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि तिथि और त्योहार की तारीख हमेशा एक ही समय सीमा में नहीं होती।

भाई-बहन के रिश्ते का खास त्योहार

रक्षाबंधन सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि भाई-बहन के रिश्ते और भावनाओं से जुड़ा पर्व है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके सुखी, स्वस्थ और सफल जीवन की कामना करती है।

भाई भी अपनी बहन की सुरक्षा, सम्मान और सुख का संकल्प लेता है। समय के साथ इस त्योहार का स्वरूप भी बदल रहा है। अब कई भाई-बहन अलग-अलग शहरों या देशों में रहते हैं और त्योहार मनाने के लिए लंबी यात्रा करते हैं।

इसी वजह से हर परिवार के लिए एक ही समय पर राखी बांधना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता।

समय को लेकर भ्रम क्यों पैदा हुआ?

इस बार मुख्य मुहूर्त की अवधि अपेक्षाकृत छोटी होने के कारण लोगों में चिंता ज्यादा है। सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक का समय करीब चार घंटे का है, लेकिन इतने बड़े देश में लाखों परिवारों के लिए यह समय सुविधाजनक हो, यह जरूरी नहीं है।

इसके अलावा इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अलग-अलग शहरों के पंचांग समय शेयर होने से भी भ्रम बढ़ जाता है।

किसी एक शहर का राहुकाल दूसरे शहर में बिल्कुल वही हो, यह जरूरी नहीं है। इसी तरह सूर्योदय और स्थानीय समय के अंतर के कारण मुहूर्त की शुरुआत में भी बदलाव हो सकता है।

क्या करें अगर 9:48 बजे तक राखी नहीं बांध पाए?

अगर किसी वजह से 9:48 बजे तक भाई-बहन एक जगह नहीं पहुंच पाए हैं तो सबसे पहले घबराने की जरूरत नहीं है।

अपने शहर के पंचांग के अनुसार आगे का शुभ समय देखें। परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा और राखी बांधने का समय तय करें। अगर राहुकाल या यमगंड से बचने की परंपरा है तो स्थानीय गणना के अनुसार उन समयों को छोड़कर रस्म पूरी की जा सकती है।

किसी भी स्थिति में सोशल मीडिया पर वायरल किसी एक दावे को अंतिम धार्मिक नियम मान लेना उचित नहीं है।

रक्षाबंधन में भावना भी महत्वपूर्ण

धार्मिक मान्यताओं में मुहूर्त का महत्व अपनी जगह है, लेकिन रक्षाबंधन का मूल भाव भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और आपसी जिम्मेदारी से जुड़ा है।

कई बार भाई किसी मजबूरी के कारण समय पर घर नहीं पहुंच पाता। कई बार बहन पढ़ाई या नौकरी की वजह से दूसरे शहर में होती है। ऐसे में परिवार अपनी परिस्थितियों के अनुसार त्योहार मनाते हैं।

इसलिए मुहूर्त को लेकर जानकारी रखना जरूरी है, लेकिन अनावश्यक डर या भ्रम पैदा करना सही नहीं है।

इस साल रक्षाबंधन को लेकर सबसे जरूरी बात

28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन मनाया जाएगा। श्रावण पूर्णिमा तिथि सुबह 9:48 बजे तक रहेगी और सुबह का मुख्य राखी मुहूर्त 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया जा रहा है।

अगर आप इस समय के भीतर राखी बांध सकते हैं तो यह मुख्य मुहूर्त माना जा रहा है। लेकिन अगर यात्रा या किसी अन्य कारण से ऐसा संभव नहीं है, तो अपने शहर के पंचांग के अनुसार वैकल्पिक शुभ समय देखा जा सकता है।

इसलिए 9:48 बजे के बाद राखी बांधने को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। सही समय के लिए स्थानीय पंचांग और अपनी पारिवारिक परंपरा को ध्यान में रखें। रक्षाबंधन का असली संदेश भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के सुख की कामना है।

कोई टिप्पणी नहीं