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‘गुड टच-बैड टच’ सिखाया तो 11 साल की बच्ची ने खोला मुंह, सामने आया ऐसा राज कि पुलिस भी रह गई हैरान



महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले की एक आश्रम शाला में बच्चों को सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श के बारे में जागरूक करने के लिए आयोजित किया गया एक सामान्य सा सत्र उस वक्त बेहद गंभीर हो गया, जब एक 11 वर्षीय छात्रा ने महिला अधिकारी के सामने अपने साथ हुए कथित यौन उत्पीड़न की जानकारी दी। बच्ची की बात सुनने के बाद जब मामले की जांच आगे बढ़ी तो उसकी 14 वर्षीय बड़ी बहन से जुड़ा एक और गंभीर आरोप सामने आया।

मामले की जानकारी मिलते ही स्कूल प्रशासन ने बच्चियों के परिवार से संपर्क किया और पुलिस को सूचना दी। नंदुरबार पुलिस ने प्रारंभिक कार्रवाई के तहत जीरो एफआईआर दर्ज की। चूंकि कथित घटना सूरत के उधना इलाके में हुई थी, इसलिए मामला संबंधित क्षेत्राधिकार वाली उधना पुलिस को सौंप दिया गया। उधना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 56 वर्षीय निर्माण ठेकेदार को गिरफ्तार किया है।

आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर रही है।

‘गुड टच, बैड टच’ सत्र बना खुलासे की वजह

यह पूरा मामला 25 अगस्त को सामने आया। आश्रम शाला परिसर में बच्चों के लिए ‘गुड टच, बैड टच’ को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस तरह के सत्रों का उद्देश्य बच्चों को यह समझाना होता है कि कौन सा स्पर्श सुरक्षित है, कौन सा असहज या अनुचित हो सकता है और ऐसी स्थिति में उन्हें किस भरोसेमंद व्यक्ति से मदद मांगनी चाहिए।

सत्र के दौरान 11 वर्षीय छात्रा ने हिम्मत जुटाकर महिला अधिकारी से निजी तौर पर बात की। बच्ची ने आरोप लगाया कि एक परिचित व्यक्ति ने उसके साथ गलत व्यवहार किया था। उसने शारीरिक परेशानी की शिकायत भी की।

बच्ची की बात को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों ने उससे आवश्यक जानकारी हासिल की। इसी दौरान उसने अपनी बड़ी बहन के साथ भी कथित तौर पर इसी तरह की घटना होने की जानकारी दी।

इसके बाद स्कूल प्रशासन ने मामले को दबाने के बजाय तुरंत बच्चियों की मां से संपर्क किया। परिवार को जानकारी दिए जाने के बाद पुलिस कार्रवाई शुरू हुई।

छोटी बहन की बात से सामने आया बड़ा मामला

शुरुआत में यह मामला केवल एक बच्ची की शिकायत के रूप में सामने आया था, लेकिन पूछताछ के दौरान दूसरी नाबालिग बहन का नाम भी सामने आने से पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया।

पुलिस के मुताबिक, दोनों बहनें नंदुरबार जिले की आश्रम शाला में पढ़ती हैं। गर्मियों की छुट्टियों के दौरान वे अपनी मां के पास सूरत आई थीं। उनकी मां उधना इलाके में निर्माण कार्य से जुड़ी मजदूरी करती थीं।

इसी दौरान आरोपी का परिवार से संपर्क हुआ। पुलिस का आरोप है कि मां के काम पर चले जाने के बाद आरोपी बच्चियों के घर पहुंचा और अलग-अलग मौकों पर दोनों के साथ अपराध किया।

पुलिस के अनुसार, बच्चियों को इस बारे में किसी को बताने से रोकने के लिए धमकाया भी गया था। इसी डर की वजह से उन्होंने तत्काल किसी को जानकारी नहीं दी। छुट्टियां खत्म होने के बाद दोनों बहनें वापस नंदुरबार स्थित अपने स्कूल चली गईं।

कई दिनों तक छिपा रहा दर्द

ऐसे मामलों में अक्सर बच्चे डर, दबाव या धमकी की वजह से अपने साथ हुई घटना किसी को नहीं बता पाते। इस मामले में भी कथित तौर पर ऐसा ही हुआ। बच्चियां अपने स्कूल लौट आईं, लेकिन घटना की जानकारी सामने नहीं आई।

25 अगस्त को जागरूकता कार्यक्रम के दौरान जब बच्चों को सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श के बारे में बताया जा रहा था, तब छोटी बहन ने अपनी बात कहने का साहस किया।

यही वह क्षण था जब कई दिनों से छिपी घटना स्कूल प्रशासन और पुलिस के सामने आई।

बच्ची का यह कदम इस बात को भी रेखांकित करता है कि बच्चों को उम्र के अनुसार सुरक्षा और जागरूकता की जानकारी देना कितना जरूरी है। यदि बच्चों को यह पता हो कि गलत व्यवहार की स्थिति में किससे बात करनी है और किस तरह मदद मांगनी है, तो कई घटनाएं समय रहते सामने आ सकती हैं।

नंदुरबार में दर्ज हुई जीरो एफआईआर

मामले की जानकारी मिलने के बाद नंदुरबार पुलिस ने तुरंत जीरो एफआईआर दर्ज की। जीरो एफआईआर की व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि किसी गंभीर अपराध की सूचना मिलने पर पुलिस क्षेत्राधिकार का इंतजार किए बिना शिकायत दर्ज कर सकती है।

इसके बाद जब यह स्पष्ट हुआ कि कथित अपराध सूरत के उधना इलाके में हुआ है, तो मामला वहां की पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया।

उधना पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब कथित घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।

मामले में बच्चों की पहचान और उनकी निजता की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। कानून भी यौन अपराधों से जुड़े मामलों में नाबालिग पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक करने पर सख्त रोक लगाता है।

मेडिकल जांच के बाद रिपोर्ट का इंतजार

उधना पुलिस ने दोनों नाबालिगों का मेडिकल परीक्षण कराया है। पुलिस अब मेडिकल रिपोर्ट और जांच से जुड़े अन्य साक्ष्यों का इंतजार कर रही है।

मेडिकल जांच ऐसे मामलों की जांच प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसके अलावा पुलिस घटनास्थल, परिवार के सदस्यों, संबंधित लोगों और अन्य संभावित गवाहों से भी जानकारी जुटा सकती है।

जांच के दौरान यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी का बच्चियों के परिवार से किस तरह संपर्क हुआ और कथित घटनाओं के दौरान परिस्थितियां क्या थीं।

फिलहाल आरोपी पुलिस की हिरासत में है और मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाले मुकदमे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

आरोपी का परिवार से था संपर्क

पुलिस के अनुसार आरोपी मूल रूप से नंदुरबार का रहने वाला है, लेकिन वर्तमान में उधना इलाके में अपने परिवार के साथ रहता है। वह निर्माण कार्य से जुड़ा ठेकेदार बताया जा रहा है।

आरोपी ने कथित तौर पर पीड़ित बच्चियों की मां को निर्माण स्थल पर मजदूरी का काम दिया था। इसी वजह से परिवार और आरोपी के बीच संपर्क बना था।

पुलिस इसी संपर्क और घटना से पहले तथा बाद की परिस्थितियों की भी जांच कर रही है।

POCSO के तहत कार्रवाई क्यों महत्वपूर्ण है?

नाबालिग बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए भारत में पॉक्सो कानून लागू है। यह कानून बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में विशेष कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।

ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन से अपेक्षा होती है कि बच्चे की पहचान सुरक्षित रखी जाए, पूछताछ संवेदनशील तरीके से की जाए और बच्चे को अतिरिक्त मानसिक दबाव से बचाया जाए।

इस मामले में भी बच्चियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। यह जरूरी है क्योंकि किसी नाबालिग पीड़ित की पहचान सामने आने से उसके भविष्य और मानसिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

एक जागरूकता कार्यक्रम ने खोल दिया बंद दरवाजा

इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि अगर स्कूल में ‘गुड टच, बैड टच’ पर जागरूकता सत्र नहीं होता, तो शायद बच्ची अपने साथ हुई घटना बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाती।

बच्चों को केवल यह बताना पर्याप्त नहीं है कि गलत स्पर्श क्या होता है। उन्हें यह भी समझाना जरूरी है कि अगर उनके साथ कोई गलत व्यवहार करता है तो वे बिना डर के माता-पिता, शिक्षक, काउंसलर, पुलिस अधिकारी या किसी भरोसेमंद वयस्क को इसकी जानकारी दें।

बच्चे अक्सर धमकी, डर, शर्म या अपराधी के दबाव में चुप रह जाते हैं। ऐसे में परिवार और स्कूल का वातावरण ऐसा होना चाहिए जहां बच्चा अपनी परेशानी खुलकर बता सके।

अब जांच से सामने आएगा पूरा सच

फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और दोनों नाबालिगों की मेडिकल जांच भी कराई जा चुकी है। जांच एजेंसियां मामले से जुड़े साक्ष्य जुटा रही हैं।

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित घटनाएं कब और किन परिस्थितियों में हुईं, आरोपी और परिवार के बीच किस तरह का संपर्क था और आरोपों की पुष्टि के लिए कौन-कौन से साक्ष्य उपलब्ध हैं।

यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं है। स्कूल, परिवार, प्रशासन और समाज—सभी को मिलकर ऐसा माहौल बनाना होगा जहां बच्चे डर के बजाय भरोसे के साथ अपनी बात कह सकें।

इस मामले में 11 वर्षीय बच्ची ने ‘गुड टच, बैड टच’ सत्र के दौरान जो हिम्मत दिखाई, उसी से कथित अपराध का पर्दाफाश हुआ। अब पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया यह तय करेगी कि आरोपों के पीछे पूरी सच्चाई क्या है और कानून के तहत आरोपी के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

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