नेपाल की बाढ़ में अचानक गायब हुआ Infosys का बड़ा अफसर, 320 भारतीय लापता… आखिर कहां पहुंचा आखिरी सुराग?
नेपाल और चीन की सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ ने अब एक नया डर पैदा कर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा में हजारों लोगों के प्रभावित होने के बीच भारत की दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस के एक वरिष्ठ अधिकारी से भी संपर्क टूट गया है। इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के प्रमुख लैक्स गोपीसेट्टी नेपाल में निजी यात्रा पर गए थे, लेकिन भीषण बाढ़ और मलबे के सैलाब के बाद से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। इंफोसिस ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि कंपनी उनकी सुरक्षा और कुशलक्षेम सुनिश्चित करने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर जानकारी जुटा रही है।
गोपीसेट्टी के लापता होने की खबर ऐसे वक्त सामने आई है, जब नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ ने पूरे क्षेत्र में तबाही मचा रखी है। सड़कें, पुल, इमारतें और दूसरी बुनियादी सुविधाएं पानी और मलबे के तेज बहाव में बह गई हैं। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं और राहत तथा बचाव दल बेहद मुश्किल परिस्थितियों में लोगों की तलाश कर रहे हैं।
निजी यात्रा पर नेपाल गए थे गोपीसेट्टी
इंफोसिस ने स्पष्ट किया है कि लैक्स गोपीसेट्टी कंपनी के आधिकारिक काम से नहीं, बल्कि निजी यात्रा पर उस क्षेत्र में गए थे। बाढ़ की तबाही के बाद से उनसे संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है।
कंपनी ने कहा कि उसकी पहली प्राथमिकता गोपीसेट्टी की सुरक्षा और कुशलक्षेम सुनिश्चित करना है। इंफोसिस संबंधित एजेंसियों के साथ संपर्क में है और उनके बारे में अधिक जानकारी जुटाने तथा उनसे संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है।
कंपनी ने यह भी बताया कि वह गोपीसेट्टी के परिवार के लगातार संपर्क में है और इस मुश्किल समय में हर संभव सहायता उपलब्ध करा रही है। इंफोसिस ने नेपाल में हुई तबाही और लोगों की मौत पर भी गहरा दुख जताया है।
कौन हैं लैक्स गोपीसेट्टी?
इंफोसिस में गोपीसेट्टी सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े कारोबार में एक अहम भूमिका निभाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों को रणनीति, तकनीक, संचालन और बदलाव से जुड़े मामलों में सलाह देते हैं। वह कंपनी की रणनीति और उसके क्रियान्वयन से भी जुड़े रहे हैं।
वर्तमान भूमिका से पहले वह इंफोसिस में ग्लोबल वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस एप्लीकेशंस एवं डिजिटल वर्कस्पेस सर्विस के प्रमुख रह चुके हैं। उस भूमिका में उन्होंने अमेरिका, यूरोप और एशिया में कारोबार के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इंफोसिस में आने से पहले गोपीसेट्टी एक्सेंचर में मैनेजिंग डायरेक्टर थे। वहां उन्होंने उत्तरी अमेरिका में स्वास्थ्य और सार्वजनिक सेवा कारोबार के एक हिस्से का नेतृत्व किया था।
यही वजह है कि उनके लापता होने की खबर सामने आते ही इंफोसिस से जुड़े लोगों और उनके परिचितों में चिंता बढ़ गई है।
सिर्फ गोपीसेट्टी नहीं, 320 भारतीय भी लापता
नेपाल की इस त्रासदी का असर केवल एक भारतीय अधिकारी तक सीमित नहीं है। भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में कम से कम 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
इसके अलावा करीब 400 भारतीय नागरिक चीन की तरफ फंसे हुए हैं। इनमें से कई लोग नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में यात्रा या अन्य कारणों से मौजूद थे। भारत सरकार लगातार नेपाल और चीन के अधिकारियों के संपर्क में है ताकि भारतीय नागरिकों की स्थिति का पता लगाया जा सके और उन्हें सुरक्षित निकाला जा सके।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, चीन की ओर फंसे भारतीयों में से 153 लोग सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। यह उन परिवारों के लिए राहत की खबर है, जो लगातार अपने परिजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।
नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों से काठमांडू पहुंचे 21 भारतीय नागरिक भी शुक्रवार दोपहर नई दिल्ली पहुंच गए। इन लोगों को नेपाल में चलाए गए राहत और बचाव अभियान के दौरान सुरक्षित निकाला गया था।
बाढ़ ने मचा दी ऐसी तबाही कि रास्ते तक गायब हो गए
नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ सामान्य बाढ़ से कहीं ज्यादा भयावह थी। पानी के साथ भारी मात्रा में मिट्टी, चट्टान, पेड़ और मलबा नीचे आया। कई जगहों पर सड़कें पूरी तरह बह गईं और पुलों के टूट जाने से प्रभावित इलाकों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया।
नेपाल के रासुवा और आसपास के इलाकों में हालात बेहद खराब रहे। कई स्थानों पर संचार व्यवस्था प्रभावित हुई और राहत टीमों को दुर्गम पहाड़ी इलाकों में पहुंचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
मलबे और पानी की तेज धार के कारण कई परिवारों को अचानक सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। जिन लोगों को कुछ मिनट भी अतिरिक्त मिले, उन्होंने ऊंचे इलाकों की ओर भागकर अपनी जान बचाई।
हिमालय में कैसे आया इतना बड़ा सैलाब?
इस विनाशकारी आपदा के पीछे हिमालयी क्षेत्र में हुई एक गंभीर प्राकृतिक घटना को प्रमुख कारण माना जा रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, बर्फ और चट्टान के बड़े हिस्से के खिसकने के बाद भारी मात्रा में मलबा और पानी नदी तंत्र में पहुंचा।
इसके बाद नदी का बहाव अचानक बेहद तेज हो गया। पानी अपने साथ बड़े-बड़े पत्थर, पेड़, मिट्टी और टूटे हुए निर्माणों का मलबा लेकर नीचे की ओर बढ़ने लगा।
पहाड़ी इलाकों में जब पानी के साथ इतना भारी मलबा बहता है तो वह सामान्य बाढ़ से कई गुना ज्यादा विनाशकारी हो जाता है। मजबूत सड़कें और पुल तक कुछ ही समय में टूट सकते हैं।
यही वजह है कि इस आपदा को देखने वाले कई लोगों ने इसे सामान्य बाढ़ के बजाय पहाड़ों से आई सुनामी जैसा मंजर बताया।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
भारत सरकार ने नेपाल को हर संभव सहायता देने की बात कही है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और जरूरत पड़ने पर नेपाल को राहत तथा बचाव अभियान में हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार है।
भारतीय अधिकारियों की प्राथमिकता इस समय नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है।
नेपाल के अधिकारियों के साथ समन्वय कर प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालने का काम जारी है। दुर्गम इलाकों में हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है, क्योंकि कई सड़कें और पुल बाढ़ में बह चुके हैं।
लापता लोगों के परिवारों की बढ़ती बेचैनी
इस आपदा का सबसे दर्दनाक पहलू उन परिवारों की बेचैनी है जिन्हें अब तक अपने परिजनों के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है।
कई परिवार लगातार सरकारी हेल्पलाइन और अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं। किसी को फोन पर थोड़ी जानकारी मिल रही है तो किसी का अपने परिजनों से कई दिनों से संपर्क नहीं हो पाया है।
ऐसे में लैक्स गोपीसेट्टी का मामला भी बेहद संवेदनशील बन गया है। एक तरफ वह इंफोसिस जैसे बड़े संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके परिवार के लिए इस समय सबसे जरूरी सिर्फ यही जानना है कि वह सुरक्षित हैं या नहीं।
इंफोसिस ने अभी तक उनके साथ क्या हुआ, इस बारे में कोई अंतिम जानकारी नहीं दी है। कंपनी लगातार संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर उनकी तलाश और संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है।
मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है
नेपाल और चीन के प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश की जा रही है और प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
कई क्षेत्रों में अभी भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। खराब मौसम, टूटे हुए रास्ते और दुर्गम पहाड़ी इलाके बचाव दलों के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
हर गुजरता घंटा बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकालना जरूरी है।
अब सबसे बड़ा सवाल- कहां हैं लैक्स गोपीसेट्टी?
नेपाल की इस भीषण आपदा ने सैकड़ों परिवारों को चिंता में डाल दिया है। इन्हीं परिवारों में अब इंफोसिस के वरिष्ठ अधिकारी लैक्स गोपीसेट्टी का परिवार भी शामिल है।
उनके निजी यात्रा पर नेपाल क्षेत्र में होने और बाढ़ के बाद संपर्क टूटने की पुष्टि कंपनी ने कर दी है। लेकिन उनकी वर्तमान स्थिति के बारे में अभी कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है।
इंफोसिस और संबंधित एजेंसियां उनकी जानकारी जुटाने में लगी हैं। वहीं भारत सरकार नेपाल और चीन के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है।
नेपाल की विनाशकारी बाढ़ ने जहां सैकड़ों जिंदगियां तबाह कर दीं, वहीं अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या मलबे और तबाही के बीच लापता हुए लैक्स गोपीसेट्टी और सैकड़ों अन्य भारतीयों की सुरक्षित खबर जल्द सामने आएगी?

कोई टिप्पणी नहीं