जिसे मामूली थकान समझते रहे, वही निकला लिवर सिरोसिस का संकेत! इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
लिवर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह शरीर में पोषक तत्वों के इस्तेमाल, विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, पाचन से जुड़े कई कामों और खून के थक्के बनने से जुड़े प्रोटीन के निर्माण समेत कई जरूरी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। लेकिन लगातार होने वाला लिवर डैमेज धीरे-धीरे गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है। ऐसी ही एक गंभीर स्थिति है लिवर सिरोसिस, जिसमें स्वस्थ लिवर टिश्यू की जगह स्कार टिश्यू बनने लगता है और समय के साथ लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सिरोसिस शुरुआती दौर में कई लोगों में बिना स्पष्ट लक्षण के भी रह सकता है। जब लक्षण दिखाई देने लगते हैं, तब तक लिवर को काफी नुकसान हो चुका हो सकता है। इसलिए लगातार रहने वाली थकान, भूख कम लगना, बिना वजह वजन घटना, पैरों या पेट में सूजन और त्वचा या आंखों का पीला पड़ना जैसे संकेतों को सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
AIIMS नई दिल्ली के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ. शालिमार लिवर रोगों से जुड़े मामलों का उपचार करते हैं। AIIMS की आधिकारिक जानकारी में भी डॉ. शालिमार को लिवर क्लिनिक की फैकल्टी के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
आखिर क्या होता है लिवर सिरोसिस?
लिवर सिरोसिस ऐसी स्थिति है जिसमें लंबे समय तक लिवर को नुकसान पहुंचने के बाद स्वस्थ कोशिकाओं की जगह स्कार टिश्यू बनने लगते हैं। यह स्कार टिश्यू सामान्य लिवर टिश्यू की तरह काम नहीं करता। जैसे-जैसे स्कारिंग बढ़ती जाती है, लिवर की संरचना और काम करने की क्षमता प्रभावित होती जाती है।
सिरोसिस कई कारणों से हो सकता है। इनमें लंबे समय तक अत्यधिक शराब का सेवन, क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी या सी संक्रमण और फैटी लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारी प्रमुख कारणों में शामिल हैं। कुछ मामलों में ऑटोइम्यून बीमारियां, पित्त नलिकाओं से जुड़ी समस्याएं और कुछ आनुवंशिक बीमारियां भी लिवर को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाकर सिरोसिस का कारण बन सकती हैं।
शुरुआत में क्यों पता नहीं चलता?
लिवर की खासियत यह है कि नुकसान बढ़ने के बावजूद शुरुआती चरण में व्यक्ति को कोई बड़ी परेशानी महसूस नहीं हो सकती। यही वजह है कि कुछ लोग सामान्य थकान या कमजोरी को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मान लेते हैं।
NIDDK के अनुसार सिरोसिस के शुरुआती चरण में लक्षण नहीं भी हो सकते हैं और कई बार बीमारी के संकेत तब सामने आते हैं जब लिवर काफी क्षतिग्रस्त हो चुका होता है।
इसी कारण शरीर में लंबे समय से हो रहे बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है।
लगातार थकान को सिर्फ कमजोरी न समझें
अगर पर्याप्त आराम करने के बावजूद लगातार थकान और कमजोरी बनी रहती है, तो इसका कारण केवल काम का दबाव या नींद की कमी मान लेना सही नहीं है।
लिवर सिरोसिस में थकान और कमजोरी शुरुआती लक्षणों में शामिल हो सकते हैं। इसके साथ भूख कम लगना, बिना कोशिश वजन कम होना, मतली या उल्टी जैसी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं।
हालांकि इन लक्षणों के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, लेकिन यदि ये लंबे समय तक बने रहें या लगातार बढ़ रहे हों तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
पेट और पैरों में सूजन भी हो सकती है संकेत
सिरोसिस बढ़ने पर शरीर में तरल पदार्थ जमा होने की समस्या हो सकती है। इसके कारण पेट में पानी भरने जैसी स्थिति यानी एसाइटिस और पैरों, टखनों या पंजों में सूजन हो सकती है।
यदि किसी व्यक्ति के पेट का आकार अचानक बढ़ने लगे या पैरों में लगातार सूजन रहने लगे, तो इसे सामान्य वजन बढ़ना समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
आंखें और त्वचा पीली पड़ना
त्वचा या आंखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ना पीलिया (जॉन्डिस) का संकेत हो सकता है। सिरोसिस में भी यह लक्षण दिखाई दे सकता है। इसके साथ पेशाब का रंग गहरा होना भी हो सकता है।
ऐसे लक्षण दिखने पर चिकित्सकीय जांच कराना महत्वपूर्ण है, क्योंकि पीलिया के पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं।
भूख कम लगना और वजन घटना
अगर पहले की तुलना में भूख लगातार कम हो गई है और बिना डाइटिंग या व्यायाम बढ़ाए वजन कम हो रहा है, तो इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सिरोसिस के शुरुआती लक्षणों में भूख कम होना और बिना कोशिश वजन घटना शामिल हो सकता है। बीमारी बढ़ने पर मांसपेशियों की कमजोरी और वजन से जुड़ी दूसरी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
मतली, उल्टी और मानसिक बदलाव भी हो सकते हैं संकेत
सिरोसिस में मतली और उल्टी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। बीमारी गंभीर होने पर शरीर में विषैले पदार्थों के जमा होने से दिमाग की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो सकती है। इससे भ्रम, सोचने में परेशानी, याददाश्त में बदलाव, व्यक्तित्व में बदलाव या नींद से जुड़ी समस्या हो सकती है।
अगर किसी व्यक्ति में अचानक भ्रम, असामान्य व्यवहार या सोचने-समझने में गंभीर परेशानी दिखाई दे, तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
खून की उल्टी आए तो तुरंत अस्पताल जाएं
सिरोसिस की गंभीर जटिलताओं में पाचन तंत्र की नसों में बढ़ा हुआ दबाव और वैरिक्स से ब्लीडिंग शामिल हो सकती है। नसों के फटने पर खून की उल्टी या काला/खूनी मल जैसी स्थिति हो सकती है। ऐसी स्थिति आपातकाल हो सकती है और तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
इसलिए खून की उल्टी को कभी भी गैस, एसिडिटी या मामूली पेट की समस्या समझकर घर पर इलाज करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
लिवर सिरोसिस की जांच कैसे होती है?
डॉक्टर सिरोसिस का पता लगाने के लिए मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच, ब्लड टेस्ट और इमेजिंग टेस्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं। ब्लड टेस्ट से लिवर एंजाइम, बिलीरुबिन, प्रोटीन और अन्य संकेतकों की जानकारी मिल सकती है। हेपेटाइटिस बी और सी जैसे वायरल संक्रमण की जांच भी की जा सकती है।
अल्ट्रासाउंड जैसे इमेजिंग टेस्ट से लिवर के आकार, बनावट और अन्य बदलावों का आकलन करने में मदद मिल सकती है। कुछ मामलों में डॉक्टर लिवर की स्थिति के अनुसार दूसरे टेस्ट भी सुझा सकते हैं।
क्या सिरोसिस का इलाज संभव है?
सिरोसिस से हुए स्थायी स्कार को पूरी तरह ठीक करने के लिए कोई एक सामान्य इलाज नहीं है। लेकिन बीमारी के मूल कारण का इलाज करके लिवर को आगे होने वाले नुकसान को धीमा किया जा सकता है और कई जटिलताओं को नियंत्रित किया जा सकता है।
अगर कारण शराब से जुड़ा है, तो शराब पूरी तरह बंद करना बेहद महत्वपूर्ण है। हेपेटाइटिस बी या सी की स्थिति में डॉक्टर उपयुक्त एंटीवायरल उपचार दे सकते हैं। फैटी लिवर से जुड़ी समस्या में वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण हो सकता है।
गंभीर स्थिति में कब पड़ सकती है ट्रांसप्लांट की जरूरत?
जब सिरोसिस बढ़कर लिवर फेलियर जैसी स्थिति तक पहुंच जाता है और दूसरे उपचार पर्याप्त नहीं रहते, तब डॉक्टर लिवर ट्रांसप्लांट पर विचार कर सकते हैं। इसका निर्णय मरीज की पूरी स्वास्थ्य स्थिति और बीमारी की गंभीरता को देखकर विशेषज्ञ करते हैं।
इसलिए यह मानना सही नहीं है कि हर सिरोसिस मरीज को तुरंत ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है। शुरुआती पहचान और मूल कारण का इलाज बीमारी की प्रगति को रोकने या धीमा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
लिवर की बीमारी से बचाव के लिए सबसे जरूरी कदमों में शराब से दूरी, स्वस्थ वजन बनाए रखना और डायबिटीज जैसे मेटाबॉलिक जोखिमों को नियंत्रित रखना शामिल है। हेपेटाइटिस से बचाव और समय पर जांच भी महत्वपूर्ण हैं।
अगर किसी व्यक्ति को पहले से लिवर की बीमारी है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच और उपचार कराना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द की दवाएं, सप्लीमेंट या हर्बल प्रोडक्ट लेना भी उचित नहीं है, क्योंकि कुछ दवाएं या सप्लीमेंट लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
शराब से पूरी तरह दूरी जरूरी
लिवर सिरोसिस या शराब से संबंधित लिवर बीमारी वाले लोगों के लिए शराब से पूरी तरह दूरी बनाना महत्वपूर्ण है। शराब का सेवन जारी रखने से लिवर को अतिरिक्त नुकसान हो सकता है।
वजन और खान-पान पर रखें ध्यान
फैटी लिवर और उससे जुड़ी लिवर बीमारी में स्वस्थ वजन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित खान-पान मददगार हो सकते हैं। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति को पहले से सिरोसिस है तो डाइट में बड़े बदलाव डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह से ही करने चाहिए।
छोटी लापरवाही बन सकती है बड़ी समस्या
लिवर सिरोसिस का सबसे चिंताजनक पहलू यही है कि यह लंबे समय तक चुपचाप बढ़ सकता है। लगातार थकान, भूख में कमी, बिना वजह वजन घटना, पेट या पैरों में सूजन, त्वचा और आंखों का पीला पड़ना जैसे लक्षण कई बार सामान्य समस्या समझ लिए जाते हैं। लेकिन यदि ये लक्षण लगातार बने रहते हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
खास तौर पर खून की उल्टी, काला या खूनी मल, बेहोशी, गंभीर भ्रम या तेजी से बढ़ती पेट की सूजन जैसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
यह लेख स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। लिवर सिरोसिस का निदान केवल लक्षणों से नहीं किया जा सकता। किसी भी लक्षण या जोखिम की स्थिति में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट/हेपेटोलॉजिस्ट से सलाह लेकर उचित जांच कराएं।

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