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अस्पताल में पति ने बताया ‘एक्सीडेंट’… पोस्टमार्टम रिपोर्ट आते ही खुला ऐसा खौफनाक राज कि कांप उठी पूरी पुलिस टीम!



अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से घरेलू हिंसा और हत्या का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां 23 वर्षीय गर्भवती महिला की उसके पति ने कथित तौर पर बेरहमी से पिटाई की, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने घटना को सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश की और घायल पत्नी को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचा। हालांकि, महिला की मौत के बाद सामने आए पोस्टमार्टम निष्कर्षों ने पूरी कहानी बदल दी। जांच के दौरान महिला के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले और करीब 10 इंच लंबी लोहे की वस्तु भी बरामद होने की बात सामने आई। 

मृतका की पहचान हीराबाई के रूप में हुई है, जबकि आरोपी पति प्रदीप अगरिया बताया गया है। पुलिस के अनुसार, दोनों की शादी करीब पांच वर्ष पहले हुई थी। शुरुआती जानकारी में यह भी सामने आया है कि आरोपी शराब का आदी था और कथित तौर पर नशे की हालत में पत्नी के साथ पहले भी मारपीट करता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ की गई है। 

अस्पताल पहुंचकर सुनाई हादसे की कहानी

बताया जा रहा है कि 14 मई को भिठीकला गांव में महिला के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई। इसके बाद उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई। पुलिस के अनुसार, आरोपी उसे मोटरसाइकिल के जरिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर गया।

अस्पताल पहुंचने के बाद आरोपी ने डॉक्टरों को कथित तौर पर यह बताया कि महिला सड़क दुर्घटना में घायल हुई है। डॉक्टरों ने महिला की जांच की, लेकिन उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि उसे बचाया नहीं जा सका। चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद आरोपी अस्पताल से फरार हो गया। 

पुलिस के लिए यह घटना शुरू में एक दुर्घटना जैसी दिखाई जा सकती थी, लेकिन पोस्टमार्टम ने कई ऐसे तथ्य सामने रखे, जिनसे मामला हत्या की दिशा में चला गया।

पोस्टमार्टम में सामने आई गंभीर चोटें

महिला के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के डॉक्टर संतु बाग के मुताबिक, मृतका करीब तीन महीने की गर्भवती थी और उसके शरीर पर लगभग 17 गंभीर बाहरी चोटें पाई गईं। पोस्टमार्टम के दौरान उसके शरीर से करीब 10 इंच लंबी लोहे की वस्तु भी बरामद की गई, जिसे जांच के लिए पुलिस को सौंप दिया गया।

मेडिकल जांच के निष्कर्षों के बाद पुलिस ने मामले को दुर्घटना नहीं, बल्कि गंभीर हिंसा और हत्या के मामले के तौर पर जांचना शुरू किया।

एक अन्य रिपोर्ट में पोस्टमार्टम के दौरान सिर समेत शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटों का उल्लेख किया गया है। इन चोटों की प्रकृति को देखते हुए जांचकर्ताओं को महिला के साथ अत्यधिक हिंसा किए जाने का संदेह हुआ। 

चार साल की बेटी भी घर में मौजूद थी

इस मामले का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि घटना के समय दंपती की करीब चार वर्षीय बेटी घर में मौजूद थी। पुलिस के अनुसार, बच्ची के सामने ही महिला के साथ हिंसा की गई।

एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, बच्ची के घर में मौजूद होने के बावजूद आरोपी ने कथित तौर पर अपनी पत्नी पर हमला किया। यह तथ्य मामले को और गंभीर बना देता है, क्योंकि घरेलू हिंसा का असर केवल पीड़ित महिला तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके बच्चों के मानसिक और भावनात्मक जीवन पर भी गहरा असर पड़ सकता है। 

बच्चे के सामने माता-पिता के बीच हिंसा होना किसी भी परिवार के लिए बेहद गंभीर स्थिति है। ऐसे मामलों में बच्चे स्वयं भी मानसिक आघात का सामना कर सकते हैं।

पांच साल पहले हुई थी शादी

पुलिस की शुरुआती जानकारी के अनुसार, प्रदीप अगरिया और हीराबाई की शादी करीब पांच वर्ष पहले हुई थी। दोनों का वैवाहिक जीवन कुछ समय तक सामान्य रहा, लेकिन बाद में घरेलू विवाद बढ़ने लगे।

परिवार और पुलिस से सामने आई जानकारी के मुताबिक, प्रदीप पर शराब पीने और नशे की हालत में पत्नी के साथ मारपीट करने के आरोप पहले से लगते रहे थे। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या पहले भी महिला के साथ हिंसा की घटनाएं हुई थीं और क्या उनके संबंध में किसी स्तर पर शिकायत या पंचायत हुई थी। 

यदि किसी परिवार में लंबे समय तक हिंसा होती रहे और समय रहते हस्तक्षेप न हो, तो स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। इस मामले ने भी घरेलू हिंसा के खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है।

पत्नी को अस्पताल ले जाना भी जांच का अहम हिस्सा

पुलिस की जांच में आरोपी का अस्पताल पहुंचना और वहां दुर्घटना की कहानी बताना महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

अगर पोस्टमार्टम में चोटों की वास्तविक प्रकृति सामने नहीं आती, तो मामले की दिशा अलग हो सकती थी। लेकिन चिकित्सकीय जांच के दौरान सामने आए तथ्य पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सबूत बने।

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद उससे पूछताछ की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी ने पूछताछ में अपराध स्वीकार किया है। हालांकि मामले में अंतिम सच्चाई अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी। 

गर्भ में पल रहे बच्चे की भी गई जान

हीराबाई की मौत के साथ उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की भी जान चली गई। पोस्टमार्टम में महिला के करीब तीन महीने की गर्भवती होने की पुष्टि हुई।

इस वजह से यह मामला केवल एक महिला की हत्या तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि एक अजन्मे बच्चे की मौत से भी जुड़ जाता है। परिवार के लिए यह दोहरी त्रासदी है।

मां की मौत और गर्भस्थ बच्चे की मौत ने मृतका के मायके वालों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

शराब और घरेलू हिंसा पर फिर उठे सवाल

इस घटना के बाद एक बार फिर शराब की लत और घरेलू हिंसा के संबंध पर सवाल खड़े हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अक्सर शराब के नशे में पत्नी के साथ मारपीट करता था।

हालांकि शराब किसी भी अपराध का औचित्य नहीं हो सकती। नशे की स्थिति को हिंसा का कारण बताना अपराध की गंभीरता को कम नहीं करता। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार घरेलू हिंसा झेल रही महिलाओं को समय रहते परिवार, स्थानीय समुदाय और कानून-व्यवस्था की सहायता मिलना बेहद जरूरी है।

पुलिस जांच में सामने आएंगे बाकी सवालों के जवाब

अब पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं। महिला के साथ घटना से पहले वास्तव में क्या हुआ? आरोपी ने किस परिस्थिति में उसे अस्पताल पहुंचाया? दुर्घटना की कहानी क्यों बताई गई? क्या महिला के साथ पहले भी हिंसा होती थी? और क्या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी?

इन सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय साक्ष्य, घटनास्थल से जुटाए गए सबूत, परिवार के बयान और आरोपी से पूछताछ जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है और उसके खिलाफ हत्या सहित गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। 

घरेलू हिंसा को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

सरगुजा की यह घटना एक बेहद गंभीर सामाजिक संदेश भी देती है। किसी महिला के साथ बार-बार होने वाली मारपीट को केवल पारिवारिक विवाद समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

अगर हिंसा लगातार बढ़ रही हो, तो पीड़ित व्यक्ति और उसके परिवार को समय रहते मदद लेनी चाहिए। पड़ोसियों और रिश्तेदारों की भी जिम्मेदारी है कि वे गंभीर हिंसा की घटनाओं को सामान्य घरेलू झगड़ा मानकर चुप न रहें।

हीराबाई की मौत ने एक परिवार से मां, पत्नी और आने वाले बच्चे की खुशियां छीन लीं। अब इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया के जरिए यह तय होना बाकी है कि इस भयावह घटना के लिए कानूनी रूप से कौन-कौन जिम्मेदार है।

सरगुजा की यह घटना सिर्फ एक हत्या की खबर नहीं, बल्कि उस खतरे की चेतावनी है जो लंबे समय तक चलने वाली घरेलू हिंसा के पीछे छिपा हो सकता है।

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