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तुर्किए की महिला की तलाश में आधी रात होटल पहुंचे दो फर्जी अफसर… गेट लॉक कर 30 मिनट तक स्टाफ को बनाया बंधक, फिर खुला ऐसा राज!



राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने होटल सुरक्षा और फर्जी सरकारी पहचान के इस्तेमाल को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि दो जालसाज खुद को विदेश मंत्रालय का सेक्शन अफसर बताकर एक होटल में दाखिल हुए और वहां मौजूद मैनेजर व कर्मचारियों को धमकाकर होटल की तलाशी शुरू कर दी। दोनों ने होटल का गेट अंदर से लॉक कर दिया और कर्मचारियों को करीब आधे घंटे तक बंधक बनाए रखा।

मामला तब और ज्यादा गंभीर हो गया जब कथित फर्जी अफसरों ने होटल के हर कमरे को खुलवाकर तलाशी ली। विरोध करने पर दो कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट और गला दबाने की कोशिश की गई। आरोपियों का कहना था कि वे तुर्किए की एक महिला की तलाश में होटल पहुंचे हैं। हालांकि, जिस महिला की तलाश की जा रही थी, उसके होटल में ठहरने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।

होटल मैनेजर की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से विदेश मंत्रालय के नाम और पहचान से जुड़े कथित फर्जी दस्तावेज, कार्ड, चेकबुक, क्रेडिट कार्ड और मोबाइल फोन समेत कई सामान बरामद किए गए हैं।

आधी रात को होटल पहुंची कार, फिर शुरू हुआ पूरा खेल

बताया जा रहा है कि 15 अगस्त की रात होटल के गेट पर एक कार आकर रुकी। कार में एक व्यक्ति मौजूद था, जबकि दो लोग बाहर निकले और होटल के अंदर पहुंच गए। आरोप है कि होटल में प्रवेश करने के बाद दोनों ने कर्मचारियों को अपने प्रभाव में लेने की कोशिश की।

उन्होंने खुद को विदेश मंत्रालय से जुड़ा अधिकारी बताया और पहचानपत्र दिखाते हुए होटल की तलाशी लेने की बात कही। कर्मचारियों ने जब उनसे पूछताछ की तो कथित तौर पर उन्हें धमकी दी गई कि अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा।

इसके बाद दोनों ने होटल का गेट अंदर से बंद कर दिया। इससे होटल में मौजूद कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच भी चिंता का माहौल बन गया।

रिसेप्शन पर पहुंचकर मांगा एंट्री रजिस्टर

कथित जालसाजों ने होटल के रिसेप्शन पर पहुंचकर वहां रखे दस्तावेज और एंट्री रजिस्टर की जांच शुरू कर दी। उनका मुख्य उद्देश्य एक तुर्किए की महिला के बारे में जानकारी हासिल करना बताया गया।

महिला का नाम फिरोजा बताया जा रहा है। आरोपी कथित तौर पर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि महिला होटल में ठहरी है या हाल में वहां आई थी। उन्होंने रजिस्टर में नाम और अन्य जानकारी तलाशनी शुरू कर दी।

हालांकि, होटल प्रबंधन के मुताबिक महिला होटल में ठहरी ही नहीं थी। इसके बावजूद दोनों कथित फर्जी अधिकारियों ने होटल के रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए और कई दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए।

हर कमरे का दरवाजा खुलवाया

मामले का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा तब सामने आया जब आरोपियों ने होटल के लगभग हर कमरे की तलाशी लेने की कोशिश की। उन्होंने कर्मचारियों से कमरों के दरवाजे खुलवाए और अंदर मौजूद लोगों के बारे में जानकारी ली।

होटल कर्मचारियों ने जब इस तरह की तलाशी पर आपत्ति जताई तो कथित तौर पर दोनों आरोपियों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया। आरोप है कि दो कर्मचारियों के साथ हाथापाई की गई और उनका गला दबाने की कोशिश भी की गई।

आरोपियों ने होटल में कथित अवैध गतिविधियों का हवाला देते हुए उच्चस्तरीय जांच कराने की धमकी दी। उनकी बातों से होटल स्टाफ इतना डर गया कि किसी को समझ नहीं आया कि आखिर ये लोग वास्तव में अधिकारी हैं या किसी बड़े मकसद से होटल में घुसे हैं।

करीब आधे घंटे तक बना रहा डर का माहौल

होटल मैनेजर सर्वोत्तम पाठक की शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने करीब आधे घंटे तक होटल के गेट को अंदर से लॉक रखा। इस दौरान होटल के कर्मचारियों के मोबाइल फोन भी कथित तौर पर अपने कब्जे में ले लिए गए।

कर्मचारियों के मुताबिक, उन्हें धमकी दी जा रही थी कि अगर उन्होंने विरोध किया तो सभी को जेल भेज दिया जाएगा। इस दौरान होटल में आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सबसे बड़ा सवाल यही था कि अगर ये लोग वास्तव में सरकारी अधिकारी नहीं थे तो उन्हें होटल के कमरों की तलाशी लेने का अधिकार किसने दिया था?

इसी आशंका के बाद होटल मैनेजर ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी।

पुलिस पहुंची तो खुलने लगा फर्जी अफसरों का राज

सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम होटल पहुंची। पुलिस के पहुंचते ही मामले की गंभीरता सामने आने लगी। आरोपियों के दस्तावेजों और पहचानपत्रों की जांच की गई तो पुलिस को उन पर संदेह हुआ।

जांच के बाद दोनों को हिरासत में लिया गया और पूछताछ शुरू की गई। पुलिस ने उनके पास मौजूद सामान को भी कब्जे में लिया।

अपर पुलिस उपायुक्त पूर्वी अमोल मुरकुट के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मेरठ के भवानपुर किला रोड निवासी शिवम चौहान और नोएडा सेक्टर-120 स्थित प्रतीक लोरेन निवासी अभिनव सिंह के रूप में बताई गई है।

पुलिस के अनुसार, दोनों के पास विदेश मंत्रालय के सेक्शन अफसर के नाम और फोटो वाले कथित फर्जी पहचानपत्र मिले।

आरोपियों के पास से मिला सामान

पुलिस के मुताबिक आरोपियों के कब्जे से कई संदिग्ध सामान बरामद किए गए। इनमें विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के नाम से बने बताए जा रहे 478 फर्जी आईडी कार्ड, एक चेक, तीन फर्जी आधार कार्ड, विदेश मंत्रालय के नाम वाला एक प्लास्टिक कार्ड और गले में पहनने वाली पट्टी, 14 क्रेडिट कार्ड, दो चेकबुक और तीन मोबाइल फोन शामिल बताए गए हैं।

इतनी बड़ी संख्या में कथित फर्जी कार्ड मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये कार्ड किस उद्देश्य से तैयार किए गए थे और क्या इनका इस्तेमाल पहले भी किसी अन्य जगह पर किया गया।

तुर्किए की महिला की तलाश क्यों कर रहे थे?

पूरे मामले का सबसे रहस्यमय पहलू तुर्किए की महिला फिरोजा से जुड़ा है। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी कथित तौर पर महिला के संपर्क में कई वर्षों से थे।

विवेचक दरोगा प्रेम कुमार के मुताबिक, शिवम और अभिनव दोनों फिरोजा के संपर्क में थे और महिला उनके साथ अलग-अलग स्थानों पर रह चुकी थी। पुलिस के अनुसार, महिला के पासपोर्ट और वीजा की वैधता समाप्त हो चुकी थी।

अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि महिला इस समय कहां है, वह भारत में किस स्थिति में रह रही थी और दोनों आरोपियों का उसके साथ क्या संबंध था।

यही सवाल इस मामले को सामान्य फर्जी अधिकारी बनकर होटल में घुसने की घटना से आगे ले जाता है।

क्या महिला की तलाश के पीछे कोई बड़ा कारण था?

फिलहाल पुलिस ने इस बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं रखा है। लेकिन जिस तरह आरोपी कथित तौर पर सरकारी अधिकारी बनकर होटल पहुंचे, गेट बंद किया, कर्मचारियों के मोबाइल अपने कब्जे में लिए और कमरों की तलाशी ली, उससे जांच एजेंसियों की दिलचस्पी भी बढ़ गई है।

बताया जा रहा है कि दोनों आरोपियों से विभिन्न एजेंसियों के अधिकारियों ने भी घंटों पूछताछ की। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर संबंधित एजेंसियां अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही हैं।

अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि महिला की तलाश के पीछे वास्तविक कारण क्या था और आरोपियों ने विदेश मंत्रालय के नाम का इस्तेमाल क्यों किया।

होटल कर्मचारियों के मन में बैठा डर

घटना के बाद होटल के कर्मचारियों में डर का माहौल बन गया। कर्मचारियों के लिए सबसे परेशान करने वाली बात यह थी कि दो अज्ञात लोग सरकारी अधिकारी होने का दावा करते हुए अचानक होटल में पहुंचे और कुछ ही समय में पूरे स्टाफ पर दबाव बनाने लगे।

अगर होटल मैनेजर समय रहते पुलिस को सूचना नहीं देते तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

यह मामला होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए भी एक चेतावनी की तरह सामने आया है कि किसी व्यक्ति के सरकारी अधिकारी होने के दावे को केवल पहचानपत्र देखकर स्वीकार करना जोखिम भरा हो सकता है। जरूरत पड़ने पर संबंधित विभाग या पुलिस से आधिकारिक पुष्टि करना जरूरी है।

तीन के खिलाफ मुकदमा, दो गिरफ्तार

होटल मैनेजर की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इनमें से दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अब मामले में शामिल तीसरे व्यक्ति की भूमिका की भी जांच कर रही है।

जांच एजेंसियां बरामद दस्तावेजों, मोबाइल फोन, बैंकिंग से जुड़े सामान और आरोपियों के संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं।

पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि कथित फर्जी पहचानपत्रों का निर्माण कहां हुआ, इन्हें किसने तैयार किया और इनका इस्तेमाल इससे पहले कहां-कहां किया गया।

आगे क्या होगा?

फिलहाल इस पूरे मामले में कई सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। तुर्किए की महिला कहां है, उसके दस्तावेजों की स्थिति क्या है, आरोपियों ने उसकी तलाश क्यों की और 478 कथित फर्जी कार्ड उनके पास कैसे पहुंचे—ये सभी सवाल पुलिस जांच के केंद्र में हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर दो लोग बिना किसी वास्तविक सरकारी अधिकार के विदेश मंत्रालय के अधिकारी बनकर होटल में दाखिल होकर तलाशी ले सकते हैं, तो उन्होंने पहले ऐसा कितनी बार किया होगा?

पुलिस की जांच अब इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामला भले ही सामने आ गया हो, लेकिन तुर्किए की महिला से जुड़ी पूरी कहानी और कथित फर्जी सरकारी पहचान के पीछे का नेटवर्क अभी भी रहस्य बना हुआ है। जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि यह सिर्फ दो लोगों की साजिश थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।

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